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स्त्री पारस की तरह होती है...वो प्रेम नहीं करती प्रेम में बसती है...जिस रिश्ते को छूती है उसे प्रेम से भरे देती हैं... 💞 - Hemant Parmar
कभी जो हम पर जान दिया करते थे जो हम कहते थे उसे मान लिया करते थे आज मिलते भी है तो ऐसे गुजरते हैं जैसे जानते ही नहीं कभी जो हमारी आहट भी पहचान लिया करते थे कभी जो हमारी एक थकान पर भी अपनी जान वार दिया करते थे, आज हमारी मरने की बात भी उन्हें बहाना लगता है...💔 - Hemant Parmar
तुम्हें कभी पूरा लिखूँ … फिर कभी अधूरा लिखूँ मैं रातों को बैठकर तुम्हें सवेरा लिखूँ…. मैं जब भी लिखूँ …..बस इतना लिखूँ…. खुद को तेरा …..और तुझ को मेरा लिखूँ ...💞 - Hemant Parmar
उसकी "typing..." पर, खुशी से काँपती मेरी उँगलियाँ.. इश्क़ है..❤️ उसकी "New profile pic" को.. मिनटों तक.. एकटक झाँकती पलकों की पंखुड़ियाँ.. इश्क़ है.. गुफ्तगू करने की.. अनगिनत ख्वाहिशों के बीच.. "online" होकर भी चीखती खामोशियाँ.. इश्क़ है.. जरा सी आहट पे.. फोन पकड़ कर बैठ जाना.. वो "notification" की टनटनाती घंटियाँ.. इश्क़ है.. कैसी हो? पूछने पर.. "i am fine" बताना लिख कर मिटाना.. मिटा कर छिपाना, वो "draft" में बेबस पड़ी अनकही अर्जियाँ .. इश्क़ है.. अनंत तक चलने वाली "conver" में.. "Hmm" और "K" की तल्खियाँ.. इश्क़ है.. मशरुफ़ियत.. कितनी भी भारी पड़े कैफ़ियत पूछने पर.. बस इक बार.. "Last seen" देखने वाली बेचैनियाँ.. इश्क़ है.. हर सुबह की "gm" और देर रात की "gn " इश्क़ है बस बेइंतहा इश्क़ है ❤️❤️
हर संबंध को अंत तक ढोना आवश्यक नहीं होता। कुछ संबंधों से उस क्षण विदा ले लेनी चाहिए, जब अपना कर्तव्य पूर्ण हो चुका हो और, सामने वाले के जीवन में आपकी आवश्यकता भी समाप्त हो गई हो। शायद यही संबंधों के प्रति अंतिम सम्मान है। निसंदेह तुम्हारे जीवन में मेरा कर्तव्य पुरा हो गया और मेरी आवश्यकता खत्म ... - Hemant Parmar
जब द्रौपदी ने कृष्ण की उँगली पर बाँधा अपने आँचल का टुकड़ा… ___________ रक्षाबंधन की कथाओं में कृष्ण और द्रौपदी का प्रसंग सबसे भावुक कथाओं में से एक माना जाता है। यह कथा हमें बताती है कि रिश्ते हमेशा रक्त के नहीं होते, कभी-कभी एक छोटा-सा स्नेह भी जीवनभर का बंधन बन जाता है। __________ कहा जाता है कि एक अवसर पर श्रीकृष्ण की उँगली पर चोट लग गई और उससे रक्त बहने लगा। द्रौपदी ने जब यह देखा तो उनसे रहा नहीं गया। उन्होंने तुरंत अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़ा और कृष्ण की घायल उँगली पर बाँध दिया। _________ वह कोई विधि-विधान से बाँधी गई राखी नहीं थी। न कोई मंत्र था, न कोई औपचारिकता। __________ बस एक अपने की चोट देखकर दूसरे के हृदय से निकला स्नेह और अपनापन था। ________ कृष्ण ने द्रौपदी के उस छोटे-से त्याग को साधारण नहीं समझा। कहते हैं, उन्होंने उस कपड़े के टुकड़े को अपने ऊपर चढ़े एक प्रेम के ऋण की तरह स्वीकार किया। __________ समय बीता… और फिर वह दिन आया जब हस्तिनापुर की सभा में द्रौपदी की मर्यादा संकट में पड़ गई। सभा में उपस्थित बड़े-बड़े योद्धा और बुजुर्ग मौन खड़े रहे, लेकिन द्रौपदी ने अंततः अपने सारे सहारे छोड़कर श्रीकृष्ण को पुकारा। __________ और तब वही कृष्ण, जिनकी उँगली पर कभी द्रौपदी ने अपने आँचल का एक छोटा-सा टुकड़ा बाँधा था, उसकी लाज के रक्षक बनकर खड़े हुए। ________ लोकपरंपरा इसी प्रसंग को द्रौपदी और कृष्ण के उस पवित्र बंधन से जोड़ती है, जिसे आगे चलकर रक्षाबंधन के भाव से देखा गया। _______ क्योंकि द्रौपदी ने कृष्ण को कुछ माँगकर नहीं बाँधा था.. उसने तो बस उनकी चोट पर अपना आँचल रख दिया था। ___________ और शायद सच्चे रिश्तों की खूबसूरती भी यही है... जहाँ दिया हुआ प्रेम कभी व्यर्थ नहीं जाता, वह किसी न किसी रूप में लौटकर जरूर आता है। ❤️ ____________ नोट: कृष्ण की उँगली पर द्रौपदी द्वारा साड़ी का टुकड़ा बाँधने की कथा लोकप्रिय पौराणिक/लोकपरंपरा में रक्षाबंधन से जोड़ी जाती है; इसे महाभारत के मूल ग्रंथ में वर्णित रक्षाबंधन संस्कार के रूप में नहीं प्रस्तुत करना चाहिए। - Hemant Parmar
inshn ko akshar wahi se sabse aicha bada sabak milta he, jaha wo sabse jiyada wafadar hota he or sabak bhi aisa ki uska shina chali ho jaiye or dard se tudap uthe jo sahna bhi mushkil or kisi se kahna bhi mushkil sirf andar hi andar jalta rahe kyu ka pahle say hi sabne usiye aigah kiya huwa tha fir bhi woh use rah ko hi ushne chuna tha ab sahne alawa uske pass or koiye rashta nahi he sirf dard or dard hi he jab tak sans chalegi tab tak dard hi milega hashi ka ak pal bhi nashib nahi hoga unko... 💘 - Hemant Parmar
tujhe hauq he tu jatiya kar "pata he aij kiya huwa ? ya kehkar sub batiya kar... 💕 - Hemant Parmar
जिस स्त्री ने घर, परिवार और रिश्तों को संभालते हुए सबको आगे बढ़ाया, वही जब अपने सपनों के लिए एक कदम बढ़ाती है तो उसे साबित करना पड़ता है कि वह भी सक्षम है। सम्मान और अवसर दोनों बराबर हों, तभी सच्ची समानता होगी..! - Hemant Parmar
महाभारत हमे सिखाती है की अन्याय करने वाला जितना दोषी होता है, उससे कम दोषी वह नहीं जो सब देखकर भी चुप रहता है है - Hemant Parmar
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