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हमारी कहानी Half Marriage.. एक अनकही कहानी प्रकाशित हो चुकी है,,प्लीज़ पढ़िए और कमेंट्स कीजिए
छूट गया क्या, वो मेरा घर , अब रहती हूँ जिसमे,या वो मेरा घर, बचपन बिताया जिसमें, साथ निभाया जिसने, फुदकी, चहकी,उछली उड़ी मैं बिन पर, क्या नहीं था वो मेरा घर, कसमें निभा रहीं हूँ यहां, मकान से घर बना रहीं हूँ यहां, स्त्री तो है खुशकिस्मत , दो छत होती हैं, बस केवल समझ का फर्क, ये भी घर वो भी घर।। सब खुश तो रहूँ मैं भी खुश, हंसे सब तो हंस देती हूँ, कसक नहीं मायका छूटने की, नहीं बेचैनी पुरानी मैत्री टूटने की, नित नए सम्बन्ध जुड़ रहे यहां, रोज़ बन रहे नए जहां, मैं तो एक परिवार की नींव हूँ, मुझ पर आधारित सब के पर, ये भी घर,वो भी घर।। धन्यवाद(शिल्पी गुप्ता) अगर मेरे विचार आपको पसन्द आएं तो आप मुझे फ़ॉलो भी कर सकते हैं। और हमारी दो कहानियां प्रकाशित हो चुकी हैं,,एक आज पब्लिश होगी....प्लीज़ पढ़िए,,कमेंट्स कीजिए और अगर यहां कॉइन या स्टिकर होते हों,,तो प्लीज़ दीजिएगा।😊😊
क्या कोई हमें बताएगा कि अगर हमे अपने नोवेल में पार्ट ऐड करना हो तो कैसे होगा..???...दरअसल हम नए हैं इस ऐप पर,,तो अभी पता नहीं है,,वैसे हमारी "नई बहु" और" कुदरत का कानून..1" प्रकाशित हो चुकी है। पढ़िए,,रिव्यू दीजिए,,डाउनलोड और शेयर कीजिए,,और प्लीज़ फॉलो कीजिए। धन्यवाद-शिल्पी🙏
सुप्रभात,,,, हमारी कहानी नई बहु प्रकाशित हो चुकी है,,,पढ़िए ,,कमेंट्स कीजिए और हां फॉलो करना मत भूलियेगा,,, अगर इस ऐप पर स्टिकर्स या कॉइन होते हैं तो प्लीज़ जरूर दीजियेगा..!!!!😊😊😊😊 धन्यवाद-शिल्पी
आज अचानक यूं ही बैठे ख़्याल आया कब सुबह हो गई,अब साया गहरा छाया.. इक इक पल बदल जाता है,बरसों में.. कभी रास्ते लगते थे दूर अब मंजिल का निशाँ गहराया.. पता ही नहीं लगा कि कब बचपन ढल गया जिम्मेवारियों का कब बोझ सर चढ़ गया... पर ये ही तो अलग अहसास है ' शिल्पी' हंसते गाते जाने कब ये सफ़र गुज़र गया..!! हमारी कलम से.. शिल्पी.. पसंद आए तो फॉलो जरूर कीजियेगा🙏
काश !! होती दुनिया इतनी हसीन,, जैसे दरवाज़े मनभावन रंगीन, गम न कोई अंदर आ पाता, दुःख बाहर से ही चला जाता, उदासी न बिखेरती छाया, बिछोह का न पड़ पाता साया, बस खुशियों की होती खटखटाहट, प्रेम की बस होती बिखराहट, चहुं ओर बस प्यार बरसता, दिल अकेला न कोई तरसता, उगती बस सुख की फसल हर ज़मीन, होता कोई काश!ऐसा दरवाज़ा रंगीन।। धन्यवाद-शिल्पी गुप्ता 🙏 प्लीज़ फॉलो
शहनाई की गूंज, गेंदे के फूलों की मादक महक और हवन कुंड से उठते पवित्र धुएं ने उस पुरानी हवेली के विशाल प्रांगण को एक जादुई आभामंडल से भर दिया था। हवेली की वह पुरानी छत, जिसकी पारंपरिक गाटर-पटिया की मज़बूत नींव इस बात की गवाह थी कि इस घर में रिश्ते भी उसी मज़बूती से बांधे और निभाए जाते हैं। आज उसी छत के नीचे एक नई कहानी की शुरुआत हो रही थी। मंडप के बीचों-बीच वेदी की अग्नि प्रज्वलित थी। लाल सुर्ख जोड़े में सजी दुल्हन अपनी नज़रें नीची किए बैठी थी। हम पहली बार इस ऐप पर कहानी प्रकाशित करने जा रहे हैं,,, जल्द ही पढ़िए Half Marriage.. एक अनकही कहानी ❣️ फॉलो करना मत भूलियेगा...
हमारी कहानी "नई बहु" और "कुदरत का कानून"जल्द ही इस ऐप पर प्रकाशित होने वाली हैं....उम्मीद है आप सब का सहयोग और स्नेह मिलेगा..!!!उम्मीद करते हैं कि आप हमें फॉलो अवश्य करेंगे,,इस ऐप की कार्यशैली हमें अभी पता नहीं है,अत: आपके साथ की जरूरत है....वैसे हम मातृभारती पर सालों से लिख रहे हैं.... shilpi gupta 'anu' के नाम से,,,आप वहां भी हमें फॉलो कर सकते हैं। वैसे हमारी यू ट्यूब पर भी कहानी हैं https://youtu.be/dEOI0BOhylk?si=hw1qA58KSNF8ZabK धन्यवाद-😊🙏
प्लीज़ हमारा यू ट्यूब चैनल फॉलो कीजिए,,,वहां आपको हमारी कहानियां देखने को मिलेंगी,,,आज ही एक नई कहानी अपलोड की है। इस ऐप पर हमारी पहली कहानी 3 अक्टूबर को आएगी... https://youtu.be/dQFGP8OpHFw?si=V9YdARYtpXmVAlUD धन्यवाद
खुशी के लिए बहुत सारा पैसा,,धन,,दिखावा या आडम्बर की जरूरत नहीं होती,,,,संतुष्ट रहना यानी संतोषी होना ही सबसे बड़ी खुशी है,,और आज कल के समय में अगर आप स्वस्थ हैं,,तो शायद इससे बड़ी खुशी की बात कोई है ही नहीं शिल्पी गुप्ता 🙏 प्लीज़ फॉलो
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