Quotes by Dr Darshita Babubhai Shah in Bitesapp read free

Dr Darshita Babubhai Shah

Dr Darshita Babubhai Shah Matrubharti Verified

@dbshah2001yahoo.com
(1.7m)

मैं और मेरे अह्सास

दुनियादारी
चाहता हूँ दुनिया की सभी रस्में तोड़ दूँ l
मंज़िल की राह ईश्वर की गली में मोड़ दूँ ll

रीति रिवाज के नाम पर कलंक है सब l
दुनियादारी के ढकोसलों को फोड़ दूँ ll

कोई छोटा कोई बड़ा सिर्फ इन्सां बने l
और दिलों से दिलों का रिश्ता जोड़ दूँ ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Read More

मैं और मेरे अह्सास

मोहब्बत
मोहब्बत का असर हो रहा हैं l
दिवाना घर से बेघर हो रहा हैं ll

आरज़ूएं हद से बढ़ती रहने से l
यूही बेबाक सजन हो रहा हैं ll

आज रूपरेखा के अनुसार ही l
उम्मीद पर सफर हो रहा हैं ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Read More

मैं और मेरे अह्सास

निशाँ
कोशिशों के बाद भी हम ना छुपा पाये निशाँ ll
सिर्फ पानी की लकीरें थी हमारी राजदां ll

आँखों के रास्तों से निकले ओ पहुँचे दिल तलक l
भावनाओ का युगों से दूर फेला कहकशाँ ll

रोनके होती दिखावे की भरोसा मत करो l
बेतुकी सी राज ना आई मुझे रंगीनियाँ ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Read More

मैं और मेरे अह्सास

संगदिल
में कहां कभी किसीका एहसान रखता हूँ l
बात सीधी लगती है पर सच्ची कहता हूँ ll

बेपनाह बेहिसाब इश्क़ हो गया कब से l
संगदिल सनम से मोहब्बत करता हूँ ll

में एक तरफ़ा प्यार युगों युगों करके l
रोज सुबह शाम ठंडी आहे भरता हूँ ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Read More

मैं और मेरे अह्सास

जिंदगी
जिंदगी के राज बोले क्या l
पटारा दिल का खोले क्या ll

थोड़ी सी खुशी के लिए l
आस्तीन को छोले क्या ll

कहो तो तुम्हारी खुशी को l
पूराने जख्मों फोले क्या ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Read More

मैं और मेरे अह्सास

जिंदगी
जिंदगी की अहमियत को समझा ही नहीं l
गहराईयाँ औ बारीकी को जाना ही नहीं ll

सहरा में रेत फ़िसलती वैसे ही जिंदगी गई l
रात दिन वक्त का हिसाब पहचाना ही नहीं ll

कुछ अपनी कुछ अपनों के लिए गुजरी कि l
प्यार को नशीले लम्हों से सजाया ही नहीं ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Read More

मैं और मेरे अह्सास

प्यार
सीतमगर से प्यार किया l
दिल को यू बेकरार किया ll

नया बहाना सुनाता फिर भी l
हर बात पे एतबार किया ll

झूठी उम्मीदे दे संगदिल ने l
अश्क़ देके खुशगवार किया ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Read More

मैं और मेरे अह्सास

इंतजार
एक पल तुम्हें देखे बिना गुजारा भी नहीं l
तुम्हारे बिना दूसरा मेरा सहारा भी नहीं ll

एक हम है सारी दयार को ठुकरा दिया l
एक तुम हो की रिश्ता निभाया भी नहीं ll

तेरी कायनात मेंने खुशबुओ से महका दी l
तुने एक गुल आंगन मेरे सजाया भी नहीं ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Read More

मैं और मेरे अह्सास

मोहब्बत
बे-मिजाज़ दिल फेंक से मोहब्बत है तो हैं l
प्यार में इंतजार ही मेरी किस्मत है तो हैं ll

में नहीं चाहती सदा पास मेरे बेठा रहे वो l
प्यारी नशीली यादों की सौगात है तो हैं ll

ताउम्र साथ निभाने के लिए हाथ पकड़ा है l
दुनिया चाहे इसे समझे बग़ावत है तो हैं ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Read More

मैं और मेरे अह्सास

दोस्त
दोस्त की खास जगह होती है दिल की कहानी
में l
यारों के साथ करते रह्ते है मटरगश्ती जवानी में ll

अज़ीब सा सुकून मिलता दो लम्हों के साथ में l
कोई तो कशिश होती होगी रिश्तों की रुहानी में ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Read More