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Dr Darshita Babubhai Shah

Dr Darshita Babubhai Shah Matrubharti Verified

@dbshah2001yahoo.com
(2.3m)

मैं और मेरे अह्सास
मुस्कान
मुस्कान होंठों पर सजाये रखना l
सब के साथ संबंध बनाये रखना ll

हमदर्दी नहीं सच ही हमदर्द बनके l
रिश्ता दिल से निभाये रखना ll

रस्मों रिवाजों को पीछे छोड़कर भी l
मोहब्बत को गले से लगाये रखना ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास
वचन
वचन निभाने का हौंसला होना चाहिए l
बात रखेंगे विस्वास को बोना चाहिए ll

आपसी रंजिशें पैदा ही ना हो उस तरह l
अपने रिश्तों को अच्छे संजोना चाहिए ll

माँ पिता जैसा प्यार कोई नहीं दे सकता l
ममता की प्यारी सी गोद में सोना चाहिए ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास
संगत
जिंदगी में अच्छे लोगों की संगत रखनी चाहिए l
ख़ुद की कह सके व्यक्ति अंगत रखनी चाहिए ll

जब लोग खुद खाना लेते हैं बिगाड़ ज्यादा करते l
सदा खाना खिलाने के लिए पंगत रखनी चाहिए ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास
हजारों रंग
मन में हजारों रंग के अरमान पलते रहते हैं l
हौसला बनाएं रख सदा ही कहते रहते हैं ll

जहां में कोई किसीका दर्द ले नहीं सकता है l
जिंदगी के दर्दों गम चुपचाप सहते रहते हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास
कुछ है नहीं
बात में दम कुछ है नहीं तो चिंता करना छोड़ दो l
बिना मतलब की ठंडी ठंडी आहे भरना छोड़ दो ll

यहां सभी के दिन एक जैसे ही गुज़रते है तो l
मन नहीं है कहकर उदासियों में सरना छोड़ दो ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास
किधर जा रहे हो l
सुकून पा रहे हो ll

किसकी याद मे l
गीत गा रहे हो ll

पहली नजर में ही l
दिल को भा रहे हो ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास
बरसात में
बरसात में इश्क़ वालों के हौसले बढ़ जाते हैं l
हुस्न वाले निगाहों से मोहब्बत पढ़ जाते हैं ll

मौसम की या इश्क़ की इंतिहा ही कहो कि l
बादलों के पार पहुँचने ऊपर चढ़ जाते हैं ll

आहलदायक नशीले से माहौल में दौनों ही l
बारिस में भिगकर भिगोकर सज जाते हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास
बधाई हो बधाई
बधाई हो बधाई विरा शज़र पर बहार आई l
खुशीयों के मारे बयार ने शहनाई बजाई ll

चौतरफ फ़िज़ाओं में खुशनुमा खुशबु फेला l
उपवन में रंगबिरंगी फूलों से डाली सजाई ll

हवाएँ भी रंगीन मिजाज की होती है कि l
कायनात में चारो ओर की खुशबु लाई ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास
जिंदगी के सलीब
जिंदगी के सलीब के साथ जीना सीख लो l
कड़वे मीठे सभी बोल को पीना सीख लो ll

बड़े से बड़ा ज़ख्म भी वक्त भर देगा तो l
खामोश रहकर ही मुँह सीना सीख लो ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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તરસી રહ્યા છે લોકો,
વરસી જાય તો સારું.
સખી
દર્શિતા બાબુભાઇ શાહ
- Dr Darshita Babubhai Shah