Quotes by Dr Darshita Babubhai Shah in Bitesapp read free

Dr Darshita Babubhai Shah

Dr Darshita Babubhai Shah Matrubharti Verified

@dbshah2001yahoo.com
(2.1m)

मैं और मेरे अह्सास

अनगिनत मंज़िलें
अनगिनत मंज़िलें और उसकी जुस्तजू एक तरफ़ ll
जिन्दगी में सबकुछ पा लेने की आरज़ू एक तरफ़ ll

लम्हों की मुलाकात का लुफ़्त कुछ और ही होता है l
हुस्न वालों से होती रहती है गुफ़्तगू एक
तरफ़ ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

औरत एक साहस
औरत एक साहस और निगाहें उस की l
घायल कर देती तिरछी निगाहें उस की l

जब मौन व्रत ले लेती है वो सब कुछ तो l
ख़ामुशी बहुत सना देती बातें उस की ll

बस उसकी एक आँख ही काफी है सखी l
ममता का धोध बरसाती आँखें उस की ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

औरत एक साहस और उसका रवैया एक तरफ l
उपर से कड़क बहार से नर्म ये जलवा एक तरफ ll

नाजुक और कमसिन दिखनेवाली का हर बार ही l
परिस्थित और संजोग अनुसार लहजा एक तरफ ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

मानवता पशु पक्षी के लिए
मानवता पशु पक्षी के लिए रखनी चाहिए l
दाना पानी की व्यवस्था भी करनी चाहिए ll

कई पशु पक्षी तो असहाय दशा में होते हैं l
गर्मी के दिनों में पानी की कुंडी भरनी चाहिए ll

ईश्वर ने सभी जीवो के लिए खाना दिया है l
समग्र जीव सृष्टि अच्छी तरह पलनी चाहिए ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

मेरा गाँव भाता हैं
मेरा गाँव भाता हैं, मेरे पुरखों का स्वाभिमान हैं l
मेरा जन्म स्थान, रूह में बसा मेरा अभिमान हैं ll

कहानी औ किस्से का दौर,सभी हंसते करते मौज।
प्रेम जहां प्रीत, मनभावन रिवाज उसपे मान हैं ll

दिवाली दीप, होली रंग, मनभावन सा सुन्दर फाग।
रमणीय सुन्दर मेरे गाँव में बसती मेरी जान हैं ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

अच्छा होगा
बात दिल की बता दी जाए तो अच्छा होगा l
दो घड़ी चैन ओ सुकून पाए तो अच्छा होगा ll

एसा नहीं की गम की दौलत से मालामाल है l
रोजबरोज खुशियों को लाए तो अच्छा होगा ll

नशीली वादियों में हाथों में हाथ डाल कर l
इश्किया से भरे गीत गाए तो अच्छा होगा ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

रूप
इन्सान हर लम्हा रूप बदलता रहता हैं l
बात से अपनी कभी भी पलटता रहता हैं ll

कभी शब्दों से तो कभी ख़ामोशी से वो l
औरों के सामने यूहीं मचलता रहता हैं ll

ना जाने कितने चहरे छिपे नकाब के पीछे l
बिना कुछ किए हुए छलकता रहता हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

रंग
रंग नीली सी आँखों का भा गया हैं l
पहेली नजर में दिल पे छा गया हैं ll

तीर जैसे चुभ गया पहला ही वार l
ना मिटने वाला ज़ख्म लगा गया हैं ll

रंगबेरंगी दुनिया की जगमगा कर l
मोहब्बत की दुनिया सजा गया हैं ll

"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

गोरैया
गोरैया आहिस्ता उड़ो कहीं अरमान छलक ना जाये ll
बादलोंने और पंखीओने ख़ुशीयों से मधुर गीत
गाये ll

उड़ान लम्बी और ऊंचाई पर कर के मज़ा आ
जाए l
आसमाँ में सफेद दूध जैसे बादलों के पहाड़ आये ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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मैं और मेरे अह्सास

आस
आस का दीपक जलाये रखना l
दिल में श्रद्धा को बनाये रखना ll

कभी भी ले जाने को आएँगे तो l
हाथों में मेहंदी सजाये रखना ll

ताउम्र साथ निभाने का सखी l
दिया हुआ वादा निभाये रखना ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

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