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Author Pawan Singh

Author Pawan Singh Matrubharti Verified

@authorpawansingh.367578
(1m)

हम दोनों ही महादेव को अत्यंत प्रिय हैं
क्योंकि तुम सावन की पहली बारिश जैसी,
और मैं सावन का पहला सोमवार

आप सभी को सावन के पहले सोमवार की हार्दिक शुभकामनाएँ

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जो था दस वर्ष के लिए, वो सत्तर साल से जारी है,
‘काबिलियत’ पर ‘पिछड़ापन’ आज भी भारी है।

कुछ कर नहीं सकते
तो उतर क्यों नहीं जाते
कुर्सी ही तो है
तुम्हारा जनाजा थोड़े ही है
- Author Pawan Singh

अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे
तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे।
उस की कुर्सी है जनाज़ा तो नहीं है उस का
जो उतरता ही नहीं है उसे समझाएँ कैसे।

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काजू भुने प्लेट में, विहस्की ग्लास में
उतरा है रामराज, विधायक निवास में
आज़ादी का ये जश्न मनाएँ किस तरह
जो आ गए फूटपाथ पर घर की तलाश में

- Author Pawan Singh

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नींद, मृत्यु का दैनिक अभ्यास है"
- Author Pawan Singh

अंते वयम सर्वे कथाः भवें
अंत में हम सब कहानी बन जाते हैं।
- Author Pawan Singh

कलाकार की ज़िद और बच्चे कि ज़िद में
कोई बड़ा फ़र्क़ नहीं होता
दोनों में आपको,
सच्चाई और मासूमियत देखने को मिलती है

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