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5000 साल का सन्नाटा और एक अधूरा पश्चाताप... 🔱 हिमालय की बर्फ में जमा वह महान अघोरी 'रुद्रभैरव', जिसे समय भी नहीं मार सका, आज कलयुग के उज्जैन में एक कमज़ोर और मरे हुए लड़के (सिद्धार्थ) के शरीर में जाग उठा है। क्या एक अघोरी का यह प्रचंड क्रोध उन हत्यारों को खोज पाएगा? और क्या उसे 'अक्षरा' इस भीड़ में मिल सकेगी? 'अधूरी साधना: भाग-1' अब अमेज़न पर लाइव है! मेरी इस नई और सबसे बड़ी कहानी का हिस्सा बनें। अभी पढ़ें और इस रहस्यमयी दुनिया में कदम रखें: 👇 https://amzn.in/d/0aFRPbXW
तप की धूनी बुझ गई, टूटा मन का मान, देह देख विचलित हुआ मन , खोया सब ज्ञान। पाँच सहस्र की साधना, हुई धूल के समान, अब कलयुग की धूल में, होगा असली दान।
"रिश्तों की नुमाइश में, रूह का सौदा कर आई, वो बेटी आज अपनी ही नज़र में, अजनबी बन घर आई। माथे का सिंदूर गवाह था उस मजबूरी का, जो माँ की दुआ बन कर, उसकी पलकों पर उतर आई।"
"हाथों में कंगन भारी हैं, पर रूह आज भी खाली है, माँ की जान बचाने को, उसने अपनी हस्ती वार डाली है। जो कल तक नंगे पाँव थी, आज महलों की रानी है, पर इस चमक के पीछे छुपी, एक दर्द भरी कहानी है।"
"शहर का सबसे बड़ा बिजनेस टाइकून, आर्यन राठौर! 🏢 आख़िर क्या छिपा है उसके इस सख्त चेहरे के पीछे? 🎭 एक तरफ बोर्ड मीटिंग का तनाव और दूसरी तरफ घर में अपनों के तंज। जब सब सान्वी को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे थे, तब आर्यन का उसके पक्ष में खड़ा होना... क्या ये महज एक दिखावा है या उसकी नफरत की बर्फ पिघल रही है? ❄️➡️🔥 अपनी राय कमेंट्स में बताएं! 👇💬"
"रिश्ता भले ही एक 'सौदा' था, पर सान्वी के संस्कार बिकाऊ नहीं थे। 👰 उस आलीशान किचन की चमक-धमक में जहाँ शीतल चाची के शब्दों में ज़हर था, वहीं सान्वी के हाथों में उसकी माँ का सिखाया प्यार था। ❤️ स्वाद अमीरी से नहीं, साफ नीयत से आता है। आज सान्वी ने अपनी पहली परीक्षा तो पार कर ली, पर क्या वो इस पत्थर के महल में अपना दिल बचा पाएगी? 🏰🥀 पढ़िए 'सौदे का सिंदूर' का नया अध्याय! 📖✨"
"स्वाद अमीरी या गरीबी से नहीं, बल्कि नीयत और प्यार से आता है। आज सान्वी ने साबित कर दिया कि महल चाहे कितना भी बड़ा हो, दिल जीतने के लिए सादगी ही काफी है।" पढ़िए 'सौदे का सिंदूर' का अगला भाग, सिर्फ मातृभारती पर!
"प्रिय मित्रों, 'सौदे का सिंदूर' सिर्फ एक कहानी नहीं, मेरे द्वारा बुने गए जज्बात हैं। भाग 1, 2 और 3 को मिली आपकी प्रतिक्रियाओं ने मुझे भावविभोर कर दिया है। मैं इस समय भाग 4 की रूपरेखा तैयार कर रहा हूँ, लेकिन उसे शब्दों में पिरोने के लिए मुझे आपके साथ और हौसले की जरूरत है। आपको यह कहानी कितनी पसंद आ रही है? क्या आप कहानी के अगले मोड़ के लिए तैयार हैं? अपनी राय कमेंट्स में जरूर साझा करें। आपकी एक-एक टिप्पणी मेरे लेखन के सफर को ऊर्जा प्रदान करती है। इंतज़ार रहेगा!" धन्यवाद! "आपका लेखक, अनिल सिंह"
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