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Alok Mishra

Alok Mishra Matrubharti Verified

@alokmishra8153
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खाल मे रहना ।
बवाल न करना ।
तकलीफ हो कितनी भी ,
सवाल न करना ।
- Alok Mishra

जो ये राहें बोलती राज़ खोलती ।
हर राहगीर को रोज तोलती ।
हो जाता कहर इस जमानें में
जो राहें भी अपनी रज़ा बोलती ।

- Alok Mishra

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तरंगों से सराबोर हो जिंदगी
उमंगों से सराबोर हो जिंदगी
अबकी होली जी भर खेलो
कि रंगों से सराबोर हो जिंदगी
- Alok Mishra

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अपना शहर अपना ही होता है
उसे भी तो रोज बदलना होता है
लोग छोड़ जाते है उसे आवारा समझ
उसे भी तो वक्त के साथ चलना होता है
- Alok Mishra

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इंतजार इंतजार और इंतजार
जीने का सलीका बदल लिया
- Alok Mishra

गर दिल होगा तुम्हारे भी सीने में
कभी तो तड़पोगे हम याद आऐंगे

-Alok Mishra

इश्क तो किया था दोनों ने |
कुछ हमने खोया कुछ तुमने |
तन्हा तुम भी हुए और हम भी |
कुछ हमने खोया कुछ तुमने |
बिछडे थे तो नम थी आंखें चारों |
कुछ हमने रोया कुछ तुमने |
जहर के बीज थे पनप गए |
कुछ हमने बोया कुछ तुमने |
शायद कुछ और था पाने को |
कुछ हमने पाया कुछ तुमने |
बुत हो गए दिल दोनों ही |
कुछ हमने ढोया कुछ तुमने |
आलोक मिश्रा "बुत"

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कितना तराशू में अपने ही बुत को
उन्हें तो हर-सू कमीयां नज़र आती है

-Alok Mishra

भूल तो
बहुत है
जिंदगी में ।
पर
भूल से भी
तुम्हें भूल जाउं
ये हो नहीं सकता ।
भूलना तुमको
मेरी
भूल होगी ।
जो
भूल हो ऐसी
जिंदगी मुझे
भूल जाए ।

आलोक मिश्रा बुत

-Alok Mishra

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दस्तान
मसला ही कहां था प्यार का |
वो हुनर बता रहे थे व्यापार का |
बस हम ही बेवकूफ बनते रहे ,
समय ही कहां था उन्हें प्यार का |

बस एक झूठ था उस इकरार का |
झूठ था अमल वादों के इरादों का|
हमें हर शब्द सच्चा ही लगा हर दम ,
वो मज़ाक ही उड़ाते रहे एहसास का |

किस्सा अजीब था उस बदकार का |
हुनर अज़ीम था उस फनकार का |
हम ही अश्क बहाते रहे ईमान से ,
उसे तो मज़ा आ रहा था तमाशे का |
आलोक मिश्रा "बुत"

-Alok Mishra

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