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Amrita Singh

Amrita Singh

@aennyrajput8gmail.com810709


मैं एक साधारण-सी लड़की हूँ,
सजने-संवरने का हुनर नहीं मेरा।
चेहरे पे वो चाँद-सा नूर नहीं,
साँवलेपन की नर्मी है—मैं अपनी राह में स्थिर हूँ।

भीड़ की रौनक मुझे भाती नहीं,
ख़ामोशी में मेरी दोस्ती बसती है।
मेरी आँखों में वो चमक नहीं,
जो हर ख़्वाब में तुम तलाशते हो।

मेरी नज़र बस सुकून की आदत में डूबी है,
तो फिर क्यों वक़्त ज़ाया करते हो मेरे पीछे?
जाओ, ढूँढ लो वो चाँद-सा चेहरा कहीं,
इस दुनिया में हुस्न की कोई कमी नहीं।

तुम्हें मिल जाएगी वो नूर वाली,
आँखों में जादू लिए कोई और हसीन।
और मैं रहूँगी अपनी सादगी की छाँव में,
ख़ामोशी की रौशनी में, अपने रंगीन जीवन में।

writer by अमृता सिंह ✍🏽

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दिल कहता है कि बस उसकी एक झलक पा लूँ,
मगर जब वो सामने हो… नज़रों का तआ़रुफ़ (मिलना) भी न हो पाए।
धड़कनों की रवानी (तेज़ी) बढ़ जाती है,
लबों पर ठहरे लफ़्ज़ भी यूँ बिखर से जाएँ।

लेकिन जब घड़ी की सुइयाँ 11:11 पर ठहरती हैं,
उसकी यादें दिल में एक नई बेकरारी (बेसब्री) जगा जाती हैं।
वो लम्हा… वो एहसास… ख़्वाब-सा महक उठता है,
और ज़ुबाँ पर कोई अल्फ़ाज़ (शब्द) लाने की हिम्मत भी न रह जाती है

11:11
Amrita Singh ✍🏼

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मेरा इश्क़ भी दिल से ही रवाँ है,
मेरी नफ़रत भी उसी दिल में पलती है,
मेरे जज़्बात भी दिल से बिखरते हैं,
मेरे एहसास उसी में मसलते हैं।

मेरे आँसू दिल की ज़मीन पर गिरते हैं,
मेरी ख़ुशी वहीं कहीं दफ़्न हो जाती है,
मेरी तन्हाई दिल की गलियों में भटकती है,
मेरे शोर भी वहीं आकर ख़ामोश हो जाते हैं।

मेरी दुआ दिल से उठकर ख़ुदा तक जाती है,
मेरी बददुआ भी दिल में ही दम तोड़ती है—
मगर हैरत है कि
एक वही शख़्स है,
जो इस दिल से
आज तक
रुख़्सत होना नहीं सीख पाया।

Amrita Singh ✍🏽

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