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Part 7: अंधेरे के बीच नामजब होश और बेहोशी के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है…तो इं...
(काल कोठरी ) -------11 वी किश्त लोगों से जुड़ना, उन्हे...
शानवी गहरी नींद में थी। कमरा अंधेरे में डूबा हुआ था। तभी…खिड़की से हल्की थक-थक क...
रॉनी, राजस के बार काउंटर के पास गया और बोला, "बॉस, उनका इलाज हो गया है। उन्हें...
महिला आरक्षण की अधूरी यात्रा और लोकतंत्रविवेक रंजन श्रीवास्तव, भोपाल भारतीय लोक...
अगली सुबह जब सूरज की रोशनी उस घर की खिड़कियों से टकराई, तो वंशिका के लिए वह घर अ...
मेरा नाम सिया है और यह कहानी मेरे साथ तब हुई जब मैं दिल्ली की एक पुरानी 14 मंज़ि...
शहद की गुड़िया - प्रकरण 24 " गरिमा के सदमे से दादू अभ...
गोदाम। अँधेरे कमरे में बड़ी स्क्रीन चमक रही थी। सामने अनीश चुप खड़ा देख रहा था।...
नई सुबहपटना से उठी "विश्वास विश्वविद्यालय" और "विश्वास दल" की रोशनी अब पूरी दुनि...
हवाई अड्डे की भीड़ में मेहरीश एक पतली सी रेखा की तरह खड़ी थी। उसके कंधे पर एक छोटा सा बैग था, हाथ में एक किताब, और आँखों में एक ऐसी थकान जो सालों की नहीं, जन्मों की लगती थी। उसकी म...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
"नहीं! ऐसा मत करो, छोड़ दो please..... जाने दो! नहीं! नहीं!" "रात्रि उठ! ऐसा कहकर मेघा (रात्रि की मां) ने रात्रि को झकझोर दिया। कितनी बार कहा है इस लड़की को की छोड़...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
बहुत से स्टूडेंट्स एक बोर्ड के सामने खड़े अपना -अपना रिजल्ट देख रहे थे। स्टूडेंट का एक बड़ा ग्रुप धक्का -मुक्की करते हुए अपने रिजल्ट पहले देखने ही होड़ में लगा हुआ था। वहीं कुछ दू...
वो रात, जहाँ सब शुरू हुआ उस रात की खामोशी में एक अजीब सा तूफान छुपा था। हवा ठंडी थी, मगर उसके भीतर एक अनकही बेचैनी थी, जैसे कोई राज धीरे-धीरे परतों से बाहर आने को तैयार हो। शह...
मुख्य किरदार: आरव सिंह मेवाड़ – एक अमीर, घमंडी और सख्तदिल बिज़नेसमैन। रागिनी शर्मा – एक साधारण लेकिन आत्मसम्मानी लड़की, जो अपने परिवार के लिए कुछ भी कर सकती है। --- ? क...
मजबूरी की शादीबारिश की वो रात भूला न जाने वाली थी। पटना की तंग गलियों में पानी की धाराएँ तेज़ी से बह रही थीं, सड़कें नदियों में बदल चुकी थीं। मानो आसमान भी अनन्या मिश्रा के आँसुओं...
कभी-कभी जिंदगी हमें ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहाँ प्यार और दोस्ती की परिभाषा बदल जाती है। बचपन की मासूम दोस्ती धीरे-धीरे दिल की गहराई में उतर जाती है, लेकिन समय, दूरी और परिस्थितियाँ...
इस घर में प्यार मना है… क्योंकि यहाँ प्यार ने कभी किसी को पूरा नहीं छोड़ा। या शायद… क्योंकि इस घर का मालिक प्यार से नफरत करता है। अध्याय 1— एक अनचाही शादी “संस्कृति… तैयार...
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