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— "ब्रह्मांड की दरार: 5वीं सदी का वो खौफनाक सफर"दृश्य 1: भविष्य की चेतावनीस्थान:...
फाइनल टेस्ट पास करने के बाद तारा की भूमिका सहयोग फाउंडेशन में बदल चुकी थी. अब वह...
लिव-इन कमल चोपड़ा अरुण...
गार्ड्स चिल्लाए। अनन्या कमरे से बाहर निकली, दिल धक्-धक्। आर्यन दौड़ता आया, हाथ म...
उसे इस तरह तड़पते हुए देख सभी घबरा से गये थें। पार्टी-वार्टी छोड़ वे सब उसे घेरे...
कहते है जीवित बचे रहना बहुत बड़ी बात है पर कोई ये नहीं जानता उसकी भी एक कीमत है।_...
उस दिन मनमोहन और प्रार्थना किसी काम से गाँव के दूसरे छोरगए हुए थे। घर पहली बार प...
सब औरतों की हँसी-मज़ाक चल रही थी।किसी के नए सूट की बात…किसी के मायके जाने की तैय...
भाग 1दिल्ली की ठंडी रात, चमकती रोशनी, और शाही होटल "रॉयल क्राउन" के बाहर खड़ी मह...
प्रतिशोध की ज्वालाहिरण्याक्ष से राजपाट की बागडोर मिलने के पश्चात् हिरण्यकशिपु अत...
१.बेटी से संवादतुम्हारा हँसना, तुम्हारा खिलखिलाना,तुम्हारा चलना,तुम्हारा मुड़ना , तुम्हारा नाचना ,बहुत दूर तक गुदगुदायेगा।मीठी-मीठी बातें ,समुद्र की तरह उछलना,आकाश को पकड़ना ,हवा की...
ओ वसन्त भाग-११.ओ वसन्त ओ वसन्तमैं फूल बन जाऊँसुगन्ध के लिए,ओ आसमानमैं नक्षत्र बन जाऊँटिमटिमाने के लिए।ओ शिशिरमैं बर्फ बन जाऊँदिन-रात चमकने के लिए,ओ समुद्रमैं लहर बन जाऊँथपेड़ों में...
’’करवट बदलता भारत’’ 1 काव्य संकलन- वेदराम प्रजापति ‘’मनमस्त’’ समर्पण— श्री सिद्ध गुरूदेव महाराज, जिनके आशीर्वाद से ही कमजोर करों को ताकत मिली, उन्हीं के श्री चरणों मे...
*वीर पंजाब की धरती* महाकाव्य के दशम कृपाण (सर्ग): *"माच्छीवाडा़ से तलवंडी यात्रा चित्रण"* से चुनिंदा पद -?*जब गुरु गोविंद सिंह महाराज चमकोर युद्ध के बाद मछीवाड़ा जंगल में...
‘दो शब्दों की अपनी राहें’’ मां के आँचल की छाँव में पलता, बढ़ता एक अनजाना बचपन(भ्रूण), जो कल का पौधा बनने की अपनी अनूठी लालसा लिए, एक नवीन काव्य संकलन-‘‘बेटी’’ के रूप में, अपन...
स नावेल मे आप सब को अलग अलग तरह की कविताएं पढ़ने को मिली गई l इस नावेल को लिख कर जितनी मुझे ख़ुशी हो रही है , उम्मीद है आप सब wonderful readers को भी जे नावेल पढ़ कर उतनी ही ख़ुशी हो...
नि.र.स. --------------------------------------------------- क्या तुम्हे पता है कि - गर तुम कुछ ना कहो, ना लिखो, ना ही मेरी हकीकत में हो, तो मै नि.र.स. हो जाता हूँ। -------...
आज की इस भयावह चकाचौंध में भारत की पावन धरती से मानवी के बहुत सारे सच्चे चेहरे गायब और अनदिखे से हो रहे हैं, उन्हीं की खोज में यह काव्य संकलन ‘मेरा भारत दिखा तुम्हें क्या ?’...
1.तड़पतेरे इश्क ने ये हालत कैसी कर दी मेरी ये जालिम।दरबदर भटकते रहेते हम तुम्हें भूलने को रात दिन।हम तो मयखाने में भी जाते है तुम्हे भुलाने के लिए।कमबख्त शराब की हर एक बूंद में भी...
जीवन को स्वस्थ्य और समृद्ध बनाने वाली पावन ग्राम-स्थली जहां जीवन की सभी मूलभूत सुविधाऐं प्राप्त होती हैं, उस अंचल में आने का आग्रह इस कविता संगह ‘गांव की तलाश ’में किया गया है...
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