नागबंधन: मुक्ति का श्राप. by Simran in Hindi Novels
अध्याय 1जंगल का श्रापघना जंगल—इतना घना कि सूरज की सुनहरी किरणें भी ज़मीन तक पहुँचने से पहले ही थककर बिखर जाती थीं। यहाँ...
नागबंधन: मुक्ति का श्राप. by Simran in Hindi Novels
अध्याय 2नया घर, नई उलझनेंशिवांशी की नींद किसी झटके के साथ टूटी।उसका शरीर ठंडे पसीने से तर-बतर था और दिल सीने के अंदर किस...
नागबंधन: मुक्ति का श्राप. by Simran in Hindi Novels
खौफनाक रात के बाद की सुबह उम्मीद से कहीं ज़्यादा उजली थी। रात भर की मूसलाधार बारिश ने हवा को बिल्कुल साफ़ कर दिया था। जब...