भीड़ में अकेली by Alok Mishra in Hindi Novels
भीड़ में अकेलीअध्याय–1 : एक अनजान    संदेश रात के साढ़े दस बज रहे थे। शहर की ऊँची इमारतों की खिड़कियों में एक-एक करके रो...
भीड़ में अकेली by Alok Mishra in Hindi Novels
अध्याय–2 : एक घर, जहाँ सन्नाटा रहता है    सुबह के छह बजे थे। अलार्म बजने से कुछ क्षण पहले ही उमा की आँख खुल गई। यह वर्षो...
भीड़ में अकेली by Alok Mishra in Hindi Novels
अध्याय–3 : चैट की आदत     कहते हैं कि मनुष्य किसी भी आदत का बंदी बन सकता है। किसी को चाय की आदत होती है, किसी को किताबों...