: First Love in Hindi Love Stories by ashwin books and stories PDF | पहला प्यार - 4

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पहला प्यार - 4



Part 4 —
तस्वीर में तीसरा इंसान

आरव फर्श पर पड़ी तस्वीर को घूर रहा था।

तस्वीर में वह और मीरा छोटे बच्चे थे।

दोनों मुस्कुरा रहे थे।

लेकिन उनके पीछे खड़ा तीसरा आदमी…

उसका चेहरा तस्वीर में थोड़ा धुंधला था।

आरव ने तस्वीर उठाई।

“पापा… ये कौन है?”

उसके पिता ने तस्वीर देखते ही नजरें फेर लीं।

“इसे वापस रख दो।”

“पहले बताइए ये कौन है।”

“आरव, मैंने कहा इसे रख दो।”

“नहीं!”

आरव की आवाज पहली बार इतनी तेज हुई।

“बारह साल से आप मुझसे ये सब छिपाते रहे। अब मैं जानना चाहता हूँ।”

उसके पिता कुछ देर चुप रहे।

फिर बोले,

“मुझे नहीं पता।”

आरव हैरान रह गया।

“आपको नहीं पता?”

“नहीं।”

“तो फिर आप डर क्यों रहे हैं?”

उसके पिता ने कोई जवाब नहीं दिया।

---

उधर मीरा भी अपनी माँ के कमरे में बैठी थी।

उसके सामने वही लकड़ी का डिब्बा खुला पड़ा था।

मीरा ने लाल रिबन हाथ में लिया।

उसे देखकर उसके दिमाग में फिर वही बचपन का दृश्य आया।

वह और आरव किसी पुराने घर के बाहर खेल रहे थे।

आरव ने उसे एक लाल रिबन दिया था।

“ये तुम्हारे लिए।”

छोटी मीरा हँसकर बोली थी,

“क्यों?”

आरव ने कहा,

“क्योंकि तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो।”

दृश्य अचानक खत्म हो गया।

मीरा ने आँखें खोल दीं।

उसकी आँखों में आँसू थे।

“माँ… वो घर कहाँ था?”

माँ ने कहा,

“अब वो घर नहीं है।”

“कहाँ था?”

“शहर के बाहर।”

“मैं वहाँ जाना चाहती हूँ।”

माँ तुरंत खड़ी हो गईं।

“नहीं!”

मीरा डर गई।

माँ ने धीरे से कहा,

“वहाँ मत जाना।”

“क्यों?”

“क्योंकि वहीं से सब कुछ शुरू हुआ था।”

---

अगले दिन आरव कॉलेज पहुँचा।

मीरा पहले से गेट पर उसका इंतजार कर रही थी।

आरव उसके पास गया।

“मीरा।”

“हाँ?”

“मुझे लगता है हम बचपन में एक-दूसरे को जानते थे।”

मीरा कुछ सेकंड चुप रही।

फिर बोली,

“मुझे भी।”

आरव ने अपनी जेब से तस्वीर निकाली।

मीरा ने तस्वीर देखते ही उसे पहचान लिया।

“ये…”

“तुम्हारे पास भी ऐसी तस्वीर है?”

मीरा ने धीरे से सिर हिलाया।

आरव ने पूछा,

“तुम्हारी तस्वीर के पीछे क्या लिखा था?”

मीरा ने कहा,

“15 जुलाई 2012।”

आरव ने अपनी तस्वीर पलटी।

उसके पीछे भी वही तारीख थी।

दोनों एक-दूसरे को देखने लगे।

“उस दिन क्या हुआ था?” आरव ने पूछा।

मीरा ने कहा,

“मुझे नहीं पता।”

तभी पीछे से कबीर की आवाज आई।

“तुम दोनों यहाँ क्या कर रहे हो?”

आरव ने तस्वीर तुरंत जेब में रख ली।

कबीर ने दोनों को देखा।

“कुछ छिपा रहे हो?”

आरव ने कहा,

“नहीं।”

कबीर मुस्कुराया।

“ठीक है। लेकिन जब तुम दोनों झूठ बोलते हो, तो चेहरे से पता चल जाता है।”

---

दोपहर में मीरा अकेली लाइब्रेरी में बैठी थी।

उसने इंटरनेट पर पुराने शहर के नक्शे खोजने शुरू किए।

कुछ देर बाद उसे एक पुरानी जगह का नाम मिला—

“शांति निवास।”

नाम पढ़ते ही उसके दिमाग में वही घर दिखाई दिया।

वही बरामदा।

वही पेड़।

वही बारिश।

मीरा ने फोन पर उस जगह की तस्वीर देखी।

उसका दिल तेजी से धड़कने लगा।

“यही है…”

तभी उसके फोन पर एक मैसेज आया।

“अगर सच जानना है, तो आज शाम 6 बजे शांति निवास आओ।”

मीरा ने नंबर देखा।

अनजान था।

उसने तुरंत आरव को फोन किया।

“आरव…”

“हाँ?”

“मुझे एक जगह मिली है।”

“कहाँ?”

“शांति निवास।”

फोन के दूसरी तरफ अचानक चुप्पी हो गई।

“आरव?”

उसने धीमे से कहा,

“वहाँ मत जाना।”

“क्यों?”

“क्योंकि मुझे लगता है कोई हमें वहाँ बुला रहा है।”

मीरा बोली,

“शायद वही हमें सच बताना चाहता है।”

आरव ने कहा,

“तो मैं भी तुम्हारे साथ चलूँगा।”

---

शाम के 6 बजने में कुछ मिनट बाकी थे।

शहर से बाहर एक सुनसान सड़क पर दो लोग चल रहे थे।

आरव और मीरा।

सामने एक पुराना घर दिखाई दिया।

जंग लगा गेट।

टूटी हुई खिड़कियाँ।

और बाहर एक बड़ा पेड़।

मीरा अचानक रुक गई।

उसकी आँखों के सामने बचपन की याद पूरी तरह साफ हो गई।

“आरव…”

“क्या हुआ?”

“हम यहाँ पहले आ चुके हैं।”

आरव ने उसकी तरफ देखा।

“तुम्हें याद आ गया?”

मीरा ने धीरे से सिर हिलाया।

“हाँ।”

वह आगे बढ़ी।

पेड़ के नीचे जमीन में कुछ दबा हुआ था।

आरव ने मिट्टी हटाई।

उसे एक छोटा-सा लोहे का डिब्बा मिला।

डिब्बे पर लिखा था—

A + M

मीरा की आँखों में आँसू आ गए।

“ये हमने बनाया था…”

आरव ने डिब्बा खोला।

अंदर एक पुरानी चिट्ठी थी।

आरव ने उसे खोला।

पहली लाइन पढ़ते ही दोनों चौंक गए।

“अगर तुम दोनों ये चिट्ठी पढ़ रहे हो, तो इसका मतलब है कि तुम्हें आखिरकार एक-दूसरे की याद आ गई।”

आरव और मीरा एक-दूसरे को देखने लगे।

चिट्ठी के नीचे सिर्फ एक नाम लिखा था—

“अमन।”

मीरा ने पूछा,

“अमन कौन है?”

तभी पीछे से किसी की आवाज आई—

“वही… जिसने तुम दोनों को अलग किया था।”

दोनों ने पलटकर देखा।

दरवाजे के पास एक आदमी खड़ा था।

उसके हाथ में वही पुरानी तस्वीर थी।

और वह मुस्कुरा रहा था।

जारी रहेगा…