अनचाही शादी
कभी-कभी जिंदगी में ऐसे फैसले हमारे सामने आ जाते हैं, जिन्हें हम अपनी मर्जी से नहीं चुनते। लेकिन शायद किस्मत उन्हीं फैसलों के पीछे हमारी असली खुशी छिपाकर रखती है।
रिया की जिंदगी भी कुछ ऐसी ही थी।
वह अपने कॉलेज के आखिरी साल में थी। पढ़ाई पूरी करके नौकरी करना और अपने पैरों पर खड़ा होना उसका सपना था। वह शादी के बारे में अभी सोच भी नहीं रही थी। लेकिन घर की परिस्थितियाँ कुछ और ही चाहती थीं।
एक शाम उसके पिता ने उसे अपने पास बुलाया।
“रिया, तुम्हारे लिए रिश्ता आया है।”
रिया कुछ पल चुप रही।
“लेकिन पापा, मैंने अभी शादी के बारे में सोचा ही नहीं है।”
पिता ने नजरें झुका लीं।
“मैं जानता हूँ बेटा… लेकिन घर की कुछ मजबूरियाँ हैं। लड़का अच्छा है, परिवार भी अच्छा है। हम तुम्हें किसी गलत जगह नहीं भेजेंगे।”
रिया अपने कमरे में चली गई। उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे। उसके सारे सपने जैसे अचानक किसी ने बंद कमरे में कैद कर दिए थे।
जिस लड़के से उसका रिश्ता तय हुआ, उसका नाम कबीर था।
रिया ने उसे सिर्फ एक बार देखा था। शांत चेहरा, कम बोलने वाला और आँखों में एक अजीब-सी गंभीरता।
रिश्ता पक्का हो गया।
रिया ने आखिरी बार अपनी माँ से कहा, “माँ, अगर मैं खुश नहीं रही तो?”
माँ ने उसे गले लगा लिया।
“बेटी, कभी-कभी जिंदगी हमें जो देती है, उसे समझने में थोड़ा वक्त लगता है।”
कुछ ही दिनों बाद शादी का दिन आ गया।
लाल जोड़े में बैठी रिया बेहद खूबसूरत लग रही थी, लेकिन उसके चेहरे पर खुशी नहीं थी। उसके मन में सिर्फ एक सवाल था—क्या मैं इस अनजान इंसान के साथ पूरी जिंदगी बिता पाऊँगी?
मंडप में कबीर उसके सामने बैठा था।
फेरे शुरू हुए।
हर फेरे के साथ रिया को लगता रहा कि वह अपने पुराने सपनों से दूर होती जा रही है।
शादी पूरी हो गई।
विदाई के समय रिया अपने पिता से लिपटकर बहुत रोई।
कबीर चुपचाप खड़ा रहा।
ससुराल पहुँचने के बाद रात को रिया कमरे में अकेली बैठी थी। उसके हाथों की मेहंदी अभी गहरी थी, लेकिन मन में डर उससे भी गहरा था।
दरवाजा खुला।
कबीर अंदर आया और कुछ दूरी पर बैठ गया।
कुछ देर दोनों के बीच खामोशी रही।
फिर कबीर ने धीरे से कहा,
“रिया, मैं जानता हूँ कि यह शादी तुम्हारी मर्जी से नहीं हुई।”
रिया ने उसकी तरफ देखा।
“तो फिर आपने शादी के लिए हाँ क्यों की?”
कबीर कुछ पल चुप रहा।
“क्योंकि मेरे परिवार को लगता था कि यही सही है। लेकिन मैं तुमसे एक बात साफ कहना चाहता हूँ… मैं तुम्हें कभी मजबूर नहीं करूँगा।”
रिया की आँखें नम हो गईं।
कबीर ने आगे कहा,
“तुम्हें इस रिश्ते को स्वीकार करने में जितना समय चाहिए, लो। मैं तुम्हारा पति बनने से पहले तुम्हारा दोस्त बनना चाहता हूँ।”
उस रात रिया पहली बार थोड़ा सुकून महसूस करके सोई।
दिन गुजरने लगे।
कबीर ने कभी रिया पर कोई अधिकार नहीं जताया। वह उसकी पढ़ाई के बारे में पूछता, उसके सपनों को सुनता और हर बार कहता,
“अगर तुम नौकरी करना चाहती हो तो कर सकती हो।”
एक दिन रिया को शहर की एक कंपनी से इंटरव्यू का कॉल आया।
वह खुश भी थी और परेशान भी।
उसे डर था कि शायद कबीर के परिवार को पसंद नहीं आएगा।
कबीर ने उसकी परेशानी समझ ली।
“क्या हुआ?”
रिया ने फोन दिखाते हुए कहा, “मेरा इंटरव्यू है… लेकिन शायद घर में कोई नहीं चाहेगा कि मैं नौकरी करूँ।”
कबीर मुस्कुराया।
“तुम इंटरव्यू देने जाओगी।”
“लेकिन…”
“कोई लेकिन नहीं। तुम्हारे सपने शादी के बाद खत्म नहीं हुए हैं।”
रिया पहली बार दिल से मुस्कुराई।
उस दिन से कबीर की नजरों में उसके लिए सिर्फ जिम्मेदारी नहीं, सम्मान भी दिखाई देने लगा।
रिया को पता ही नहीं चला कि कबीर उसके लिए कब जरूरी बन गया।
एक शाम तेज बारिश हो रही थी। रिया बालकनी में खड़ी बारिश देख रही थी।
कबीर उसके पास आया।
“कुछ सोच रही हो?”
रिया मुस्कुराई।
“हाँ… सोच रही हूँ कि जिस शादी से मैं इतनी डर रही थी, उसी शादी में मुझे इतना अच्छा इंसान कैसे मिल गया।”
कबीर ने उसकी तरफ देखा, लेकिन कुछ नहीं कहा।
कुछ पल बाद रिया ने खुद कहा,
“कबीर…”
“हाँ?”
“अगर उस दिन मुझे शादी से मना करने का मौका मिलता, तो शायद मैं कर देती।”
कबीर के चेहरे की मुस्कान हल्की पड़ गई।
रिया ने तुरंत उसकी ओर देखकर कहा,
“लेकिन आज अगर मुझे दोबारा चुनने का मौका मिले… तो मैं तुम्हें चुनूँगी।”
कबीर कुछ बोल नहीं पाया।
रिया की आँखों में आँसू थे।
“क्योंकि तुमने कभी मुझे अपना बनाने की कोशिश नहीं की… तुमने मुझे खुद अपना बनने की आजादी दी।”
कबीर ने बस इतना कहा,
“तो क्या अब मैं तुम्हें अपना कह सकता हूँ?”
रिया मुस्कुरा दी।
“अब तुम्हें पूछने की जरूरत नहीं है।”
उस दिन रिया को समझ आया कि हर अनचाहा रिश्ता दुख देने के लिए नहीं आता। कुछ रिश्ते हमारी जिंदगी में इसलिए आते हैं, ताकि हमें वह प्यार दे सकें जिसकी हमने कभी उम्मीद ही नहीं की थी।
जिस शादी को रिया अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी मजबूरी समझती थी, वही उसकी सबसे खूबसूरत चाहत बन गई।
क्योंकि कभी-कभी…
किस्मत हमारी पसंद नहीं पूछती, लेकिन सही इंसान से मिलाकर हमारी जिंदगी की पसंद बदल जरूर देती है।
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