Blueberry Cottage - Part 3 in Hindi Horror Stories by Anamika books and stories PDF | ब्लूबेरी कॉटेज - भाग 3

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ब्लूबेरी कॉटेज - भाग 3

ब्लूबेरी कॉटेज
भाग - ३ 
लेखिका "अनामिका" 
शीसा  टूशीशाटने की ख़ौफ़नाक आवाज़ से कॉटेज का सन्नाटा चीर उठा। सीमा, अनन्या और अमित बुरी तरह सहम गए। तीनों किसी तरह वहां से तुरंत भाग निकलना चाहते थे। वे जैसे ही मुख्य दरवाज़े की तरफ बढ़े, तभी हॉल के गलियारे में वही बच्चा बदहवास सा एक कमरे से दूसरे कमरे की ओर भागता दिखा। यह मंज़र देखते ही तीनों के कदम वहीं थम गए और आगे बढ़ने की बची-खुची हिम्मत भी जवाब दे गई।
​उन्होंने पिछले दरवाजे से भागने की कोशिश की, लेकिन वह मजबूती से लॉक था। कोई और रास्ता न पाकर वे डरते-कांपते दोबारा हॉल की ओर मुड़े।
​तभी वहां का मंजर देखकर उनकी सांसें थम गईं—उन बदमाशों में से एक आदमी हाथ में बंदूक ताने उस मासूम बच्चे पर गोली चलाने ही वाला था। यह देखते ही सीमा के अंदर की मां जाग उठी। वह एक पल के लिए भूल गई कि वे इंसान नहीं बल्कि आत्माएं हैं।
​"नहीं!" चिल्लाते हुए सीमा उस बच्चे को बचाने के लिए उसकी तरफ झपटी। उसने बच्चे को पकड़ना चाहा, लेकिन उसके हाथ हवा में ही तैरते रह गए। तभी धांय की आवाज़ के साथ गोली चली, पर वह बच्चे को न लगकर किसी अनजानी दिशा में मुड़ गई।
गोली की दिशा बदलते ही सीमा ने चौंककर पीछे देखा—अमित ने गुंडे का हाथ ऊपर की तरफ धकेल दिया था!
​कमरे में खौफनाक सन्नाटा छा गया। वह मासूम बच्चा, दोनों किडनैपर्स और तीनों—हर कोई डर के मारे कांप रहा था। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि हवा में तैरता अदृश्य हाथ किसका था।
​तभी हड़बड़ाहट और दहशत में आकर उस गुंडे की चीख निकल गई। उसने बिना सोचे-समझे पूरे कमरे में अंधाधुंध गोलियां चलाना शुरू कर दिया। धांय-धांय की गूंजती आवाज़ों, उड़ती धूल और दीवारों से टूटते प्लास्टर के बीच कॉटेज की फिज़ा में मौत का खौफ फैल गया।
​गोलियां सीमा, अमित और अनन्या के जिस्म को पार करती हुई निकल रही थीं, लेकिन उन्हें एक खरोंच तक नहीं आई—उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वे इस खौफनाक मंज़र के बीच ज़िंदा भी हैं या नहीं!
गोलियाँ सीमा, अमित और अनन्या के शरीर के आर-पार निकल रही थीं। तभी उनके दिमाग में उस खौफनाक मंज़र की यादें कौंध गईं—मोड़ पर अचानक आई तेज़ रफ्तार ट्रक, ज़ोरदार टक्कर, चीखें और चारों तरफ़ फैला खून!
​उन्हें झटके से अहसास हुआ कि उस एक्सीडेंट में उनकी जान जा चुकी है, और कॉटेज में असली भूत वे खुद हैं! उन्हें अब सब समझ आने लगा—चाय वाला रास्ते में कॉटेज को इसीलिए घूर रहा था क्योंकि उसे वहाँ बदमाशों के होने का शक था। वह उनकी बातों का जवाब इसीलिए नहीं दे रहा था क्योंकि वह उन्हें देख ही नहीं पा रहा था! कमरे से भागते कदमों की आहट इन्हीं गुंडों की थी और घर का राशन भी इन्हीं का था।
​जैसे ये लोग गुंडों को भूत समझ रहे थे, वैसे ही वे गुंडे और बच्चा भी भयानक खौफ में थे—क्योंकि उन्हें कॉटेज में किसी अदृश्य साए की मौजूदगी लगातार महसूस हो रही थी!
​वे इस सदमे में ही थे कि कॉटेज का दरवाज़ा धड़ाम से खुला। टपरी वाला पुलिस और दो कांस्टेबलों को लेकर अंदर आ पहुँचा।
​"हैंड्स अप!" पुलिस की कड़क आवाज़ गूँजते ही गोलियाँ चला रहा गुंडा स्तब्ध रह गया।
पुलिस जैसे ही गुंडों को हथकड़ी पहनाकर बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालती है, इंस्पेक्टर मेज़ पर पड़े उसी पुराने अखबार को देखता है। वही अखबार, जिसमें सालों पुराने एक अनसुलझे किडनैपिंग केस और इसी गैंग की तस्वीर छपी थी। पुलिस को सालों बाद वह सुराग और अपराधी दोनों एक साथ मिल जाते हैं।
​इधर कॉटेज के कोने में खड़े सीमा, अमित और अनन्या की आँखें भर आती हैं। उन्हें समझ आता है कि कार हादसे में अपनी जान गँवाने के बाद भी उनकी आत्माएँ भटक क्यों रही थीं—नियति ने उनसे एक मासूम की जान बचाने और उन मुजरिमों को सज़ा दिलाने का काम लेना था।
​बच्चा बाहर जाते-जाते अचानक मुड़कर कॉटेज के उस खाली कोने की तरफ मुस्कुराकर हाथ हिलाता है, जैसे उसे उस अदृश्य साए के होने का अहसास हो गया हो। तीनों मुस्कुराते हैं और हल्की सफ़ेद रोशनी के साथ कॉटेज के सन्नाटे में विलीन हो जाते हैं।
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                       ❀ ༺ समाप्त ༻ ❀

लेखिका की ओर से:
हर भटकती आत्मा बुरी नहीं होती। कुछ रूहें बस अपनी अधूरी कहानी को पूरा करने और सुकून का रास्ता तलाशने में लगी होती हैं।
​शायद हम इंसानों के साथ भी ऐसा ही है—ज़िंदगी में हम सब किसी खास मकसद से आए हैं, बस देर है तो उसे महसूस करने और समझने की।
​मेरी इस छोटी सी कहानी को इतने प्यार से पढ़ने और इस खूबसूरत सफर का हिस्सा बनने के लिए आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया!❤️ आपकी राय मेरे लिए सच में बहुत मायने रखती है, इसलिए अपनी बात या विचार ज़रूर शेयर करें।