एक समय की बात है राजा युद्ध जंगल में भगवान कृष्ण के साथ टहलने के बाद विश्राम किया और भगवान कृष्ण से कहा हे माधव आपमुझे महा मास केकृष्ण पढ़ने वाली एकादशी के बारे में बताओ बताओ जिससे संसार के सभी जीवोक उद्धार हो चाहे संसार में किसी प्रकार का पाप हो किसी प्रकार के कष्ट हो भयंकर से भयंकर पाप कष्टधरिता इस प्रकार युधिष्ठिर के कहने पर भगवान कृष्ण बोले भगवान कृष्ण बोले हे पास समय जीवों का उद्धार करने वाली संसारक सभी मोक्षप्दान करने पाप हरिणी महा मास के कृष्णक षट्तिला एकादशी /मैं तुम्हें एक समयकी बात बता रहा हूं जब महर्षि पुलसते ने दल्बह ऋषि से कहा मनुष्य अपने जीवन में अनेकों प्रकारके पाप करताहै चोरी हत्या आदि आने को प्रकार कर्मों को इन सभी प्रकार प्रकारके संकटों से छुटकारा पाने केलिए षट्तिला एकादशी व्रत को रखने वाले लोग मनुष्य सुबह प्रातः काल 4:00 बजे स्नानागार करके भगवान विष्णु के मंत्र ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः का 108 बार जाप करना चाहिए घर के मंदिर में भगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाना चाहिए पुष्प रखना चाहिए सामग्री आदि से पूजन करना चाहिए उसके बाद षट्तिला एकादशी व्रत कथा पढ़नी चाहिए जरूरतमंदों और गरीबों को दान देना चाहिए एक समय नारद जी ने भगवान श्री विष्णु से भी यही बात कही थी और भगवान ने षट्तिला एकादशी का महत्व नारद जी से कहा सो मैं तुमसे कहता हूं भगवान ने नारद जी से कहा कि हे नारद मुनि, मैं तुमसे सत्य घटना कहता हूं ध्यानपूर्वक सुनो प्राचीन काल में मृत्यु लोक में एक ब्राह्मणी रहती थी वह सदैव व्रत किया करती थी एक समय वह एक मास तक व्रत करती रही इससे उसका शरीर अत्यंतदुर्बल हो गया एचपी वह अत्यंत बुद्धिमान भी थी उसने कभी देवताओं या ब्राह्मण के नियमित अन्य धन दान नहीं दिया था इससे मैं सोचा ब्राह्मणी ने नियमित व्रत आदिस अपना शरीर शुद्ध कर लिया है अब इसे विष्णु लोक तो मिल ही जाएगा परंतु उसने कभी अन्य का दान नहीं किया इससे इसकी तृप्ति होना कठिन है भगवान ने आगे कहा ऐसा सोचकर मैं भिखारी के भेष में मृत्युलोक में उसे ब्राह्मण के पास गया और उसे भिक्षा मांगी वह ब्राह्मणी बोली महाराज किस लिए आए हो मैंने कहा मुझे बच्चा चाहिए इस पर उसने एक मिट्टी का ढीला मेडालविचारपत्र में डाल दिया मैं उसे लेकर स्वर्ग में आ गया उसे ब्राह्मणी का मिट्टी का दान करने से सुंदर महल मिला परंतु उसने अपने घर को अनाड़ी सभी सामग्रियों से सुनने पाया घबराकर वह मेरे पास आई और कहने लगी भगवान मैं आपकी पूजा की परंतु फिर भी मेरे घर अन्य आदि सभी वस्तुओं से सुनने हैं इसका क्या कारण है इस पर मैंने कहा पहले तुम अपने घर जाओ देव स्त्रियां आएंगे तुम्हें देखने केलिए/ पहले उ उनसे षट्तिला एकादशी पुण्य और विधि सुन लेना उसके बाद द्वारा खोलना मेरे ऐसे वचन सुनकर वह अपने घर गई जब देव स्तरीय आई और द्वार खोलने को कहा तो ब्राह्मणी बोली आप मुझे पहले षट्तिला एकादशी व्रत महत्व मुझे कहो फोन में से एक स्त्री ने कहा ठीक है मैं बताती हू उसने संपूर्ण महत्व बताएं उसके बाद ब्राह्मण ने द्वार खोल लिया देवांगनाओं ने उसको देखा की ना तो वह गन्धर्वी है और नाआसुरी है वर्णन करने लगी ना वह पहले की तरह कोई कन्या या बालिका है इस प्रकार ब्राह्मणी पूरे नियम और कथा पूजा सामग्री कि सड़क गरीबों को दान ब्राह्मण को भोजन आदि क साथ एकादशी का व्रत किया इसके प्रभावसे बहुत सुंदर और रूपवती हो गई तथा उसका हर घर अन्य धन्य आदि से समस्त सामग्रियों से युक्तहो गया इस प्रकार स्त्रीहो या पुरुष दोनों को एकादशी व्रत रखने चाहिए