ापित वीडियो
भाग 1
मेरा नाम राहुल है और यह मेरी कहानी है।
यह बात तब की है जब मैं बस 18 साल का था, पर अब मेरी शादी हो चुकी है और बच्चे भी हैं। उस उम्र में मेरे अंदर भूतों को लेकर बिल्कुल भी डर या विश्वास नहीं था। पर एक दिन न्यूज़ देखते-देखते मुझे पता चला कि पिछले कई दिनों से पूरे राजस्थान में एक वीडियो का खौफ फैला हुआ है। न्यूज़ में दिखाया जा रहा था कि जिसके फोन पर भी यह वीडियो आएगी, अगर उसने सात दिनों के भीतर इसे किसी और को नहीं भेजा, तो वह वीडियो वाली आत्मा उसे मार डालेगी।
इतना पढ़कर मैं सो गया। अगली सुबह जब मैं कॉलेज पहुँचा और अपने दोस्तों से इस बारे में बात की, तो सबने मुझे इस टॉपिक पर बात करने से मना कर दिया। पर मैंने ध्यान दिया कि मेरा बचपन का दोस्त, रोहित, एकदम गुमसुम और चुप था। छुट्टी के वक्त जब मैंने उससे अकेले में पूछा कि, "भाई, तू इतना शांत क्यों है?" तब उसने डरते हुए बताया कि लगभग पाँच दिन पहले उसके पास भी वही वीडियो आई थी। यही वजह थी कि वह इतना खोया-खोया सा था। मैंने उससे पूछा, "तो क्या तूने अभी तक वह वीडियो किसी को फॉरवर्ड नहीं की?" उसने कहा कि उसने कल ही उसे एक अननोन नंबर पर भेज दिया है। मैंने उसे दिलासा देते हुए कहा, "फिर तो तू खामख्वाह डर रहा है! अभी तुम्हारे सात दिन पूरे भी नहीं हुए और तुमने उसे आगे भेज दिया है, इसका मतलब अब तुम बिल्कुल सेफ हो।" लेकिन रोहित ने मेरी तरफ देखा और थरथराते हुए कहा, "भाई, किसी और को भेजने के बाद भी मुझे अपने घर..."
भाग 2
"...में अजीब-अजीब आवाजें सुनाई देती हैं। कभी-कभी तो मैंने घर में एक डरावनी काली परछाई को भी देखा है, जबकि मैं घर में बिल्कुल अकेला रहता हूँ।" बस इतना कहकर वह खौफ के मारे अपने घर की तरफ भाग गया। कॉलेज से घर लौटकर मैंने अपनी एक और दोस्त को यह सारी बात बताई। उसने कहा, "रोहित के पास अब सिर्फ एक ही दिन बचा है, वह दिन कट जाने दो। फिर मैं तुम्हें कॉल करूँगी। क्या पता डर की वजह से यह सिर्फ उसका वहम हो कि घर में उसके अलावा कोई और आत्मा भी है।"
इसके बाद कॉलेज की दो दिन की छुट्टी पड़ गई, जिसकी वजह से मेरी रोहित से कोई बात नहीं हो पाई। छुट्टी के दूसरे दिन जब मैं सुबह उठा, तो देखा कि फोन पर रोहित के नंबर से 5-6 मिस्ड कॉल आए हुए थे। मैंने बिना वक्त गंवाए तुरंत वापस फोन किया। फोन रोहित की मम्मी ने उठाया। इससे पहले कि मैं रोहित के बारे में कुछ पूछता, वह रोते-रोते बोलीं कि कल रात एक भयानक कार एक्सीडेंट में रोहित की मौत हो गई। यह सुनकर मानो मुझे एक गहरा झटका लगा, मेरा बचपन का दोस्त अब इस दुनिया में नहीं था। मैंने एक पल भी नहीं गंवाया और तुरंत रोहित के घर पहुँचा। वहाँ पुलिस अपनी तफ्तीश कर रही थी। जब मैंने पुलिस ऑफिसर से बात की, तो उन्होंने एक चौंकाने वाली बात बताई। उन्होंने कहा कि एक्सीडेंट के बाद भी गाड़ी बिल्कुल सही-सलामत खड़ी थी, जबकि रोहित की बॉडी उससे कुछ दूरी पर मिली थी। और सबसे हैरान करने वाली बात...
भाग 3
...तो यह थी कि गाड़ी के स्टीयरिंग व्हील और हैंडल पर किसी के भी फिंगरप्रिंट्स नहीं थे। यह भला कैसे मुमकिन था कि कोई गाड़ी बिना ड्राइवर के अपने-आप चले और किसी का एक्सीडेंट कर दे? यह सब जानकर मैं बुरी तरह घबरा गया। मैंने तुरंत अपने एक और गहरे दोस्त को फोन किया, जिसका नाम शेखर था और उसके पापा शहर के एक बहुत बड़े साइंटिस्ट थे। मैंने शेखर को फोन पर पूरी बात विस्तार से बताई। शेखर ने कहा, "इसका मतलब साफ है राहुल, वह अफवाह बिल्कुल झूठी है कि वीडियो आगे भेजने से इंसान बच जाता है। सच तो यह है कि वीडियो आगे भेजने के बाद भी वह आत्मा पीछा नहीं छोड़ती और मार डालती है।"
मैं शेखर से बात कर ही रहा था कि अचानक मेरे फोन पर एक नोटिफिकेशन आया। जैसे ही मैंने फोन को स्पीकर पर डालकर नया मैसेज खोला, मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। किसी अनजान नंबर से मुझे भी वही खौफनाक वीडियो भेज दी गई थी! मैंने थरथराते हुए शेखर को यह बात बताई, तो उसने मुझे कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि मैं उस वीडियो को प्ले करने की गलती बिल्कुल न करूँ। मैंने उसकी बात मान ली और वीडियो नहीं देखी। पर उसी रात जब मैं खाना खाकर अपने कमरे में सोने गया, तो अचानक मुझे लिविंग रूम से अजीब सी सरसराहट की आवाज आई। मुझे लगा शायद कोई बिल्ली आ गई होगी, पर जैसे ही मैं वहाँ देखने गया, डर के मारे मेरे होश उड़ गए। पूरा कमरा बर्फ की तरह ठंडा था, टी.वी. अपने-आप चालू हो चुका था और स्क्रीन पर वही खौफनाक वीडियो बिना रुके चल रही थी। उस खौफनाक मंज़र को देखकर डर के मारे मुझे तेज बुखार आ गया।
भाग 4 (संशोधित एवं विस्तृत अंत)
बुखार और खौफ के साए में मैं पूरी रात अपने कमरे में दुबका रहा। तभी रात के ठीक तीन बजे, मेरे घर के मेन गेट पर किसी के ज़ोर-ज़ोर से खटखटाने की आवाज़ आई। आधी रात को उस सन्नाटे में वह आवाज़ किसी डरावने साये की दस्तक जैसी लग रही थी। मैं डर के मारे कांप रहा था, पर फिर भी हिम्मत जुटाकर भारी कदमों से बाहर गया और कांपते हाथों से कुंडी खोली।
सामने कोई भूत नहीं, बल्कि शेखर और उसके पापा खड़े थे। शेखर ने अपने पापा को इस जानलेवा वीडियो और रोहित की मौत के बारे में सब कुछ सच-सच बता दिया था। शेखर के पापा ने इस मामले की गहराई को समझते हुए शहर के एक बहुत बड़े और सिद्ध तांत्रिक (हकीम) से संपर्क किया था। शेखर के पापा ने गंभीर होकर मुझसे कहा, "राहुल, मामला बहुत गंभीर है। यह कोई साधारण वायरस या प्रैंक नहीं है, बल्कि इस वीडियो के जरिए एक बेहद प्राचीन और शक्तिशाली रूह को जाग्रत किया गया है, जो इंसानों की जान लेती है।"
मैंने रोते हुए पूछा, "अंकल, क्या इससे बचने का कोई रास्ता नहीं है? क्या मैं भी रोहित की तरह मारा जाऊँगा?"
उन्होंने मेरे कंधे पर हाथ रखा और ढाढस बंधाते हुए कहा, "घबराओ मत, तुम्हारे पास अभी पूरे सात दिन हैं और तुम्हारी समय सीमा खत्म नहीं हुई है। वह हकीम जी बहुत शक्तिशाली हैं। उन्होंने एक विशेष सुरक्षा कवच तैयार किया है, लेकिन उसके लिए तुम्हें अभी इसी वक्त हमारे साथ चलना होगा।"
हम बिना एक पल गंवाए तुरंत उनके साथ निकल गए। वहाँ पहुँचकर हकीम जी ने कुछ विशेष मंत्रों और तंत्र-सामग्री के जरिए मेरे फोन को एक पवित्र धागे से बांधा और उस श्रापित वीडियो को हमेशा के लिए डिलीट कर दिया। जैसे ही वह वीडियो डिलीट हुई, मुझे अपने सीने पर से एक भारी दबाव हटता हुआ महसूस हुआ, मानो कोई अदृश्य साया खिड़की के रास्ते चीखता हुआ बाहर निकल गया हो। अगली सुबह जब मैंने फोन चेक किया, तो वह वीडियो फ़ाइल पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी और मेरा बुखार भी उतर चुका था। उस खौफनाक हादसे के बाद, आज भी मैं जब उस रात को याद करता हूँ तो मेरी रूह कांप जाती है। उस दिन के बाद से मैंने कभी भी ऐसी अनजान चीज़ों पर कौतूहल दिखाने की गलती नहीं की और हमेशा के लिए इन अदृश्य ताकतों के अस्तित्व को स्वीकार कर लिया।
---Nikhil
(Winner of the)
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