Mr. Ms. Fake - 4 in Hindi Comedy stories by kajal jha books and stories PDF | Mr. Ms. Fake - एपिसोड 4

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Mr. Ms. Fake - एपिसोड 4

Mr. & Ms. Fake

Episode 4 – The Contract

अगली सुबह...

सान्वी पूरी रात सो नहीं पाई थी।

टेबल पर अस्पताल का बिल रखा था।

बार-बार उसकी नज़र उसी पर जा रही थी।

तभी उसके पिता के डॉक्टर का फोन आया।

"मिस सान्वी, ऑपरेशन ज़्यादा देर तक टालना ठीक नहीं होगा। जितनी जल्दी हो सके, पैसे जमा कर दीजिए।"

"जी... मैं कोशिश कर रही हूँ।"

फोन कटते ही उसकी आँखें भर आईं।

उसी समय उसकी सबसे अच्छी दोस्त रिया कमरे में आई।

"क्या हुआ?"

सान्वी ने सारी बात बता दी।

रिया कुछ देर चुप रही, फिर बोली—

"कल जिस लड़के ने तुम्हें नकली गर्लफ्रेंड बनने को कहा था..."

सान्वी ने तुरंत कहा—

"पागल है वो!"

रिया हँस पड़ी।

"पागल होगा... लेकिन बुरा नहीं लगा। उसकी आँखों में डर था, चालाकी नहीं।"

सान्वी सोच में पड़ गई।

उधर...

आर्यवीर ऑफिस में बैठा था।

उसका पूरा ध्यान मोबाइल पर था।

हर बार फोन की स्क्रीन जलती, तो उसे लगता शायद सान्वी का मैसेज होगा।

लेकिन हर बार कोई बैंक या ऑफिस का नोटिफिकेशन निकलता।

कबीर ने हँसते हुए कहा,

"इतनी बेचैनी तो तूने एग्जाम के रिज़ल्ट में भी नहीं दिखाई होगी।"

आर्यवीर बोला,

"मुझे लगता है वो मना कर देगी।"

कबीर ने कंधे उचकाए।

"अगर किस्मत में होगी, तो खुद फोन करेगी।"

इतने में...

ट्रिंग... ट्रिंग...

एक अनजान नंबर।

"हैलो?"

दूसरी तरफ़ से आवाज़ आई—

"मैं... सान्वी बोल रही हूँ।"

आर्यवीर तुरंत अपनी कुर्सी से खड़ा हो गया।

"जी... बोलिए!"

"अगर ऑफर अभी भी है... तो शाम पाँच बजे 'कॉफ़ी कॉर्नर' में मिलिए।"

फोन कट गया।

कबीर मुस्कुराया।

"लगता है कहानी शुरू हो गई, भाई!"

शाम पाँच बजे।

आर्यवीर तय समय से बीस मिनट पहले ही कैफ़े पहुँच गया।

वह बार-बार घड़ी देख रहा था।

ठीक पाँच बजे...

दरवाज़ा खुला।

सान्वी अंदर आई।

सफेद कुर्ती, नीली जींस और कंधे पर बैग।

वह सामने वाली कुर्सी पर बैठ गई।

"इतनी जल्दी आ गए?"

आर्यवीर मुस्कुराया।

"आदत है।"

सान्वी ने सीधे मुद्दे पर आते हुए कहा—

"मैं आपकी नकली गर्लफ्रेंड बनने के लिए तैयार हूँ..."

आर्यवीर की आँखों में चमक आ गई।

"...लेकिन मेरी कुछ शर्तें हैं।"

"जो कहिए।"

सान्वी ने बैग से एक फाइल निकाली।

आर्यवीर हैरान रह गया।

"ये क्या है?"

"कॉन्ट्रैक्ट।"

"कॉन्ट्रैक्ट?"

"हाँ। अगर अभिनय करना है, तो नियम भी होंगे।"

आर्यवीर ने फाइल खोली।

पहला नियम—

1. यह रिश्ता सिर्फ़ अभिनय होगा। कोई असली भावनात्मक उम्मीद नहीं।

दूसरा—

2. बिना मेरी अनुमति के हाथ पकड़ना, गले लगना या कोई रोमांटिक हरकत नहीं।

तीसरा—

3. मेरे परिवार के बारे में कोई सवाल नहीं पूछेंगे।

चौथा—

4. अगर मुझे कभी लगे कि यह समझौता मेरी इज़्ज़त या आत्मसम्मान के ख़िलाफ़ जा रहा है, तो मैं उसी समय इसे खत्म कर दूँगी।

पाँचवाँ—

5. पंद्रह दिन पूरे होते ही हम दोनों एक-दूसरे की ज़िंदगी से बाहर हो जाएँगे।

आर्यवीर ने पूरी फाइल पढ़ी।

फिर मुस्कुराकर बोला—

"बस इतनी-सी बातें?"

सान्वी ने भौंह उठाई।

"आपको ये आसान लग रहा है?"

"क्योंकि मैं भी कुछ जोड़ना चाहता हूँ।"

"क्या?"

"छठा नियम।"

सान्वी उत्सुक हो गई।

आर्यवीर मुस्कुराया—

"इन पंद्रह दिनों में अगर आपको मेरे परिवार से कोई परेशानी हो... तो पहले मुझे बताएँगी। अकेले सब नहीं सहेंगी।"

सान्वी कुछ पल उसे देखती रही।

उसने पहली बार महसूस किया...

यह लड़का अजीब ज़रूर है...

लेकिन अच्छा इंसान है।

वह हल्के से मुस्कुराई।

"ठीक है... ये नियम मंज़ूर है।"

दोनों ने कॉन्ट्रैक्ट पर साइन कर दिए।

जैसे ही दोनों ने हाथ मिलाया...

उसी समय कैफ़े के बाहर खड़ी एक लड़की ने यह सब अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया।

उसने वीडियो देखते हुए धीरे से कहा—

"तो... आर्यवीर की ज़िंदगी में कोई लड़की आ ही गई।"

उसकी आँखों में गुस्सा साफ़ दिखाई दे रहा था।

वह कौन थी?

और वह आर्यवीर और सान्वी के इस नकली रिश्ते को देखकर क्यों भड़क गई?

क्रमशः...