The Last Promise - 13 in Hindi Crime Stories by CHIRANJIT TEWARY books and stories PDF | The Last Promise - 13

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The Last Promise - 13

P k को बुलाने पर P k मन ही मन सोचता है --

" लगता है आज ये हम सबको मरवा कर ही मानेगा , पहले शगाई होने से डर लग रहा था , अब पता नही ये अंदर  क्या करेगा , कही शगाई से मना ना कर दे ।  अब डर ये लग रहा है के कही शगाई टुट ना जाए । उफ्फ प्रभू ... लगता है मैं सस्पेंस मे ही मर  जाउगां "

p k इतना सोच ही रहा था के तभी रुद्रा P k को बुला लेता है -

रुद्रा :- क्या हूआ चल ना !

अंदर जाकर रुद्रा कोमल के पास खड़ा था , कोमल अपने दोनो हाथो को समेटे हूए थी और रुद्रा को ही दैख रही थी , रुद्रा क्या बोलता ये उसे समझ मे नही आ रहा था । तब कोमल कहती है --

कोमल :- क्या बात है , मुझे यहां पर बुलाकर चुप हो गए ? कुछ बात है तो बोलो वरना चलो शगाई का समय हो गया है ।

रुद्रा :- मेडम जी .. क्या ये शगाई सही होगा ?

रुद्रा के मुह से इतना सुनकर  p k अपना सर पकड़ लेता है , और धिरे से बुदबुदाता है --

" जिसका डर था वही हो रहा है , अब तो पक्का सब मारे जाऐगें । कभी हां , कभी ना के चक्कर मे मंत्री जी कही गोली ही ना मरवा दे ।"

रुद्रा अपनी बात को जारी रखता है और कहता है --

रुद्रा :- नही... मेरा मतलब है के आप मुझे ठिक से जानता भी नही हो के मैं कैसा लड़का हूँ , और फिर मेडम आप कहां और मैं कहां ?

कोमल :- मैं कहां हूँ बोलो ... तुम किस चिज की बात कर रहे हो ?

रुद्रा :- मेडम जी , मैं ठहरा एक साधारण सा पंडित और आप महल की राजकुमारी,  आप मेरे साथ नही रह पाओगी ।

कोमल :- क्यों नही रह पाउंगी ? ऐसा क्या है जो मैं नही रह पाउंगी ?

रुद्रा :- मेडम जी ... मैं समझ सकता हूँ के आप उस राजवीर से शगाई नही करना चाहती थी तो इसिलिए आपने मेरा नाम लिया , पर उसके लिए आपको मेरे से सच मे शगाई करने की जरुरत नही है । आप चलिए , मैं मंत्री जी को सब समझा दूगां ।

इतना बोलकर रुद्रा वहां से जाने लगता है तो कोमल रुद्रा का हाथ पकड़ लेती है और उसे रोककर अपनी तरफ खींच लेती है और रुद्रा के करीब जाकर कहती है --

कोमल :- तुम्हें क्या लगता है के उस राजवीर को मना करने के लिए मुझे किसी बहाने की जरुरत होगी ? 

रुद्रा :- पर मेडम जी .....


कोमल रुद्रा के होंट पर अपनी उंगली रख देती है और कहती है --

कोमल :- अभी मेरी बात पुरी नही हूई है , हां .. मैं उस राजवीर से शगाई नही करना चाहती थी क्योंकी उसे मैं पहली नजर मे ही पहचान गया था के वो कैसा है , फिर मुझे तुम दिखे , मुझे तुम्हारी सादगी बहुत अच्छी लगी, रुद्रा…तुम्हारा कैरेक्टर, तुम्हारा व्यवहार—सब कुछ बहुत सच्चा लगता है। आजकल लोग दिखावा ज़्यादा करते हैं,
लेकिन तुम जैसे हो, वैसे ही हो—और यही बात मुझे सबसे ज़्यादा पसंद आई।

कोमल रुद्रा के और करीब जाकर कहती है --

कोमल :- तुम्हें क्या लगा था के कल मैने तुम्हारे गाल पर किस क्यों किया था ? तुम मुझे अच्छे लगे , इसिलिए किया था । अब बताओ हो गई सारी बात क्लियर. .. या और कुछ जानना है ?

रुद्रा :- पर मेडम जी , आप जो सौच रही हो वो मैं नही हूँ । 

कोमल :- तुम क्या हो नही हो इससे मुझे कोई फर्क नही पड़ता , मुझे बस इतना पता है के तुम्हारे अंदर जो दिल है वो साफ है और तुम एक बहुत अच्छे इंसान हो । इससे ज्यादा ना तो मुझे कुछ जानना है और कुछ सुनना है । 

रुद्रा :- पर  मेडम जी ... मैं एक ....

रुद्रा इतना बोलता ही है के कोमल रुद्रा को किस करने लगती है और उसके बाद गले लगा लेती है , P K अपना मुह दुसरी और कर लेता है । कोमल रुद्रा से अलग होती है और सर्माने लगती है , रुद्रा हक्का - बक्का वही पर खड़ा था ।

कोमल :- अब और कुछ कहना है , रुद्रा मुझे तुमसे प्यार हो गया है , मुझे तुम्हारी सादगी से प्यार हो गया है , तुम यहां पर जैसे भी मुझे रखोगे , मैं खुशी - खुशी रह लुगीं ।

कोमल की मासुमियत और उसकी आंखो मे अपने लिए प्यार दैखकर रुद्रा एक हल्की मुस्कुान देता है जिसे दैखकर कोमल खुश हो जाती है और रुद्रा के गले लग जाती है । 

कोमल वहां से खुश होकर बाहर चली जाती है , रुद्रा को राजी होते दैखकर P k अपने दिल पर हाथ रखता है और एक गहरी सांस लेकर रुद्रा के पास जाता है और भगवान से कहता है --

P K :- धन्यवाद भगवान ... जान बच गया ।

p k रुद्रा के पास जाता है और कहता है --

PK :- तु पागल हो गया है रुद्रा , उसे मना क्यों कर रहा था ! 

रुद्रा :- तु तो जानता है ना के हम कौन है , हमारा पास्ट क्या है , और फिर मंत्री के घर मे शादी मतलब हर वक्त पुलिस और पॉवर फूल लोग । 

p k :- तो अब क्या करेगा , चलो फिर यहां से भाग चलते है ।


रुद्रा :- नही P k .. तुने दैखा नही , कोमल ने क्या कहा .. मैं उसे छोड़कर नही जा सकता ।

P k रुद्रा की और मुस्कुरा कर दे़ैखता है और कहता है --

pk :- ओ हो ... प्यार हो गया लगता है ..!

रुद्रा हल्की मुस्कान देता है और हां मे सर हिला कर जवाब दे देता है ।

रुद्रा :- हां यार .. तुने दैखा ना कितनी मासुम है , मैं चाहकर भी उसके दिल को ठेस नही पहूँचा सकता । अब चल आगे जो होगा दैखा जाएगा ।

इतना बोलकर दोनो ही वहां से बाहर आ जाता है , सभी स्टेज पर उन सबका इंतजार कर रहे थे , तभी कोंल और रुद्रा को आते दैख सबकी निगाहे उनकी तरफ ही थी । 

शिव नारायण उपर की और दैखकर भगवान से कहता है --

शिव नारायण: - हे प्रभु .. पता नही अब क्या किया इसने ? कभी हां बोले तो टेशंन और ना बोल रहा है तो टेशन । उफ्फ .... दैख लेना प्रभू ।

तभी रुद्रा और कोमल आ जाती है , शिव नारायण रुद्रा तो इशारे से पूछता है के क्या हूआ तो रुद्रा सर्माते हूए सिर झुका लेता है , किसन कुमार कोमल की और दैखता है और उसे भी इशारे से पूछता है , शिव नारायण कोमल की और नजरे गड़ाए कोमल की जवाब का इंतेजार कर रहा था ,  तो कोमल अपने पापा की और दैखता है और हां मे सर हिलाकर जवाब दे देता है ।

कोमल के जवाब सुनकर सभी खुश हो जाता है और शिव नारायण अपने दिल पर हाथ रखकर कहता है --

शिव नारायण :-  भगवान की कृपा है ।



To be continue......