नरक का गुलाम
"जिस आत्मा को कैद करने आया था... उसी के प्रेम ने उसे आज़ाद कर दिया।"
हर हज़ार वर्षों में एक बार स्वर्ग, पृथ्वी और नरक के बीच की सीमाएँ कमज़ोर हो जाती हैं। उसी समय एक ऐसी आत्मा जन्म लेती है, जो तीनों लोकों का संतुलन बदलने की क्षमता रखती है। इस बार वह आत्मा है—अनाया।
अपने बाइसवें जन्मदिन के बाद से अनाया के साथ अजीब घटनाएँ होने लगती हैं। उसे रातों में किसी अनजान व्यक्ति की आवाज़ सुनाई देती है, आईनों में अपनी परछाईं बदलती हुई दिखाई देती है और ऐसे सपने आते हैं, जिनमें वह किसी प्राचीन मंदिर में एक योद्धा का इंतज़ार कर रही होती है। उसे नहीं पता कि उसकी आत्मा पर सदियों पुराना एक श्राप और एक अधूरा वचन आज भी जीवित है।
नरक के अंधकारमय साम्राज्य में, आरव—नरक का सबसे शक्तिशाली गुलाम—सदियों से बिना भावना, बिना दया और बिना किसी प्रश्न के अपने स्वामी के आदेशों का पालन करता आया है। उसका काम है उन आत्माओं को पकड़कर नरक लाना जिनकी नियति तय हो चुकी है। उसके हाथ कभी नहीं काँपते... जब तक कि उसे अपना अगला शिकार नहीं सौंपा जाता।
उसका लक्ष्य है—अनाया।
आदेश स्पष्ट है—उसे जीवित नरक लाना है।
लेकिन पहली बार जब आरव अनाया की आँखों में देखता है, तो उसके भीतर दफ़्न यादों की राख से एक भूली हुई पहचान जाग उठती है। उसे ऐसे दृश्य दिखाई देने लगते हैं जो किसी और जीवन के हैं—एक मंदिर, एक रक्तरंजित युद्ध, एक अधूरा विवाह और एक स्त्री जिससे उसने जन्मों पहले लौट आने का वादा किया था।
धीरे-धीरे सत्य सामने आता है।
हज़ार वर्ष पहले आरव कोई दानव नहीं, बल्कि एक वीर योद्धा था जिसने अपने प्रेम की रक्षा के लिए स्वयं नरक के राजा से सौदा किया था। उसने अपनी आत्मा हमेशा के लिए नरक को सौंप दी थी ताकि अनाया का पूर्वजन्म जीवित रह सके। मरते समय अनाया ने उससे एक वचन लिया था—
"अगर अगले जन्म में मिलो... तो इस बार मुझे छोड़कर मत जाना।"
पर नरक का राजा छल का स्वामी था।
उसने आरव की सारी यादें छीन लीं और उसे अपना अमर गुलाम बना दिया। अब वही आरव उस स्त्री की आत्मा को कैद करने आया है, जिसके लिए उसने अपनी पूरी मानवता खो दी थी।
जब अतीत लौटने लगता है, आरव अपने स्वामी के आदेश और अपने हृदय के बीच फँस जाता है। दूसरी ओर, स्वर्ग के दूत, प्राचीन ऋषि, भटकी हुई आत्माएँ और नरक के अन्य शिकारी भी अनाया की तलाश में निकल पड़ते हैं। हर पक्ष उसे अपने उद्देश्य के लिए चाहता है, क्योंकि उसकी आत्मा में एक ऐसी शक्ति छिपी है जो नरक के सिंहासन को नष्ट भी कर सकती है और उसे असीमित शक्ति भी दे सकती है।
प्रेम, विश्वासघात, पुनर्जन्म, शाप, बलिदान और भाग्य के इस महायुद्ध में आरव को एक असंभव निर्णय लेना होगा—
क्या वह अपने स्वामी का सबसे वफ़ादार गुलाम बना रहेगा...
या उस प्रेम के लिए पूरे नरक के विरुद्ध युद्ध छेड़ देगा जिसने जन्मों बाद भी उसे भुलाया नहीं?
"नरक का गुलाम" एक भव्य पैरानॉर्मल रोमांटिक फैंटेसी है, जहाँ प्रेम केवल दो दिलों के बीच नहीं, बल्कि तीनों लोकों की नियति बदलने की शक्ति बन जाता है। यह कहानी सिखाती है कि सच्चा प्रेम मृत्यु, समय, श्राप और स्वयं नरक की जंजीरों से भी अधिक शक्तिशाली हो सकता है।