Paretni's Wedding - 5 in Hindi Motivational Stories by Sapna Badh books and stories PDF | परेतनी की शादी - 5

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परेतनी की शादी - 5

वह सुन्दरी मुझे जगा हुआ देखकर उसने मेरी ओर देखा और मुस्कुराई तब तक वे दोनों अधेड़ प्रकट हो चुके थे एक ने मेरे हाथ धुलवाए और दूसरा जो खड़ा था उसने मुझे तौलीयां दिया हाथ पोंछने के उस सुन्दरी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और राजमहल जैसे भवन में पता नहीं कहां से हल्की-हल्की सफेद रोशनी छाई हुई थी।वह मुझे हाथ पकड़ कर घुमाने ले ग‌ई राजमहल के बाहर एक सुंदर बगीचा था।उस बगीचे के एक किनारे पर एक तलाब बना हुआ था और उस तलाब के बीचोंबीच एक छोटा सा कमरा था।

बगीचे के अंदर बहुत सुंदर सुंदर फूल खिले हुए थे और उन फूलों कि खुशबू से पूरा राजमहल महक रहा था।

वे सभी अलग-अलग‌ तरह के फूल थे और फूल बहुत बड़े बड़े थे जैसे गोबी के फूल जितने बड़े बड़े फूल थे।

फूलों का रंग ज्यादातर लाल सुर्ख और शोख था।

बगीचे के अंदर उस छोटे कमरे में जाने के लिए छोटा सा गलियारा बना हुआ था।

वह सुन्दरी मुझे उस गलियारे से लेकर उस कमरे में आ गई।

उस कमरे में बहुत खुबसूरत का पलंग पर उसने मुझे अपने रूप लावण्य का वो नजारा दिखाया जिसके बाद मै किसी भी चीज के लिए इंकार करने के काबिल नहीं रहा,,,,पूरी रात उसी तरह से गुजरी,,,,,, सुबह जब आंख खुली,,,,तो फिर वही उपक्रम चला,,, स्नान और फिर भोजन फिर नींद फिर रात रंगीन,,,,,,,,,।

ऐसे ही कुछ दिन मज़े से गुजरे ।अब भैरू बाबा को बुलाना क्या अगर वह उसे रस्सी से बांध कर लाने की बात करती तो भी शायद मैं ले आता।

मैं पूरी तरह से उस सुन्दरी के जाल में फंस चुका था,,,,,,।

फिर एक दिन सुबह स्नान के बाद वह मुझे अपने साथ लेकर उस तहखाने में ले ग‌ई तहखाना अंधेरे से डूबा हुआ था उसके हाथ में एक मशाल थी। हम सीढ़ियों से चलते चलते नीचे पहुंचे। 

वहां पहुंचकर उसने एक गोल चक्कर सा घूमाया, गोल चक्कर के घूमते ही दीवार का एक हिस्सा एक तरफ सरक गया और वहां पर एक दरवाजा दिखा। हम दोनों उस दरवाजे से आगे बढ़े।


सामने एक गलियारा बना हुआ था उसमें लगभग दौ सौ मीटर चलने के बाद एक और गोल चक्कर दिखाई दिया उसने उसे दबाया। जिस जगह पर हम लोग खड़े थे वह सहासा ऊपर की तरफ होने लगा।

फिर उसने मुझे कहा, मैं तुम्हें वापस गांव के पास झोड दूंगी। वहीं से तुमको मैरू बाबा को लेकर आना है। और एक बात का ध्यान रखना की रात दस बजे के बाद ही आना और वहां पहुंचकर तीन बार ताली बजाना मैं खुद आ जाऊंगी ।

इतना कह कर उसने फिर अपनी चुनरी मेरे सिर डाल दी।

जब मेरी आंख खुली तो मैं नदी किनारे वाले बरगद के पड़े के नीचे पड़ा हुआ था मेरे कपड़े वापस वही पूराने थे। राजसी वस्त्र गायब हो चुके थे मुझे ऐसा लगा कि जैसे मैं स्वर्ग से सीधे धरती पर आ गया हूं। थोड़ी देर के लिए मुझे बहुत दुख हुआ,,,,,सपने से यथार्थ में थोड़ा वक्त लगा !

फिर अचानक याद आया कि मुझे भैरू बाबा को लेकर जाना है,,,,,।

मैं धीरे से उठा नदी में स्नान किया और मैं वापस अपने घर की तरफ चल पड़ा,,,,,,

रास्ते में गांव के क‌ई लोग मिले। लेकिन मैं किसके छुने का कोशिश करता तो मैं उसे स्पर्श नहीं कर पा रहा था।

क्रमशः ✍️