Secrets or Reality - 4 in Hindi Love Stories by Priyanka Saini books and stories PDF | राज या हक़ीकत - 4

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राज या हक़ीकत - 4

ओ तो मेला miku इतना बड़ा हो गया कि वो अब  अपने डैडी को punish कलेगा ... एक लड़के ने हंसते हुए कहा ... 
  तो छोटा सा miku गुस्से से लाल हुए बोला...   "हां  कलूँगा... डैडी मुदे अकेला छोल कर चले गए ... "  
    "अरे miku तुम यहां अकेले भी हो हम है न यहां .. " उस लड़के ने जल्दी से  miku को अपनी गोद में लेते हुए कहा ..
        "ओल मेली मम्मा वो ...  वो कहां है तातू "... Miku ने बड़ी  ही मासूमियत के साथ कहा .. तो सब एक पल के लिए खामोश हो गए ।

आगे .....
      सभी की नज़रे उस छोटे  से मासूम बच्चे पर टिक गई जो अपनी मां के बारे में पूछ रहा था ... इस बात से अनजान की उसकी मां कौन है ? उसने तो बस सुना था अपने  चाचू अपने पापा के मुंह से मम्मा  जो उसकी दादी को बुलाते थे ।

       लाज़मी था उसका पूछना भी की उसकी मम्मा आखिर है  कहां ? पर कौन जाने उसके बारे में उस छोटे से मासूम बच्चे को क्या ही वो बताते .... 
          
            "अरे ! बच्चा में तो भूल ही गई देखो बुआ आपके लिए कितनी सारी चॉकलेट लेकर आई है "... आहना ने  कहा ...   तो  miku अपनी टिमटिमाती उन प्यारी प्यारी आंखों में चमक लिए उन चॉकलेटों को देखता है ..." बुआ सच्ची ये साली (सारी) माली है " ....  miku हड़बड़ी में  अंश की गोद से उतरते हुए बोला ... 

           अंश जो अवि और आहना का छोटा भाई है .. जल्दी से बोला...  "ओ.. अनु.. तुम सारी चॉकलेट miku के लिए नहीं ला सकती कुछ मुझे भी चाहिए ... " हां तेरे लिए भी है मेरे झापड़ बता कितने चाहिए तुझे ..." आहना ने उसे देख कहा...  तो इस पर  अंश चिढ़ते हुए बोला.....  "छिपकली तू कभी मुझसे तमीज से बात नहीं कर सकती .. ।"  आहना गुस्से से घूरते हुए ... " तुझे कहां से में छिपकली दिखती हूं  ?
    तू खुद तो बंदर जैसा है मुझे छिपकली बोल रहा ... " 
  
  अंश कोई जवाब दे पता उससे पहले ही कविता जी की गुस्से भरी आवाज गूंजी ... "तुम दोनों  को कुछ शर्म हया रही है के नहीं एक छोटा सा बच्चा तुम्हारे मुंह से ये सब सुनकर क्या सीखेगा कुछ पता भी है क्या असर पड़ेगा उस पर .." कविता 
जी ने कहा .. तो उन दोनों को भी रियलाइज हुआ .. कैसे वो दोनों कुत्ते बिल्ली की लड़ाई उस मासूम से बच्चे के सामने लड़ रहे थे ।  दोनों जल्दी से उस तरफ देखते है जहां miku एक सिंगल शीटर सोफे पर बैठे चॉकलेट खाने में बिजी था ।उसके दोनों हाथ और मुंह चॉकलेट से सना हुआ था ।वो बिल्कुल किसी भुक्कड़ बच्चे जैसा दिख रहा था।
     
     "अरे... ऐसे  नहीं खाते बेटा ..." जश्न  जी जो miku के हाथ से चॉकलेट उसे अच्छे से रैपर लगा कर देते है और साथ ही उसका क्यूट सा चेहरा ओर छोटे हाथों का आपने रुमाल से साफ करते है ।      "इच्हे ऐछे खाते है दादू  ... " Miku ने अपनी प्यारी प्यारी आवाज में कहा .... उसकी वो मासूम आंखे देखकर जश्न जी उसके सिर पर प्यार से हाथ रखते है और हां में सिर हिला देते हैं।
       
          अंश जल्दी से अपने कॉलेज के लिए निकलता है साथ ही आहना से बोलता है ..." O my god अनु जल्दी कर  में कॉलेज के लिए लेट हो रहा हूं ..." आहना अपने कंधे पर अपना पर्स टांगते हुए बोलती है ... "चल " दोनों जल्दी से सभी को बाय बोलते है ओर निकल जाते है ।  कविता जी एक सोफे बैठी प्यार से miku और जश्न जी को देख रही थी कितना प्यार था उन दादा पोते के बीच ...  सब कुछ था उनके पास बस सिवाय इसके जब भी मीकू पूछता की उसकी मम्मा कहां है लाकर दो बस सब बेबस हो जाते क्या बताते उस छोटे से बच्चे को । अभी miku इन सब से बेखबर अपने खाने में व्यस्त था वो  तो भूल ही चुका था अब उसकी मां कहां है बच्चा ही तो था अभी .... 

       इधर दूसरी तरफ एक लड़की  टैक्सी में बैठी हुई  अपने ही ख्यालों में गुम..  उसका चेहरा  टैक्सी की खिड़की से टिका हुआ है कुछ बाल हवा में लहरा रहे  थे।

जो उसे उसकी मासुमियत के साथ और भी ज्यादा खूबसूरत बना रहे थे । उसकी पलकें कुछ भीगी हुई थी उन आंखों में कुछ  था जो शायद थोड़ा गहरा था... "मैडम हम पहुंच गए अवस्थी हाउस" ....  इस आवाज से वो होश में आई और चौंकते हुए बोली...  "ओ...   अच्छा ... मेरी आंख लग गई थी ..." उसने टैक्सी  ड्राइवर से कहा ...  जल्दी से दरवाजा खोल बाहर आई  तेजी ड्राइवर को पैसे दिए और पीछे मुड़ी उसकी आंखों के सामने एक घर था जो ज्यादा बड़ा नहीं था तो ज्यादा छोटा भी नहीं था । लेकिन देखने में सुंदर था .. ये था अवस्थी हाउस विशी का घर  ...
        मान्या एक गहरी सांस लेकर आगे बढ़ती है डोर बेल बजाती है ... घर के अंदर एक औरत ओर एक लड़की सोफे पपर बैठी हुई आपस में कुछ बात कर रही थी डोर बेल बजने की आवाज सुन वो लड़की  जल्दी से सोफे से उठती है ..  "में देखती हूं मम्मी " इतना कहकर  दरवाजे की तरफ जाती है । जैसे ही दरवाजा खोलती है सामने मान्या खड़ी थी ।मान्या को देख वो जल्दी से बोलती है ... 
     
     अरे... मनु तुम कैसी हो ? जल्दी से गले लगा खुशी से बोलती है ... "मैं ठीक हूं ...  भाभी आप बताये आप कैसे हो ?" मान्या ने भी मुस्कुराकर उन्हें गले लगाते हुए कहा ..

"हम्म में भी ठीक हूं.. चलो.. अंदर चलते है पहले .. " रिया ने मुस्कराते हुए कहा .. दोनों अंदर आती है । मान्या रेनू जी को देख जल्दी से उनके पास जाती है उनके गले लगते हुए पूछती है ... "कैसी हो ? aanti जी  मैंने आपको बहुत मिस किया " । "हां .. हां .. वो तो दिख रहा है कितना मिस किया... जो इतने दिनों से घर भी नहीं आई ।" रेनू जी ने मुंह बनाकर कहा... 
      
      तो इस पर मान्या हल्का सा मुस्कुराई । उसे अपने घर की याद आ गई... कैसे उसकी सौतेली मां उस पर जुल्म करती थी मगर उसके पापा एक शब्द भी नहीं बोलते थे। और रेनू उसकी दोस्त की मां उस पर अपना प्यार लुटा रही है। कितना दर्द भरा और अजीब था यह उसके लिए...
   
    अपने सारे मन में चल रहे विचारों को साइड रखते हुए मान्या सोफे पर बैठ जाती है... रिया जल्दी से पीने के लिए पानी लाती है... थोड़ी देर में लंच करने के बाद तीनों आपस में बैठकर बातें करने लगते हैं। मान्या की बॉन्डिंग रिया  और रेनू  जी के साथ बहुत अच्छी थी। मान्या बिल्कुल उन्हें अपनी मम्मी की तरह मानती थी। 
        
    इधर दूसरी तरफ... रनवे पर एक प्राइवेट जैट landing करता है । उसमें से एक बेहद ही रॉयल पर्सनैलिटी का शख्स बाहर आता है। उसकी आंखों पर  ब्लैक सनग्लासेस लगे हुए थे।

नीली crisp shirt, ब्लैक blazer,black pent , चमचमाते काले शूज तो इतने चमक रहे थे कि कोई इंसान अपनी सकल ही देख ले ।  स्टाफ उसके पीछे-पीछे सामान लेकर चल रहा था।  

     कौन था?  ये शख्स । कहां से आया ? अब क्या होने वाला है आगे ?  और  कैसे रिएक्शन होंगे , जब विशी मान्या को Apne घर देखेगी ? आगे जानने के लिए पढ़िए । 


ओर plz दोस्तों बताओ कि आपको मेरी स्टोरी कैसी लग रही है ? कृपया रेटिंग भी दो ओर हां बताओ कि आपको मेरे प्यारे मिकी का कैरेक्टर कैसा लगा ? Plz बताओ कुछ तो बताओ ।
      
बस एक छोटी से रिक्वेस्ट है कि फॉलो और रेटिंग भी जरूर दें.. आई नो चैप्टर लेट आते है बट इसमें मेरी कोई गलती नहीं है बीकॉज ये लोग मतलब मातृभारती वाले एक चैप्टर को अपलोड करने में 4 से 5 दिन लगा ही देते है।