उस रात आर्या बहुत देर तक सो नहीं पाई।
बार-बार उसकी आंखों के सामने वही चेहरा आ रहा था…
गहरी आंखें… चेहरे पर ठहराव… और उस ठहराव के पीछे छुपा हुआ दर्द।
उसने करवट बदली और खुद को समझाने लगी।
“तुम पागल हो क्या आर्या…? वो इतने बड़े आदमी हैं… और तुम बस एक साधारण लड़की।”
लेकिन दिल कहां मानने वाला था।
सुबह…
विक्रांत अपनी कंपनी के कॉन्फ्रेंस रूम में बैठा था।
सामने बड़े-बड़े क्लाइंट्स थे… करोड़ों की डील पर चर्चा चल रही थी।
“सर, अगर हम इस प्रोजेक्ट में 15% और इन्वेस्ट करें तो—”
“नहीं।”
सब चुप हो गए।
विक्रांत की नजरें फाइल पर थीं… लेकिन दिमाग कहीं और।
करण धीरे से उसके पास आया।
“तू यहां बैठा जरूर है… लेकिन दिमाग कहीं और घूम रहा है।”
विक्रांत ने गहरी सांस ली।
“मैं खुद को समझा रहा हूं करण… मगर पता नहीं क्यों उसका चेहरा दिमाग से जा ही नहीं रहा।”
करण मुस्कुराया।
“तो मिल ले उससे।”
“और क्या कहूं जाकर? कि 30साल का आदमी पहली नजर में तुमसे प्यार कर बैठा?”
करण शांत हो गया।
विक्रांत कुर्सी से उठकर शीशे के सामने जा खड़ा हुआ।
“मैं उसकी जिंदगी खराब नहीं कर सकता।”
उधर कॉलेज में…
आर्या अपनी दोस्त नेहा के साथ कैंटीन में बैठी थी।
“तुझे पता है?” नेहा उत्साहित होकर बोली, “विक्रांत सिंह हमारी यूनिवर्सिटी के टॉपर स्टूडेंट्स को अपनी कंपनी में इंटर्नशिप देने वाले हैं।”
“अच्छा?”
“और तेरा नाम सबसे ऊपर है।”
आर्या चौंकी।
“मेरा?”
“हां मैडम… अब तू बड़ी कंपनी में काम करेगी।”
आर्या हल्का मुस्कुराई… मगर ना जाने क्यों उसके दिल की धड़कन बढ़ गई।
दो दिन बाद…
आर्या पहली बार विक्रांत सिंह की कंपनी पहुंची।
इतनी बड़ी बिल्डिंग उसने पहले कभी नहीं देखी थी।
चारों तरफ लोग भागते हुए… बड़े-बड़े ऑफिस… शीशे की चमक…
वह थोड़ी घबरा गई।
“मैम, इस तरफ।”
रिसेप्शनिस्ट उसे लेकर ऊपर गई।
उसी वक्त…
अपने केबिन में बैठा विक्रांत सीसीटीवी स्क्रीन पर उसे देख रहा था।
सफेद कुर्ती में साधारण सी आर्या…
जिसके चेहरे पर आज भी वही मासूमियत थी।
विक्रांत खुद को रोक नहीं पाया।
वह तुरंत नीचे चला गया।
आर्या लिफ्ट के सामने खड़ी थी जब अचानक उसकी नजर सामने खड़े विक्रांत पर पड़ी।
वह एक पल के लिए रुक गई।
ब्लैक सूट… गंभीर चेहरा… और वही गहरी आंखें।
“वेलकम मिस आर्या।”
उसकी भारी आवाज सुनकर आर्या थोड़ा नर्वस हो गई।
“थ… थैंक यू सर।”
विक्रांत कुछ पल बस उसे देखता रहा।
फिर खुद को संभालते हुए बोला—
“अगर यहां किसी चीज की जरूरत हो तो सीधे मुझे बताइएगा।”
आर्या हैरानी से उसे देखने लगी।
इतनी बड़ी कंपनी का मालिक… उससे इतनी नरमी से बात कर रहा था।
“जी सर।”
दिन बीतने लगे।
आर्या अब कंपनी में रोज आने लगी थी।
और विक्रांत…
वह हर दिन खुद को उसके और करीब जाता महसूस कर रहा था।
उसे आर्या की छोटी-छोटी बातें अच्छी लगने लगी थीं।
कैसे वह सबकी मदद करती थी…
कैसे चाय वाले अंकल को भी सम्मान से “अंकल” कहती थी…
कैसे हर काम ईमानदारी से करती थी।
एक दिन…
आर्या ऑफिस में देर तक काम कर रही थी।
बारिश बहुत तेज हो रही थी।
पूरे ऑफिस में अब सिर्फ वही थी।
तभी अचानक लाइट चली गई।
“ओह!”
आर्या घबरा गई।
उसी वक्त पीछे से आवाज आई—
“डर गई?”
आर्या पलटी।
विक्रांत उसके पीछे खड़ा था।
मोबाइल की हल्की रोशनी में उसका चेहरा और भी गंभीर लग रहा था।
“सर… आप अभी तक गए नहीं?”
“तुम्हें अकेले कैसे छोड़ देता?”
उसकी बात सुनकर आर्या कुछ पल शांत रह गई।
बारिश की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी।
दोनों के बीच अजीब सी खामोशी थी।
फिर अचानक तेज बिजली चमकी।
डरकर आर्या का हाथ विक्रांत के हाथ से टकरा गया।
दोनों एक पल के लिए ठिठक गए।
विक्रांत की धड़कन जैसे रुक गई।
इतने सालों बाद… किसी के स्पर्श ने उसे अंदर तक हिला दिया था।
आर्या ने तुरंत हाथ पीछे कर लिया।
“सॉरी सर…”
“इट्स ओके।”
लेकिन उसकी आवाज पहले जैसी स्थिर नहीं थी।
उस रात…
विक्रांत पहली बार अपने दिल से हार गया।
वह जान चुका था…
ये सिर्फ आकर्षण नहीं था।
उसे सच में आर्या से प्यार हो गया था।
लेकिन उसी पल…
उसके दिमाग में एक डर भी आया।
“अगर उसे मेरी उम्र से फर्क पड़ा तो…?”
“अगर उसे लगा मैं उसके लायक नहीं…?”
पहली पत्नी के शब्द आज भी उसके कानों में गूंजते थे।
“तुम मेरे लायक नहीं हो विक्रांत।”
उसने आंखें बंद कर लीं।
वह दोबारा टूटना नहीं चाहता था।
अगले दिन…
आर्या ऑफिस पहुंची तो देखा सब लोग बहुत तनाव में थे।
“क्या हुआ?”
नेहा ने कहा—
“सर बहुत गुस्से में हैं। किसी ने कंपनी का बड़ा डेटा लीक कर दिया।”
उसी वक्त कॉन्फ्रेंस रूम का दरवाजा खुला।
विक्रांत बाहर आया।
उसका चेहरा गुस्से से लाल था।
सब लोग डर गए।
लेकिन तभी उसकी नजर आर्या पर पड़ी।
और जैसे अचानक उसका गुस्सा शांत हो गया।
“मिस आर्या… मेरे केबिन में आइए।”
सब हैरानी से उसे देखने लगे।
आर्या धीरे-धीरे अंदर गई।
“जी सर?”
विक्रांत कुछ पल चुप रहा।
फिर धीमे से बोला—
“तुम ठीक हो ना?”
आर्या हैरान रह गई।
“जी… लेकिन आप इतना परेशान क्यों हैं?”
विक्रांत हल्का सा मुस्कुराया।
“क्योंकि कुछ चीजें मेरे लिए बहुत जरूरी हैं…”
उसकी नजरें सीधे आर्या पर थीं।
और पहली बार…
आर्या का दिल तेजी से धड़क उठा।
धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ने लगी।
अब विक्रांत उसके साथ सहज महसूस करने लगा था।
वह उसके सामने मुस्कुराने लगा था…
जो उसने सालों से बंद कर दिया था।
पूरे ऑफिस में लोग नोटिस करने लगे थे कि विक्रांत सिंह अब पहले जैसे नहीं रहे।
वह कम गुस्सा करते थे।
कभी-कभी हंस भी देते थे।
और इसकी वजह सिर्फ एक थी—
आर्या।
एक शाम…
आर्या ऑफिस की छत पर खड़ी बारिश देख रही थी।
तभी पीछे से विक्रांत आया।
“बारिश पसंद है?”
आर्या मुस्कुराई।
“बहुत।”
“मुझे नहीं थी।”
“क्यों?”
विक्रांत कुछ पल शांत रहा।
“क्योंकि बारिश हमेशा मुझे मेरी जिंदगी के सबसे बुरे दिन याद दिलाती थी।”
आर्या उसकी तरफ मुड़ी।
पहली बार उसे विक्रांत की आंखों में दर्द साफ दिखाई दिया।
“आप बहुत अकेले हैं ना?”
उस सवाल पर विक्रांत चौंक गया।
इतने सालों में किसी ने उससे ये नहीं पूछा था।
वह हल्का सा हंसा।
“इतना साफ दिखता है?”
“हम्म…”
कुछ पल दोनों चुप रहे।
फिर आर्या धीरे से बोली—
“हर इंसान दूसरी बार खुश होने का हक रखता है।”
विक्रांत की नजरें उस पर टिक गईं।
उस पल…
उसे लगा जैसे किसी ने उसके टूटे हुए दिल पर मरहम रख दिया हो।
लेकिन उनकी कहानी इतनी आसान नहीं थी।
क्योंकि दुनिया…
दुनिया सिर्फ प्यार नहीं देखती।
वह उम्र देखती है… हैसियत देखती है… रिश्तों पर सवाल उठाती है।
और यही तूफान अब उनकी जिंदगी में आने वाला था।
एक दिन…
आर्या अपने घर पहुंची तो देखा उसके पापा बहुत खुश थे।
“आर्या बेटा! तुम्हारे लिए रिश्ता आया है।”
आर्या चौंक गई।
“रिश्ता?”
“लड़का सरकारी अफसर है।”
आर्या के चेहरे की मुस्कान धीरे-धीरे गायब हो गई।
ना जाने क्यों…
उसके दिल में अचानक बेचैनी होने लगी।
उधर…
उसी समय विक्रांत अपने केबिन में बैठा आर्या की फोटो देख रहा था।
और पहली बार…
उसे डर लग रहा था।
कहीं वह आर्या को खो ना दे।