Oyy Mr. Vampire - 2 in Hindi Fiction Stories by kusum kumari books and stories PDF | Oyy Mr. Vampire - 2

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Oyy Mr. Vampire - 2

स्नोसिटी बिलकुल अपने नाम की तरह ही था। यहाँ अक्सर बर्फबारी होती रहती थी। ये शहर दिखने में जितना खूबसूरत था, उतना ही रहस्यमय भी। इस शहर के अंदर कई राज़ दफ़न थे।

आज भी तेज़ बर्फबारी हो रही थी। रात का वक़्त था और एक लड़की अँधेरी गलियों में लड़खड़ाते हुए आगे बढ़ रही थी। उसके सिर पर चोट का निशान था, जिससे ख़ून रिस रहा था। लड़की ने अपना जैकेट का हुडी सिर पर डाल लिया क्योंकि बर्फबारी बहुत तेज़ हो गई थी। उसने एक बार इधर-उधर देखा और फिर आगे बढ़ते हुए एक अँधेरे से कोठारी के अंदर चली गई।

अंदर एक छोटी सी पीली बल्ब लटक रही थी, जिससे वहाँ हल्की सी रोशनी हो रही थी। कोठारी काफी बड़ी और विशाल थी, और खूबसूरत भी। उसकी दीवारों पर बने डिज़ाइन कमाल के थे, लेकिन इस वक्त मकड़ी के जालों से भरी हुई थी। लड़की को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा। वो आगे बढ़ते हुए जाकर एक कपड़े से ढके सोफ़े के पास खड़ी हो गई।

कुछ देर तक उस सोफ़े को घूरने के बाद उसने खींच कर उस कपड़े को हटा दिया। कपड़े के नीचे एक बड़ा सा, नया सा दिखने वाला सोफ़ा था। उसमें एक कुशन और ब्लैंकेट रखा हुआ था। लड़की के होंठों पर मुस्कान आ गई और वो धड़ाम से सोफ़े पर गिर गई, अपनी आँखों के ऊपर अपनी बाजू रख ली।

तभी उस सुनसान और अँधेरे कोठारी में फ़ोन रिंग की आवाज़ गूँज गई। लड़की ने सिर हिला दिया और उठकर बैठ गई। उसने अपना फ़ोन निकाला और देखा कि कॉलर आईडी पर " " janeman " लिखा हुआ है और स्क्रीन पर एक खूबसूरत लड़की की फ़ोटो चमक रही है।

लड़की ने एक गहरी साँस भरी और कॉल पिक कर लिया। कॉल पिक होते ही स्क्रीन पर एक सुंदर लड़की दिखाई दी। शिवाया ने घूर कर लड़की को देखा  ! 

"ध्रुविका, तू फिर से अपनी उस कालकोठरी में गई है क्या ?"

"  ध्रुविका ने कुछ नहीं कहा".. और बस शिवाया को देखती रही।

शिवाया ने सिर हिला दिया ! 
"ओके, ओके, ठीक है बाबा। पर सब तेरी फ़िक्र कर रहे थे। दादी माँ सबसे ज़्यादा।"
परेशान हो रही थी ! ध्रुविका ने एक गहरी साँस छोड़ी और सोफ़े पर पसर गई। शिवाया ने उसको घूर कर देखा।

"अरे, बोल भी लिया कर! हमेशा चुप ही क्यों रहती हो बे! " " " ध्रुविका ?" 

ध्रुविका ने एक-एक गहरी साँस ली।

"तुम्हें पता है कि क्या करना है। गुड नाइट।" और call कट कर दीया । उसने आँखें बंद कर लीं।

उसकी आँखों के सामने कुछ देर का पेहले नज़ारा घूम गया। स्नोसिटी। जाने-माने बिज़नेसमैन में से एक mr .चौधरी !  उनके यहाँ एक पार्टी थी ! और अंदर माहौल जमा था।

इसी बीच ध्रुविका सीढ़ियों से चलते हुए नीचे आई। 

शिवाया ने उसके कपड़े देखकर कहा " ये क्या पहना है यार? ऐसे कपड़े पार्टी में कौन पहनता है ? शिवाया ने मुँह बना लिया ! 

ध्रुविका ने गहरी साँस ली।

शिवाया ने चीडते हुए कहा " "मैं ना कोई ट्रांसलेटर हूँ ! और न तुम कोई गूँगी समझी । इसलिए शब्द का उपयोग कर लिया करो।" 

ध्रुविका मुश्कुराई और शिवाया की ओर देखते हुए कहा" ,"स्माइल कर, सब हमें ही देख रहे हैं।" 

फिर उसने खुद को देखा। उसने काले बॉडीकॉन ड्रेस के साथ बूट्स और ब्राउन लॉन्ग जैकेट पहनी थी। उसके बटरफ्लाई कट के बाल उसके माथे पर बिखरे हुए थे।

ध्रुविका  ने कहा " "इसमें क्या प्रॉब्लम है? अच्छी तो लग रही हो।"

फिर उसने सबको देखा। किसी ने भी जैकेट नहीं पहनी थी। सारी लड़कियों ने स्टाइलिश कपड़े पहने थे।

उसने शिवाया को देखा, जिसने रेड बंद गले वाली ड्रेस पहनी थी। उसे देखकर ध्रुविका को कपकपी छूट गई।

उसने हाथ मसलते हुए कहा " "तुम पहन सकती हो? इतनी ठंड में पतली-सी, रस्सी वाले कपड़े में नहीं पहन सकती। ठंड से मर जाऊँगी मैं " ! 

शिवाया ने उसको घूर कर देखा और फिर अपने बालो को  पीछे की और style मैं झटकते हूवे कहा " ये तो लड़कियों की ख़ूबि हैं !  कि वो कपकपाती ठंड में बैकलैस ड्रेस पहन कर घूम सकती हैं।

"  अब मुझे ही देख लो। शायद भगवान ने मुझे ये ख़ूबियाँ नहीं दी !  इसलिए मैं ऐसे नहीं घूम सकती।"

और वो आगे तेज़ी से सीढ़ियाँ उतर गई।



शिवाया ने मुँह बना लिया ह्म्म्म किया होगा इस लड़की… 

इसीलिए तो इसका मैगेत्र कभी इसमें इंटरेस्ट नहीं दिखाता, बेचारा दिखाएगा भी कैसे…

शिवाया… किसी ने उसे बुलाया।

"हाँ, आई…" शिवाया ने कहा और तेजी से सीढ़ियाँ उतर गई।

ध्रुविका जैसे ही नीचे आई उसके पास एक लड़का आकर खड़ा हो गया।

लड़का दिखने में ठीक-ठाक था।

"ध्रुवि…" लड़के ने धीरे से कहा अबे यार ये क्या पहना है, कम से कम आज तो ढंग के कपड़े पहन लेती… 

क्यों, आज तुम्हारी मय्यत है क्या?"ध्रुविका ने सपाट लहजे में कहा "......
"नहीं, पर तुम्हारे पापा के लिए बहुत बड़ा दिन है ! उन्हें इतना बड़ा अवॉर्ड मिला है।" लड़के ने चिढ़ते हुए कहा….." ! 


"Mr. अंगद भाटिया…"

"पहली बात !  अवॉर्ड उनको मिला है मुझे नहीं !  और अगर मिलता तो भी कपड़ों से अवॉर्ड की चमक कम नहीं होती… ! ओके! और दूसरी बात !  अगर तुम्हें मुझसे इतनी ही चिढ़ मचती है तो तुम मना क्यों नहीं कर देते इस रिश्ते के लिए हाँ ?"


अंगद मुस्कुरा दिया "तुम जानती हो बेबी डॉल !  जैसे तुम्हारे पास ऑप्शन नहीं है !  वैसे ही मेरे पास भी ऑप्शन नहीं… ! मुझे इस रिश्ते को निभाना ही पड़ेगा ! और तुम्हें भी। तो सपने देखना छोड़ दो ।"

ध्रुविका ने अपनी आँखें बंद कर लीं ! 
"वोओओओ… तुम सच में बहुत दब्बू हो… बे ! साला ज़िंदगी भर तुम्हें झेलूँगी कैसे…!  सच कह रही हूँ बेटा !  अगर तुझे शादी के दूसरे दिन कॉफी में ज़हर डालकर मार न दिया ना तो कहना… ! 

वो कॉफी नहीं चाय होती है।" शिवाया वहाँ आते हुए बोली " 

"क्या? चाय होती?"
दोनों ने उसकी ओर देखा ! 

तो शिवाया ने कंधे उचकाते हुए कहा "एक्चुअली !  तुम् नेने   अभी जो डायलॉग मारा ना… वो चाय के लिए फेमस है। 'चाय में ज़हर देकर मार दूँगी….! 

हाँ, पर ये चाय नहीं पीता ना, कॉफी पीता है।"ध्रुविका ने आराम से कहा " …! 


"तुम दोनों बस करोगे?"अंगद ने चिढ़ते हुए कहा " …! 

और तभी वहाँ एक लेडी आ गई। उसने एक साड़ी पहनी थी ! जिसमें वो खूबसूरत लग रही थी। उसने तीनों को देखकर एक मुस्कुराहट दी ! बदले में तीनों भी मुस्कुरा दिए।

अंगद ने धीरे से कहा "Mom…"

आरती भाटिया ने मुस्कुराते हुए अंगद को देखा ! 
"तुम दोनों मेरे साथ चलो ! किसी से मिलवाना है।"

ये सुनते ही ध्रुविका ने घूर कर अंगद को देखा।
अंगद ने पलकें झपका दीं ! तो ध्रुविका की मुट्ठियाँ भींच गईं।
शिवाया ने ध्रुविका को देखा और अपने होंठ भींच लिए !  उसको सच में बहुत हँसी आ रही थी।

कुछ देर बाद अंगद और ध्रुविका मुस्कुराते हुए सबसे मिल रहे थे।
तभी ध्रुविका के पास आकर एक लड़का खड़ा हो गया।
ध्रुविका ने लड़के को देखा और फिर अपने होंठ भींच लिए और आँखें सिकोड़ लीं।

लड़का मुस्कुरा दिया और आरती भाटिया को देखते हुए कहा "एक्चुअली मैं, आंटी… ध्रुविका को दादी बुला रही है तो क्या…"

"अरे बिल्कुल जाओ बेटा।" आरती मुस्कुरा दी।

ध्रुविका झटके से लड़के की ओर मुड़ी "Thanks भाई…" उसने मुँह में ही कहा और अपनी सबसे प्यारी स्माइल दी।

अंगद ने ये देखा और अपनी माँ की ओर मुड़ा ! "Mom, मैं भी ध्रुवि के साथ जाता हूँ ओके।"और वो भी ध्रुविका के साथ खिसक लिया।

"Hello Mr. कार्तिक चौधरी…" पीछे से एक आवाज़ आई तो लड़का मुस्कुराते हुए पीछे मुड़ गया। हैलो… 

ध्रुविका सीधे कोने में जाकर एक कुर्सी पर बैठ गई और एक गहरी साँस ली।
और तभी उसके कान में कुछ औरतों की फुसफुसाहट सुनाई दी ! 

"भाई, मानना पड़ेगा, भाटियास को पैसे के लिए कुछ भी कर सकता है !  अब देखो एक नाजायज लड़की को घर की बहू बना रहे हैं….।"

तभी किसी और ने भी कहा "अरे कोई कुछ भी कहे !  पर सच तो यही है न कि वो लड़की Mr. चौधरी की रखैल की बेटी है…..! 

ध्रुविका की मुट्ठियाँ भींच गईं ! उसके हाथ-पैर बुरी तरह से काँपने लगे थे ! और साँस गहरी हो गई थी। उसे और भी बहुत सारी आवाज़ें सुनाई दे रही थीं। उसे ऐसा लगा जैसे वो बीच में खड़ी हो ! और उसके आस-पास बहुत सारे लोग खड़े हों और सब उसको 'नाजायज' बोल रहे हों।

ध्रुविका ने अपने कानों पर हाथ रख लिए और तभी उसे एक आवाज़ सुनाई दी ! "ध्रुवि… ध्रुवि…"

ध्रुविका ने झटके से अपनी आँखें खोल दीं। उसने मुड़कर देखा तो उसके पीछे शिवाया खड़ी थी। शिवाया ने जैसे ही ध्रुविका की लाल आँखें और पसीने से तर चेहरा देखा शिवाया ने चिंता भरी आवाज़ में कहा " तू ठीक है ना? क्या हुआ?"

ध्रुविका ने गहरी साँस छोड़ी। 3–4 बार लंबी साँस लेने के बाद वो उठ खड़ी हुई ! "मैं जा रही हूँ… तू यहाँ सबकुछ संभाल लियो ओके।" और वो तेजी से वहाँ से निकल गई।

"अरे, पर कहाँ जा रही है ध्रुवि ध्रुवि ….?" शिवाया ने पीछे से कहा " ..! 
पर ध्रुविका ने कुछ नहीं कहा और तेजी से घर के मेन गेट से बाहर निकल गई।

थोड़ी ही देर में वो Snow City की सड़कों पर हाथ में बीयर का बोतल लिए, कानों में हेडफ़ोन लगाए ! बेपरवाही से 
चलती जा रही थी।

बाहर हल्की बर्फ़बारी हो रही थी। लोग छाता लिए साइड में चल रहे थे। सड़कों पर गाड़ियाँ तेजी से भाग रही थीं।
सड़कों पर लगे ट्यूबलाइट से हर तरफ़ रोशनी हो रही थी।

तभी एक लड़का… ध्रुविका के सामने आकर खड़ा हो गया ! "ओए, कहाँ जा रही है? हम छोड़ दें क्या ?"

ध्रुविका ने लड़के की ओर देखा और फिर अपनी गड़ी में टाइम देखा !  रात के 11 बजे रहे थे। उसने इधर-उधर देखा तो एक-दो दुकानें ही दिखाई दे रही थीं। वो अब थोड़े सुनसान इलाके में आ गई थी। उसने देखा लड़के के पीछे और भी 2-4 लड़के खड़े थे।

"धत तेरी की ! साला बेकार! अब  ये लोग अपनी हडिया तोड़वाएंगे!" अपनी इस सोच से कि रात होते ही सड़क इनकी बाप की हो जाती है ! और इसमें जाती लड़कियाँ इनकी जागीर।

ध्रुविका ने आराम से कहा  "जहाँ मैं जा रही हूँ वहाँ तुम लोग मेरे साथ आ नहीं पाओगे ! इसलिए मेरे रास्ता छोड़ो " चचुनदरो " ..! 

लड़के ने घूरकर ध्रुविका देखा और फिर हँस पड़ा  "ऐसे भी कहाँ जा रही है? एक बार बोल कर तो देख।"

ध्रुविका मुस्कुरा दी "अपने महबूब के आशियाने में जा रही हूँ !  छोड़ दोगे क्या?"

"हाँ, बिल्कुल छोड़ देंगे darling!  पर उससे पहले हमें भी तो कुछ देती जा।" लड़के ने मुस्कुराते हुए कहा " ...।

"बिलकुल, मैं इसी का तो इंतज़ार कर रही थी !  कि कब तुम लोग कुछ मांगो और मैं दूँ। किया है न कि बिना माँगे मैं किसी को कुछ नहीं देती ।" ध्रुविका भी मुस्कुरा दी ! 

"  तो लड़का उसके पास आ गया ! क्या बात है darling और उसने अपनी 2 उँगली ध्रुविका के गालों पर घुमा दी।

और थोड़ी ही देर में वहाँ बस दबे-गुचे चीखें सुनाई दे रही थीं।

दूर की छत पर खड़ा एक आदमी इस चीज़ को अपनी लाल आँखों से देख रहा था। उसकी आँखों में एक ही अलग-सी चमक थी। उसने अपने होठों पर जीब फिराई ! दिए और अपनी गर्दन तेड़ी कर ली.. ।