वर्ष 4999 की बाद है, जब मानवता ने अपनी मानवता खो चुका था और मॉडर्न टेक्नोलॉजी की ताकत की नशे में चूर इंसानों ने खुद को भगवान से कमतर नही आक रहे थे और तभी इंसानों की हाथ लगा एक रहस्यमय ताक़त जिसको पा कर इंसानों ने खुद को भगवान ही समझने लगे। और उस ताक़त को हासिल करने के लिए इंसानों ने पूरी जाति को दांव पर लगा दिया।
यह कहानी जब कलयुग चरम सीमा पर थी और इंसानों ने पूरे पृथ्वी पर हाहाकार हाहाकार मचा हुआ था और इंसान एक पर ही एटॉमिक बम से एक दूसरे पर ही हमला कर रहा था। उसी पल कुछ प्राइवेट आर्गेनाईजेशन को अंटार्टिका में कुछ रहस्यमय शाक्तियाँ के बारे पता चला और उस शाक्तियाँ को हासिल करने के लिए पूरी दुनियां प्राइवेट ऑर्गनाइजेशन अंटार्टिका में क़दम रखे और उस शाक्तियाँ को हासिल करने के लिए एक दूसरे के ग्रुप पर हमला करने लगा। इसी बीच किसी एक गुट के लोगो ने उस रहस्यमय ताक़त को अपने मुट्ठी में कर लिया और चिल्लाते हुए बोला "तुम लड़ना बंद करो और मुझे अपना स्वामी मान लो??"
अचानक से ताक़त किसी एक के हाथ लगने से सारे गुट शांत हो गए और एक दूसरे को देखने लगे। जिसके पास वो रहस्यमय ताक़त था, जो एक छोटा सा संदूक में कैद था। वो इंसान समझ नही पाया उन सभी का चाल। और कुछ कर पाता उससे पहले सभी गुटों के लोग उसके पर हमला कर दिया और इसी अनबन में वो संदूक हाथ से छूटकर नीचे गिर गया और संदूक का दक्कन खुलते ही संदूक की अंदर दिव्य रोशिनी निकला और पूरा ब्राह्मण में फैल गया। और काली रात की शांति पूरी दुनियां में फैल गया।
प्रेजेंट डे... उस घटना के 100 बाद..
घंघरों अंधेरा! ऊपर से सरसारी हवाएं बह रही... बादलों जोर जोर से गर्जना रहा था और उसी साथ बारिश भी अपने चरम सीमा होकर और भी तेजी वर्षा कर रही थी। इस गीली जमीन पर सड़क में एक महिला घायलवस्था में अपने गोद मे ली हुई दो तीन महीने का छोटा सा बच्चा को लिए तेजी से भाग रही थी। और भागते भागते वो औरत पीछे मुड़ कर देखी भी जा रही थी। पूरे शरीर से खून निकल रही थी और पीटकर पर दो तीर लगे होने के बाजूद भी अपने बच्चे अपने दूर नही कर रही थी।
उस औरत को पीछा करने वाले वे लोग सफ़ेद रंग का पोषक को धारण कियस हुआ था। वो भागती हुई महिला किसी भी सूरत में कमजोर नही थी और लेकिन अगर पलटकर अपने उन हमलावर की सामना करती तो इसमें उसका की जान ख़तरे में आ जाता। जिस कारण अपने बच्चे की खोने देने उस औरत की आँखों मे आशु आ चुकी थी और सिर्फ एक ही नाम ली ही जा रही थी। श्रावण!! श्रावण तुम कहाँ हो श्रावण??
और तभी एक पत्थर पर पैर लगने से वो औरत नीचे गिरने लगी और लेकिन अपने बच्चें को बचाना के चक्कर खुद का सिर जमीन पर पहले लगने दी, पर अपने बच्चे को कुछ नही होने दी। किसी तरह उठी और आगे चलने को हुई तो वो लड़खाने लगी। खुद की ऐसी हालत देख फुट फुटकर अंदर से रोने लगी और खुद से बोली "इन ताकतों का क्या फायदा, अगर मैं अपने बच्चें को ही बचा ना सकूँ।" खुद से बाते करते हुई औरभी हताशा हो गयी और तभी सामने से अधेड़ उर्म का योद्धा को आते हुई देखी। उस औरत की आंखों में ख़ुशि आ गयी और किसी तरह उस आदमी के पास जाती हुई पहने हूई सारी जेवर उसको सौंपती हुई और अपने बच्चे को एक लॉकेट पहनकर उसको भी देती हुई बोली "मैं कुछ देर में आकर, अपने बच्चे को तुमसे ले जाऊँगी।" और बिना उस आदमी की बातें सुनें दूसरी तरफ भाग जाती।
उस घटना को बीता हुआ आज 19 साल हो गया..
उस घटने के वो अधेड़ उर्म आदमी, उस औरत काफी इंतिज़ार किया था। पर वो लौट कर कभी नही आई, जिस कारण उसके कंधों में एक ज़िमेदारी आ गया और सभी की नज़रो से छिपाकर उस बालक को अपने साथ हिमालय ले आया और आज वो बच्चा19 का साल हो गया।
जो बच्चपन में ही अपना प्रदर्शन कर अपने मुँह बोले दादी जी को हैरान कर चुका था। लेकिन आज वही लड़का अपने दादाजी से शिकायत करते हुए बोला "दादाजी!! आपने मुझे झूठ बोला, आज मैं 19 साल का होगया हूँ और मुझे जादुई शाक्तियाँ अभी तक नही मिली। इसका मतलब आप मुझसे इतने सालों से झूठ ही बोलते आ रहे थे।" और गुस्सा दिखाते हुए आगे बोला "मैं यहाँ से जाना हूँ और एक दिन मैं आपको इस दुनिया का सबसे शक्तिशाली योद्धा बन कर दिखाऊंगा" और रोते हुए आगे बोला "क्या हुआ मेरे पास आपके जैसा जादुई शाक्तियाँ नही, आप ही तो हमेशा कहते हैं। इस दुनिया ऐसे भी योद्धा जिनके पास जादुई शाक्तियाँ नही भी दुनिया का श्रेठ योद्धाओं में उनकी गिनती होती।" बोलते हुए वो बालक बोला "मुझे आज्ञा दीजिए दादाजी और जाने लगा।"
यह नजारा देखकर उस बालक का दादाजी खुद से बोले "ऐसे रूठकर ना जाओ रुद्र!! अगर तूम ऐसे रूठकर जाओगे, तो ऐसा लगता भगवान रुद्र हिमाल्यास पर्वत से रूठकर जा रहे।" और अपनी आवाज़ में गंभीरता लाते हुए बोले "अपने इस बूढ़े दादा को ऐसे ना रुलाओ??" दादाजी की आंखों में आने लगे। यह रुद्र भी फ़ौरन भागता हुआ दादाजी से निपट गया और बोला "दादाजी!!! मैं मज़क कर रहा था, मैं भला आपको छोड़कर कहाँ जा सकता हूँ।"
तभी दादाजी रुद्र की गालों को पकड़ते हुए बोले "बेटा रुद्रा!! मैं तुमसे जो कहने जा रहा हूँ। वो जान लेने के बाद भी मैं दादा ही रहुँगा और तुम मेरे पोते ही रहोगे।"
दादाजी की ऐसी बहकी बहकी बातों से रुद्र का मन थोड़ा घबराने लगा था और धीमी आवाज़ में पूछा "दादाजी!! आप ऐसे आज क्यो बोल रहे हो?? मेरा मन आज से पहले इतना कभी डर नही, यहाँ तक कि जब मेरा सामना बड़े बड़े सफ़ेद भालुओं की झुंड से हुआ था। तभी मेरा मन आज से ज्यादा कभी नही डरा था। इसीलिए दादाजी आप मुझसे कुछ मत कहो...।" और थोड़ा रुकता हुआ आगे बोला "मैं आज से आपका हर बात मानूँगा, यहाँ तक मैं उन भालुओं से भी लड़ने नही जाऊँगा.. बस आप कुछ मत बोलो??" और कुछ नही कहने के लिए विनती करने लगा।
रुद्र की बातों से दादाजी भी थोड़ा भाउक हो गए थे और रुद्र को मनाते हुए बोले "बेटा रुद्रा!! मैं तुमसे औरनही छिपा सकता, इसीलिए तुम्हें जानना जरूरी है।" इतना कहना ही था कि रुद्र अपना दोनो कान बंद कर लिया और जोर जोर से चिल्लाने लगा। लेकिन दादाजी तो दादाजी ही थे, रुद्र का शरारत अच्छे से समझ रहे थे और जो वो बताना चाहते थे। वो अतियान्त आवश्यक इसीलिए अपने बात को आगे बढ़ाते हुए बोले "बेटा रुद्रा!!! मैं तुम्हारा असल मे दादा नही हूँ, और ना ही हमारा खून का रिश्ता है। और मैं पहले तुमसे इसीलिए नही बोला क्योंकि तुम उस नाबालिक थे, लेकिन आज तुम पूरे 19 साल के हो गए और ये जानना जरूरी तुम्हें जन्म देने वाली माँ जब तुमको मुझे सौंपी थी, खुद उस वक़्त तुम्हारी माँ अपनी मौत से लड़ रही थी।" इतना कहते हुए दादाजी शांत हो गए और रुद्र को एकटक देखने लगे।
जब रुद्र को खामोश देखे तो दादाजी रुद्र का सिर सहलाते हुए बोले "बेटा!! मैं उसी वक़्त भारत आया था और तुम्हारी माँ से युही रास्ते मे टकराया था, मुझपर यकीन करो??" और दादाजी एक लॉकेट को अपने हाथ मे लेकर रुद्र को देते हुए बोले "ये तुम्हारी माँ ने तुमको दिया था। और आगे ये सच के हमारा रिश्ता में कोई बदलाव नही होगा। मैं आज भी और कल भी तुम्हारा दादा ही रहुँगा, बस तुम अपने सयम से काम लेना।"
दादाजी को भावुक होता देख अपनी अशुओ को पोछता हुआ दादाजी से बोला "दादाजी!! बस इतनी सी बात, मुझे लगा आप कुछऔर कहने वाले थे।"
दादाजी हैरानी से पूछे "तुम्हें क्या लगा था?? जऱा मुझे भी बताओ।"
रुद्र झेंपते हुए बोला "मुझे लगा आप मुझे फिर से छोड़कर चले जायेंगे, आप जब भी अचानक से चले जाते थे, मैं आपको बहुत याद करता था। क्योंकि मुझे कई दिनों तक भुखा रहने पड़ता और मुझे गंदे कपड़े भी पहनना पड़ता था और ऊपर से वो जंगली भुलाओ भी मुझे खाने को दौड़ता था।" तभी दादाजी रुद्र का कान पकड़ते हुए बोले "तो तुम मुझे इसीलिए जल्दी आने को बोलते थे।"
आउच!! दादाजी मुझे दर्द हो रहा मेरे नाजुक कान को छोड़ दीजिए ना?? और रुद्र का कान को छोड़ते हुए दादाजी एक लंबी साँसे लेते हुए बोले "एकओर बात है??"
तुरंत ही रुद्र भी सीरियस हो गया और दादाजी से बोला "आप बताओ दादाजी, मैं सुन रहा हूँ।"
रुद्र के तरफ देखते हुए दादाजी बोले "ये तुम्हारे ही बारे में है, इसीलिए ध्यान से सुनना और मुझपर तुमको भरोसा भी करना होगा और अगर तुम ऐसा नही करते तो शायद तुम अपने कर्तव्य से भागने वाले कायर योद्धा कहलाओ और तुम्हारे साथ समाज मुझे भी कायर बोलएगा।"
दादाजी की मुँह से ऐसी बातें सुन रुद्र गुस्से से बोला "आप बताओ दादाजी!! मैं भले ही ताक़तवार नही हूँ लेकिन मैं कायर हूँ।"
रुद्र को अपने झांसे में लेने के बाद दादाजी मन ही मन मुस्कुराते हुए बोले "अगर सुनने का हिमत है तो सुनो..!!! तुमने बच्चपन में एक बच्ची के साथ जबरजस्ती करते हुए उस बच्ची से शादी कर लिए थे और तुम यही पर नही तुम उस बच्ची की होंठो को चूमते हुए तुमने उस बच्ची को धमकी देते हुए कहाँ था, अगर मैंने सुना तुम मुझे धोका दे रही हो, मैं तुम्हारी दोनो पैर तोड़कर हमेशा के लिए घर मे बैठा दूँगा।"
दादाजी की मुँह शादी शब्द और किसी के साथ जबरजस्ती किया हूँ, ऐसा कुछ जब रुद्र को पता चला तो रुद्र तुरंत ही दादाजी को सकी की नजरों से देखता बोला "कहीं आप मुझे अपने काहीनो मे नही उलझा रहे, जिसके बारे में मुझे भी ज्ञात नही। सच सच कहिय मैंने सच मे ऐसा किया था या फिर आप मुझे कोई काम करवाना चाहते?"
रुद्र का डरा हुआ चेहरा देख दादाजी जोर जोर से हँसने लगे और दादाजी को हँसता देख रुद्र नाराज हो जाता। और दादाजी पर गुस्सा करते हुए बोला "दादाजी!! आप बहुत बुरे हो और ये कहते हुए रुद्र का चेहरा लाल हो चुका था।"
दादाजी खुद पर काबू पाते हुए और सीरियस होकर बोले "अब तुम्हें यहाँ से जाना होगा, मेरा मतलब तुम जादूई ताक़त के बारे में जानने चाहते और जादुई क्षमता को सीखना चाहते थे। इसीलिए मेरा एक दोस्त रहता मध्य क्षेत्र में वो वहां पर एक विज़ार्ड अकेडमी चलाता, जहाँ पर काफी सारे योद्धा जादुई सीखने आते। मैं चाहता हूँ, तुम भी उसी अकेडमी को जॉइन कर लो??
दादाजी की बातें सुनकर रुद्र बोला "ठीक है दादाजी, पर मेरा शर्त है??" रुद्र का कुछ शर्त है, ये जान दादाजी थोड़ी हैरानी से बोले "बताओ, तुम्हारे क्या शर्त है?"
तभी रुद्र ज्ञायासु से बोला "दादाजी!! मैंने सारे ग्रंथ पढ़ लिए जो भी आपने मुझे पढ़ने को दिया था, लेकिन उन ग्रंथो में मुझे ये नही पता चला कि हम इंसानों को शाक्तियाँ कहाँ से मिला और कैसे मिला?? आप आज मुझे इन रहस्यों के बारे में बतायें??"
दादाजी कुछ सोचते हुए बोले "मुझे भी ठीक से कुछ पता नही, कब और कैसा हुआ था। लेकिन मैं तुमको मानव और शैतानों के बीच हो चुका विषण लड़ाई के बारे में बताता हूँ।"
रुद्र जोश में बोला "दादाजी!! ये भी मेरे लिए चलेगा।"
दादाजी कहते हुए--- आज से तकरीबन 100 साल पहले की बात... शैतानों और मानव योद्धा के बीच लड़ाई चिड़ चुका था। और चारो तरफ कई मानव योद्धा के लाश पड़े थे। किसी भी पल मानव योद्धाओं की हार हो सकता था, लेकिन ऐसा नही हुआ और उस मुस्किल परिस्थिति में आधावन आगे चलकर आये और महाराज आधावन ने अपनी सेनाओं के साथ मिलकर उन शैतानों को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया। उसके बाद शैतानों ने अपना हार स्वीकार किया और वपास से पाताल लोक चले जाने के लिए मजबूर हो गया। लेकिन जाते जाते उन शैतानों ने बोला "हम तो अभी यहाँ से जा रहे, लेकिन हम 100 साल के बाद एकबार फिर से जरूर आऊंगा और तुम्हें हराकर तुम्हें अपना ग़ुलाम बाउंगा।" ऐसा कहते हुए ये शैतान चले गए। और चूंकि इस युद्ध मे सबसे ज्यादा योगदान आधावन साम्राज्य का था, हर जगह आधावन साम्राज्य और सम्राट आधावन का ही जय जयकर हो रहा था।
दादाजी आगे बोलते हुए "क्या तुम जानते हो, आज जो आधावन साम्राज्य है, पहले कभी उस भूमि में सिर्फ बर्फ बर्फ रहा करता था।" जैसे ही बोले रुद्र तुरंत ही दादाजी अगला सवाल दागता हुआ पूछा "आपने तो बोला था... आप कुछ नही जानते। हम इंसानों को शाक्तियाँ कैसे मिली और कहां से मिला???"
"आपने तो बोला था... आप कुछ नही जानते। हम इंसानों को शाक्तियाँ कैसे मिली और कहां से मिला ?
रोशनी के कारण पूरी दुनिया मे अजीबोगरीब घटना होने लगा । इस घटना के कारण से पूरे पृथ्वी पर अलग अलग प्रजाति का creature फिर से दिखने लगा। जैसे कि Demon, Devil, Giant Demon, मॉन्स्टर , ब्लैक डेविल, कुछ प्राचीन Beast जैसे Dragons, Giant Beast, बड़े बड़े आसमान में उड़ने वाला प्राचीन पछियां.... इतना ही नही जो जानवर पहले से अस्तित्व में थे। उन सब ने भी बहुत बड़ा बदलाव दिखने को मिला... जैसे कि उस दिव्य रोशनी के कारण उन जानवरों में भी जादुई और अदभुत शक्तियाँ का मिश्रण देखने को मिला।
जिससे को भी सोचने और समझने की भी शाक्ति मिला और इंसानों की प्रकृति से ऊर्जा को अवोशोषित करना शुरू कर दिया और खुद को इंसानों से भी बेहतर प्रजाति बनाया।
और तो ओर जो जानवर हम इंसानों से दूर रहते थे, शाक्तियाँ मिलने पर इंसानों से भी लड़ना की तरह तरह की योजना बनाता हुआ इंसानों पर कई हमला भी करने लगा।
सिर्फ इतना ही हुआ.... जब दिव्य रोशनी पूरे ब्रमांड में फैली थी... उसी पृथ्वी ग्रह से आधी आबादी घट गया और तो और भूगौलिक क्षेत्र में भी बड़ा बदलावों देखने को मिला। जैसे कि धरती और समुंदर कही कही पर समंदर के बीच मे जमीन निकल आयी थी... और सुमन्द्र में रहने वाले प्राणी धरती में रहने वाले प्राणी से और भी ज्यादा खतरनाक और ठंडे दिलो के हो गए थे।
और बेटा रुद्र.... हम इंसानों के लिए अपनी शाक्तियाँ पर काबू पाना और अपने शाक्ति को उच्चे स्तर ले जाने केलिए.. काफी सारी ताकतें मिला। जैसे कि Devil and Demon को मारने पर मिलने वाली ताकतें, दिव्यव्यति, सेमी-गॉड, प्राचीन जानवरों और साथ मे प्राचीन कला विद्या, प्राचीन महान हथियार जिसका इस्तिमाल करने से पूरा ब्रह्मांड जीता जा सकता था ।
और तो और कुछ प्राचीन हथियार जो कई कई हज़ार साल पहले ब्रह्मांड में पाया जाता था। लेकिन किसी कारण वे सारे प्राचीन कही पर छिपा दिया गया।
बेटा रुद्र मुझे.... ठीक से कुछ पता नही लेकिन मैंने कुछ किस्से अपनी नानी से सुना था... जब भगवान शिव क्रोध हो उठे... दैत्य और राक्षसों के प्रजाति मिलकर देवताओं से लड़ धरती पर लड़ाई करते.... और लड़ाई होने वाला सबसे ज्यादा प्रभाव इंसानों को ही हुआ करता।
इसी कारण भगवान शिव को क्रोध आकर अपना त्रिशूल इस्तिमाल करते हुए पूरे ब्रह्मांड से जादुई शक्तियाँ को छिनन लिया था। और एक साथ पूरे ग्यारह ग्राह में ग्यारह त्रिशूल से हमला हुआ। और इस कारण सारे संसार से दिव्य शक्तियाँ, दैत्य शक्तियाँ, जादुई शक्तियाँ और भिन भिन जादुई शक्तियाँ से बने हुआ हथियार से भी शक्तियाँ छीन लिया गया सिर्फ प्राचीन हथियारों में ही शक्तियाँ बचा रहा क्योंकि प्राचीन हथियार में जो शाक्तियाँ था। उसमे देवताओं की शक्तियाँ होने के कारण उन हथियारो शाक्तियाँ बची रही लेकिन भगवान शिवा उन सारे दिव्य हथियारों को संसार के अगल अगल दिशाओं में भेज दिय। जितने भी प्राचीन मंत्र और सूत्र थे, उन सभी को धरती के गहराई में गाढ़ दिया ।
उन मंत्रों और सूत्रों का रक्षा करने के लिए बड़े बड़े दानव को चुना गया ।
रुद्र अपने दादाजी की बात को बड़ा ही गोर से सुना रहा था। लेकिन बीच मे ही रुद्र से रहा नही गया.. तो दादा जी से सवाल करता हुआ रुद्र पूछा दादाजी!!! भगवान शिव के वो ग्यारह त्रिशूल भी तो प्राचीन था... तो वो त्रिशूल कहाँ गया???
रुद्र के बातों को सुनकर दादाजी मुस्कुराते हुए बोले तुम लड़कों को सिर्फ हथियार में ही रुचि रहता। तो सुनो कहते है.. भगवान शिव का वो ग्यारह त्रिशूल एक प्राचीन त्रिशूल था। जो सृष्टि का निर्माण होने के समय पर एक उल्का पिंड से भगवान विश्कर्मा के द्वारा बनाया सबसे पहला हथियार था। जिससे तोड़ किसी दूसरे अस्त्र के पास बिल्कुल भी नही था। भगवान शिव ने जब उस त्रिशूल को छोड़ा था फिर उस त्रिशूल को कभी भी वपास नही बुलाया और जिस ग्रह पर वो प्राचीन त्रिशूल गया... वो त्रिशूल उसी ग्रह पर रह गया।
और उसी दिन से भगवान शिव बिना हथियार के हो गए.... लेकिन वपास फिर कभी भी भगवान विश्वकर्मा को त्रिशूल बनाने को नही बोले.... कुछ समय के पच्यात भगवान शिव और माता शाक्ति के ऊर्जा से उत्तपन हुआ एक आकर को माता सती अपने पति के लिए त्रिशूल बनाकर भगवान शिव को तोफे में दिए थी।
और तरह से यहाँ पर कहानी खत्म हो गया..। दादाजी आगे बोले अब मेरे पास आओ और इस जादुई क्रिस्टल में अपना एक बूंद गिराओ!!!
रुद्र इस पल का न जाने कबसे इन्तिज़ार कर रहा था और जैसे ही दादाजी बोले... रुद्र तुरंत भगकर आता हुआ और उतना ही तेजी से खून का बूँद जादुई क्रिस्टल में गिरा देता।
जैसे ही रुद्र अपना खून का एक बूंद जादुई क्रिस्टल में गिराता। उसके अगलेही पल रुद्र के आंखों के जादुई और मैकेनिकल तस्वीर के साथ आवाज़ भी आता हुआ। और जो रुद्र को तस्वीर के रूप दिखा वो दअरसल एक स्टेटस बॉक्स था.. जिसमें रुद्र के बारे सारा जानकारी दिया हुआ था।
रुद्र स्टेटस बॉक्स में देखता हुआ दादाजी से बोला दादाजी!! इसमे अननोन warrior लिखा हुआ दिख रहा, लेकिन जब स्टेटस को नीचे स्क्रॉल किया तो मुझे देर सारे जादुई शाक्तियाँ दिखा... क्या इसका मतलब मेरे पास भी जादुई शाक्तियाँ जैसे आपके पास...!!!
रुद्र का सवाल का जवाब देते हुए दादाजी बोले मुझे नही पता कि तुम्हारा जादुई शाक्ति कब तक वपास आ सकता लेकिन... तुम एक महान योद्धा बनाने के सारे काबिलियत तुम्हारे अंदर हैं।
रुद्र भी बोलता हुआ क्या अगर मेरे पास जादुई ताक़त नही मैं जरूर महान योद्धा बनूँगा और ये मेरा आपसे वादा.. इतना कहते हुए रुद्र बाहर चला जाता और कुछ बेसिक मार्शल आर्ट्स का अभियास करने लगा।
अगले दिन
रुद्र अपने दादा जी से मिलता हुआ अपने नए सफ़र में जाने लगा। तभी दादाजी रुद्र को 20 बीस सोने के सिक्के देते हुए बोले मेरे पास इतना ही था... इसीलिए तुम अपना ख़याल रहना। रुद्र सोने के सिक्के को लेता हुआ बोला काफ़ी है..!! और जाने से पहले भगवान की शिव मंदिर में रुद्र अपना माथा टेकता हुआ। और उसी पल भगवान शिव के हाथ से त्रिशूल छूटकर जमीन पर गिर गया। रुद्र समझ नही पाया और त्रिशूल वपास भगवान शिव के हाथों में रखने को हुआ तो दादाजी पीछे से बोले... शायद भगवान ने तुमको अपना आश्रीवाद के तौर पर अपना त्रिशूल भेंट किए... अपने पास रख लो..।
ऐसा रुद्र को भी लगा था क्योंकि जैसे ही रुद्र त्रिशूल को अपने हाथ मे पकड़ा था, ठीक उसी पल रुद्र का दिमाग में एक घंटी की आवाज़ सुनाई दिया था। रुद्र जब उस आवाज़ में किया अपने स्टेटस बॉक्स से छूकर देखा तो... हैरान था.. क्योंकि रुद्र को एक नया जादुई ताक़त खुला हुआ मिला जो कि बहुत ही दुर्लभ शाक्ति थी। जो कि टेलेपोर्टेशन मैजिक स्किल था। और इतना ही नही खुद त्रिशूल एक प्राचीन त्रिशूल था।
पर ये टेलीपोर्टेशन मैजिक अभी रुद्र का किसी काम का नही क्योंकि रुद्र से उसका जादुई छीन लिया गया और कहे रुद्र शरीर ऊर्जा का संचार बंद कर चुका था।
रुद्र अपना स्टेटस को आगे देखता हुआ UNKNOWN WARRIOR लिखा हुआ था। और उसी के साथ WARRIOR-MAGICAL योद्धा का पावर स्टेटस 10 लेवल लिखा हुआ था। और उसकी के साथ रुद्र को Hiding स्किल भी नीचे लिखा हुआ मिला जिसका लेवल 3/10..!!
इतना ही नही रुद्र का मारक क्षमता 10 बीस हजार हाथियों का ताक़त के बराबर था। बचव क्षमता 20 हजार हाथियों का बचव ताक़त का बारबार और हेल्थ पॉइंट 30 हजार हथियारों का हेल्थ पॉइंट के बराबर था।
" रुद्र अपना सारा सामान डायमेंशनल स्टोरेज में रखता और दादा जी का पैर छूता हुआ वहां से निकल जाता अपनी नई सफर में ..
रुद्र को अपना घर छोड़े पांच दिन बीत चुका था । रुद्र खाने के तालाश में जंगलों के अंदर घुसता ही चला जा रहा था। पर रुद्र को जंगल में एक भी जानवर नही दिख रहा था और भूख से लाचार रुद्र जंगलों से होता हुआ एक गाँव में पहुँच गया। गांव को देख रुद्र काफी खुश हुआ और गाँव के अंदर चला गया। लेकिन रुद्र को गांव के अंदर जाने के लिए दस कोपर का सिक्का कर के तौर पर देना पड़ा।
रुद्र को इतना जोरो से भूख लगा हुआ था.. की जरा भी ध्यान नही की ढाबे का मालिक चिकन का मीट के लिए रुद्र से काफी ज्यादा सिक्के वसूला था। जहाँ पर एक चांदी के सिक्के पर चिकन का मीट मिलता था, वही पर रुद्र से एक नही बल्कि दो सोने सिक्के लिया था।
ढाबे में ही पहले से बैठे गांव का मुखियाँ किसी दुबिदा मे नजर आ रहे थे... और देख कर ढ़ाबे का मालिक अप्ससोस करता हुआ बोला अब न जाने इस गांव का क्या होगा... लगता हम सभी को इस गांव को छोड़कर जाना होगा।
ऐसी बातें जब का कानों में पड़ा... रुद्र जिज्ञासा होते हुए पूछ पड़ा और तभी गांव का मुखियाँ सब कुछ रुद्र को बता देता।
सारी कहानी को सुनता हुआ रुद्र बोला अगर मैं उस शैतान को मार डालूँ तो मुझे इनाम का राशि मिलेगा।
गांव का मुखियाँ और ढाबे का मालिक दोनो की आँखें चमक उठा और बोले अगर तुम ऐसा करोगे तो... हम सिर्फ तुमको इनाम का राशि नही बल्कि वो दस भेड़ दे देंगे।
सुनकर रुद्र बोला... रुद्र खुश हुआ और वहां से उठता हुआ... फिर से गांव के बाहर चला जाता।
और रुद्र एक सपाट स्थान पर उस शैतान का आने इन्तिज़ार करने लगा।
काफी देर इन्तिज़ार करने के बाद काले रंग का धुंध से ढका हुआ चार सुनहरी रंग का चमकीली आँखें दिखाई देता हुआ। रुद्र काफी देर से काले धुंध के अंदर छिपा हुआ उस शैतान को देखने का कोशिश करता रहा।
और जैसे जैसे काला धुंध सामने आता गया रुद्र साफ साफ देख सकता था। वो कोई शैतान नही जैसे गांव वाले बोल रहे थे। बल्कि एक भेड़िया था... और शायद वो जादुई भेड़िया हो सकता क्योंकि भेड़िया के चारों तरफ काला रंग ऊर्जा निकल रहा था।
रुद्र मन बोला इस जितना आसान होगा और इतना बोलते ही रुद्र अपने पूरे जोर से भेड़िया पर हमला कर देता। लेकिन जैसे ही रुद्र अपना हाथ पीछे लेने को हुआ रुद्र का हाथ बाहर आ ही नही रहा था। भेड़िया अपने सामने एक 19 साल का बच्चा को देखा तो हँसने लगा और बोल पड़ा उन गांव के लोग एक बच्चा को मुझे लड़ने को भेज दिया... खुद नही आ सकता था क्या??? और हँसने लगा लगा...
भेड़िया का बातें सुनकर रुद्र को बड़ा बेज्जति महसूस हुआ और अपने दूसरे हाथ से ही भेड़िया पर एक के बाद एक लगातार हमला करने लगा।
रुद्र का हमला से भेड़िया को चोट तो नही लग रहा था लेकिन भेड़िया को गुदगुदी जरूर हो रहा था, इसीलिए भेड़िया हँस रहा था। और रुद्र को अपने अलग करता हुआ भेड़िया अपने ज़ोरदार पंजों से रुद्र पर प्रहार करता और रुद्र उड़ता हुआ कुछ दूर जाकर गिरा।
भेड़िया हँसता हुआ बोला तुमसे नही हो पायेगा, इसीलिए तुम यहाँ से चले जाओ।
रुद्र भी उसी के अंदाज में भेड़िया को जवाब देता हुआ बोला बस इतना ही दम है तुम्हारे प्रहार में... ये कहते हुए रुद्र का शरीर मे काफी चोट आ चुका था लेकिन फिर भी भेड़िया के सामने निडर होकर बोले जा रहा था।
रुद्र के बातों ने दो सिर वाले भेड़ियाँ को बड़ा गुस्सा दिला दिया और तेज़ी से रुद्र के तरफ दौड़ता आ रहा... था लेकिन रुद्र अपने जगह से हिला तक नही और जैसे ही सामने आता भेड़ियाँ रुद्र पर हमला किया.. रुद्र किसी तरह भेड़िया के हमलों से खुद को बचाते हुए एक ज़ोरदार लात भेड़ियाँ का पेट पर मारा देता। और रुद्र का लात उस जगह पर लगा था जहाँ पर कभी भी किसी भी male creature को लगाना नही चाहिए। भेड़िया मुँह बनाकर दर्द से करारने लगा था। और ऐसा करके रुद्र औरभी भेड़ियाँ को गुस्सा दिला चुका था।
कुछ क्षण के बाद रुद्र घायलावस्था में जमीन पर गिरा पड़ा था। और शैडो भेड़ियाँ !!! रुद्र पर हँसे जा रहा था... रुद्र किसी तरह अपने दोनो पैरों में खड़ा होते हुए त्रिशूल का आवाहन किया। क्योंकि के पास अब त्रिशूल ही बचा था.. रुद्र का व्यक्तिगत क्षमता भेड़ियाँ की ताक़त के सामने कुछ नही और ऊपर भेड़ियाँ एक जादुई जानवर था।
एक बार फिर से रुद्र और भेड़ियाँ के बीच घमासान मुक़ाबला होने लगा और इसबार भेड़ियाँ..!!! रुद्र का त्रिशूल से थोड़ा बचकर भागता था। देखकर रुद्र सुकून मिला भेड़ियाँ के तरफ निशाना लगता हुआ रुद्र त्रिशूल तेजी से भेड़ियाँ के तरफ चला दिया।
पर अगले ही भेड़ियाँ त्रिशूल को अपने नाखून से रोकता हुआ रुद्र का बचा हुआ आशा भी तोड़ दिया.. लेकिन इसी बीच रुद्र कुछ ध्यान दिया और फिर से अपना त्रिशूल को भेड़ियाँ के तरफ चला दिया। त्रिशूल भेड़ियाँ को छू पाता उससे पहले ही भेड़ियाँ काले धुंध में कहीं गयाब हो गया था।
रुद्र को यकीन हो गया हो न हो भेड़ियाँ को पता चल गया मेरा पास जो हथियार वो एक प्राचीन हथियार इसीलिए सीधा सीधी लड़ना छोड़ छिपकर हमला कर रहा।
रुद्र खुद से बोला मुझे एक मौका मिल गए... तो मैं इस भेड़ियाँ का काम तमाम कर सकता हूँ। और रुद्र को बहुत जल्दी ही भेड़िया का मूवमेंट का पैटर्न जान चुका था। और बस एक पल इन्तिज़ार करते हुए रुद्र त्रिशूल को बहुत ही तेजी से घुमाया शुरू कर दिया।.. जैसे ही भेड़ियाँ अपने शैडो से बाहर आया रुद्र बिना एक पल भी गवाए त्रिशूल भेड़ियाँ की तरफ चला देता।
इसबार भेड़िया त्रिशूल को देख नही पाया और त्रिशूल सीधे जाकर पीठ पर लगा । जिसके बाद भेड़िया शरीर का राख में बदल जाता पर मैजिकल भेड़िया अपने पीछे Black Magic Crystal को छोड़ देता और भेड़िया के मारते ही रुद्र का नोटिफिकेशन मिला। मैजिकल shadow भेड़िया मार चुका ।
रुद्र भी क्रिस्टल को देख चुका था इसीलिए मैजिकल क्रिस्टल उठाने गया तो उसे पहले ही त्रिशूल ब्लैक मैजिकल क्रिस्टल को अपने अंदर अवोशोषित कर लिया ।
त्रिशूल को मैजिकल क्रिस्टल को अवोशोषित करते ही रुद्र को एक ओर नोटिफिकेशन मिला। जो कि डार्क मैजिक था और उसके साथ ही रुद्र को एक नया स्किल shadow skill मिला था। जिसका इस्तिमाल करके रुद्र का कई परछाई बना सकता था।
एक बार फिर से रुद्र अपना स्टेटस को देखता हुआ... त्रिशूल जो dark जादुई पत्थर को अवोशोषित करने पर त्रिशूल कुछ जादुई ताक़त को unlock कर चुका था। जैसे कि रुद्र को Dark magic नाम का नया skill मिला था। रुद्र धीरे धीरे समझ रहा था... की त्रिशूल किस तरह काम करता.. क्योंकि त्रिशूल जितना भी जादुई पत्थर को अवोशोषित करेगा रुद्र उतना ही जादुई स्किल मिलता जाएगा। लेकिन अब भी रुद्र के सामने एक दिक्कत था, जो कि रुद्र के पास अब भी जादुई ताक़त नही था तो जादुई स्किल का क्या करेगा।
" अब क्या होगा आगे ? जानने के लिए बने रहे हमारे साथ । सिर्फ मातृभूमि app पर।