Obsession - 2 in Hindi Love Stories by Bharti 007 books and stories PDF | Obsession - 2

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Obsession - 2

डाइनिंग टेबल पर हल्की रोशनी थी… लेकिन बातचीत का माहौल धीरे-धीरे गंभीर होता जा रहा था।
इशिका की बात सुनकर राजीव कपूर ने हामी में सिर हिलाया, “बिल्कुल सही कह रही हो तुम… अब उसे जिम्मेदारी समझनी होगी।”

नंदिनी कपूर ने भी गहरी साँस लेते हुए कहा— “मैं भी यही सोच रही थी… शादी के बाद घर में और जिम्मेदारियाँ बढ़ेंगी… ऐसे में रिहान का यूँ बेफिक्र रहना ठीक नहीं है।”
तभी सीढ़ियों से उतरते कदमों की आहट आई…
रिहान कपूर बाहर से  घर अंदर आया  ,कैज़ुअल कपड़ों में, हाथ में फोन, चेहरे पर वही बेपरवाह अंदाज़ , यहां डायनिंग टेबल पर घरवालों की जमघट देखकर,“लगता है मेरी ही बात हो रही है…” उसने कुर्सी खींचते हुए हल्की मुस्कान के साथ कहा।

इशिका ने तुरंत जवाब दिया— “हाँ, और इस बार तुम बच नहीं सकते।”

रिहान ने भौंहें उठाईं— “ओह… इतना सीरियस क्या हो गया?”

राजीव कपूर ने सीधे मुद्दे पर आते हुए कहा— “कल से तुम ऑफिस जॉइन कर रहे हो, रिहान। बहुत वक्त बर्बाद कर लिया तुमने।”
कुछ पल के लिए टेबल पर सन्नाटा छा गया…
रिहान का चेहरा बदल गया ,वो मुस्कुराया जरूर, लेकिन आँखों में हल्की चिढ़ साफ दिख रही थी,“डैड… अभी शादी का माहौल है, गेस्ट्स आएंगे… मैं बाद में—”
“नो एक्सक्यूज़,” राजीव कपूर की आवाज़ सख्त हो गई, “अब तुम बच्चे नहीं हो।”
नंदिनी ने नरमी से कहा— “देखो बेटा… ये तुम्हारे भले के लिए ही है…”
रिहान ने धीरे से कुर्सी पीछे धकेली… और खड़ा हो गया।
“ठीक है…” उसने छोटे से जवाब में कहा, लेकिन उसकी आवाज़ में मान जाने वाला सुकून नहीं… बल्कि अंदर दबा गुस्सा था।
वो बिना कुछ और बोले वहाँ से चला गया…
अपने कमरे में पहुँचते ही उसने दरवाज़ा ज़ोर से बंद किया।
फोन बेड पर फेंकते हुए वो खिड़की के पास आकर खड़ा हो गया…नीचे लॉन में हल्की रोशनी थी… ठंडी हवा के झोंका आया तो
मृगा का चेहरा दिखाई दिया रिहान का गुस्सा… धीरे-धीरे किसी और भावना में बदलने लगा।
“ऑफिस… जिम्मेदारी… शादी…” उसने हल्के ताने के साथ खुद से कहा, “सबको मेरी जिंदगी की पड़ी है… लेकिन मुझे क्या चाहिए… ये किसी ने पूछा?”

उसकी इशारा मृगा पर गई…
सादा कपड़े… और चेहरे पर मासूमियत…
रिहान के होंठों पर हल्की मुस्कान आ गई—
 "मुझे पता है… मुझे क्या चाहिए…”

अगली सुबह…
घर में शादी की तैयारियों की हलचल शुरू हो चुकी थी ,नंदिनी और इशिका शॉपिंग की लिस्ट बना रही थीं… राजीव ऑफिस के लिए निकल रहे थे बस इंतजार रिहान का था…

 रिहान आज पहली बार… फॉर्मल कपड़ों में नीचे आया ,सबकी नजरें उस पर टिक गईं।

इशिका ने हल्की मुस्कान के साथ कहा— “वाह… आज तो कोई सीरियस लग रहा है!”
रिहान ने बिना कुछ कहे बस अपनी घड़ी ठीक की…
लेकिन उसकी नजरें—
सीधे डायनिंग एरिया की तरफ गईं…
जहाँ मृगा खड़ी थी।
दोनों की नजरें एक पल के लिए मिलीं…
मृगा ने तुरंत नजरें झुका लीं… और अपने काम में लग गई।

रिहान के चेहरे पर एक अजीब-सी शांति थी… जैसे उसने कोई फैसला कर लिया हो।
रिहान हल्का-सा मुस्कुराया
“ खेल अभी शुरू हुआ है, मृगा…”



"NK Glow Cosmetics शहर की बड़ी ब्रांडेड कंपनियों में गिना जाने लगा था ,
ऑफिस किसी साधारण दफ्तर जैसा नहीं था कांच की ऊँची बिल्डिंग, अंदर कदम रखते ही शानदार रिसेप्शन एरिया, जहाँ पहले से ही प्रोफेशनल स्टाफ मौजूद था।

रिसेप्शन पर बैठी लड़कियाँ लगातार कॉल्स अटेंड कर रही थीं, विज़िटर्स को मैनेज कर रही थीं—हर चीज़ सिस्टम में बंधी हुई।

यहाँ किसी एक आदमी का नहीं, बल्कि पूरी टीम का काम चलता था।
रिहान जब ऑफिस आया, तो एक पल के लिए वो खुद भी हैरान रह गया ,
उसे शायद अंदाजा नहीं था कि राजीव जी का साम्राज्य इतना बड़ा हो चुका है।
राजीव ने बिना समय गंवाए उसे अपने केबिन में ले गया ,“यहां कोई छोटा काम नहीं होता, रिहान… यहाँ हर दिन लाखों की नहीं, करोड़ों की डील्स होती हैं।”
उन्होंने सामने रखी फाइल्स उसकी तरफ बढ़ाईं—“ये नेशनल क्लाइंट्स के कॉन्ट्रैक्ट्स हैं… और ये नई प्रोडक्ट लाइन की डील ,अगर ये फाइनल हुई, तो कंपनी अगले लेवल पर जाएगी।”

रिहान चुपचाप सुन रहा था।

राजीव ने आगे कहा -
“तुम्हें असली काम सीखना है—डील कैसे होती है, क्लाइंट को कैसे हैंडल करते हैं, और बिजनेस कैसे बढ़ाया जाता है।”
इसके बाद उन्होंने रिहान को सीधे मीटिंग रूम में ले आया वहाँ पहले से कुछ बड़े क्लाइंट्स बैठे थे—सूट-बूट में, गंभीर चेहरे, और हर बात में प्रोफेशनल टोन।

रिहान पहली बार ऐसी मीटिंग का हिस्सा बन रहा था,वो कोने में बैठा सब देख रहा था—कैसे हर शब्द सोच-समझकर बोला जाता है, कैसे एक छोटी-सी गलती पूरी डील खराब कर सकती है, और कैसे राजीव हर सवाल का जवाब इतनी सटीकता से देते हैं कि सामने वाला मना ही नहीं कर पाता।
मीटिंग खत्म होते-होते एक बड़ी डील फाइनल हो गई।

रिहान के चेहरे पर हल्की हैरानी थी—
उसे समझ आ रहा था कि ये दुनिया कितनी अलग है, लेकिन उसके पास सोचने का समय नहीं था, मीटिंग खत्म होते ही राजीव ने उसे दूसरी फाइल थमा दी—
“अब ये प्रोजेक्ट तुम्हें समझना है… शाम तक इसकी पूरी रिपोर्ट चाहिए।”

दिन भर उसे एक के बाद एक काम मिलता रहा , कभी मार्केटिंग टीम के साथ स्ट्रेटजी डिस्कस करना, कभी फाइनेंस डिपार्टमेंट के डेटा को समझना,तो कभी नए प्रोडक्ट्स की प्रेजेंटेशन तैयार करना।

यहाँ हर कोई अपने काम में इतना व्यस्त था कि किसी के पास फालतू बात करने का समय नहीं था।

शाम होते-होते रिहान की हालत थकान से भर चुकी थी ,वो कुर्सी पर बैठा सोच रहा था ,ये वही जिंदगी है, जिसे वो इतना आसान समझता था…?

लेकिन राजीव जी की नजरों में एक सख्ती थी, और कहीं न कहीं एक योजना भी रिहान को लेकर..!!



रात गहरा चुकी थी…

रिहान अभी-अभी ऑफिस से लौटा था—थका हुआ, लेकिन चेहरे पर वही अजीब-सा आत्मविश्वास , उसने सीढ़ियों पर चढ़ने से पहले आवाज़ दिया ," मीना दीदी मेरा खाना ऊपर ही भेज देना मैं थक गया हूं ...
रिहान अपने कमरे में दाखिल हुआ तो दिनभर की थकान उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी,ऑफिस का दबाव आज कुछ ज्यादा ही था—लगातार मीटिंग्स, फाइल्स और जिम्मेदारियाँ… सब कुछ उसके लिए नया था।

उसने बिना देर किए शर्ट पैंट उतारी और सीधे वाशरूम की तरफ बढ़ गया।
जैसे ही शावर ऑन किया—ठंडे पानी की बूँदें उसके शरीर से टकराईं, और एक सुकून-सा महसूस हुआ।
पानी की धार उसके बालों से होती हुई चेहरे पर गिर रही थी…
रिहान ने आँखें बंद कर लीं, जैसे वो पूरे दिन की भागदौड़ को उसी पानी के साथ बहा देना चाहता हो।
उसके मन में दिनभर की बातें घूम रही थीं—
राजीव जी की सख्ती, बड़े-बड़े क्लाइंट्स, और वो जिम्मेदारियाँ जिनका उसने कभी अंदाजा भी नहीं लगाया था।
वो दीवार के सहारे खड़ा रहा, पानी लगातार उस पर गिरता रहा…
और धीरे-धीरे उसकी सांसें सामान्य होने लगीं।
एक अजीब-सी खामोशी थी उस पल में—
बाहर की दुनिया से बिल्कुल अलग।
कुछ देर बाद उसने गहरी सांस ली,
जैसे खुद को फिर से संभालने की कोशिश कर रहा हो।
फिर शावर बिना बंद किये ,
वो बाहर आया, तौलिया उठाकर बालों को सुखाते हुए—


नीचे, इशिका और नंदिनी शॉपिंग से वापस आई थीं। उनके हाथों में बैग्स थे और चेहरे पर शादी की तैयारियों की चमक।
उन्होंने आते ही चाय के लिए कहा, तो मीना ने जल्दी से मृगा को आवाज दी—
“मृगा, ये खाना ऊपर रिहान के कमरे में दे आओ…”
मृगा ने चुपचाप ट्रे उठाई।
उसके कदम भारी थे… जैसे हर सीढ़ी के साथ कोई अनकहा डर भी उसके साथ ऊपर चढ़ रहा हो।

कमरे का दरवाज़ा आधा खुला था।
वो धीरे से अंदर गई....
कमरा खाली था…सिर्फ वाशरूम से आती पानी की आवाज बता रही थी कि कोई अंदर है।
मृगा ने जल्दी से ट्रे टेबल पर रखी और बिना रुके वापस मुड़ने लगी…

लेकिन तभी—

रिहान मृगा के एकदम सामने आया 
भीगे बाल, और सिर्फ कमर पर लिपटा एक तौलिया।

मृगा के कदम वहीं ठिठक गए,
वो तुरंत नजरें झुकाकर निकलना चाहती थी, लेकिन इससे पहले कि वो कुछ समझ पाती—
रिहान ने उसका हाथ पकड़ लिया।
एक झटके में उसने उसे अपनी ओर खींच लिया।
मृगा घबरा गई…
उसने खुद को छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन उसकी पकड़ मजबूत थी।

रिहान उसे अपने सीने में चिपका लिया था और मृगा के चेहरे पर झुकते हुए, उसकी लटों को उंगलियों से हटाते हुए धीमे लेकिन दबाव भरे स्वर में बोला—
“क्या मैं तुम्हें पसंद नहीं हूँ…?”
उसकी आवाज में सवाल कम, एक अजीब-सा अधिकार ज्यादा था।
“देखो मुझे… मैं स्मार्ट हूँ, अच्छा दिखता हूँ… और तुम्हें पसंद करता हूँ…”
वो हल्का-सा मुस्कुराया, लेकिन उस मुस्कान में गर्माहट नहीं थी—
“फिर इतनी दूरी क्यों…? किस बात का घमंड है तुम्हें…?”वो एक हाथ से मृगा का पीठ को लपेट कर जकड़ लिया था 

मृगा का दिल तेजी से धड़क रहा था।
उसकी आँखों में डर साफ झलक रहा था।
वो बार-बार खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसकी आवाज गले में ही अटक गई—जैसे हालात ने उसे बोलने का हक ही छीन लिया हो।
कमरे की खामोशी अब और भारी हो चुकी थी…और उस खामोशी में मृगा की बेबसी साफ महसूस हो रही थी ," प्लीज़ छोड़ दो मुझे मैंने क्या बिगाड़ा है आपका ...??

रिहान ने मुस्कुराते हुए मृगा के नाजुक लबों पर उंगली फेरते हुए कहा," बिगाड़ दिया तुमने सब कुछ क्योंकि तुम सिर से पांव तक नशा हो मेरे लिए मैं तुम्हें एक बार पाना चाहता हुं बस एक बार ,इन लबों की जाम पीना चाहता हुं ..वो मृगा के होंठों को अपने होंठों से छुने के लिए आगे बढ़ा ....

तभी... रिहान की फोन बजा...


जारी है कहानी