Invitation in Hindi Short Stories by Ramesh Desai books and stories PDF | आमंत्रण

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आमंत्रण

                       

                        प्रतिकात्मक तसवीर

                

                          एक सच्ची कथा

        ऊस ने मुझे पहली मुलाकात में यही बताया था।

       "मेरा नाम स्नेहा है, जिसका मतलब होता है प्यार!"

       "मैं तुम्हें ढेर सारा प्यार दूँगी! मैं तुम्हारी दोस्त बनूँगी। मैं तुम्हारा ख्याल रखूँगी। मैं तुम्हें सब कुछ दूँगी।"

        वह अच्छा फिगर थी  उसके स्तन बहुत बड़े थे। वे मुझे हमेशा आकर्षित करते थे। मैं उसे लगातार टकता रहता था।

        उसे देखते ही मेरे मन में स्नेहा जैसी 'रखैल' बनने का विचार आ गया था लेकिन यह मेरी फिदरत नहीं थी. मैं हर एक स्त्री को देवी मानता था.

        उस के तरबूज़ जैसे स्तन किसी को भी  लुभा सकते थे।

       स्तन इतने बड़े क्यों हो जाते हैं?

       स्नेहा ने खुद मुझे यह जानकारी दी थी।

       ऊस ने खुद मुझे उसके स्तनों को छुने का अधिकार सोंपा था.

       स्नेहा ने खुद एक बार अपना टी शर्ट उपर कर के ऊस के स्तन का दर्शन करवाया था. कुछ गलत करने को उकसाया था. और मैने पहली बार किसी के साथ गलत काम किया था. माहोल ही कुछ ऐसा था.. जो मैं अपने आप को रोक नहीं पाया था.

          स्तन बडे होने के लिये ऊस ने मुझे जिम्मेदार माना था.

          "तुम्हारी वजह से मेरे स्तन बड़े हो गए हैं!"

           उसे अपने हाथों से अपने स्तनों को दबाने और मालिश करने की आदत थी।

           ऊस के बुज़ुर्ग चाचा से भी ऊस के नाजायज संबंध थे. वह उसकी छाती दबाते थे। इसी वजह से उसके स्तन तरबूच जैसे हो गए थे।

          फिर मेरे कामुक मन में एक सवाल उठा था.

          अगर एक करीबी चाचा उसके ख़िलाफ़ जाकर ऐसा कर सकता है, इस बात ने मुझे भटका दिया था

           मैने अपने दोनो हाथ ऊस की छाती को दबाना शुरु किया वह चुपचाप मझा ले रही थी.. तो मेरा साहस बढ गया था. मै ऊस की दोनो चुचिंयो को मुंह में लेकरं चुसने लगा. उसे कोई प्रॉब्लेम नहीं था. फिर भी ऊस ने शरारती अंदाज में सवाल किया था.

         " यह क्या कर रहे हो? "

          मैने बिन्दास्त जवाब दिया था.. " एक छोटे बच्चे की तरह तुम्हारा दूध पी रहा हुं. "

           ऊस पर ऊस ने कुछ नहीं बोला था.

            मैने उसे बताया था : " मुझे तुम्हारा दुध पीना अच्छा लगता हैं. "

            ऊस पर ऊस ने वादा किया था : मै हर बार जब तुम आओगे मै तुम्हे अपना दूध पिलाऊंगी. "

            और यह वादा ऊस ने सालो तक निभाया था.

             मै ऊस के घर में खुर्ची या सोफे पर बैठता था, तो वह मेरे पेंट की जीप खोलकर मेरा लौडा सहलाती थी.

             एक दिन तो ऊस ने खुल्लम खुल्ला मुझे पूछा था. " मेरी चुत में उंगली डालना हैं?

              एक बार ऊस के घर जाने के लिये मैने उसे फोन किया था. तब ऊस ने मुझे बिन्दास्त सवाल किया था.  " आप क्या करोगे? "

              मैने भी उसी अंदाज में जवाब दिया था.

              " तुम्हारे पर चढकर सो जाऊंगा.. "

               वह मेरा इरादा जान गई थी.. ऊस ने सवाल किया था.

               " सारे कपडे निकलवाओगे या ऐसे ही करोगे? "

                " तुम जैसे चाहो वैसे.. "

                 फिर नंगे होकर सब कुछ करना हमारा मेनू हो गया था.

                 ज्यादातर हम लोग किचन में यह करते थे, मै ऊस के ब्लाउज, ब्रा निकालता था. ऊस का दूध पीता था. वह भी बाकी के कपडे उतार देती थी, मै उसे जमीन पर सुलाकर ऊस के उपर चढ जाता था और ऊस की भरपूर चुदाई करता था.

                  उसे मेरी गोद में बैठना अच्छा लगता था. मै खुर्ची पर बैठता और वह मेरी गोद में आकर बैठ जाती थी. मैं पीछे से दोनो हाथो ऊस के बुब्स दबाता था और वह मेरे लोडे पर अपनी गांड रखकर कुदती थी.

                मैं हमेशा ऊस के दोनो बुब्स को पीछे से पकडकर गांड में लोडा डाल कर किचन में ले जाता था, उसे दीवार के साथ दबोचता था, ऊस की चुत पर लौडा घीस्ता था. होठो को चुमता था..

               स्नेहा ने मुझे सब कुछ दिया था जो शायद किसी पत्नी ने अपने पति को दिया होगा. वह एक तुफान बनकर मेरी जिंदगी बनकर आई थी, वह  'रखैल' नहीं बल्की मेरी दुसरी बीवी बनकर आई थी..

              मेरे पास उसके नंगे व्हिडियो भी थे. ऊस के टोपलेस बूब्स का विडियो गलती से फेस बुक पर वायरल हो गया था. और हमारे 12 साल के रिश्ते का यकायक अंत आ गया था. जिस रिश्ते का ऊस के लडके, बेटे की मंगेतर ऊस की सासू मा और लडके के दोस्तो को भनक नहीं लगी थी वह फेस बुक ने जाहिर कर दिया था

              और वह मेरी ज़िंदगी से दूर जा चुकी थी। उसने मुझे अपना पिता मान लिया था। और समय के साथ, वह फूट पड़ी।

             "लोगों की नज़रों में हम बाप-बेटी ही रहेंगे। और पीठ पीछे हम बिस्तर के साथी ही रहेंगे।"

              हमारा रिश्ता बाप-बेटी के इसी स्पर्श से शुरू हुआ था।

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              यह कहानी ठीक लगे तो प्रकाशित करना नहीं तो इग्नोर करना.

              अक्सर स्त्री पुरुष के रिश्ते मे अक्सर पुरुष को जिम्मेदार माना जाता हैं इस बात को जुठ साबित करने के लिये मैं यह कहानी यथावत भेज रहा हूं..  :  :