Borahae : The Winter Bear in Hindi Motivational Stories by Deepika Patel books and stories PDF | Borahae : The Winter Bear

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Borahae : The Winter Bear

​सियोल की सर्द रातें कभी सोती नहीं, लेकिन ताएह्युंग के लिए आज की रात कुछ ज़्यादा ही बोझिल थी। 'गंगनम' के एक आलीशान, आधुनिक अपार्टमेंट की खिड़की के पास खड़ा होकर वह बाहर गिरती बर्फ को देख रहा था। कांच पर जमी भाप में उसे अपना अक्स धुंधला दिखाई दे रहा था। बाहर नियॉन लाइट्स चमक रही थीं, गाड़ियाँ दौड़ रही थीं, एक शोर था जो थमता नहीं था। लेकिन ताएह्युंग के कानों में इस वक्त सियोल का शोर नहीं, कोचांग का सन्नाटा गूँज रहा था।

​वह याद कर रहा था अपना वो गाँव, जहाँ सर्द रास्तों पर वह नंगे पैर दौड़ता था, यह सोचे बिना कि एक दिन वह दुनिया का सबसे चमकता सितारा बनेगा।

​ताएह्युंग की कहानी सियोल के चकाचोंध वाले मंचों से नहीं, बल्कि कोचांग (Geochang) के उन कच्चे रास्तों और खेतों की मिट्टी से शुरू हुई थी। जहाँ सुबह का कोहरा खेतों के ऊपर चादर की तरह छाया रहता था और हवा में गीली मिट्टी की सोंधी खुशबू बसी होती थी। उसका बचपन बहुत ही सादगी में बीता था, एक ऐसे परिवार में जहाँ सपने देखने की इजाजत तो थी, पर उन्हें पूरा करने के संसाधन नहीं।

​उसकी दुनिया उसकी दादी के इर्द-गिर्द सिमटी हुई थी। वही दादी जिन्होंने उसे चौदह साल तक अपनी उँगली पकड़कर चलना सिखाया, जिन्होंने उसे रात को कहानियाँ सुनाकर सुलाया और जिन्होंने उसे सिखाया कि "दिल साफ़ हो, तो भगवान हर राह आसान कर देता है।" ताएह्युंग को आज भी याद था कि कैसे वह और उसकी दादी सुबह-सुबह खेतों में जाते थे। वह पुरानी, फटी हुई सैक्सोफोन (Saxophone) की धुन, जिसे वह हर शाम बजाता था, उसकी दादी को बहुत पसंद थी। वह अक्सर कहती थीं, "ताएह्युंगा, तेरी धुन में एक अजीब सा सुकून है, जैसे कोई मीठी लोरी।"
​जब ताएह्युंग ने पहली बार गायक बनने का सपना देखा था, तो गाँव के लोगों को लगा था कि वह पागल हो गया है। एक किसान का बेटा और दुनिया का इतना बड़ा कलाकार? यह मुमकिन नहीं लगता था। लेकिन ताएह्युंग की आँखों में एक अजीब सी चमक थी, एक ऐसी जिद जो हार मानने को तैयार नहीं थी।
​वह दिन उसे आज भी याद था जब वह पहली बार ऑडिशन देने सियोल जाने लगा था। उसके पास अच्छे कपड़े नहीं थे, पहनने को एक ढंग की जैकेट तक नहीं थी। शहर के लोग उसे गरीब समझकर ठुकरा न दें, इस डर से उसकी माँ ने बड़ी मुश्किल से पैसे जोड़कर उसके लिए एक महँगी 'ब्रांडेड' जैकेट खरीदी थी। वह जैकेट ताएह्युंग के लिए सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि उसकी माँ की ममता और पिता के पसीने की खुशबू थी। जब उसने वह जैकेट पहनी, तो उसे लगा जैसे उसके माता-पिता का आशीर्वाद उसके साथ है।
​लेकिन सियोल का धुआँ कोचांग की धूल से बहुत अलग था।
​यह शहर जितना चमकदार था, उतना ही बेरहम भी। यहाँ पहुँचकर ताएह्युंग को अहसास हुआ कि सिर्फ टैलेंट काफी नहीं होता। यहाँ भाषा, रहन-सहन और यहाँ तक कि बात करने का तरीका भी अलग था। जब वह पहली बार कंपनी में शामिल हुआ, तो उसे लंबे समय तक 'हिडन मेंबर' (Hidden Member) बनाकर रखा गया। इसका मतलब था कि वह ग्रुप का हिस्सा तो था, पर दुनिया के सामने नहीं आ सकता था।
​जब बाकी सदस्य कैमरे के सामने अपनी खुशियाँ बाँटते, फैंस से बात करते, तब ताएह्युंग को एक अंधेरे कोने में, पर्दे के पीछे खड़ा होकर बस उन्हें देखना पड़ता था। वह अकेलापन, वह डर कि "क्या दुनिया मुझे कभी अपनाएगी?", आज भी उसके सीने में एक टीस बनकर उठता था। वह घर फोन करता तो रो पड़ता, लेकिन माँ से बस इतना ही कह पाता, "माँ, मैं ठीक हूँ। सब बहुत अच्छे हैं।" वह नहीं चाहता था कि कोचांग में बैठे उसके माता-पिता उसकी वजह से परेशान हों।

​ताएह्युंग ने खिड़की पर जमी भाप को अपनी उँगली से साफ़ किया। उसे याद आया वो दिन, जब उसे पहली बार ग्रुप के सदस्य के रूप में दुनिया के सामने लाया गया था। वह घबराहट, वो डर... और फिर फैंस का वो प्यार, जिसने उसके सारे डर को पल भर में दूर कर दिया।

​उसने अपनी मेज़ पर रखे एक पुराने लिफाफे को छुआ, जिस पर 'Borahae' लिखा था। यह शब्द उसके लिए सिर्फ एक रंग नहीं, बल्कि एक वादा था—आखिरी दम तक प्यार और भरोसे का। 'I Purple You'—यह वादा जो उसने अपने फैंस से किया था, और जो फैंस ने उससे किया था।

​आज जब वह आईने में खुद को देखता है, तो उसे 'सुपरस्टार वी' नहीं, बल्कि वही कोचांग का सीधा-सादा लड़का 'ताएह्युंग' दिखाई देता है, जो अपनी दादी की गोद में सिर रखकर सो जाना चाहता है। सियोल की ऊँची इमारतें उसे वो सुकून नहीं दे पातीं जो गाँव के उन कच्चे रास्तों पर मिलता था। उसे आज भी मिट्टी की खुशबू पसंद है और वह दिखावे की दुनिया से दूर रहना चाहता है।

​तभी उसके फोन की घंटी बजी। एक नया मैसेज था—"कल सुबह नया कॉन्सर्ट का रिहर्सल है।"
​ताएह्युंग ने एक गहरी साँस ली। वह जानता था कि यह चमक-धमक वाली दुनिया के नीचे, आज भी वही कोचांग का सीधा-सादा लड़का छिपा है जो बस थोड़ा सा प्यार और अपनी दादी की गोद चाहता है। उसने अपनी डायरी खोली और पन्ने पर बस एक शब्द लिखा— "कोचांग"। क्योंकि वह जानता था कि उसका सफर अभी खत्म नहीं हुआ है, यह तो बस शुरुआत है कोचांग की धूल से सियोल के सितारों तक पहुँचने की।

सियोल की सर्द हवाएँ ताएह्युंग के चेहरे को छूकर निकल रही थीं, लेकिन उसका ध्यान अपनी कांपती हुई उंगलियों पर था। वह अभ्यास कक्ष (Practice Room) के बाहर गलियारे में खड़ा था। अंदर से संगीत की तेज़ आवाज़ और नाचते हुए पैरों की थाप सुनाई दे रही थी। बाकी लड़के पसीने में तर-बतर होकर अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन ताएह्युंग के लिए चुनौती कुछ और ही थी।

​उसे 'सीक्रेट मेंबर' रखा गया था। इसका मतलब था कि जब भी कैमरे चलते, उसे फ्रेम से बाहर जाना पड़ता। जब फैंस के लिए व्लॉग (Vlog) शूट होते, तो उसे दीवार के पीछे या खंभे की ओट में खड़ा होना पड़ता। वह वहां होकर भी वहां नहीं था।

​ताएह्युंग ने अपनी उस लाल रंग की महँगी जैकेट के हुड को थोड़ा और खींच लिया। यह वही जैकेट थी जिसे देखकर सियोल के दूसरे ट्रेनी लड़के उसे अमीर घर का समझते थे। उन्हें क्या पता था कि इस जैकेट के पीछे उसकी माँ के कितने महीनों की बचत और उसकी फिक्र छिपी थी। माँ ने सोचा था कि अगर बेटा महँगे कपड़े पहनेगा, तो सियोल के रईस लड़के उसे नीचा नहीं दिखाएंगे। पर ताएह्युंग को कपड़ों की चमक नहीं, अपनी आवाज़ की खनक दुनिया को सुनानी थी।

​एक शाम, जब सब जा चुके थे, ताएह्युंग अकेले उस ठंडे कमरे में फर्श पर बैठ गया। उसने अपना पुराना सैक्सोफोन निकाला। कोचांग में जब वह इसे बजाता था, तो कौवे और चिड़ियाँ उसके इर्द-गिर्द आ जाते थे। वहां उसे सुनने वाला कोई जज नहीं था, बस कुदरत थी। पर यहाँ, हर सुर पर एक कसौटी थी।

​उसने फूँक मारी और एक उदास धुन निकाली। उसे अपनी दादी की याद आई। दादी अक्सर कहती थीं, "ताएह्युंगा, जब मन भारी हो तो आसमान को देखा कर, वो सबके लिए एक जैसा है।"

​उसने खिड़की से बाहर देखा। सियोल का आसमान तारों से खाली था, सिर्फ ऊँची इमारतों की कृत्रिम रोशनी थी। उसने अपनी डायरी निकाली और उसमें टेढ़े-मेढ़े अक्षरों में लिखा— "आज फिर मैं कैमरे के पीछे था। उन्होंने मुझसे कहा कि मेरा चेहरा अभी दुनिया के लिए एक राज़ है। पर क्या राज़ होना ही मेरी किस्मत है?"

​उसका गला भर आया। उसे याद आया कि कैसे वह लॉग्स (Logs) की शूटिंग के दौरान खाली कमरे में बैठ कर खुद से बातें करता था, यह सोचकर कि शायद एक दिन कोई इन्हें देखेगा। वह डरता था कि कहीं उसे ग्रुप से निकाल न दिया जाए। कहीं उसे वापस कोचांग न भेज दिया जाए, जहाँ सब उसकी सफलता की आस लगाए बैठे थे।

​उस रात वह भूखा ही सो गया। नींद में उसे फिर वही कोचांग के खेत दिखे। उसने देखा कि वह नंगे पैर मिट्टी पर दौड़ रहा है और उसकी दादी दूर से उसे बुला रही हैं। जैसे ही वह उनके पास पहुँचने वाला था, सियोल के अलार्म की कर्कश आवाज़ ने उसे जगा दिया।

​सुबह के 4 बज रहे थे। एक और दिन शुरू होने वाला था—वही संघर्ष, वही छिपना और वही इंतज़ार। लेकिन ताएह्युंग ने अपनी आँखों के आंसू पोंछे और अपनी लाल जैकेट को झाड़कर खड़ा हो गया। उसे 'विंटर बियर' की तरह धीरज रखना था। उसे उस 'धूल' का मान रखना था जिससे वह निकलकर आया था।
​उसने आईने में खुद को देखा और बुदबुदाया, "ताएह्युंग, डरो मत। सितारे तभी चमकते हैं जब अंधेरा सबसे ज़्यादा होता है।"