a forest in Hindi Fiction Stories by Ganesh books and stories PDF | एक जंगल

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एक जंगल

बहुत समय पहले की बात है। ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों से घिरा हुआ एक घना और हरा-भरा जंगल था। उस जंगल में दिन में सूरज की रोशनी पत्तों के बीच से छन-छन कर नीचे आती थी और रात में चाँदनी पूरे जंगल को चाँदी की तरह चमका देती थी। यह जंगल सिर्फ पेड़ों और नदियों से नहीं बना था, बल्कि वहाँ रहने वाले जानवरों की साँसों, आवाज़ों और जीवन से बना था। यही जंगल उनका घर था, उनकी दुनिया थी।
उस जंगल में हर तरह के जानवर रहते थे। शेर, हाथी, चीता, भालू, घोड़ा, हिरण, बंदर, मोर, मोरनी, खरगोश और कई तरह के पक्षी। हर जानवर के पास अपनी-अपनी खास ताकत थी। शेर के पास उसकी दहाड़ और शक्ति थी, हाथी के पास उसका भारी शरीर और सूँड की ताकत थी, चीते के पास तेज़ दौड़ने की शक्ति थी, बंदरों के पास चतुराई और फुर्ती थी, और पक्षियों के पास उड़ने की आज़ादी थी।
लेकिन इस जंगल की एक बड़ी समस्या थी। यहाँ हर जानवर अपनी ताकत पर घमंड करता था।

शेर सोचता था कि वह सबसे ताकतवर है, इसलिए वही जंगल का असली मालिक है। वह अक्सर अपनी दहाड़ से बाकी जानवरों को डराता था। कई बार वह बिना ज़रूरत के भी शिकार कर लेता था, बस यह दिखाने के लिए कि वह राजा है। हाथी को अपनी ताकत पर गर्व था। वह सोचता था कि अगर वह चाहे तो पूरे जंगल को रौंद सकता है। चीते अपनी तेज़ी पर घमंड करते थे और कहते थे कि कोई भी उन्हें पकड़ नहीं सकता। बंदर अपनी चतुराई पर हँसते और दूसरों को मूर्ख समझते थे।

इसी घमंड के कारण जंगल में अक्सर झगड़े होते रहते थे। कभी पानी पीने की जगह को लेकर, कभी फलों वाले पेड़ को लेकर, तो कभी रास्ते को लेकर। हर कोई कहता था, “मैं ज़्यादा ताकतवर हूँ।” कोई यह नहीं सोचता था कि जंगल सबका है।

समय ऐसे ही बीत रहा था।
एक दिन आधी रात्रि जंगल में कुछ अजीब-सी आवाज़ें गूँजने लगीं। पहले किसी ने ध्यान नहीं दिया, लेकिन फिर ज़मीन काँपने लगी। धड़ाम… ठक… ठांय… पेड़ गिरने लगे। पक्षी डर के मारे उड़ने लगे। हिरण भागते-भागते हाँफने लगे। खरगोश झाड़ियों में छिप गए।
जल्दी ही सबको पता चला कि जंगल में इंसान आए हैं — शिकारी। उनके हाथों में कुल्हाड़ियाँ थीं, बंदूकें थीं और बड़ी-बड़ी गाड़ियाँ थीं। वे पेड़ों को काट रहे थे और जानवरों को पकड़ने की कोशिश कर रहे थे। उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं था कि यह जंगल किसी का घर है।
जंगल में डर फैल गया। पहली बार जानवरों को यह महसूस हुआ कि यह खतरा किसी एक के लिए नहीं, बल्कि उनकी जंगल के लिए भी है ।

छोटे जानवर एक जगह इकट्ठा हुए। वे काँप रहे थे, रो रहे थे और एक-दूसरे से पूछ रहे थे कि अब क्या होगा। किसी ने कहा, “हम भाग जाएँगे।” किसी ने कहा, “हम छिप जाएँगे।” लेकिन सब जानते थे कि अगर जंगल ही खत्म हो गया, तो वे भागकर जाएँगे कहाँ?
उन्होंने आपस में बात की, लेकिन फिर वही पुरानी बातें आने लगीं। कोई बोला, “शेर से मदद माँगो।” कोई बोला, “नहीं, वह हमें खा जाएगा।” कोई चीते को बुलाना चाहता था, तो कोई उनसे डरता था। फिर से अहंकार और डर बीच में आ गया।

एक बूढ़ा हाथी, जो बहुत कुछ देख चुका था, आगे बढ़ा। उसकी आँखों में डर नहीं, बल्कि समझ थी। उसने कहा कि आज अगर वे अपनी-अपनी ताकत और घमंड में फँसे रहे, तो कल कोई भी नहीं बचेगा। उसकी बात सुनकर सब चुप हो गए। पहली बार उन्हें लगा कि यह समय लड़ने का नहीं, सोचने का है।
आख़िरकार सबने तय किया कि उन्हें शेर,चेता और सभी जानवर के पास जाना ही होगा ।
जब सारे जानवर शेर के पास पहुँचे, तो शेर पहले की तरह गरजा। लेकिन आज उसकी दहाड़ में भी डर छिपा था। जानवरों ने उसे बताया कि शिकारी जंगल को खत्म कर रहे हैं। पहले शेर ने कहा कि वह अकेला ही सबको भगा देगा, क्योंकि वही सबसे ताकतवर है। लेकिन जब उसने दूर कटते हुए पेड़ देखे, सूनी होती ज़मीन देखी, तो उसे एहसास हुआ कि उसकी ताकत भी इस खतरे के सामने छोटी है।
शेर को पहली बार समझ आया कि जंगल रहेगा तभी वह राजा रहेगा।
धीरे-धीरे सारे बड़े जानवर भी इकट्ठा हो गए। हाथी, चीते, भालू — सब। उन्होंने एक-दूसरे की तरफ देखा। पहले जिन आँखों में घमंड था, अब उनमें चिंता थी। उन्होंने माना कि हर किसी के पास कोई न कोई शक्ति है, लेकिन अकेले-अकेले सब कमजोर हैं।
उन्होंने मिलकर योजना बनाई। हर जानवर ने अपनी ताकत जंगल के लिए दी। हाथियों ने रास्ते रोक दिए, बंदरों ने शिकारी का सामान चुरा लिया, पक्षियों ने ऊपर से चेतावनी दी, चीते तेज़ी से चारों तरफ दौड़े, और शेर सबसे आगे खड़ा हो गया।
जब शिकारी आगे बढ़े, तो उन्होंने देखा कि पूरा जंगल एक साथ खड़ा है। कोई अकेला नहीं था। जानवरों की एकता देखकर वे डर गए। उन्हें समझ आ गया कि यह सिर्फ जानवर नहीं, बल्कि एक परिवार है। वे वहाँ से भाग गए और फिर कभी उस जंगल की तरफ नहीं आए।
जंगल बच गया।

उस दिन सारे जानवर एक साथ खड़े थे। शेर ने सबकी तरफ देखकर कहा कि आज उसने सीखा कि जंगल सिर्फ ताकत से नहीं, बल्कि एकता से बचता है। फिर सब जानवर एक साथ जंगल की सीमा तक गए और दूर खड़े शिकारियों की तरफ देखकर बोले:
“हाँ, हम अपने जंगल के अंदर कभी-कभी लड़ते हैं।
और हो सकता है आगे भी लड़ते रहे पर शायद हमारी लड़ाई से कही ऊपर वो माटी है वो जंगल है जहां हम लड़ते है ।
और जब हमारे जंगल पर कोई आएगा,
तो हम सब एक साथ खड़े होंगे,
एक साथ लड़ेंगे,
और एक साथ जीतेंगे।”
उस दिन के बाद जंगल का लड़ाई तो कम नहीं हुए पर वो जंगल जरूर बच गया जहां कही पीढ़ि के सारे जानवर छोटी चोरी लड़ाई का आनंद उठाते रहे।


नैतिक शिक्षा: आपसी मतभेद छोटे होते हैं, मातृभूमि सबसे बड़ी होती है।