तबाही का शिखर हिसाब का दिन विनाशराज अघोर की मौत सिर्फ़ एक आदमी की मौत नहीं थी वह उस डर की पहली दरार थी जिस पर पूरा साम्राज्य खड़ा था जैसे ही उसकी लाश ज़मीन पर गिरी वैसे ही पूरे इलाक़े में एक अजीब सी बेचैनी फैल गई, सैनिकों की चाल बदल गई मज़दूरों की आँखों में पहली बार सवाल दिखा और महल की दीवारों के भीतर बैठा अंधकारनंद समझ गया कि खेल अब शतरंज से आगे बढ़ चुका हैइस बेचैनी को सबसे पहले महसूस किया कालसिंह तिमिरगहन ने वह आदमी जो हमेशा चुप रहता था क्योंकि उसे पता था कि शब्दों से ज़्यादा डर ख़ामोशी फैलाती है, लेकिन आज उसकी ख़ामोशी भी भारी हो रही थी उसने बिना किसी सभा के, बिना किसी चेतावनी के आदेश दे दिया और अगले ही पल साम्राज्य की खदानों में ज़ंजीरों की आवाज़ तेज़ हो गई मज़दूरों को आगे धकेला गया बंदूकें तनीं और काम का बोझ कई गुना बढ़ा दिया गयाडर के मारे कुछ मज़दूरों ने रुकने की कोशिश की किसी ने हाथ जोड़ दिए किसी ने ज़मीन की तरफ़ देखा लेकिन गोलियों की आवाज़ ने सारे सवाल ख़त्म कर दिए उस सुबह पहाड़ों की गोद में दस-पंद्रह लोग हमेशा के लिए सो गए न कोई नाम लिया गया न कोई गिनती रखी गई और साम्राज्य ने फिर साबित कर दिया कि यहाँ इंसान की कीमत पत्थर से भी कम हैउसी वक़्त उसी इलाके से थोड़ी दूर धुएँ और चीख़ों के बीच वीरान और ज़ोया छिपे हुए थे ज़ोया की मुट्ठियाँ भिंची हुई थीं और वीरान की आँखें ठंडी हालात इतने ख़तरनाक थे कि आम इंसान कांप जाए लेकिन वीरान ने हल्की सी हँसी के साथ कहा लगता है आज ज़िंदगी ने कॉमेडी शो कैंसिल कर दिया ज़ोया ने ग़ुस्से और डर के बीच जवाब दिया तू ज़िंदा रहे बस वही मेरा पंचलाइन है और उस अंधेरे में भी दोनों की आँखों में एक पल के लिए सुकून उतर आयायही उनकी मोहब्बत थी मौत के सामने भी एक-दूसरे से मज़ाक करनाकालसिंह तिमिरगहन को जब पता चला कि वीरान ज़िंदा है और उसी इलाके में है तो वह खुद मैदान में उतर आया न कोई भाषण न कोई चेतावनी बस उसकी मौजूदगी से हवा भारी हो गई सैनिक अपने आप रास्ता छोड़ते गए मज़दूर सिर झुकाते चले गए क्योंकि उन्होंने पहले भी देखा था जब कालसिंह चलता है तो कोई खड़ा नहीं रहतालेकिन इस बार सामने कोई और थावीरान आगे बढ़ा पीछे ज़ोया की आवाज़ आई अब चुप मत रहना वीरान ने कंधे उचकाकर कहा आज तो बिल्कुल नहीं और जो टकराव हुआ वह हथियारों का नहीं हिम्मत का था कालसिंह की ख़ामोशी जो सालों से लोगों को दबाती आई थी आज पहली बार टूट रही थी और जब धूल बैठी तो वह आदमी जो ख़ामोशी से मारता था उसी ख़ामोशी में ख़त्म हो चुका थामहल के भीतर बैठा अंधकारनंद सब समझ रहा था वह जानता था कि ताक़त अब काम नहीं आएगी इसलिए उसने आख़िरी चाल चली उसने पूरे साम्राज्य को जलाने का हुक्म दिया गोदामों में आग रास्तों पर विस्फोट ताकि जीत किसी की न हो, लेकिन यही उसकी सबसे बड़ी भूल थीजिन मज़दूरों को वह सालों से कुचलता आया था जिनके नाम कभी मायने नहीं रखते थे आज वही एक साथ खड़े थे डर नहीं था बस ग़ुस्सा था और वीरान ने पहली बार उन्हें सिर उठाकर खड़े होने का मौका दिया कोई भाषण नहीं बस एक इशारा और वही काफ़ी थामहल के दरवाज़े टूटे आग ने दीवारें चाट लीं और उस राख के बीच अंधकारनंद के सामने वीरान खड़ा था दोनों की आँखों में अलग-अलग युद्ध थे वीरान ने बस इतना पूछा सब हिसाब आज ही अंधकारनंद मुस्कराया हिसाब तो बहुत पहले से था लेकिन इस बार शतरंज का बोर्ड उलट चुका थाजब धुआँ छँटा तो साम्राज्य का सबसे बुद्धिमान दिमाग़ भी उसी खंडहर का हिस्सा बन चुका था न कोई ताज बचा न कोई चाल सिर्फ़ राख और ख़ामोशीतबाही के बाद सन्नाटा था हवा में बारूद की गंध ज़मीन पर टूटे हथियार और कुछ नाम जो हमेशा के लिए खो गए थे वीरान ने ज़ोया का हाथ थामा मज़ाकिया लहजे में बोला अब शायद मैं थोड़ा कम बोलूँ ज़ोया हँसी अब देर हो चुकी है और दोनों की हँसी में उन मज़दूरों की याद भी थी जो इस आज़ादी की क़ीमत बन गए थेबचे हुए लोग चुपचाप खड़े थे आज़ाद तो थे लेकिन खाली हाथ वीरान ने उनकी तरफ़ देखा और पहली बार उसकी आवाज़ में मज़ाक नहीं ज़िम्मेदारी थी डर खत्म हो गया है अब जीना सीखना होगासाम्राज्य खत्म हो चुका था डर मर चुका था लेकिन कहानी ज़िंदा थी क्योंकि जब अंधकार बहुत बढ़ जाए तो कभी-कभी हँसता हुआ एक आम आदमी ही उसे जला देता है और जब उसके साथ मोहब्बत खड़ी हो तो साम्राज्य भी राख बन जाते हैं
लेखक
मेरी कहानी जैसी भी हो आप सब पढ़ लेते हो बस यही मेरे लिए बहुत बड़ी बात है मैं कोई बड़ा लेखक नहीं हूँ बस आप सबका छोटा भाई हूँ कोशिश कर रहा हूँ कुछ अच्छा लिखने की अगर दिल करे तो एक Follow और छोटी सी Rating दे देना आप सबके प्यार और सपोर्ट से ही थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ पाऊँगा और अगर कहानी में कहीं कोई गलत शब्द या गलती हो जाए तो अपना छोटा भाई समझकर माफ कर देना