Bloodline - 1 in Hindi Mythological Stories by ABHINAVV BAJPAYI books and stories PDF | ब्लडलाइन: द फर्स्ट हेयर - 1

Featured Books
Categories
Share

ब्लडलाइन: द फर्स्ट हेयर - 1

अध्याय 1  फर्स्ट स्टेप 

अविरॉक्स भाग रहा था। उसकी सांसें बेकाबू होकर सीने को तोड़ रही थीं और पैर धीरे-धीरे जवाब दे रहे थे, लेकिन रुकना अब उसके लिए मुमकिन नहीं था। पीछे से आती आवाज़ सिर्फ आवाज़ नहीं थी, बल्कि एक ऐसा दबाव थी जो उसके दिमाग पर लगातार वार कर रही थी।


“रुक जा!”

आवाज़ फिर गूंजी, लेकिन इस बार भी उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसे पता था कि पीछे देखने का मतलब होगा अपनी रफ्तार खो देना, और इस वक्त रफ्तार ही उसकी सबसे बड़ी ताकत थी।

भागते-भागते अचानक उसका पैर एक पत्थर से टकराया। संतुलन बिगड़ा, शरीर आगे झुका और वह सीधे जमीन पर घिसक गया। गिरते ही उसका हाथ ज़मीन पर जोर से लगा… और उसी पल कुछ अजीब हुआ।

उसे महसूस हुआ कि ज़मीन ठंडी नहीं है… बल्कि गर्म है।

वह तुरंत रुक गया। उसने हाथ हटाया और ज़मीन को ध्यान से देखा—सब कुछ सामान्य था। न कोई चमक, न कोई दरार। एक पल के लिए उसे लगा शायद यह उसका भ्रम है।

“यह बस दिमाग का खेल है…” उसने खुद को समझाने की कोशिश की।

लेकिन जब उसने दोबारा हाथ ज़मीन पर रखा, तो वही गर्मी फिर महसूस हुई—इस बार पहले से ज्यादा गहरी, जैसे सतह के नीचे कुछ बह रहा हो। उसका दिल एक पल के लिए रुक गया।

“यह… क्या है?”

तभी पीछे से आती कदमों की आवाज़ अचानक बंद हो गई। चारों तरफ सन्नाटा छा गया।

अविरॉक्स धीरे-धीरे मुड़ा। सामने वही तीन लोग खड़े थे जो उसका पीछा कर रहे थे।

उनमें से एक आदमी आगे बढ़ा और ठंडी आवाज़ में बोला, “आखिर रुक ही गया।” उसकी आवाज़ शांत जरूर थी, लेकिन उस शांति के अंदर साफ़ खतरा छिपा हुआ था।

अविरॉक्स चुप रहा। उसका ध्यान अब भी उस अजीब गर्मी पर अटका हुआ था जो उसने ज़मीन में महसूस की थी।

“जवाब दे,” दूसरे ने सख्ती से कहा।

“मैंने कुछ नहीं किया,” अविरॉक्स ने सीधा जवाब दिया, हालांकि उसके दिमाग में अब भी सवाल ही चल रहे थे।

तीसरा आदमी हंस पड़ा। “सब यही कहते हैं।”

पहला आदमी उसके बिल्कुल करीब आ गया। “फोन दे।”

अविरॉक्स का हाथ अपने आप जेब की तरफ गया, लेकिन उसने तुरंत खुद को संभाला। “नहीं है,” उसने साफ झूठ बोल दिया।

एक पल का सन्नाटा छाया… और अगले ही पल एक जोरदार थप्पड़ उसके चेहरे पर पड़ा। उसका सिर एक तरफ झटक गया, मुंह में खून का स्वाद भर गया और कानों में तेज़ आवाज़ गूंजने लगी।

“झूठ बोल रहा है,” वह आदमी अब भी शांत था, जैसे यह सब उसके लिए रोज़ की बात हो।

अविरॉक्स के अंदर कुछ बदलने लगा। डर अभी भी था, लेकिन उसके नीचे दबा हुआ गुस्सा अब बाहर आने लगा था।

“मत मारो…” उसने धीरे से कहा, लेकिन इस बार उसकी आवाज़ में विनती कम और चेतावनी ज्यादा थी।

“वरना?” आदमी और करीब आ गया।

अविरॉक्स ने उसकी आंखों में देखा… और उसी पल उसे महसूस हुआ कि उसकी धड़कन बदल रही है।

वह सामान्य नहीं थी—भारी, गहरी और अजीब तरीके से शक्तिशाली।

धक… धक…

हर धड़कन उसके सिर के अंदर गूंज रही थी। उसका सीना कसने लगा।

“यह क्या हो रहा है…”

तभी तीसरा आदमी आगे बढ़ा और उसने उसका कॉलर पकड़ लिया। “हीरो बन रहा है?”

जैसे ही उसका हाथ अविरॉक्स की गर्दन के पास आया, अचानक उसके अंदर कुछ टूट गया। एक पल के लिए उसकी नजर धुंधली हुई… फिर सब कुछ असामान्य रूप से साफ दिखने लगा।

उसने बिना सोचे अपना हाथ उठाया।

और जैसे ही उसकी त्वचा उस आदमी के हाथ से छुई, एक तेज़ गर्मी सीधे उसके शरीर में दौड़ गई।

आदमी का चेहरा तुरंत बदल गया—पहले हैरानी, फिर दर्द।

“आह!” वह चीख पड़ा और तुरंत पीछे हट गया।

अविरॉक्स खुद भी चौंक गया। “यह… मैंने किया?”

उसने अपनी हथेली देखी। उसकी त्वचा के अंदर एक पतली लाल रेखा हल्के से चमक रही थी।

धक…

अब उसे साफ समझ आ गया था कि यह आवाज़ बाहर नहीं… उसके अंदर से आ रही है।

दूसरा आदमी गुस्से में आगे बढ़ा और उसने मुक्का मारा। वार लगा, लेकिन इस बार सब कुछ धीमा महसूस हुआ, जैसे समय खुद रुक गया हो।

अविरॉक्स गिरा, लेकिन इस बार उसने जानबूझकर अपना हाथ ज़मीन पर रखा।

और तभी… उसे महसूस हुआ।

ज़मीन के अंदर जैसे एक पूरा जाल था—गर्मी का, ऊर्जा का—जैसे कोई जीवित नसें उसके नीचे बह रही हों।

और जैसे ही उसने उन्हें महसूस किया, उसकी हथेली की लाल रेखा और तेज़ चमकने लगी।

“यह… जुड़ा हुआ है…” उसने खुद से कहा।

तीसरा आदमी फिर उसकी तरफ बढ़ा, लेकिन इस बार अविरॉक्स ने खुद उसका हाथ पकड़ लिया।

जैसे ही संपर्क हुआ, एक तेज़ ऊर्जा का विस्फोट हुआ। आदमी जोर से चीख उठा, उसकी त्वचा लाल पड़ गई, जैसे अंदर से जल रही हो।

बाकी दोनों डर के मारे पीछे हट गए।

अविरॉक्स का हाथ कांप रहा था, लेकिन अब वह डर नहीं था—कुछ और था।

“यह… मैं कर रहा हूं?”

सन्नाटा छा गया।

फिर अचानक उसके अंदर एक आवाज़ गूंजी—

“सक्रियण पूर्ण।”

वह ठिठक गया। “कौन है?”

“ब्लडलाइन सक्रिय।”

उसकी धड़कन अब स्थिर हो गई थी, लेकिन पहले से ज्यादा भारी और ताकतवर।

उसने अपनी हथेली को देखा—लाल रेखा अब साफ दिख रही थी, जैसे कोई निशान हो।

और उसी पल उसे समझ आया—यह शक्ति उसके पास नहीं आई… यह पहले से उसके अंदर थी। बस जागने का इंतज़ार कर रही थी।

सामने खड़े तीनों लोग अब उसे डर के साथ देख रहे थे।

अविरॉक्स ने उन्हें देखा, फिर अपने हाथ को।

“यह… मेरा है?” उसने धीरे से पूछा।

कुछ पल खामोशी रही… फिर वही आवाज़ आई—

“नहीं… तू इसका है।”

उसी पल उसकी परछाई ज़मीन पर हल्की सी हिली… लेकिन इस बार वह उसके साथ मेल नहीं खा रही थी। वह धीरे-धीरे बड़ी होने लगी, उसका आकार बदलने लगा—जैसे कोई और उसके अंदर से बाहर झांक रहा हो।

अविरॉक्स की सांसें धीमी हो गईं।

उसके दिमाग में आखिरी ख्याल उभरा—

अगर यह शुरुआत है… तो अंत कैसा होगा?

धक…

और सब कुछ अंधेरे में डूब गया।

आगे जारी है....................🪔