रात के 11 बजे थे। शहर की सड़कों पर सन्नाटा धीरे-धीरे फैल रहा था। स्ट्रीट लाइट्स की पीली रोशनी सड़क पर लंबी परछाइयाँ बना रही थी।
एक आदमी बेचैनी से सड़क किनारे टहल रहा था। उसके हाथ में फूलों का एक छोटा-सा गुलदस्ता था, लेकिन चेहरे पर खुशी नहीं, बल्कि घबराहट साफ दिखाई दे रही थी।
वह बार-बार अपनी घड़ी देख रहा था।
11:05… 11:12… 11:20…
“बस किसी तरह 12 बजे से पहले घर पहुंच जाऊं…”
वह खुद से बड़बड़ाया।
आज उसकी शादी की सालगिरह थी। सुबह से उसने बहुत प्लान किया था - डिनर, सरप्राइज़, केक… लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। उसकी गाड़ी बीच रास्ते में ही खराब हो गई थी।
अब वह सड़क पर खड़ा था - बेबस, परेशान और वक्त के खिलाफ भागता हुआ।
उसी बेचैनी में वह सड़क पार करने लगा…
और तभी -
धड़ाम!
एक कार से वह हल्के से टकरा गया।
कार तुरंत रुक गई। अंदर से एक आदमी जल्दी से बाहर निकला-
“अरे! ठीक हो आप?”
वह आदमी घबराकर बोला-
“हाँ… मैं ठीक हूँ… माफ कर दीजिए, मेरी गलती थी… दरअसल… आज मेरी सालगिरह है… और मुझे जल्दी घर पहुंचना है…”
उसकी आवाज में डर और बेचैनी दोनों थे।
कार वाले आदमी ने कुछ पल उसे देखा… फिर हल्की मुस्कान के साथ बोला -
“बैठिए… मैं आपको छोड़ देता हूँ।”
वह आदमी एक पल को चौंका, फिर राहत की सांस लेकर कार में बैठ गया।
कार धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी। कुछ पल खामोशी रही।
फिर ड्राइवर ने पूछा -
“कितने साल हो गए शादी को?”
वह आदमी हल्की मुस्कान के साथ बोला -
“आज पहला साल है… लेकिन हम एक-दूसरे को पाँच साल से जानते हैं…”
ड्राइवर ने सिर हिलाया -
“अच्छा है…”
तभी उस आदमी की नजर ड्राइवर की बगल वाली सीट पर रखे फूलों पर पड़ी।
“ये फूल… आपकी भी आज सालगिरह है क्या?”
ड्राइवर हल्का सा मुस्कुराया -
“नहीं… मैं तो ये रोज अपनी पत्नी के लिए लेकर जाता हूँ… अगर कभी देर हो जाऊँ, तो वो नाराज़ नहीं होती…”
वह आदमी हैरान रह गया -
“रोज़? आपकी पत्नी तो बहुत खुश रहती होगी…”
ड्राइवर ने सामने देखते हुए धीरे से कहा -
“हाँ… वो हमेशा खुश रहती है…”
कुछ देर बाद ड्राइवर बोला -
“मेरा घर रास्ते में ही है… अगर आपको कोई परेशानी न हो, तो मैं ये फूल देकर आ जाऊँ? ज़्यादा देर हो गई तो वो इंतज़ार करती रहेगी…”
उस आदमी ने घड़ी देखी- 11:30
“कोई बात नहीं… आप दे आइए… मेरे पास अभी समय है…”
कार एक छोटे से घर के सामने रुकी।
ड्राइवर अंदर चला गया।
वह आदमी कार में बैठा सोचने लगा -
“कैसा इंसान है ये… रोज अपनी पत्नी के लिए फूल ले जाता है… सच में प्यार ऐसा ही होता है…”
कुछ मिनट बाद ड्राइवर वापस आया।
“माफ कीजिए… आपको इंतज़ार करना पड़ा…”
वह आदमी मुस्कुराया -
“अरे नहीं, आप तो मेरी मदद कर रहे हैं… धन्यवाद तो मुझे कहना चाहिए…”
फिर उसने पूछा -
“आपके रिश्ते को कितना समय हुआ?”
ड्राइवर ने धीरे से जवाब दिया -
“छह साल…”
“वाह… और आप आज भी इतना ख्याल रखते हैं… आपकी पत्नी बहुत खुशकिस्मत है…”
ड्राइवर ने हल्की मुस्कान के साथ कहा-
“नहीं… खुशकिस्मत तो मैं हूँ…”
कुछ ही देर में कार उस आदमी के घर के बाहर रुकी।
घड़ी में 11:55 बज रहे थे।
वह जल्दी से उतरते हुए बोला -
“आपका बहुत-बहुत धन्यवाद… आपने मेरी सालगिरह बचा ली…”
ड्राइवर ने बस इतना कहा -
“जल्दी जाइए… कोई आपका इंतज़ार कर रहा है…”
वह आदमी दौड़ते हुए अपने घर की ओर चला गया।
कार अब धीरे-धीरे वापस उसी रास्ते पर मुड़ती है।
कुछ देर बाद वह फिर उसी छोटे से घर के सामने रुकती है।
ड्राइवर गाड़ी से उतरता है।
वह दरवाज़ा खोलता है…
अंदर सन्नाटा है… हल्का अंधेरा…
वह धीरे से दरवाज़ा बंद करता है और कहता है-
“माफ करना… आज फिर देर हो गई…”
उसकी आवाज़ में एक अपनापन है… जैसे कोई सच में सुन रहा हो।
वह धीरे-धीरे कमरे के अंदर जाता है…
और फिर एक जगह रुक जाता है।
दीवार पर एक फ्रेम टंगा हुआ है-
एक लड़की की मुस्कुराती हुई तस्वीर…
तस्वीर पर हार चढ़ा हुआ है।
वह कुछ पल चुपचाप उस तस्वीर को देखता है।
फिर धीरे से आगे बढ़ता है…
और अपने हाथ में पकड़े फूल तस्वीर के पास रख देता है।
उसकी आँखों में हल्की नमी है… लेकिन होंठों पर मुस्कान।
वह तस्वीर के सामने खड़ा होकर धीमे से कहता है-
“आज फिर एक साहिल को उसकी सुहानी से मिलाने गया था…”
कमरे में सन्नाटा है…
लेकिन उस सन्नाटे में भी एक गहरी मोहब्बत की आवाज़ गूंज रही है।
तस्वीर में मुस्कुराती हुई सुहानी…
और उसके पास रखे ताज़ा फूल…
मानो हर दिन वही कहानी दोहराई जाती हो-
एक अधूरी मोहब्बत… जो आज भी पूरी तरह जिंदा है।
कुछ रिश्ते खत्म होकर भी…
हर रोज़ जिंदा रहते हैं।