Episode 2: पहली टक्कर
“नागवंश की रानी… वापस आ गई…”पुजारी के शब्द अब भी सिंहा के कानों में गूंज रहे थे।
उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था।“न… नहीं… ये सब गलत है…”वह खुद से बुदबुदाई।वह तेजी से मंदिर की सीढ़ियाँ उतर गई।उसे वहाँ एक पल भी रुकना नहीं था।लेकिन जैसे ही वह बाहर निकली…हवा अचानक ठंडी हो गई।
उसने पीछे मुड़कर देखा—मंदिर बिल्कुल शांत था।जैसे कुछ हुआ ही न हो।
“क्या… ये सब सच था…?”उसके कदम खुद-ब-खुद तेज़ हो गए।
उसी समय…शहर के सबसे आलीशान इलाके में—मल्होत्रा मेंशन।जहाँ हर चीज़ पर रौब था…और हर कोने में ताकत का अहसास।
लेकिन आज…उसमेंशन में बेचैनी थी।“डॉक्टर! कुछ कीजिए…”एक नौकर घबराकर बोला।
कमरे के अंदर…अहान वीर मल्होत्रा अपनी दादी के पास खड़ा था।उसकी मुट्ठियाँ कस चुकी थीं।
डॉक्टर ने गहरी सांस ली—“उनकी हालत बहुत नाज़ुक है…”“अगर इन्हें जीना है… तो इन्हें emotional support चाहिए…”अहान की आँखें ठंडी हो गईं—“मतलब?”“मतलब… इन्हें कोई ऐसा चाहिए…जो इन्हें जीने की वजह दे सके…”अहान कुछ सेकंड तक चुप रहा।
उसे जवाब पता था…लेकिन वह उसे मानना नहीं चाहता था।“अहान…”दादी की धीमी आवाज आई।वह तुरंत उनके पास बैठ गया।“हाँ दादी…”दादी ने कमजोर मुस्कान दी—“मुझे… अपनी बहू देखनी है…”अहान का दिल जैसे रुक गया।“दादी… अभी ये बात…”“वादा करो…”दादी ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“तुम शादी करोगे…”अहान की आँखों में संघर्ष साफ दिख रहा था।एक तरफ उसका वादा…दूसरी तरफ उसकी जिद—ब्रह्मचर्य।
उसने धीरे से कहा—“मैं… कोशिश करूँगा…”लेकिन दिल के अंदर आवाज आई—“कभी नहीं…”उसी समय…सिंहा अपने घर पहुँची।उसका दिमाग अभी भी उसी घटना में उलझा था।“दीदी… आप ठीक हो?”आत्या ने पूछा।सिंहा ने सिर हिलाया—“हाँ…”लेकिन उसकी आवाज में भरोसा नहीं था।उसे अब भी महसूस हो रहा था—जैसे कोई उसे देख रहा हो।जैसे उसकी जिंदगी बदलने वाली हो।
रात को…राघव मौर्यवंशी गंभीर बैठे थे।“सिंहा…”उन्होंने धीमी आवाज में कहा—“हमें पैसों की बहुत जरूरत है…”सिंहा चौंक गई—“क्या हुआ पापा?”राघव ने नजरें झुका लीं—“कर्ज बहुत बढ़ गया है…”“अगर हमने जल्द कुछ नहीं किया…तो हम सब खो देंगे…”सिंहा के हाथ ठंडे पड़ गए।उसके पास कोई रास्ता नहीं था।
तभी—दरवाजे पर दस्तक हुई।एक आदमी खड़ा था।“मल्होत्रा मेंशन से आया हूँ…”सिंहा और राघव दोनों चौंक गए।“हमें एक केयरटेकर चाहिए…”“अहान मल्होत्रा की दादी के लिए…”सिंहा ने तुरंत पूछा—“और सैलरी?”आदमी ने जो रकम बताई…वह सुनकर दोनों चौंक गए।
इतनी बड़ी रकम…उनकी सारी समस्याएँ खत्म कर सकती थी।सिंहा कुछ सेकंड तक चुप रही।फिर उसने धीरे से कहा—“मैं तैयार हूँ…”उसे नहीं पता था…कि यह फैसला उसकी पूरी जिंदगी बदल देगा।
अगली सुबह…मल्होत्रा मेंशन के सामने खड़ी सिंहाकुछ पल के लिए रुक गई।इतना बड़ा घर…उसने पहले कभी नहीं देखा था।उसने गहरी सांस ली…और अंदर कदम रखा।जैसे ही वह अंदर आई—उसे एक अजीब सा एहसास हुआ।जैसे यह जगह…उसे पहचानती हो।
तभी…सीढ़ियों से कोई नीचे उतर रहा था।उसकी चाल में रौब था…और आँखों में ठंडा आत्मविश्वास।वह था—अहान वीर मल्होत्रा।दोनों की नजरें टकराईं।
और कुछ सेकंड के लिए…समय जैसे थम गया।अहान ने उसे ध्यान से देखा।“ये वही लड़की है…”उसके दिमाग में आवाज गूंजी।सिंहा ने भी उसे देखा।
दिल में अजीब सी हलचल हुई।लेकिन अगले ही पल—अहान का चेहरा सख्त हो गया।
“तुम नई केयरटेकर हो?”उसकी आवाज ठंडी थी।सिंहा को उसका अंदाज बिल्कुल पसंद नहीं आया।“जी… और आप?”अहान हल्का सा मुस्कुराया—“तुम्हारा बॉस।”सिंहा ने तंज में कहा—“ओह… attitude भी job description में आता है क्या?”पीछे खड़े बिहान और सोनू हँसी रोकने लगे।
अहान की आँखों में हल्की सी चमक आई।किसी ने पहली बार उससे इस तरह बात की थी।
“काम पर ध्यान दो…”“बाकी बातें बाद में।”सिंहा ने बिना झुके जवाब दिया—“मुझे काम करना आता है…डरना नहीं।
”दोनों के बीच पहली टक्कर हो चुकी थी…और यह टक्कर…आगे चलकर उनकी किस्मत बदलने वाली थी…
रात का समय…
मल्होत्रा मेंशन की लंबी गलियाँ
खामोशी में डूबी हुई थीं।
हर तरफ सन्नाटा था…
सिर्फ घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे रही थी।
सिंहा धीरे-धीरे दादी के कमरे में दाखिल हुई।
उसने हल्के से दरवाज़ा बंद किया।
दादी गहरी नींद में थीं।
सिंहा उनके पास बैठ गई।
उसकी आँखों में थकान थी…
लेकिन मन अब भी बेचैन था।
“ये सब क्या था…?”
वह खुद से बुदबुदाई।
मंदिर…
वो साँप…
पुजारी की बातें…
सब कुछ जैसे एक पहेली बन गया था।
उसी समय…
कमरे की खिड़की के पास
हल्की सी सरसराहट हुई।
सिंहा चौकन्नी हो गई।
उसने धीरे से सिर उठाया—
“कौन है…?”
कोई जवाब नहीं।
लेकिन…
हवा में एक अजीब सी हलचल थी।
जैसे कोई वहाँ मौजूद हो…
पर दिख नहीं रहा।
सिंहा धीरे-धीरे उठी।
उसके कदम अपने आप खिड़की की तरफ बढ़ने लगे।
जैसे कोई उसे खींच रहा हो।
उसने खिड़की के पास जाकर बाहर झाँका—
अंधेरा।
सिर्फ अंधेरा।
लेकिन अचानक…
उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक आई।
कुछ सेकंड के लिए…
उसकी पुतलियाँ हल्की सुनहरी हो गईं।
और उसी पल—
उसके दिमाग में एक आवाज गूँजी—
“सत्यवर्ता…”
सिंहा का शरीर सिहर उठा।
“नहीं…!”
उसने तुरंत पीछे हटते हुए कहा।
उसकी साँसें तेज हो गईं।
उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।
“मैं… मैं पागल हो रही हूँ क्या…?”
उसने अपने सिर को पकड़ा।
तभी—
दरवाज़ा खुला।
अहान अंदर आया।
सिंहा एकदम चौंक गई।
“आप…?”
अहान ने उसे गौर से देखा।
उसकी नजरें कुछ ढूँढ रही थीं।
“तुम अभी तक सोई नहीं?”
उसकी आवाज शांत थी…
लेकिन आँखों में सवाल थे।
सिंहा ने खुद को संभालते हुए कहा—
“मैं… दादी का ध्यान रख रही थी…”
अहान धीरे-धीरे उसके पास आया।
उसने कमरे के चारों तरफ नजर दौड़ाई।
उसे अजीब सा महसूस हो रहा था।
जैसे अभी-अभी यहाँ कुछ हुआ हो…
लेकिन सब कुछ सामान्य दिख रहा था।
“तुम हमेशा इतनी… खोई-खोई रहती हो?”
उसने अचानक पूछा।
सिंहा ने भौंहें चढ़ाईं—
“मतलब?”
“मतलब…”
अहान ने हल्की मुस्कान दी—
“कभी मंदिर में… कभी यहाँ…
जैसे तुम कहीं और हो…”
सिंहा कुछ सेकंड चुप रही।
उसके पास जवाब नहीं था।
“आपको शायद गलतफहमी हो रही है…”
उसने धीरे से कहा।
अहान ने उसकी आँखों में देखा।
उसे लगा जैसे वह कुछ छुपा रही है।
लेकिन क्या…?
वह समझ नहीं पा रहा था।
तभी…
दादी ने हल्की सी आवाज दी—
“अहान…”
दोनों तुरंत उनकी तरफ मुड़े।
अहान उनके पास गया—
“हाँ दादी…”
दादी ने धीमी आवाज में कहा—
“ये लड़की… अच्छी है…”
सिंहा चौंक गई।
दादी ने उसका हाथ पकड़ लिया—
“इसे मत जाने देना…”
अहान ने हल्का सा सिर हिलाया—
“ठीक है…”
लेकिन उसके दिमाग में सवाल अब भी घूम रहे थे।
कमरे से बाहर निकलते हुए…
अहान एक पल के लिए रुका।
उसने पीछे मुड़कर सिंहा को देखा।
वह अब भी दादी के पास खड़ी थी।
शांत…
लेकिन रहस्यमयी।
“ये लड़की…”
उसने मन ही मन कहा—
“साधारण नहीं है…”
लेकिन यह “असाधारण” क्या था…
वह अभी समझ नहीं पा रहा था।
उसी समय…
मेंशन के बाहर…
एक काली परछाई खड़ी थी।
उसकी आँखों में खतरनाक चमक थी।
वह खिड़की की तरफ देख रहा था—
जहाँ अभी-अभी सिंहा खड़ी थी।
“तो… तुम यहीं हो…”
उसने धीमे से कहा।
उसकी मुट्ठी में एक काला पत्थर चमक रहा था।
“नागमणि…”
उसकी आवाज ठंडी थी—
“इस बार…
तुम मुझसे बच नहीं पाओगी…”
उसने हल्की सी हँसी छोड़ी—
“और जब तक वो लड़का…”
“तुमसे प्यार करेगा…”
“मैं अपना खेल पूरा कर चुका होऊँगा…”
अंदर…
सिंहा खिड़की के पास खड़ी थी।
उसे फिर वही एहसास हुआ—
जैसे कोई उसे देख रहा हो।
उसने धीरे से बाहर देखा…
लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
फिर भी…
उसका दिल कह रहा था—
खतरा बहुत करीब है…
और इस बार—
यह सिर्फ उसका नहीं…
बल्कि उस हर इंसान का था…
जो उसकी जिंदगी से जुड़ने वाला था।
और सबसे ज्यादा—
अहान वीर मल्होत्रा का…
जिसे अभी तक यह नहीं पता था…
कि वह किस तूफान में कदम रखने वाला है…
Hello buddies ☺️✋कैसे हो आप सभी
आशा करती हूं सब ठीक होगे।
वैसे ये मेरा सीरीज नागमणी की श्रापित नाग रानी का दूसरा एपिसोड है।
अगर पसंद आए तो प्लीज़ फॉलो कर ले। और प्लीज़ अच्छे अच्छे रिव्यू दे मुझे हेल्प होगा।
क्यों कि आगे ऑर भी कई नए नए ट्विस्ट आने वाले है।
वैसे तब तक के लिए धन्यवाद दोस्तो।
Take care all of you ☺️
Have a great day
Be healthy and happy
कान्हा आप सभी को ढेर सारी खुशियां दे और स्वस्थ रखे ।
मेरा ढेर सारा प्यार buddies ☺️❤️
By piyu 7soul ❤️📘📖📝