वेब सीरीज :_शबद
एक अनदेखी, अद्भुत, रोचक कहानी
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यह कहने में कोई संकोच नहीं कि पंजाब में पिछले कुछ वर्षों में बेहतरीन और सलीके वाली कहानियां,वेबसीरीज और फिल्मों के माध्यम से सामने आ रही हैं। फिर टब्बर हो,जिसमें सामान्य व्यक्ति, पवन मल्होत्रा और उसके परिवार के पीछे पड़े माफिया की कहानी थी। योर ऑनर हो,जिसमें जिम्मी शेरगिल ने बेहतरीन ढंग से परिवार और कोर्ट में उलझे जज का किरदार निभाया,कोहरा हो जो विगत वर्ष टॉप पर रही वेब सीरीज थी,जिसमें सुविंदर विक्की,की खामोश बेहतरीन अभिनय से एक अधेड़ कॉप के किरदार को अमर बना दिया था। वरुण सोबती ने भी अपने बेहद स्वाभाविक अभिनय से दिल जीता।इतनी लोकप्रिय हुई कि अभी नेटफ्लिक्स पर इसका दूसरा सीज़न आया।
ऐसे ही शबद ,रीत और परम्परा, वेब सीरीज (z फाइव) पर उन्हीं ऊंचाइयों को छूती है।
निर्देशक अमित गुप्ता ने पिता ,सुविंदर विक्की,पुत्र मिहिर आहूजा के माध्यम से उस क्षेत्र की कहानी कही है जिसे हम हर शहर,कस्बे में रोज देखते हैं। लेकिन कभी उनके बारे में नहीं सोचते।उनके परिवार,भावी पीढ़ी की सोच,दिक्कतों को हम कभी जानते भी नहीं। उन लोगों की कहानी बड़े ही सलीके और सुंदर ढंग से इस वेब सीरीज में आई है।
कथा ,पटकथा और अभिनय
--------------------------------------पिता पुत्र की कशमकश कहां नहीं होती? सभी ने महसूस की है। उसमें भी सामान्यतः समय के साथ समस्याएं हल होती हैं या पिता पुत्र दोनों तनाव झेलते हैं। लेकिन शबद में मानो उस खूबसूरत रिश्ते को नए और बेहद सशक्त बैकग्राउंड से उभारा गया है।
कहानी है ग्रंथी हरमिंदर सिंह की,जो गुरुद्वारे में शबद,गुरुवाणी का पाठ सुनाते हैं,भजन गाते हैं। उनके परिवार में तीन पीढ़ियों से यह परंपरा है। उनके दादा जी ने पिता को और पिता ने हरमिंदर को बचपन से रियाज करवाके संगीत और गायन की शिक्षा दी। यह पंजाब में ही लोक संगीत और वाद्य यंत्रों का इतना अच्छा और बेहतरीन उपयोग कैसे होता है? शायद यह सब प्रकृति का परिणाम है।क्योंकि वहां पांच नदियों और उपजाऊ भूमि से अच्छी फसलें,खुशहाली और उन्नति आम राज्यों से अधिक है। जब व्यक्ति कमाने खाने से निश्चित होता है तो वह संगीत और लोक पर बेहतर करता है।
पर यहां शबद संगत के मुख्य रागी, हरमिंदर उम्र के पचास पार कर चुके हैं, चाहते हैं अपने बारहवीं में पढ़ रहे बेटे से की वह राग,संगत को सीखे,रियाज करें। किशोर बेटे का रुझान फुटबॉल खेलने और जिंदगी में आगे अपने सपनों को ले जाने का है।
यह सब बहुत खूबसूरती से पहले एपिसोड में ही निर्देशक दिखा और समझा देते हैं। सुविंदर विक्की अपनी धीर गम्भीर चेहरे और आंखों से अभिनय करते हुए एक ग्रंथी की तरह जब संगत गाते हैं तो आप तय नहीं कर सकते कि यह अभिनय कर रहे हैं या सच में रागी ,जत्थेदार हैं।
कहानी आगे बढ़ती है क्योंकि बहुत से रागी अन्य व्यवसाय में सेवा देकर अपना परिवार चलाते हैं। रागी जी एक बैंक में सीनियर क्लर्क हैं ,प्रमोशन होने वाला होता है पर नए खून के नाम पर उनसे जूनियर को मैनेजर बना दिया जाता है।
वह आते ही इस बात पर एतराज करता है कि हफ्ते में दो दिन आप गुरुद्वारे में शबद संगत के लिए बैंक से पांच बजे क्यों चले जाते हो? वह बड़ी बेरुखी से देर तक हरविंदर को रोकता है।परिणामत वह गुरुद्वारे देर से पहुंचते हैं तो वहां उनकी ,मुख्य रागी की गद्दी पर निगाह गाड़े बैठा बंदा अपने भतीजे को मौका दे देता है। "आपके बाद अब यह युवा ही विरासत संभालेंगे।"
रागी के चेहरे के बेबसी,दिल की टूटन और नाकामी के भाव सुविंदर बिना शब्दों के जो अभिव्यक्त करते हैं,वह उन्हें बहुत ऊंचे दर्जे का अभिनेता सिद्ध करता है।
उधर पुत्र को बोलने में हकलाहट है तो वह शबद गाना नहीं चाहता। साथ ही स्कूल फुटबॉल टीम के साथी उसका मजाक बनाते हैं। वह किस तरह स्कूल के साथियों के मध्य अपनी सामान्य जिंदगी जीने की कोशिश करता है तो उसे टीम में पीछे कर दिया जाता है। क्योंकि कोई कह देता है कि यह तो गुरुद्वारे में संगत करेगा ,फुटबॉल नहीं खेलेगा। मिहिर आहूजा ने हकलाने से लेकर अपने द्वंद को बखूबी दर्शाया है।लगता ही नहीं वह अभिनय कर रहा बल्कि मानो वह उसी पात्र को जी रहा होता है। यह निर्देशक अमित गुप्ता का कमाल है जो इतने बेहतर अभिनय अपने पात्रों से करा सके।
बीवी बच्चों के साथ किस तरह हमारी सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक परंपरा को संभालने में किस किस तरह की मुश्किलें और बाधाएं आती हैं यह चीज उभरकर सामने आती है।देश के हर कस्बे,शहर में गुरुद्वारे हैं,जिनमें शबद कीर्तन हर हफ्ते होता है।कुछ शहरों और महानगरों में तो चार से दस जगह होता है। तबले, ढोलक,हारमोनियम और रागी जैसे परिश्रमी लोग पीढ़ियों से यह गुरुसेवा,समाज के हर वर्ग की सेवा करते हुए अपने पूरे जीवन को होम कर देते हैं।देश में लाखों की संख्या में हैं जो सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे,खामोशी से धर्म के नाम पर। इन्हें सरकार की तरफ से कोई भत्ता,तनख्वाह नहीं मिलती जिस तरह मंदिरों,मस्जिदों,मदरसों को मिलती है।कुछ अपवाद हो सकते हैं। सिख कौम स्वाभिमानी है तो वह कभी डिमांड भी नहीं करती।
इस पूरे परिवेश और लोगों की बानी को स्वर देना और सलीके से पर्दे पर उतारते हैं निर्देशक और कथाकार।
निर्देशन,कहानी कहने का सलीका
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यह आज के हर उस कौम की कथा, विवशता,मजबूरी है जो संस्कृति औद जड़ों से जुड़ी हुई तो है पर साथ साथ उत्तर उत्तर आधुनिकतावाद की आंधी,बाजारवाद उसे उड़ाए जा रहा है।
अमित गुप्ता को अच्छी तरह लिखी पटकथा मिली जिसमें कहीं भी कोई लूप होल नहीं।
अन्यथा तख्त साहब की बंदगी और गुरुवाणी पीढ़ियों से गा रहे कलाकारों के विषय में कहानी लिखना,फिल्माना बहुत मुश्किल होता है। बेहतरीन संवाद,अभिनय और खूबसूरत फोटोग्राफी ने शबद वेब सीरीज को बहुत उम्दा बना दिया है।
किस तरह तीन पीढ़ियों से शबद,गुरुवाणी गा रहे परिवार का लड़का,फुटबॉल खेलना चाहता है। पिता जोर देता है कि वह संगीत सीखे ,गुरुबाणी गाए,फुटबॉल में जिले स्तर का खिलाड़ी होने पर भी ,अपना समय खराब न करे।
सुविंदर सुक्खी ,इस अभिनेता की खोज खोजकर फिल्में,वेब सीरीज देखें तो पाएंगे बहुत महीन,बारीक और संतुलित अभिनेता है। आंखों,भाव और बॉडी लैंग्वेज से अभिनय करता है । कोहरा वेब सीरीज अपने कंटेंट और सुविंदर के अभिनय से सुपरहिट हुई थी।
अमित गुप्ता अपने निर्देशन में दिखाते हैं कि हर कोई स्याह नहीं होता तो उजला भी नहीं होता। वाहेगुरु अपनी गुरबाणी गाने वाले बंदे को हर कष्ट देता है।उसकी बैंक की नौकरी में प्रमोशन नहीं मिलता,नया जूनियर बॉस उसे तंग करता है।जब वह उसके मातहतों को सस्पेड करता है तो अकेला यह गुरुबाणी गाने वाला बंदा साहब से बहस,अपने तर्क देकर उसका सस्पेंशन रद्द कराता है। फिर उसने घर में बेटा नाखुश है फुटबॉल या गुरुवाणी में।
पर वह धैर्य ,समर्पण और ईश्वर में आस्था से अपने पथ से विचलित नहीं होता। बेटे को भी समझने को उसकी पत्नी ,जिन्होंने बहुत अच्छा काम किया है,कहती है। वह कोशिश करता है,स्पोर्ट्स शू बेटे को लाकर देता है।उधर बेटे के रोल में मिहिर ने खिलाड़ी और संगीत गायन के साथ स्कूल के तंग करने वाले लोगों को भी झेलने की मुश्किल भूमिका निभाई है।
धीरे धीरे किस तरह चीजें हल होती हैं ।मुख्य ग्रंथि भी सहयोग करते हैं।बेटा संगीत में शबद गाता है पर छोटी बहन को शबद गाने के लिए पिता आगे ले आते हैं। बेटा भी खुश,कार्य भी हुआ और बिटिया भी संगत में गुरुबाणी गाएगी।
सीरीज की खासियत है इसकी अच्छी एडीटिंग,बढ़िया दृश्य और खूबसूरत लोकेशन।
यह सीरीज सीहोर ,मध्यप्रदेश के आसपास फिल्माई है । पूरे पंजाब को दिखाने के लिए जो फूहड़ तरीके व्यवसायिक फिल्में लगाती हैं वह निर्देशक ने यहां नहीं लगाए। न बल्ले बल्ले,न शराब,सिगरेट,गालियां न ओवर एक्टिंग । किस तरह सहज,सामान्य ढंग से भी उस प्रदेश के माहौल को उभारा जा सकता है,यह इससे सीखा जा सकता है।
एक अच्छी,सपरिवार देखने वाली वेब सीरीज जो आपको बिलकुल निराश नहीं करती।
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(डॉ संदीप अवस्थी,आलोचक और पटकथा लेखक
7737407061,8279272900)