She lived in Hindi Drama by Renu Chaurasiya books and stories PDF | वो जी गयी

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वो जी गयी

1970 में मध्यप्रदेश के एक छोटे से कस्बे में सुबह 5 बजे श्री राम जी के घर एक पुत्री का जन्म हुआ।कन्या देखने में बहुत ही सुंदर और स्वस्थ थी।जब उसका जन्म हुआ, तो श्री राम जी बहुत खुश हुए। उन्हें अपनी बेटी में देवी का रूप दिखाई दिया।परंतु उनकी पत्नी और उनकी माँ उदास हो गईं। वे अपनी पहली संतान के रूप में लड़की नहीं चाहती थीं।श्री राम जी की माँ को तो जैसे सदमा लग गया हो। उनके लिए यह लड़की मानो उनके बेटे के सिर पर बोझ बनकर आई थी।श्री राम जी ने उन्हें बहुत समझाया कि लड़कियाँ तो देवी का रूप होती हैं।वे कहते थे,"हर कोई नहीं मानता, पर लड़कियाँ खास होती हैं। उन्हीं की वजह से यह संसार चलता है।"उन्होंने बहुत समझाने की कोशिश की, पर उनकी माँ को यह बात समझ नहीं आई।उन्हें वह बच्ची बिल्कुल भी पसंद नहीं थी।फिर भी, श्री राम जी ने हार नहीं मानी और तब तक समझाते रहे, जब तक उनकी माँ ने बच्ची को घर में रखने का फैसला नहीं किया।श्री राम जी अपनी बेटी से बहुत प्यार करते थे,लेकिन उसकी माँ उसे बिल्कुल भी पसंद नहीं करती थी।श्री राम जी अपनी बेटी को राजकुमारी की तरह पालते थे।वह उनकी आँखों का तारा थी। उन्होंने उसका नाम रानी रखा।नाम तो उसका रानी था,पर उसके हाथों में झाड़ू थी।वह अभी ठीक से बड़ी भी नहीं हुई थी कि उसके नाज़ुक कंधों पर घर के कामों का बोझ आ गया।धीरे-धीरे रानी बड़ी होने लगी।वह अपने पिता की लाडली थी,पर उसकी दादी और माँ उसे पसंद नहीं करती थीं।रानी के जन्म के बाद उसके माता-पिता के दो बेटों का जन्म हुआ।जब रानी स्कूल जाने लायक हुई,तो श्री राम जी उसे पढ़ाने के लिए स्कूल भेजना चाहते थे।पर उसकी माँ को यह बिल्कुल मंजूर नहीं था।उन्हें लगता था कि लड़कियाँ पढ़-लिखकर क्या करेंगी?और अगर रानी स्कूल जाएगी, तो उसके भाइयों को कौन संभालेगा?घर के कामों में हाथ कौन बँटाएगा?इसलिए दादी ने उसे स्कूल जाने नहीं दिया।उन्होंने उसे घर के काम सिखाने शुरू कर दिए।उनका कहना था कि लड़की को घर के काम ही सीखने चाहिए,ताकि ससुराल में काम आए।श्री राम जी अपनी माँ के इस फैसले से बिल्कुल खुश नहीं थे,पर वे कुछ कर नहीं सकते थे।रानी सुबह से शाम तक घर का काम करती और अपने भाइयों को संभालती।जब श्री राम जी काम से लौटते, तब तक रात हो जाती थी।उस समय उनकी माँ सो चुकी होती थी,तब श्री राम जी अपनी बेटी को प्यार से घर पर ही पढ़ना-लिखना सिखाते।रानी बहुत होशियार और समझदार थी।वह अपने पिता की सिखाई बातें एक ही बार में याद कर लेती थी।धीरे-धीरे समय बीतता गया और रानी 9 साल की हो गई।अब दादी को उसकी शादी की चिंता सताने लगी।उन्हें ऐसा लगने लगा जैसे रानी 9 नहीं, बल्कि 29 साल की हो गई हो।वे कहती थीं कि अगर अभी उसकी शादी नहीं की,तो समाज में उनका मान-सम्मान नहीं रहेगा।दादी ने अपने बेटे पर दबाव डालना शुरू कर दिया।श्री राम जी अपनी बेटी की इतनी जल्दी शादी नहीं करना चाहते थे,पर वे अपनी माँ के सामने कुछ बोल नहीं पाए।उनकी माँ ने साफ कह दिया कि अगर एक साल के अंदर रानी की शादी नहीं हुई,तो वह घर छोड़कर हरिद्वार चली जाएँगी।इस बात के बाद श्री राम जी चुप हो गए।एक तरफ उनकी माँ थीं, जिन्होंने उन्हें पाला-पोसा था,और दूसरी तरफ उनकी बेटी।आखिरकार उन्होंने अपनी माँ को चुन लिया।अगले दिन दादी ने रिश्तेदारों को बुलाकर रानी के लिए रिश्ता ढूंढना शुरू कर दिया।उन्होंने रानी का घर से बाहर निकलना भी बंद कर दिया।वे चाहती थीं कि रानी खेल-कूद छोड़कर पूरी तरह घर संभालना सीख ले।9 साल की उम्र में रानी ने पढ़ाई और खेल के अलावा सब कुछ सीखा।उसके छोटे से जीवन पर जिम्मेदारियों का भारी बोझ डाल दिया गया।कुछ ही समय में रानी का रिश्ता तय हो गया।श्री राम जी इस रिश्ते के खिलाफ थे,पर दादी को जल्दी शादी करनी थी।उन्होंने यह भी नहीं देखा कि लड़का कैसा है और क्या करता है।जिस लड़के से रानी की शादी तय हुई, उसकी उम्र लगभग 15 साल थी।वह एक साधारण परिवार से था।वह पढ़ाई के साथ मजदूरी भी करता था और आगे चलकर राजमिस्त्री बनना चाहता था।कुछ दिनों बाद रानी की शादी हो गई।और वह अपने ससुराल चली गई।वह केवल 9 साल की थी।एक अनजान जगह, अनजान लोगों के बीच,रानी ने अपनी नई जिंदगी शुरू की।रानी ससुराल के सभी काम हँसते-हँसते करती थी।वह हर जिम्मेदारी को अपना कर्तव्य समझकर निभाती थी।इन सब के बीच एक अच्छी बात यह हुई कि उसे अपने पति के रूप में एक सच्चा दोस्त मिला।उसका पति उसे पढ़ाता था।वह मानता था कि लड़का हो या लड़की, पढ़ाई पर सबका बराबर अधिकार है।रानी उसके साथ खेलती, हँसती, गाती और नाचती थी।वह बहुत खुश रहने लगी थी।उसे अपने पति के साथ वह सुकून मिला,जो उसे पिछले 9 सालों में कभी नहीं मिला था।पर समय ने उसके लिए कुछ और ही सोच रखा था।तीन साल बाद, एक बारिश के दिन,रानी की दुनिया उजड़ गई।उसका पति, जो मजदूरी कर रहा था,बारिश के कारण छत से फिसलकर नीचे गिर गया।नीचे लोहे की छड़ों और कंक्रीट पर गिरने से उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।उधर रानी शाम तक उसका इंतजार करती रही।उसका मन बहुत बेचैन था।बार-बार उसके मन में डर के विचार आ रहे थे।वह बार-बार दरवाजे की ओर देख रही थी।जब ससुराल वालों को बेटे की मौत का पता चला,तो उनके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।पर सबसे बुरा हाल रानी का था।उसने अपने पति के रूप में अपना आखिरी सहारा खो दिया था।उसी समय वह दो महीने की गर्भवती भी थी।पति की मृत्यु के बाद ससुराल वालों का व्यवहार बदल गया।वे रानी को ही दोष देने लगे।उसे डायन कहा गया।उसे मारा-पीटा गया और घर से निकाल दिया गया।यह तक नहीं देखा गया कि वह गर्भवती थी।उसकी सास ने उसके पेट पर लात मारी,जिससे उसका गर्भपात हो गया।रानी खून से लथपथ दरवाजे के बाहर पड़ी रही।दो दिनों तक वह वहीं पड़ी रही,पर किसी ने दरवाजा नहीं खोला।आखिरकार वह किसी तरह अपने पिता के घर पहुँचीऔर दरवाजे पर ही बेहोश हो गई।जब उसके पिता ने उसे इस हालत में देखा,तो तुरंत अस्पताल ले गए।वहाँ पता चला कि उसका गर्भपात हो चुका था।जब दादी को यह सब पता चला,तो उन्होंने फिर से रानी को अशुभ मान लिया।वे उसे घर में रखने के खिलाफ थीं।इस बार श्री राम जी अपनी बात पर अड़े रहे।उन्होंने कहा कि या तो रानी घर में रहेगी,या फिर वे उसे पढ़ने के लिए छात्रावास भेजेंगेवह रानी को अपने घर में नहीं रखना चाहती थी।उसे लगता था कि रानी एक डायन है, जिसने अपने पति को खा लिया और अब वह अपने आसपास के लोगों को भी नुकसान पहुँचाएगी।वह जोर-जोर से चिल्लाते हुए कहने लगी—"यह डायन है! इसने पहले अपने पति को खा लिया और अब अपने बच्चे को भी नहीं छोड़ा।""अगर यह हमारे घर में रही, तो अपने भाई-बहनों को भी खा जाएगी।""अगर यह हमारे साथ रही, तो पता नहीं और क्या होगा?""मैंने तो पहले ही कहा था कि इस लड़की को पैदा होते ही मार देना चाहिए,पर तुमने मेरी एक बात नहीं सुनी।""मैं जानती थी, यह डायन कुछ न कुछ जरूर करेगी।"वह किसी भी कीमत पर रानी को घर से निकालना चाहती थी।इस बार रानी के पिता ने जिद पकड़ ली।उन्होंने साफ कह दिया—"या तो रानी इसी घर में रहेगी, या मैं उसे पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाऊँगा।"रानी के पिता ने उसका स्कूल में दाखिला करवायाऔर उसे छात्रावास में भी भेज दिया।श्री राम जी ने अपनी माँ से तो लड़ाई जीत ली,पर समाज के ठेकेदारों—रिश्तेदारों—से लड़ना इतना आसान नहीं था।एक ऐसी लड़की, जिसका पति मर चुका हो,उसे स्कूल जाने का भी अधिकार नहीं माना जाता था।लोग उसे तरह-तरह के ताने मारते,गंदी बातें कहते,उसे छेड़ते, उसका पीछा करते,और उसके चरित्र पर उंगली उठाते।उसे बदचलन, चरित्रहीन, कुलटा जैसे शब्दों से पुकारा जाता।पर रानी इन सबके बावजूद आगे बढ़ती रही।धीरे-धीरे वह पढ़ाई में आगे बढ़ने लगी।उसे पढ़ने का बहुत शौक था।उसके पिता ने हर तरह से उसका साथ दिया।लेकिन उसकी दादी और माँ को यह सब बिल्कुल पसंद नहीं था।उन्हें यह अच्छा नहीं लगता था कि एक लड़की अकेली छात्रावास में रहे।वे बार-बार उसे घर बुलाने और पढ़ाई छुड़ाने की कोशिश करतीं।रानी पर बहुत अत्याचार किए जाते थे।वह घर का सारा काम करके स्कूल जाती,और वापस आकर फिर से काम में लग जाती।इसके बाद भी उसकी दादी उसे बचा-खुचा खाना ही देती थी।कई बार तो सिर्फ गिनकर सूखी रोटियाँ ही दी जाती थीं।फिर भी रानी बिना किसी शिकायत के सब कुछ सह लेती थी।जो भी काम उसे दिया जाता, वह बिना हिचकिचाहट के कर देती थी।उसने कभी किसी की बात का बुरा नहीं माना।उसके लिए उसके पिता की बात ही आशीर्वाद थी।वह उनकी हर बात मानती थी।धीरे-धीरे 8 साल बीत गए,और रानी ने हाई स्कूल पास कर लिया।हाई स्कूल के बाद वह आगे पढ़ना चाहती थी,पर उसकी दादी फिर से उसकी शादी कराने की जिद पर अड़ गई।लेकिन इस बार श्री राम जी ने हार नहीं मानी।उन्होंने बिना किसी को बताए रानी का नर्सिंग कॉलेज में दाखिला करवा दियाऔर उसे कॉलेज के हॉस्टल में भेज दिया।यहीं से रानी ने अपने करियर की शुरुआत की।कुछ सालों बाद रानी एक स्टाफ नर्स बनकर घर लौटी।श्री राम जी की खुशी का ठिकाना नहीं था।उनके समाज में वह पहली लड़की थी, जो नर्स बनी थी।दादी भी खुश थी—लेकिन इसलिए नहीं कि रानी ने कुछ हासिल किया था,बल्कि इसलिए कि अब उसकी दोबारा शादी करवाई जा सकती थी।दादी ने फिर से रिश्तेदारों में रानी के लिए रिश्ता ढूंढना शुरू कर दिया।एक आदमी था—जिसकी उम्र रानी के पिता से थोड़ी ही कम थी,और वह एक पुलिसवाला था।दादी उसे अच्छे से जानती थी,और उन्होंने उसी से रानी की शादी तय कर दी।इस बार रानी के पिता ने एक शर्त रखी—"मैं अपनी बेटी की शादी तभी करूँगा,जब आप उसे आगे नौकरी करने देंगे।"उस आदमी ने जवाब दिया—"हमें कोई परेशानी नहीं है।रानी जब तक चाहे काम कर सकती है।"उसने सभी शर्तें मान लीं।कुछ समय बाद रानी की दूसरी शादी हो गई,और वह अपने ससुराल चली गई।लेकिन इस बार भी उसकी जिंदगी आसान नहीं थी।घर की देवरानियाँ और जेठानियाँ उससे जलने लगीं।रानी सबसे सुंदर थी और उम्र में भी सबसे छोटी थी।इस वजह से वे उसे परेशान करने लगीं।वे उसे ताने मारतींऔर उसे सताने के नए-नए तरीके ढूंढती रहतीं।रानी फिर भी हँसते हुए सब काम करती रही।हर मुश्किल का सामना करती रही।पूरा दिन काम में ही बीत जाता,इसलिए वह अपनी नौकरी पर भी नहीं जा पाती थी।उसका पति भी उसे प्यार नहीं करता था।उसे रानी में सिर्फ एक काम करने वाली चाहिए थी,जो उसके घर और बच्चों को संभाले।रानी के साथ ससुराल में बहुत अत्याचार होते थे।उसका पति उसे मारता,झूठे इल्जाम लगाता,और रोज शराब पीकर उसे परेशान करता।लेकिन इस बार रानी कमजोर नहीं थी।वह हर इल्जाम का जवाब देती थी।उसने अपने लिए खड़ा होना सीख लिया था।इससे उसका पति और ज्यादा गुस्से में रहने लगा।धीरे-धीरे उसकी नफरत बढ़ती गई।एक दिन रानी काम खत्म करके अपने कमरे में आई,तो उसने देखा कि उसका पति अपने दोस्तों के साथ शराब पी रहा था।रानी ने उन्हें बाहर जाने को कहा,पर उसका पति उस पर चिल्लाने लगा और उसे मारने लगा।उसके दोस्तों ने भी उसे पकड़ लिया,और उसके साथ बदसलूकी करने लगे।उसका पति यह सब देख कर हँस रहा था।रानी रोती रही, गिड़गिड़ाती रही,पर किसी ने उसकी एक न सुनी।इस घटना के बाद रानी पूरी तरह टूट गई।उसने सोचा कि वह अपनी माँ और दादी को सब बताएगी,पर वे उसकी बात मानने के बजाय उसके पति पर ही विश्वास करती थीं।अब रानी पूरी तरह अकेली पड़ गई थी।उसका पति उसे धमकाने लगा।वह हर काम उसके कहे अनुसार करती,फिर भी वह उस पर भरोसा नहीं करता था।वह रोज शराब पीकर उसे मारता।रानी अब पूरी तरह टूट चुकी थी।उसने सोचा—"इस जिंदगी से तो मौत ही बेहतर है।"रानी घर से निकल गई।चलते-चलते वह एक नदी के पुल पर पहुँची।वह पुल पर खड़ी होकर अपनी पूरी जिंदगी के बारे में सोचने लगी।जैसे ही रानी नदी में कूदने वाली थी,किसी ने उसका हाथ पकड़ लिया।वह कोई अजनबी नहीं था…वह उसके पति के दूर के रिश्ते का भाई था।वह संयोग से वहाँ से गुजर रहा था,और उसने रानी को उस हालत में देख लिया।उसने तुरंत दौड़कर उसका हाथ पकड़ लियाऔर उसे पीछे खींच लिया।रानी कुछ पल तक कुछ बोल ही नहीं पाई।उसकी आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे।वह व्यक्ति उसे समझाने लगा—"जिंदगी इतनी सस्ती नहीं होती कि उसे यूँ ही खत्म कर दिया जाए।""तुमने जितना सहा है, अब उतना ही लड़ना भी सीखो।"वह कोई साधारण इंसान नहीं था।वह एक बहुत बड़ा डॉक्टर था,जिसका खुद का एक बड़ा नर्सिंग होम था।उसने रानी की हालत को समझा।उसके घाव सिर्फ शरीर पर ही नहीं,बल्कि उसके मन पर भी थे।उसने रानी को हिम्मत दीऔर उसे अपने नर्सिंग होम में काम करने का मौका दिया।रानी ने उस मौके को अपनाया।वह पहले से ही नर्स की पढ़ाई कर चुकी थी,इसलिए उसने पूरी मेहनत और लगन से काम करना शुरू किया।नर्सिंग होम का माहौल रानी के लिए बिल्कुल नया था।यहाँ उसे ताने नहीं मिलते थे,बल्कि सम्मान मिलता था।यहाँ कोई उसे कमजोर नहीं समझता था,बल्कि उसकी मेहनत और काबिलियत की सराहना होती थी।धीरे-धीरे रानी फिर से खुद को संभालने लगी।उसने अपने अंदर की टूटी हुई हिम्मत को फिर से जोड़ना शुरू किया।अब वह किसी की दया पर नहीं,बल्कि अपने दम पर जीना सीख रही थी।वह डॉक्टर रानी को पहले से जानता था।जब उसने पहली बार रानी को देखा था,तब रानी अपनी शादी में थी।लाल साड़ी में सजी रानी बहुत ही सुंदर लग रही थी।उसकी सादगी और मासूमियत ने उसी समय डॉक्टर के दिल को छू लिया था।उस दिन के बाद वह रानी को कभी भूल नहीं पाया।लेकिन उसने कभी अपनी भावनाओं को जाहिर नहीं किया।क्योंकि वह जानता था कि रानी की शादी हो चुकी है,और वह उसकी जिंदगी में कोई दखल नहीं देना चाहता था।समय बीत गया…और फिर किस्मत ने उन्हें दोबारा मिलाया—एक ऐसे मोड़ पर, जहाँ रानी पूरी तरह टूटी हुई थी।जब उसने रानी को उस हालत में देखा,तो उसका दिल अंदर तक टूट गया।पर इस बार उसने सिर्फ एक ही बात सोची—रानी को संभालना है, उसे फिर से खड़ा करना है।उसने कभी रानी पर अपने एहसान का बोझ नहीं डाला,न ही अपनी पुरानी भावनाओं का जिक्र किया।उसने बस एक इंसानियत का फर्ज निभाया—और रानी को जीने का एक नया मौका दिया।डॉक्टर ने रानी को हर कदम पर सहारा दिया।उसने समाज की परवाह किए बिना रानी को आगे बढ़ने की हिम्मत दी।उसने रानी से कहा—"लोग क्या कहेंगे, यह सोचकर अगर तुम चुप रहोगी,तो तुम्हारे साथ हो रहा अन्याय कभी खत्म नहीं होगा।""तुम्हें अपने लिए खड़ा होना होगा।"डॉक्टर की बातों ने रानी को नई ताकत दी।पहली बार उसने अपने बारे में सोचना शुरू किया।अब वह डरने वाली रानी नहीं रही थी।डॉक्टर ने उसे समझाया कि वह गलत रिश्ते में बंधकर अपनी जिंदगी बर्बाद न करे।उसने रानी को तलाक लेने की हिम्मत दी।रानी ने समाज की परवाह न करते हुएतलाक लेने का फैसला कर लिया।इसी बीच रानी के पति ने एक नई चाल चली।वह रानी के मायके पहुँचाऔर वहाँ जाकर सबके सामने झूठी बातें फैलाने लगा।उसने कहा—"रानी मेरे दूर के रिश्तेदार के साथ भाग गई है।""वह अब उसी के साथ रह रही है।""उन दोनों का पहले से ही चक्कर चल रहा था।"उसकी बात सुनकर घर में हंगामा मच गया।लोग तरह-तरह की बातें करने लगे।रानी के चरित्र पर फिर से सवाल उठाए जाने लगे।समाज को जैसे एक और मौका मिल गया थारानी को दोषी ठहराने का।कोई यह जानने की कोशिश नहीं कर रहा था कि सच्चाई क्या है,सब बिना सोचे-समझे रानी को गलत ठहराने लगे।रानी की दादी और माँ तो पहले से ही उसके खिलाफ थीं,लेकिन इस बार उसके दोनों भाई भी उससे नफरत करने लगे।उन्होंने मिलकर अपने पिता को भी उसके खिलाफ भड़काना शुरू कर दिया।रानी के पिता, जो अब तक उस पर पूरा विश्वास करते थे,समाज के झूठ और लोगों की बातों में आ गए।धीरे-धीरे उनकी आँखों पर भी जैसे एक परदा पड़ गया।जो पिता कभी रानी का सबसे बड़ा सहारा थे,अब वही उससे दूर होते चले गए।रानी का एकमात्र सहारा भी अब उससे छिन गया था।अब वह सच में बिल्कुल अकेली पड़ गई थी।रानी ने तलाक के लिए आवेदन भेज दिया।कुछ समय बाद कोर्ट से तारीख आ गई।उस दिन कोर्ट में सभी लोग मौजूद थे।रानी का पति अपने पूरे परिवार के साथ वहाँ खड़ा था।उनके साथ कई रिश्तेदार भी थे।लेकिन रानी…वह बिल्कुल अकेली खड़ी थी।उसके साथ न उसके अपने थे,न कोई सहारा।जिस परिवार के लिए उसने सब कुछ सहा,आज वही उसके खिलाफ खड़ा था।कोर्ट के उस कमरे मेंएक तरफ झूठ और भीड़ थी,और दूसरी तरफ सच के साथ खड़ी एक अकेली रानी।रानी के दिल में डर तो था,लेकिन इस बार वह पीछे हटने वाली नहीं थी।वह जानती थी कि यह सिर्फ तलाक की लड़ाई नहीं है,यह उसके सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई है।रानी ने तय कर लिया था कि आज वह सब सच बता देगी।वह अब चुप रहने वाली नहीं थी।आज वह अपने साथ हुए हर अन्याय को सबके सामने रखने के लिए तैयार थी।लेकिन तभी…उसके पिता आगे बढ़ेऔर उसके पति की तरफ से बोलने लगे।यह देखकर रानी एक पल के लिए स्तब्ध रह गई।जिस पिता पर उसे सबसे ज्यादा भरोसा था,आज वही उसके खिलाफ खड़े थे।उसके पैरों तले जैसे जमीन खिसक गई।उसकी आँखों में आँसू आ गए,पर इस बार उसने खुद को संभाल लिया।अब उसके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं था।जिस सहारे पर वह जी रही थी,वह भी आज उससे छिन चुका था।उसके पास सिर्फ एक ही सहारा था,और आज उसने भी उसका साथ छोड़ दिया था।यह सब देखकर रानी की हिम्मत पूरी तरह टूट गई।उसे लगा जैसे अब उसके पास कुछ भी नहीं बचा है—न कोई अपना, न कोई सहारा।उसने मन ही मन सोचा—"जब मेरा कोई नहीं है,तो क्यों न मैं चुप ही रहूँ…""क्यों न सब कुछ कुदरत पर छोड़ दूँ,और उसे ही अपना फैसला करने दूँ?"उसकी आँखों में आँसू थे,दिल पूरी तरह टूट चुका था।एक पल के लिए उसने हार मान ली…रानी ने धीरे-धीरे अपने आँसू पोंछे।वह जज के सामने आगे बढ़ीऔर हाथ जोड़कर खड़ी हो गई।उसकी आवाज़ काँप रही थी,दिल पूरी तरह टूट चुका था।उसने कुछ पल के लिए आँखें बंद कीं…और फिर—उसने अपने पति द्वारा लगाए गएसभी आरोप मान लिए।कोर्ट में एक पल के लिए सन्नाटा छा गया।जिस रानी ने इतना कुछ सहा था,आज वही अपने ही सच के खिलाफ खड़ी थी।उसने कुछ नहीं कहा,न कोई सफाई दी…न अपने दर्द का जिक्र किया।वह बस चुप रही—जज ने दोनों पक्षों की बात सुनीऔर कुछ देर सोचने के बाद अपना फैसला सुनाया।उन्होंने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत,तलाक देने से पहले दोनों को अपने रिश्ते को एक और मौका देना होगा।जज ने आदेश दिया—"रानी को अपने पति के साथ 6 महीने तक रहना होगा,और इस दौरान अपने रिश्ते को सुधारने की कोशिश करनी होगी।""अगर 6 महीने बाद भी वह इस शादी में नहीं रहना चाहती,तो उसे तलाक दे दिया जाएगा।"यह फैसला सुनते हीरानी के पैरों तले जमीन खिसक गई।रानी ने एक आखिरी बार अपने पिता की ओर देखा।उसकी आँखों में हजारों सवाल थे,पर होंठ बिल्कुल खामोश थे।वह जानती थी—यह शायद आखिरी बार है,जब वह अपने पिता को देख रही है।जिस पिता को वह अपना सबसे बड़ा सहारा मानती थी,आज उन्हीं की आँखों में उसके लिए विश्वास नहीं था।उसका दिल टूट चुका था,लेकिन उसने कुछ नहीं कहा।उसने चुपचाप अदालत का फैसला मान लिया।उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे,पर इस बार उसने उन्हें पोंछने की भी कोशिश नहीं की।वह बस एकटक अपने पिता को देखती रही…जैसे उस एक नजर में अपने सारे रिश्ते को अलविदा कह रही हो।रानी अदालत से बाहर निकली।जैसे ही वह बाहर आई, उसके पिता उसके पास आए।उनकी आँखों में रानी के लिए गुस्सा और नफरत साफ झलक रही थी।उन्होंने इसे छुपाने की ज़रा भी कोशिश नहीं की।उन्होंने कठोर आवाज़ में कहा—"रानी, तुमने मुझे निराश किया है।""मैंने बहुत बड़ी गलती की…""अगर मुझे पहले पता होता कि तुम मेरे विश्वास को इस तरह तोड़ोगी,तो मैं तुम्हें कभी नहीं पढ़ाता।""मैंने अपनी माँ के खिलाफ जाकर तुम्हें पढ़ाया-लिखाया,तुम्हें अपने पैरों पर खड़ा किया…""और तुमने मेरी इज्जत बर्बाद कर दी।""मेरी माँ सही कहती थी—तुम सच में मनहूस निकली।""मुझसे गलती हो गई…मुझे तुम्हें पैदा होते ही मार देना चाहिए था।"उनके शब्द किसी हथियार से कम नहीं थे।हर एक शब्द रानी के दिल को चीर रहा था।रानी चुप खड़ी रही।उसके पास कहने के लिए कुछ नहीं था…या शायद अब कहने को कुछ बचा ही नहीं था।रानी बिल्कुल चुप खड़ी रही।उसकी आँखों के आँसू तो कब के सूख चुके थे।अब तो जैसे उसके पास रोने के लिए आँसू भी नहीं बचे थे।दर्द इतना गहरा हो चुका थाकि अब वह आँसुओं में भी नहीं बहता था।वह बस खामोश थी—बिल्कुल अंदर से खाली…उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था,न गुस्सा, न शिकायत…बस एक गहरी थकान थी,और टूट जाने का सन्नाटा।रानी अपने ससुराल वापस चली गई।इस बार सब कुछ बिल्कुल अलग था।रानी की देवरानियों और जेठानियों ने उससे माफी माँगी।उन्होंने कहा कि उन्हें अपने किए का बहुत अफसोस है।उन्होंने रानी से कहा—"जो हुआ, सो हुआ…""अब आगे से हम सब एक साथ, एक परिवार की तरह रहेंगे।"अब वे लोग रानी का बहुत अच्छा ख्याल रखने लगे थे।वे उससे प्यार से पेश आते,और उसकी देवरानियाँ व जेठानियाँ उसे अपनी छोटी बहन की तरह मानने लगीं।धीरे-धीरे रानी को भी उन पर विश्वास होने लगा।अब वह पहले की तरह डरी-सहमी नहीं रहती थी।वह खुलकर हँसने लगी थी,खुलकर साँस लेने लगी थी,और दिल से अपने सारे काम करने लगी थी।अब रानी को अपने पति से भी प्यार मिलने लगा था।जिस प्यार के लिए वह हमेशा तरसती रही थी,अब वही प्यार उसे मिलने लगा।उसके पति का व्यवहार भी बदल गया था।अब वह रानी से नरमी से बात करता,उसकी परवाह करताऔर उसका ख्याल रखने लगा था।रानी के लिए यह सब किसी सपने जैसा था।जिस जिंदगी में अब तक सिर्फ दर्द था,वहीं अब धीरे-धीरे प्यार और अपनापन जगह बनाने लगा था।रानी भी अब दिल से खुश रहने लगी थी।धीरे-धीरे 6 महीने बीत गए।और आज फैसला होने का दिन था।रानी खुश थी।वह अपने पति के साथ खुशी-खुशी अदालत पहुँची।रानी ने अदालत में जज के सामने खड़े होकर अपना फैसला बताया।उसने कहा कि वह अब तलाक नहीं लेना चाहती।यह सुनकर अदालत में मौजूद सभी लोग हैरान रह गए।रानी के माता-पिता, उसके भाईऔर ससुराल वाले—सबके चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी।जैसे सभी को वही सुनने की उम्मीद थी,और आज वह पूरी हो गई थी।रानी खुशी-खुशी अपने ससुराल लौट आईऔर सबके साथ प्यार से रहने लगी।जिंदगी जैसे धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही थी।एक दिन रानी रसोई में खाना बनाने गई।जैसे ही उसने गैस चालू की—अचानक आग भड़क उठी।पल भर में सब कुछ बदल गया।आग की लपटों ने रानी को घेर लिया,और वह बुरी तरह जलने लगी।वह दर्द से चीख उठी,पर कुछ समझने का मौका ही नहीं मिला।रानी की दर्द भरी चीखें किसी ने नहीं सुनीं।वह आग में घिरी तड़पती रही,पर घर के अंदर से कोई भी उसकी मदद के लिए नहीं आया।जब आस-पास के पड़ोसियों ने घर से धुआँ निकलते देखा,तो वे तुरंत दौड़कर अंदर पहुँचे।उन्होंने रानी को उस हालत में देखा,और बिना देर किए उसे बचाने की कोशिश करने लगे।उन्होंने जल्दी से एक कंबल लाकर रानी को उसमें लपेटाताकि आग बुझाई जा सके।फिर वे उसे तुरंत अस्पताल लेकर गए।संयोग से, वे उसे उसी अस्पताल ले गएजहाँ रानी काम करती थी।पड़ोसियों को यह नहीं पता थाकि वह अस्पताल उसके किसी दूर के रिश्तेदार का है।उन्हें तो बस यही लगाकि इतने बड़े अस्पताल में उसका इलाज अच्छे से हो जाएगा।जब डॉक्टर को खबर दी गई कि एक जलने का मामला आया है,तो वे तुरंत अपना सारा काम छोड़कर मरीज के इलाज के लिए पहुँच गए।शुरू में वे रानी को पहचान नहीं पाए।उसका चेहरा बुरी तरह झुलस चुका था।उसे देखकर कोई भी उसे पहचान नहीं सकता था।लेकिन जैसे ही उनकी नजर उसके हाथ पर पड़ी,जिसका कुछ हिस्सा अभी भी ठीक था—उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।उन्होंने तुरंत पहचान लिया…वह रानी थी।रानी के हाथ पर एक नाम लिखा था।वह उसके पहले पति का नाम था।एक दिन मेले में उसके पहले पति नेअपने हाथ पर “रानी” लिखवाया था,और रानी के हाथ पर “श्याम” लिखवाया था।वही नाम आज भी उसके हाथ पर था।शायद समय सब कुछ बदल सकता है,पर कुछ निशान ऐसे होते हैंजो जिंदगी भर साथ रहते हैं।डॉक्टर ने जैसे ही वह नाम देखा,उन्हें सब कुछ याद आ गया।उनके सामने सिर्फ एक मरीज नहीं थी,बल्कि वही रानी थी…जिसे उन्होंने कभी पहली बार साड़ी में देखा था।डॉक्टर ने एक पल भी देर नहीं की।उन्होंने तुरंत पुलिस को बुलाया।रानी की हालत देखकरउन्हें समझ आ गया था कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं हो सकता।उन्होंने रानी के मामले मेंघरेलू हिंसा का केस दर्ज करवाया।रानी का पति खुद भी पुलिस में था।वह कानून के दाँव-पेच अच्छी तरह जानता था।उसे पता था कि कैसे मामलों को घुमाया जाता है,कैसे सच को छुपाया जाता हैऔर कैसे अपने आपको बचाया जाता है।इसलिए यह लड़ाई अब आसान नहीं थी।एक तरफ रानी थी—जो जिंदगी और मौत से लड़ रही थी।और दूसरी तरफ उसका पति—जो कानून की हर चाल को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना जानता था।एक हफ्ता बीत चुका था।लेकिन अभी तक रानी को होश नहीं आया था।वह 70% तक जल चुकी थी।उसकी हालत बेहद नाज़ुक थी।डॉक्टर और पूरी टीम उसकी जान बचाने की पूरी कोशिश कर रहे थे,लेकिन हर पल एक नई चुनौती लेकर आ रहा था।कमरे में सन्नाटा था…बस मशीनों की आवाज़ और उम्मीद की धीमी सांसें थीं।डॉक्टर हर समय रानी की निगरानी कर रहा था।उसकी अपनी हालत भी अब बेहद खराब हो चुकी थी।उसे खुद पर गुस्सा आ रहा था।वह बार-बार यही सोच रहा था—"काश उस दिन मैंने अदालत के फैसले के खिलाफ आवाज उठाई होती,तो शायद आज हालात कुछ और होते…"जिस रानी को वह चाहता था,उसे खुश देखकर ही उसे सुकून मिलता था।लेकिन आज…उसे उस हालत में देखकर उसका दिल टूट रहा था।वह खुद को माफ नहीं कर पा रहा था।डॉक्टर ने एक बार फिर पुलिस स्टेशन जाने का फैसला किया।उसे जानना था कि रानी के केस का क्या हुआ।क्या पुलिस ने रानी के पति को पकड़ा या नहीं?उसके मन में कई सवाल थे,और अब वह जवाब चाहता था।वह सीधे पुलिस स्टेशन पहुँचा।पुलिस इस मामले में टाल-मटोल कर रही थी।केस आगे बढ़ ही नहीं रहा था।आरोपी उन्हीं में से एक था—पुलिस विभाग का ही आदमी।ऐसे में सवाल यह था—वे उसे कैसे पकड़ते?सच को दबाया जा रहा था,और मामला धीरे-धीरे ठंडा करने की कोशिश की जा रही थी।डॉक्टर यह सब समझ चुका था।डॉक्टर वापस अस्पताल पहुँचा।वह सीधे अपने ऑफिस में गयाऔर एक पुरानी फोन नंबरों की डायरी निकालकर बैठ गया।उसने धीरे-धीरे पन्ने पलटेऔर एक खास नंबर ढूँढने लगा।वह नंबर एक ऐसे इंसान का था,जिसके इकलौते बेटे की जान कभी डॉक्टर ने बचाई थी।उस दिन के बाद से वह आदमी डॉक्टर कोअपने बेटे के समान मानने लगा था।डॉक्टर उसके लिए सिर्फ एक डॉक्टर नहीं,बल्कि उसका दूसरा बेटा था।कुछ देर बाद डॉक्टर को वह नंबर मिल गया।वह आदमी मुख्यमंत्री का पर्सनल सेक्रेटरी था।डॉक्टर ने वह नंबर मिलाया।जैसे ही फोन उठा,उसने बिना समय गंवाए अब तक जो कुछ भी हुआ था,सब कुछ विस्तार से बता दिया।उसने रानी की हालत,उसके साथ हुए अत्याचार,और पुलिस की लापरवाही—सब कुछ साफ-साफ बता दिया।उसकी आवाज़ में दर्द भी थाऔर गुस्सा भी।वह सिर्फ एक डॉक्टर नहीं,बल्कि एक इंसान की तरह न्याय की गुहार लगा रहा था।फोन के दूसरी तरफ कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया।फोन के दूसरी तरफ से आवाज़ आई—"मैं जानता हूँ, यह लड़की तुम्हारे लिए क्या मायने रखती है।""इसी की वजह से तुमने आज तक शादी नहीं की।""मैंने तुम्हारे लिए कितने रिश्ते लाए,लेकिन तुमने जिंदगी भर अविवाहित रहने का फैसला किया।""और आज… जब यह लड़की इस हालत में है,तो मैं समझ सकता हूँ कि तुम्हारे दिल पर क्या बीत रही होगी।""लेकिन अब तुम अकेले नहीं हो।""इस लड़ाई में मैं तुम्हारे साथ हूँ।""अगर रानी को इंसाफ दिलाने के लिएमुझे मुख्यमंत्री तक जाना पड़े,तो मैं वह भी करूँगा।"सेक्रेटरी ने बिना देर किएकमिश्नर को फोन लगाया।जैसे ही फोन जुड़ा,उन्होंने इस केस के बारे में विस्तार से बताया।उन्होंने रानी के साथ हुए अत्याचार,उसकी गंभीर हालतऔर पुलिस की लापरवाही—सब कुछ साफ-साफ बताया।उनकी आवाज़ में सख्ती थी।उन्होंने साफ शब्दों में कहा—"यह मामला अब सामान्य नहीं रहा है।""इस पर तुरंत और सही कार्रवाई होनी चाहिए।"कमिश्नर ने बात को गंभीरता से लिया।अब यह मामला ऊपर तक पहुँच चुका था,और अब इसे दबाना इतना आसान नहीं था।कमिश्नर ने बिना देर किए तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए।उन्होंने रानी के पति को पकड़ने के लिए पुलिस टीम भेज दी।इस बार मामला ऊपर तक पहुँच चुका था,इसलिए कोई भी लापरवाही की गुंजाइश नहीं थी।पुलिस तुरंत हरकत में आ गई।पुलिस ने रानी के पति को पकड़ लियाऔर उसे पुलिस स्टेशन ले आई।कुछ ही समय बाद कमिश्नर खुद पूछताछ के लिए वहाँ पहुँचे।शुरुआत में उसने खुद को बचाने के लिएकई तरह की झूठी कहानियाँ बनाईं।वह बार-बार बातों को घुमाने की कोशिश करता रहा।लेकिन जब सख्ती से पूछताछ की गई,तो उसका हौसला टूटने लगा।धीरे-धीरे उसने सच बोलना शुरू कर दिया।उसने काँपती आवाज़ में सच बताना शुरू किया—"यह सब… 6 महीने पहले ही नहीं,बल्कि उससे भी पहले से प्लान किया गया था…""जब रानी ने तलाक का केस किया था,उसी समय से यह सब साजिश शुरू हो गई थी।"कमरे में सन्नाटा छा गया।अदालत के फैसले से कुछ दिन पहले,मैं और मेरी भाभियाँ रानी के मायके गए थे।""हम वहाँ उसकी दादी, माँ और भाइयों से मिले।""हमने उन्हें रानी के खिलाफ भड़काया…""हमने उसकी माँ और भाइयों के सामनेरानी पर इतने आरोप लगाए,कि वे धीरे-धीरे उससे नफरत करने लगे।"*"हमने उन्हें यह भी कहा किवे रानी के पिता को भी उसके खिलाफ कर दें।"उसने आगे बताया—"रानी को कमजोर करने के लिए हमें सिर्फ एक ही इंसान को तोड़ना था…और वह थे उसके पिता।""रानी के पिता ही उसका एकमात्र सहारा थे।""इसलिए हमने धीरे-धीरे उनके मन मेंरानी के खिलाफ ज़हर घोलना शुरू कर दिया।""हमने उन्हें ऐसी-ऐसी बातें बताईं,कि उनका विश्वास धीरे-धीरे टूटने लगा।"*"आखिरकार… वही पिता,जो रानी के सबसे बड़े सहारे थे,उसी के खिलाफ खड़े हो गए।"*उसने आगे कहा—"अदालत में रानी ने वही किया,जो हम चाहते थे।""उसने अपने पिता के सामने चुप रहना चुना…""और जैसा हमने सोचा था,वैसा ही हुआ।"*"जज ने हमें 6 महीने साथ रहने का आदेश दे दिया।"उसने आगे कहा—"इस बार रानी के साथ प्यार से रहना भी हमारी ही साजिश थी।""हम उसे अच्छा व्यवहार दिखाकर उसका विश्वास जीतना चाहते थे।""हमने सोचा था कि अगर वह हम पर भरोसा कर लेगी,तो आगे का काम हमारे लिए आसान हो जाएगा।"उसने आगे कहा—"मैं रानी से प्यार से पेश आने लगा।""मैंने उसके साथ अच्छा व्यवहार करना शुरू किया,ताकि उसका विश्वास जीत सकूँ।""धीरे-धीरे वह मुझ पर भरोसा करने लगी…""आखिरकार रानी ने केस वापस ले लिया…""और वह खुशी-खुशी हमारे साथ रहने लगी।""अब समय था अगली चाल का…""उस दिन मेरी भाभी ने रसोई में गैस की पाइप में हल्का सा छेद कर दिया।""ताकि जब रानी खाना बनाने जाए,तो धीरे-धीरे गैस निकलती रहे…"*"और जब वह काम शुरू करे,तो…"*उसकी आवाज़ रुक गई।उसने आगे कहा—"मैं उस दिन ड्यूटी पर चला गया था…""और मेरी भाभियाँ अपने मायके चली गई थीं।""सब कुछ हमारे प्लान के मुताबिक चल रहा था…""लेकिन तभी सब कुछ बिगड़ गया।""पड़ोसियों को कुछ शक हो गया,और उन्होंने धुआँ देखकर रानी को बचा लिया।""वे उसे उसी अस्पताल ले गए…""जिसे मैं कभी नहीं चाहता था कि वह वहाँ पहुँचे।"उसकी आवाज़ में अब घबराहट साफ झलक रही थीकमिश्नर ने सख्त आवाज़ में पूछा—"इस सब में तुम्हारे साथ और कौन-कौन शामिल था?""सबके नाम बताओ…"कमरे में सन्नाटा छा गया।अब वह बच नहीं सकता था।उसने धीरे-धीरे सिर झुका लिया।उसकी आवाज़ काँप रही थी—उसने धीरे-धीरे सिर उठाया।उसकी आवाज़ काँप रही थी—"मैं…""मेरी भाभी…""मेरा भाई…""और रानी की दादी…"उसने धीरे-धीरे सिर उठाया।उसकी आवाज़ काँप रही थी—कमिश्नर ने उसकी ओर देखा।उनकी आवाज़ गंभीर थी—"क्या रानी के माता-पिता और भाइयों को इस साजिश के बारे में पता था?"कुछ पल के लिए वह चुप रहा।फिर उसने धीरे-धीरे अपना सिर न में हिला दिया।"सिर्फ… रानी की दादी ही इसमें शामिल थी।"पुलिस ने रानी के पति,उसकी दादी,देवरानी, जेठानी,देवर और जेठ—सभी को गिरफ्तार कर लिया।उन्हें पुलिस स्टेशन से सीधे कोर्ट में पेश किया गया।उन सभी पर घरेलू हिंसा और हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया गया।अब कानून अपना काम कर रहा था।जिन लोगों ने रानी के साथ इतना बड़ा अन्याय किया था,अब उन्हें उसके लिए जवाब देना था।न्याय की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी।सभी आरोपी अब कानून की गिरफ्त में थे।जो लोग अब तक बचते फिर रहे थे,आज वही अदालत के कटघरे में खड़े थे।अब फैसला उनके हाथ में नहीं था—बल्कि कानून के हाथ में था।आखिरकार रानी को न्याय मिल गया।कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।रानी के पति और उसकी भाभियों को20-20 साल की सजा सुनाई गई।और बाकी आरोपियों को7-7 साल की सजा दी गई।अब कानून ने अपना काम कर दिया था।जिन लोगों ने रानी की जिंदगी को खत्म करने की कोशिश की थी,आज वही अपने किए की सजा भुगतने के लिए मजबूर थे।रानी कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच लड़ती रही।रानी कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच लड़ती रही।उसका शरीर 70% तक जल चुका था,लेकिन उसकी हिम्मत अभी भी जिंदा थी।डॉक्टर और पूरी टीम दिन-रात उसकी जान बचाने में लगे थे।काफी दिनों बाद…धीरे-धीरे रानी को होश आने लगा।उसने आँखें खोलीं—जिंदगी ने उसे एक और मौका दिया था।वह कमजोर थी,बहुत दर्द में थी…पर इस बार वह टूटी नहीं थी।धीरे-धीरे रानी ठीक होने लगी।उसका शरीर कमजोर था,पर उसकी हिम्मत पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो चुकी थी।उसने फिर से अपने जीवन को नए सिरे से शुरू करने का फैसला किया।इस बार उसने सिर्फ जीने का नहीं,कुछ बनकर दिखाने का ठान लिया।उसने अपनी पढ़ाई फिर से शुरू की।दिन-रात मेहनत की,हर मुश्किल का सामना किया…और कभी हार नहीं मानी।धीरे-धीरे उसने अपने सपनों को हकीकत में बदल दिया।और एक दिन…वही रानी,जो कभी हालातों के आगे झुकने पर मजबूर कर दी गई थी—डॉक्टर बन गई।अब वह सिर्फ अपनी जिंदगी नहीं जी रही थी,बल्कि दूसरों की जिंदगी बचा रही थी।10 साल बाद…रानी एक सफल डॉक्टर बन चुकी थी।अब वह उसी अस्पताल में काम करती थी,जहाँ कभी उसकी जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ी गई थी।डॉक्टर और डॉ. रानी—दोनों मिलकर अस्पताल संभालते थे।उनकी जिंदगी अब स्थिर थी,सम्मान और सफलता से भरी हुई।लेकिन…उनकी जिंदगी में एक कमी थी।समय बीतता गया,पर उस खालीपन को दोनों ही महसूस करते थे।एक दिन…डॉक्टर ने हिम्मत जुटाईऔर रानी के सामने अपने दिल की बात रख दी।उसने रानी को प्रपोज़ किया।रानी एक पल के लिए चुप रह गई।फिर उसने धीरे से मना कर दिया।उसकी आवाज़ में झिझक थी—"अब मैं पहले जैसी खूबसूरत नहीं रही…"उसका चेहरा अब वैसा नहीं था,जैसा कभी हुआ करता था।लेकिन डॉक्टर ने बिना एक पल गंवाए कहा—"मुझे तुम्हारे चेहरे से नहीं…तुम्हारी आत्मा से प्यार है।""मैंने तुम्हें तब भी चाहा था,जब तुम खुश थीं…और आज भी चाहता हूँ,जब तुम हर दर्द से लड़कर यहाँ तक पहुँची हो।"*उसकी बात सुनकररानी की आँखों में आँसू आ गए।यह आँसू दर्द के नहीं…बल्कि सच्चे प्यार के थे।कुछ समय बाद…रानी ने डॉक्टर के प्यार को स्वीकार कर लिया।दोनों ने शादी कर ली।यह सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं था,बल्कि दो टूटे हुए दिलों का एक होना था।उनकी जिंदगी में अब सच्चा सुकून था।समय के साथ उनकी खुशियाँ और बढ़ीं—रानी ने दो बच्चों को जन्म दिया।अब उसका घर सच में पूरा हो चुका था।वह जो कभी अकेली थी,आज अपने परिवार के साथ खुशहाल जिंदगी जी रही थी।एक समय था जब उसकी जिंदगी दर्द और संघर्ष से भरी थी,और आज—वह उसी जिंदगी को मुस्कुराकर जी रही थी।कुछ सालों बाद…जिंदगी ने रानी की एक और परीक्षा ली।डॉक्टर को ब्लड कैंसर हो गया।यह खबर सुनकर रानी के पैरों तले जमीन खिसक गई।जिस इंसान ने उसे जीना सिखाया था,आज वही जिंदगी और मौत के बीच लड़ रहा था।रानी ने उसे बचाने की हर संभव कोशिश की,दिन-रात उसकी सेवा की…लेकिन इस बार किस्मत साथ नहीं थी।डॉक्टर धीरे-धीरे कमजोर होते गए।जाने से पहले…उन्होंने अपना पूरा अस्पतालऔर अपनी सारी संपत्ति रानी के नाम कर दी।उनकी आँखों में सुकून था—क्योंकि उन्हें पता थाकि वह सब कुछ सही हाथों में छोड़कर जा रहे हैं।और फिर एक दिन…वह हमेशा के लिए इस दुनिया को छोड़कर चले गए।रानी फिर से अकेली रह गई…लेकिन इस बार वह टूटी नहीं।क्योंकि इस बार उसके पास उनकी यादें थीं,उनका दिया हुआ साहस था,और दो छोटे-छोटे बच्चे थे…जिनके लिए उसे मजबूत बनकर जीना था।"कुछ लोग जिंदगी में आते हैं…और हमें जीना सिखाकर चले जाते हैं।"डॉक्टर के जाने के बाद…रानी एक बार फिर अकेली रह गई थी।लेकिन इस बार वह टूटी नहीं।उसने खुद को संभाला।उसने अपने काम पर ध्यान दियाऔर अपने बच्चों का अच्छे से ख्याल रखा।वह दिन-रात मेहनत करती,अस्पताल संभालतीऔर अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देती।उसने अपने दर्द को अपनी ताकत बना लिया।अब वह सिर्फ एक डॉक्टर नहीं थी,बल्कि एक माँ, एक जिम्मेदार इंसानऔर एक मिसाल बन चुकी थी।उसकी जिंदगी ने उसे बहुत कुछ सिखाया था—और अब वह उसी सीख के साथअपनी नई दुनिया बना रही थी।समय धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया।रानी ने अपने बच्चों को बहुत प्यार और मेहनत से पाला।उसने उन्हें सिर्फ बड़ा नहीं किया,बल्कि अपने पैरों पर खड़ा होना भी सिखाया।उसकी मेहनत रंग लाई—उसका बेटा डॉक्टर बना,और उसकी बेटी एक लेखक बनी।रानी की आँखों में सुकून था।जिस जिंदगी ने उसे इतना दर्द दिया था,आज उसी जिंदगी ने उसे गर्व और खुशी दी।वह अपने बच्चों को देखकर मुस्कुराती थी,क्योंकि अब उसकी लड़ाई सफल हो चुकी थी।रानी ने अपनी पूरी जिंदगी संघर्ष, मेहनत और हिम्मत के साथ जी।उसने हर दर्द को सहा,हर मुश्किल का सामना किया,और हर बार खुद को संभालकर आगे बढ़ी।उसने अपने बच्चों को काबिल बनाया,उन्हें अपने पैरों पर खड़ा कियाऔर एक खुशहाल परिवार देखा।अब उसके चेहरे पर एक सुकून था—जैसे उसने जिंदगी की हर लड़ाई जीत ली हो।और फिर…50 साल बाद,रानी इस दुनिया से सुकून के साथ विदा हो गई।उसके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान थी,जैसे वह कह रही हो—"मैंने अपनी जिंदगी पूरी जी है।"