कोहिनूर: उसका कीमती हीरा - 1 in Hindi Love Stories by The Aquamarine Tales books and stories PDF | कोहिनूर: उसका कीमती हीरा - 1

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कोहिनूर: उसका कीमती हीरा - 1

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*[लेखक का POV]*

एक ट्रिप से वापस आने के बाद, कोहिनूर और कार्तिक ने अपनी 12वीं कक्षा की स्कूल लाइफ शुरू की। लेकिन कुछ ही समय बाद कार्तिक का सामना अपने बचपन के दुश्मन से होने वाला था।

कोहिनूर राय सिंघानिया एबी ग्लोबल स्कूल के गेट से ऐसे अंदर आई जैसे कोई खुशमिजाज चिड़िया उड़ती हुई आ रही हो। उसके लंबे लहराते बाल हर कदम पर उछल रहे थे, उसकी स्कर्ट हवा में हल्की-सी लहर रही थी, और उसकी हिरणी जैसी आँखें पूरे कैंपस को उत्सुकता और शरारत से देख रही थीं।

“आरव के बच्चे! जल्दी आ, हमें क्लास में सबसे अच्छी सीट लेनी है!” उसने अपने बेस्ट फ्रेंड से चिल्लाकर कहा, जो उसके पीछे हांफता हुआ आ रहा था।

“शांत हो जा, कुहू। यह बस हमारी 12वीं क्लास का पहला दिन है,” आरव ने हांफते हुए कहा।

“पहला दिन? पहले दिन में ही तो मज़ा है और...” कोहिनूर ने शरारती मुस्कान के साथ कहा, “मुझे कोई ताज़ा ड्रामा चाहिए, जैसे कोई फाइट। इसलिए जल्दी चल।”

उनके पीछे कार्तिक और अंश आराम से बात करते हुए चल रहे थे, लेकिन फिर भी उनके करीब ही थे। कभी-कभी वे कोहिनूर की हरकतों को देखकर आँखें घुमा लेते।

उधर आंगन के दूसरी तरफ लड़कों का एक ग्रुप दीवार के सहारे खड़ा था। ध्रुव, वंश, निखिल और करण आपस में बातें कर रहे थे। ध्रुव और वंश मज़ाक कर रहे थे क्योंकि वे ग्रुप के सबसे मज़ेदार लड़के थे। जबकि करण और निखिल ज़्यादातर शांत थे, लेकिन कभी-कभी मज़ाक में शामिल हो जाते थे।

तभी करण की तेज़ आँखों ने तुरंत उस ग्रुप को देख लिया। उसकी नज़र सीधे कार्तिक से जा मिली।

और यहीं से शुरू हुई दुश्मनी।

जैसे ही करण और कार्तिक की नज़रें मिलीं, माहौल जैसे बिजली की तरह चटक उठा। उनके बीच पुरानी दुश्मनी थी। यह दुश्मनी कई क्लासों, प्रतियोगिताओं और स्कूल के हर इवेंट में चलती आई थी।

करण ने हल्की मुस्कान दी।  

कार्तिक ने आँखें संकरी कर लीं।

एक नई चुनौती बिना कुछ कहे ही शुरू हो चुकी थी।

“तुम फिर से,” कार्तिक ने धीमे से बड़बड़ाया, आँखें सिकोड़ते हुए।

“लगता है किस्मत को चीज़ें दोहराना बहुत पसंद है,” करण ने आराम से कहा और मुस्कुरा दिया। उसके दोस्त वंश और ध्रुव उसके पास खड़े हंस पड़े, क्योंकि उन्हें पहले से ही आने वाले तमाशे का अंदाज़ा था।

कोहिनूर ने कार्तिक की बाजू खींची, उसे अभी कुछ समझ नहीं आया था।

“कार्तिक, ये कौन है?”

“दुश्मन। यानी मेरा कट्टर दुश्मन,” कार्तिक ने दांत भींचते हुए कहा।

इससे पहले कि वह और पूछ पाती, दोनों ग्रुप आमने-सामने आ गए।

“कार्तिक राय सिंघानिया,” करण ने सहज लेकिन तीखे लहजे में कहा, “तुम्हें और कहीं जगह नहीं मिली जो मेरी जिंदगी खराब करने यहाँ आ गए?”

“करण सिंह चौहान,” कार्तिक ने शांत स्वर में जवाब दिया, लेकिन उसकी आँखों में चमक थी।  

“अब भी वही हो — ज़रूरत से ज़्यादा आत्मविश्वासी, परेशान करने वाले, और जीतने में नाकाबिल।”

कोहिनूर ने हँसी रोकने की कोशिश की, लेकिन वह बुरी तरह फेल हो गई और जोर से हंस पड़ी। उसके भाई और करण के बीच का तनाव उसे बहुत मनोरंजक लग रहा था।

सब लोग उसकी तरफ ऐसे देखने लगे जैसे कह रहे हों,  

“बहन, यहाँ इतनी गंभीर बात हो रही है और तू हंस रही है?”

कोहिनूर ने जल्दी से अपना हाथ मुंह पर रख लिया, लेकिन उसकी हंसी रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी। हँसते-हँसते उसने कहा,

“तुम दोनों दुश्मन नहीं लगते… एक-दूसरे की गर्लफ्रेंड लगते हो!”

कुछ पल के लिए पूरी तरह सन्नाटा छा गया।

करण और कार्तिक दोनों रुक गए। उनके जबड़े कस गए और दोनों ने एक साथ कहा,

“तुम क्या बकवास कर रही हो?”

कोहिनूर ने हाथ हिलाते हुए कहा, अभी भी मुस्कुरा रही थी,  

“मेरा मतलब है ज़रा देखो तो… तुम दोनों एक साथ ही बोल रहे हो… तुम लोग किसी कपल की तरह लड़ते हो!”

दोनों ने एक-दूसरे को घूरा और फिर एक साथ बोले,

“मेरी नकल करना बंद करो!”  

“नहीं, तुम बंद करो!”

आखिर में दोनों बस झुंझला कर रह गए।

वंश, ध्रुव, कोहिनूर और आरव जो एक साथ खड़े थे, हंसते-हंसते लगभग गिर ही पड़े। वे आपस में फुसफुसाते हुए कह रहे थे,

“यह तो कमाल है। अभी तो शुरू भी नहीं हुआ और एंटरटेनमेंट पहले से टॉप लेवल का है।”

उधर अंश और निखिल ने बस अपना माथा पकड़ लिया।

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