भाग 4: मुझे आपके साथ नहीं रहना। बस अनु ने इतना कहा ।
पीछे से गॉड ने उसके नाक पर रूमाल रख दिया। अनुुुु बेहोश हो गई। राज नेेेेेेेेे उस गाड को मार दिया। राज ने कहा तुम्हारी इतनी हिम्मत तुम मेरी अनु को छू सको। राज ने एक झटके में अनु को अपनी बाहों में उठा लिया। अनुुु बेहोश थी। उसकी सासे वहुत हल्की थी। चेहरााााााा सफेद पड़ चुका था। राज केे कदम तेज थे। लेकिन दिल मे एक अजीब सी बेचैनी थी। गाड़ी सीधे उसकेे बिला केेेेेे गेट पर जाकर रुकी। बिल्ला के अंदर घुसतेे ही अनुुुुुुुुुुु को और मजबूती से थाम लिया। जैसी उसे गिरनेेे से नहीं टूटनी से बचाना चाहता हो। सीढ़ियां चढ़ते हुए उसकी नजर अनु के चेहरे पर टिक गई। अनु उसने धीरे से पुकारा, मगर कोई जवाब नहीं आया। राज ने अपने कमरे का दरवाजा खोला। कैमरे में अंधेरा था। पर्दे के बीच में से चांदनी की हल्की सी रोशनी अंदर आ रही थी। उसने अनु को बिस्तर पर आराम से लिटाया। जैसे कि बो शीशे की बनी हो। कंबल ठीक किया। और उसके बाल चेहरे से हटा दिए। एक पल के लिए राज वही खड़ा रह गया। उसकी आखों में गुस्सा और डर दोनो साथ सथ थे। तुम्हें कुछ नहीं होगा। उसने खुद से कहा। उसने फोन उठाकर डॉक्टर को कॉल कि। फिर बेडसाइड टेबल पर पानी रख दिया। अनु ने हालकी सी करवट बदली। राज का दिल जोर से धड़क उठा। वह पास आकर कुर्सी पर बैठ गया। और उसका हाथ अपनी मुट्ठी में ले लिया। कमरे में बस घड़ी की टिक टिक और अनु की सांसों की आवाज थी। बाहर रात और गहरी होती जा रही थी। अनु का होश आना। सुबह की हल्की धूप कमरे के पर्दाओ से अंदर आ रही थी। कमरे में सन्नाट था। अचानक अनु की उंगलियां हल्की सी हिलने लगी। फिर उसकीआंखें धीरे-धीरे खुलने लगी। कुश पल तक वह शत को घूरती रही। जैसे समझने की कोशिश कर रही हो। कि वह कहां है। अगले ही पल उसे सब याद आने लगा। वह अचानक घबरा कर उठ बैठी। मैं मैं कहां हूं।? मुझे यहां कौन लाया?,, अनु जोर से चिल्लाने लगी। उसका शरीर डर से काप रहा था। उसकी सांसे तेज हो गई। और आंखों में आंसू भर आए। उसकी आवाज सुनकर दरवाजा तेजी से खुल गया। एक मधुर चेहरे वाली औरत घबरा कर अंदर आई। बह राज कि मां थी। वह जल्दी से अनु के पास आई और प्यार से उसके सिर पर हाथ रख दिया। क्या हुआ बच्चा... डर क्यों रही हो। तुम जहां बिल्कुल सुरक्षित हो। चिंता मत करो। अनु डर से पीछे हट गई। उसकी आंखों में घबराहट साफ-साफ दिख रही थी। कापती हुई आवाज में उसने पूछा आप आप कौन हो।? औरत हलके से मुस्कुराई। उसकी आखों में ममता साफ-साफ छलक रही थी। मैं राज की मां हूं। बेटा यह सुनते ही अनु एक पल के लिए चुप हो गई। उसके चेहरे पर उलझन और डर दोनों दिखाई दे रहा था। उसने कमरे के चारों तरफ देखा_ अजनबी लोग और दिल हजार