एक चिड़िया स्कूल जाती थी
एक चिड़िया स्कूल जाती थी,
पढ़ाई में उसका मन नहीं लगता था,
पर वह गाना बहुत अच्छा गाती थी।
जंगल के सभी जानवर चिड़ियों के दोस्त हुआ करते थे,
वे चिड़ियों के साथ स्कूल में रोज़ पढ़ा करते थे।
एक बंदर उन्हें पढ़ाया करता था,
पेड़ पर कैसे चढ़ें, यह बंदर सिखाया करता था।
जंगल की यह पढ़ाई सभी को नहीं भाती थी|
एक चिड़िया स्कूल जाती थी...
स्कूल में परीक्षा का समय आया, सभी जानवरों ने अपना प्रदर्शन दिखाया।
एक बंदर हर बार परीक्षा में प्रथम आता था, क्योंकि वह पेड़ पर सबसे पहले चढ़ जाता था।
उस बंदर की तारीफ़ स्कूल में बहुत की जाती थी। एक चिड़िया स्कूल जाती थी...
सभी जानवर खुद को कमजोर समझने लगे थे,
वे खुद को मूर्ख और बंदर को श्रेष्ठ समझने लगे थे।
जानवर अपने गुणों के विपरीत पेड़ पर चढ़ना सीख रहे थे,
असफल होने पर बार-बार खुद को दोष दे रहे थे।
शिक्षा की यह प्रणाली सबमें भेद batati थी।
एक चिड़िया स्कूल जाती थी...
एक दिन चिड़िया के मन में विचार आया,
उसने जानवरों को उनके अपने-अपने गुणों से अवगत कराया।
जब सभी जानवरों ने अपने गुणों को पहचानना शुरू किया,
तब सभी ने अपने-अपने क्षेत्र में कमाल kiya।
इस जंगल की पढ़ाई के बारे में मैंने अपने दोस्तों को बताया था। लेकिन उन्होंने मेरा मज़ाक उड़ाया, वे अब भी उसी स्कूल में पढ़ रहे हैं जहाँ सबको पेड़ पर चढ़ना सिखाया जा रहा है। मेरी इस कविता का उद्देश्य केवल सबको जागरूक करना है, भीड़ के पीछे चलने से बेहतर है अपने-अपने क्षेत्र में श्रेष्ठ बनना।
“शेर को चने और बंदर को घास खिलाई जा रही है,
हमारे स्कूल में सबको समान रूप से पढ़ाई कराई जा रही है।”
आज की शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों को ज्ञान देना और उनकी क्षमताओं को विकसित करना होना चाहिए। लेकिन कई बार हमारी शिक्षा प्रणाली एक ही मापदंड से सभी विद्यार्थियों को परखने की कोशिश करती है। हर बच्चे की रुचि, क्षमता और प्रतिभा अलग-अलग होती है, फिर भी उनसे एक जैसा प्रदर्शन करने की अपेक्षा की जाती है। यही कारण है कि कई विद्यार्थी अपनी वास्तविक प्रतिभा को पहचान ही नहीं पाते और स्वयं को दूसरों से कम समझने लगते हैं।
यह कविता उसी स्थिति को सरल और प्रतीकात्मक रूप में समझाती है। जंगल के स्कूल की कहानी के माध्यम से यह बताया गया है कि जब सभी जानवरों को केवल पेड़ पर चढ़ना ही सिखाया जाता है, तो स्वाभाविक रूप से बंदर सबसे आगे निकल जाता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि बाकी जानवरों में प्रतिभा नहीं है। मछली तैरने में निपुण है, पक्षी उड़ने में कुशल है और हिरण तेज दौड़ सकता है। यदि शिक्षा केवल एक ही प्रकार की योग्यता को महत्व देगी, तो कई प्रतिभाएँ अनदेखी रह जाएँगी।
इसलिए एक अच्छी शिक्षा नीति वही है जो हर बच्चे की अलग-अलग क्षमताओं को पहचानने और उन्हें विकसित करने का अवसर दे। जब शिक्षा बच्चों को उनकी वास्तविक प्रतिभा के अनुसार आगे बढ़ने का मार्ग देती है, तभी समाज में सच्ची प्रगति और संतुलन संभव हो पाता है।