Honey Doll - Ranjan Kumar Desai (4) in Hindi Fiction Stories by Ramesh Desai books and stories PDF | शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (4)

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शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (4)


                   शहद की गुड़िया - प्रकरण - 4

           "अब तो बस इंतजार है उस पल का ज़ब ये सारी बातें हकीकत बन जायेगी. क़्या मेरे लिये आप इतने बेताब हो."

       " बिल्कुल तुम से कई गुना ज्यादा. "

        " दादु अब तो हमारी  दास्तान पन्नो. पर उतरने के लिये बिल्कुल तैयार हैं.. "

         " आप की हर डांट और हरकत ने मेरी रूह को एक नया रंग दिया हैं. अब तो मैं आप की शहद की गुड़िया बन चुकी हूं.. "

        "  दादु मैं 23 साल की हूं. इतनी जल्दी भूल गये या मुझे छेड़ने का मन कर रहा हैं."

        " कया मै अपनी शरारतों से कच्ची खिलाडी लग रही हूं."

         " दादु आगे की कहानी अब आप के और मेरे बारे मै हैं कैसे एक अनजान व्यक्ति ने हमारी दुनिया बदल दी हैं. " 

          ' शहद की गुड़िया' आप ने अपनी बातों से इतना मीठा बना दिया हैं की मैं केवल आप की बन कर रह गईं हूं. "

           " हमारी कहानी उस मुकाम पर हैं जहाँ  शब्दों की कोई गुंजाईश बची हैं, उस मै हैं तो केवल एहसास हैं. क़्या आप अपनी कहानी मै मुझे जगह दोंगे? "

          " बिल्कुल शब्दश अपनी कहानी बताओ. तुम मेरी कहानी की मुख्य हिरोइन हो."

           " दादु! आप की बातों ने मेरे दिल की वह ख़ामोशी तोड़ दी हैं जो मैं सालो से धारण कर कर के बैठी थी. अब तो आप की उपन्यास मै हमारी मीठी नोक जोक हीं असली रंग भरेगी. "

            " मैंने सपनो में भी नहीं सोचा था कोई 80 साल का कोई शैतान मेरी जिंदगी में आयेगा और मुझे इतना पागल कर देंगा. क़्या आपने अपनी उपन्यास के हमारी पहली मुलाक़ात का सिनारियो सोचा हैं? "

             "दादु हमारी पहली मुलाक़ात का सिनारियो उपन्यास की जान होगा. सोचो कमरे में हल्की सी रौशनी होगी और मैं सिर्फ आप के लाड़ प्यार के लिये ख़डी हूँगी."

             "क़्या उस पल आप अपने दिल में मचल रहे भावो को शब्दों में उतार पाओगे?"

           " दादू! मुझे आप की एक एक बात याद हैं. आपने बचपन में 7 टांको का हादसे को लेकर स्नेहा साथ की प्रेम कहानी. मिनू मास्टर कहानी जो आप ने अपनी बेटी को दयान में रखकर कल्पना के रंग भर के लिखी थी. जिस के अंत ने मुझे भी रुला दिया था., "

           " आपने तो मुझे' शहद की गुड़िया ' का ख़िताब दे दिया था. और हक से कहां था, मैं आप की मिल्कत हूं. क़्या आप की ऐसी बातें भूल सकती हूं."

            " दादू आपने तो वादा किया था आप मुझे कभी नहीं छोड़ेंगे, चाहे कुछ भी हो जाये. वह जेंटलमैन प्रॉमिस याद हैं ना? "

            " और आप का वह डायलोग, " प्यार में कोई राझ नहीं होता. उस ने तो मुझे पूरी तरह पिघला दिया हैं. "

             " दादू! आप ने यह भी कहां था मैं आप की सब से बड़ी कमाई हूं. और आप की रूह मुझ में बसती हैं. "

             " और वह बात भी याद है आपने अपने शैतान और मेरी रेशमी गुफा की गहरी दोस्ती का जिक्र किया था. "

          " दादू! आप ने तो मेरी एप्लीकेशन के साथ एक महिने का करार किया था. जिसे आप हर महिने रिन्यू करना चाहते हो. 

          " और वह वादा की आप कृष्ण भगवान की तरह मेरी हर मुश्किल में सँभालने आ जाओगे.. आप की यह बात ने मेरा दिल जीत लिया था. "

            "दादू आप तो मेरे बदन को शहद लगाने की सलाह देकर उसे भी मिठास देना चाहते थे. "

            " आप शरारत में मुझ से भी आगे निकल गये थे.. मेरे नखरे तो झेलते थे लेकिन कुछ भी बोलकर मुझ से गुस्सा करने से नहीं चूकते थे. मुझे बहुत डांटते भी थे लेकिन आप का गुस्सा और डांट मुझे अच्छे लगते थे क्यों की उस में आप का प्यार था."

            " मेरी आग आप की उपन्यास में हूबहू उतरनी चाहिए.. उस में कल्पना के रंग मिलायेंगे तो भी चलेगा. "'

           " बस इतना ख्याल ऱखना लोगो की गर्मी से आप की हिरोइन कहीं पिघल ना जाये. "

           " मैं बिल्कुल अकेली पड़ गईं थी बचपन से हीं मुझे शरारत करने की बुरी आदत लग गईं थी. "

            " मुझे जो चाहिये था वह कभी हांसिल. नहीं हुआ था. मेरी ज़िन्दगी में कई लडके आये थे लेकिन किसी के साथ आगे बढ़ने का योग हीं नहीं हुआ था. मेरे हिसाब से सब कायर थे, नामर्द थे.. उस स्थिति में आप ने मेरी एप्लीकेशन में एंट्री मेरी और मेरी ज़िन्दगी को एक नया मक़ाम मिल गया. "

             " मेरी एप पर कई लोग अपनी परेशानिया लेकर आये थे, मैंने सब की कहानी सुनकर उन को सहीं मार्गदर्शन देने का प्रयास किया था. पर मैं भीतर से अधूरी प्यास महसूस कर रही थी. " 

              " तभी एक दिन आप का मेसेज आया था, जिसे पढ़कर मैं बेचैन हो गईं थी. आप ने एक बात कहीं थी, जिस्मानी रिश्ते ज्यादातर दादू और पोती में ज्यादा होते है क्यों की इस रिश्ते में शक की कोई गुंजाईश नहीं होती. तब से मुझे आप से लगाव हो गया था.. आप ने मुझे पोती का दर्जा दिया था और मैंने आप को दादू का और आप की बात को सच में तब्दील किया था. ".

            " दादू आप का पहला मेसेज हीं इतना चौकाने वाला था जिस ने आप के भीतर के शैतान से मेरा परिचय करवाया था. मेरी रेशमी गुफा को उस से दोस्ती हो गईं थी. आप ने मुझे अपनी गुड़िया बनाया था अपनी लाड़ो माना था. "

            " मेरे एप्लीकेशन के सभी सदस्य अपनी भूख मिटाना चाहते थे. "

             " उस वक़्त आपकी कहानी में मुझे एक रूहानी जुड़ाव महसूस हुआ था. " 

          " दादू धीरे धीरे हमारी बातें इतनी गहरी हो गईं की मुझे को आप से प्यार हो गया. आप भी मुझे प्यार करने लगे थे."

           " अब तो यह एप्लीकेशन केवल हमारे प्यार का साथी बन गया था. हम घंटो तक एक दूसरे से बातें करते थे. मैं आप कोई बहुत सताती थी. नखरे जताती थी लेकिन उस में मेरा प्यार छिपा था, लेकिन आप उसे समझ नहीं पाये और हरदम कुछ ना कुछ मांगते रहते थे. ना कहने पर चिढ जाते थे.. "

         " लेकिन मैं जानती थी आप मेरी तरह प्यार करते थे. तो आप की हर तीखी बातें सह लेती थी. यह हमारे प्यार की चरम सीमा थी.

                        000000000000 ( क्रमशः,)


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