वो कौन थी
तपन घोष और मैंने एक साथ एक जहाज कंपनी में नौकरी ज्वाइन किया था . दोनों ने कंपनी के कलकत्ता ( अब कोलकाता ) ऑफिस में एक ही दिन ज्वाइन किया था . हमारे साथ कुल पांच इंजीनियर ने ज्वाइन किया था जिसमें सबसे अंत में मैंने जोइनिंग रिपोर्ट दी थी . मुझे छोड़कर बाकी सभी बंगाली थे .इसलिए या शायद कोई और कारण भी रहा हो मुझे पता नहीं , बाकी सभी मुझे ‘ पांचू ‘ कह कर बुलाते थे .
इत्तफ़ाक़ से मैं और रमेश एक ही शिप पर करीब दो साल तक रहे थे . इस दौरान हमने एक साथ अनेक देशों की समुद्री यात्रा की . हमें खट्टे मीठे अनुभव भी हुए थे जो हम आपस में शेयर करते थे . फिर मेरा ट्रांसफर दूसरे शिप पर हो गया और हम अलग अलग शिप पर काम करते रहे हालांकि हम दोनों बराबर संपर्क में रहते थे . चूंकि मेरी और तपन दोनों की जॉइनिंग एक ही दिन थी इसलिए हम दोनों एक साथ ही रिटायर हुए थे . अपनी अंतिम यात्रा के बाद तपन अपने शिप से कोलकाता डॉक में उतरा था . उसने वहीँ ऑफिस में साइन ऑफ ( sign off - ड्यूटी से छुट्टी ) किया और नौकरी से रिटायर हुआ . कोलकाता में ही उसका घर भी था . अंतिम यात्रा के बाद मेरा शिप मुंबई डॉक पहुंचा था और मैंने मुंबई में ऑफिस में साइन ऑफ कर सदा के लिए विदा लिया . मैं मुंबई से अपने घर पटना चला आया . रिटायरमेंट के बाद भी तपन और मैं हमेशा रेगुलर कांटेक्ट में थे .
तपन का परिवार कोलकाता में रहता था इसलिए वह बीच बीच में छुट्टियों में कोलकाता जाया करता था . मैं उस से बार बार पूछा करता था ‘ उस लड़की का पता चला ‘ . वह बोलता “ नहीं पांचू , पर तुम उस के बारे में क्यों जानना चाहते हो कि वो लड़की कौन थी ? “
मैं बोला करता “ हर किसी के जीवन में रोज कोई न कोई घटना घटती रहती है पर इनमें कभी कोई एक घटना ऐसी भी होती है कि वह यादों में अमिट रह जाती है . “
रिटायरमेंट के कुछ दिनों के बाद तपन पटना आया था . पटना में मीठापुर में एक बंगाली टोला था जहाँ ज्यादा बंगाली रहते थे . वे धूमधाम से दुर्गा पूजा मनाया करते थे .मेरा घर भी उसी मोहल्ले में था इसलिए मैं भी जब पटना में होता दुर्गा पूजा उन्हीं लोगों के बीच मनाता था . तपन का एक कजिन पटना में रहता था और उसके बेटे की शादी थी . तपन उसी अवसर पर कुछ दिनों के लिए पटना आया था .
तपन मुझसे मिलने आया , मैंने पूछा “ अकेले क्यों आये हो ? बोदी ( भाभी ) नहीं आयीं हैं क्या ? तुम्हारी बोदी बाहर गयी है , आती ही होगी . “
“ नहीं यार , उसकी तबीयत ठीक नहीं है . अभी हाल ही में उसका नी रिप्लेसमेंट हुआ है इसलिए वह नहीं आ सकी है ? “
“ तुमने उसका पता लगाया ? “ मेरे अगले सवाल से वह झुंझला उठा और बोला “ अरे पांचू , तुम्हारी सूई क्यों उसी पर बार बार अटक जाती है ? तुम्हें उसका नाम वाम कुछ भी नहीं पता है सिर्फ उसका एक पुराना एड्रेस , वह भी सिर्फ स्ट्रीट का नाम और कोई एक बिल्डिंग . इस बीच तीन दशक से ज्यादा हुआ और बहुत कुछ बदल गया है . उसका नाम पूछने पर तुमने कहा कि किसी बूढ़ी औरत ने उसे बेबी कह कर पुकारा था . वैसे भी कोलकाता बहुत बदल गया है .तब कलकत्ता था अब कोलकाता हो गया है . मान लो उसका पता लग भी जाता है तो अब वह भी बूढ़ी हो गयी होगी . वैसे सच कहूँ तो मैंने कभी सीरियसली लिया ही नहीं . तुमने सिर्फ रोड और किसी बड़े अपार्टमेंट का नाम बताया था . तुम्हारे उसके पीछे पड़ने की वजह क्या है ? “
“ वजह कुछ भी नहीं और मानो तो बहुत कुछ है और सवाल उसकी जवानी या बुढ़ापे का नहीं है . उस दिन मुश्किल की घड़ी में उसने मेरी मदद की थी और मैं उसे थैंक्स भी न कह सका था . एक बार उसका शुक्रिया अदा कर देता तो सिर से एक बोझ उतर जाता . “
“ बस इतनी सी बात , खोदा पहाड़ और निकली चुहिया . और अगर तुम्हारे लिए इतना जरूरी था तो तुमने क्या किया है ? . “ तपन ने पूछा था
“ कोलकाता छोड़ने के बाद मुझे कभी दुबारा कोलकाता जाने का मौका नहीं मिला . तुम तो बार बार छुट्टियों में जाते रहते थे और अब वहीँ रहते हो इसलिए तुम्हें ही कहता आया हूँ . “
“ मैं तो अभी तक उस वाकये का डिटेल नहीं जानता हूँ . जरा मुझे भी बताओ उस दिन क्या हुआ था . खैर कुछ डिटेल बताओ तो एक आखिरी प्रयास इस बार करूंगा . “
मैंने कहा “ याद करो वो दिन जब तुमने आ कर मुझे कहा था कि हम दोनों को दो दिनों के अंदर सेल ( sail ) करना है . ऑफिस से तुमने मेरा शिप पोस्टिंग का आर्डर रिसीव कर मुझे दिया था और जल्द ही चले गए . हमारी ग्राउंड ट्रेनिंग वर्कशॉप में पूरी नहीं हुई थी और शिप पोस्टिंग की इतनी जल्दी उम्मीद नहीं थी . कंपनी के ख़रीदे एक नए शिप को खिदिरपुर डॉक से दो दिन बाद बॉम्बे के लिए सेल ( sail ) करना था और वहां से कुछ अर्जेंट कार्गो ले कर विदेश जाना था . तुम्हें याद होगा मुझे दो दिन से बुखार था और उसी दिन कुछ आराम था . . “
“ सॉरी यार , मैं जल्दी में था . सेल करने के पहले बहुत औपचारिकताएं पूरी करनी थीं , इसलिए मैं रुक नहीं सका था . “ तपन ने मेरी बात काटते हुए कहा
“ मैं समझ सकता हूँ , मैं तुम्हें ब्लेम नहीं कर रहा हूँ . मैं तीसरी मंजिल पर एक रूम के फ्लैट में अकेला रहता था और भूखा था . खाने के लिए मुझे नीचे किसी रेस्टॉरेंट में जाना पड़ता था . मुझे खाने की इच्छा भी नहीं थी और न ही नीचे सीढ़ियों से जाने की . शिप पर रिपोर्ट न करने का मतलब नौकरी से हाथ धोना था . सबसे पहले मुझे कंपनी के डॉक्टर से फिटनेस लेना था फिर कुछ टीके और तब MMD ( mercantile marine department ) समुद्री यात्रा की अनुमति पत्र आदि . तुम जानते हो मैं शहर से दूर वर्कशॉप के पास रहता था . वहां दूर तक कोई टैक्सी स्टैंड नहीं था . बस से धर्मतल्ला आया . जहाँ जहाँ जाना था सभी उसी के आसपास थे . मुझे कमजोर देख कर डॉक्टर ने पूछा था कि क्या सेल कर सकता हूँ . मैंने कहा था हाँ सिर्फ भूखा हूँ , कुछ खाने पीने के बाद नार्मल हो जायेगा . “
तब तक मेरी पत्नी आयी , मैंने तपन से उसका परिचय करा कर कुछ खाने पीने के लिए लाने को कहा . वह तुरंत कुछ स्नैक्स और कोल्ड ड्रिंक ले कर आयी और बोली “ मैं सब के लिए लंच बनाती हूँ , तब तक आप लोग गप करें . “
“ हाँ , तब आगे बोलो . “ तपन बोला
“ मैंने खाने के नाम पर कुछ बिस्कुट और चाय लिया , मुझे बहुत काम करने थे . सभी औपचारिकताएं पूरी करते करते देर शाम हो गयी . तब मैं डॉक्टर के सुझाये दवा लेने के लिए पार्क स्ट्रीट गया . केमिस्ट ने मुझे दो घंटे बाद आ कर दवा लेने को कहा . इस बीच मैं पार्क स्ट्रीट में चक्कर लगाता रहा था , पार्क स्ट्रीट में होटल बहुत महंगे थे . किसी वेंडर से कुछ स्ट्रीट फ़ूड खाया . मुझे मिचली आ रही थी और कमजोरी भी लग रही थी . रात के नौ बज गए थे . मैं केमिस्ट के यहाँ से दवा ले कर किसी खाली टैक्सी का इंतजार कर रहा था . बहुत देर तक कोई टैक्सी नहीं मिली . अचानक मुझे जोर का चक्कर आया और मुझे उल्टी होने लगी . आस पास लोग आते जाते रहे , न किसी ने मेरा हाल पूछा न टैक्सी ही मिली . मेरी उल्टी रुक नहीं रही थी , मैं लगभग बेहोश सड़क के किनारे बैठ कर रुक रुक कर फुटपाथ पर उल्टी कर रहा था . कुछ राहगीर मुझे देख कर पूछते - ‘ छेले के की होलो - what happened to the boy ‘ तो कोई बोलता - ‘ छेले टी माताल होये आच्चे - the boy is drunk ‘ . “
“ तुम्हें . कोई मददगार नहीं मिला ऐसे में तुमने शिप ज्वाइन करने की हिम्मत कैसे की ? “
“ या तो मैं ज्वाइन करता या फिर नौकरी गंवाता . जब तक जान थी नौकरी गंवाने की बात सोचना मेरे लिए असम्भव था . कुछ देर में एक लड़की पूरे मेकअप में मेरे पास आयी और उसने पूछा -की होलो ? बांग्ला जानी ना ? ( क्या हुआ , बंगला नहीं जानते हो ? . मेरे मुंह से कुछ निकल नहीं रहा था बस दुखी भाव से उसको देख रहा था और बीच में एक दो बार कुछ पानी उल्टी करता . उसने एक हाथ से रिक्शे वाले को इशारा कर बुलाया और मुझे उसके घर ले जाने को कहा . उसी लड़की और रिक्शेवाले ने सहारा दे कर मुझे बिठाया . उसने मेरी फाइल भी खोल कर देखी फिर रिक्शे वाले को दे दी . रिक्शावाला बिहारी था , मिली जुली हिंदी और बंगाली में बात करता था . मैं ठीक से उनकी बात न सुन पाता था न समझ पाता था . दोनों के बीच डॉक्टर की बात हो रही थी . वे मुझे ले कर एक कमरे में गए और बेड पर सुलाया . शायद उसने मेरे मुंह में कुछ दवा की बूंदे डाली होगी . मेरी आँखें बंद होने लगीं . मेरे कान में आवाज गयी - बेबी इतनी जल्दी कैसे लौट आयी ? किसी ने कहा - बेबी चली गयी . फिर देर रात मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि मुझे पानी चढ़ाया जा रहा था .मुझे काफी आराम लग रहा था और मेरी शक्ति वापस आ गयी है . बगल में स्टूल पर एक लड़का बोला - यह दूसरा बोतल है , 5 मिनट में यह भी पूरा हो जायेगा तब मैं चला जाऊंगा . मुझे लगा कि जल्द ही सूर्योदय होने वाला है . “
तब तक पत्नी ने कहा “ लंच तैयार है . “
“ आ रहा हूँ , बस अपनी बात पूरी होने ही वाली है “ मैंने कहा
“ ठीक है , फिर तुम्हारा आगे क्या हुआ ? “ तपन ने पूछा
“ मैं 5 मिनट बाद उठ कर बाथरूम गया तब लड़के से पूछा “ वो लड़की कहाँ गयी जो मुझे यहाँ लायी ? “
लड़का अपना सामान समेट कर वापस जाने की तैयारी में था . किसी बूढी औरत की आवाज आयी “ बेबी नाईट शिफ्ट में गयी है , आती होगी . मुझे बहुत सारे काम निपटाने थे . फ्लैट हैंड ओवर करना था . मुझे पता था कि कुछ ही महीनों के अंदर मुझे जहाज पर जाना होगा . अपार्टमेंट का दरवान बिहारी था , मैंने उसे पहले ही कहा था कि मेरा जो भी सामान है वह तुम रख लेना . और फाइनली शिप में रिपोर्ट करना . मैंने कहा - मुझे बहुत जरूरी काम है , मैं रुक नहीं सकता हूँ . बेबी को बहुत थैंक्स बोल देना . मैं एक बार मिलने की कोशिश करूंगा . पर आजतक मिल नहीं सका हूँ . यही मेरी कहानी है और मैं उस लड़की से मिलकर थैंक्स कहना चाहता था “
तपन ने एक गहरी साँस ले कर कहा “ मैंने हाफ हार्टेडलि कोशिश किया था पर तुम्हारे दिए डिटेल्स से यही पता चला कि उस समय वहां एक कॉल गर्ल रहती थी . पर उसके बाद वह उस फ्लैट को छोड़ कर कहीं चली गयी . शायद तुम्हें मदद करने वाली वह एक कॉल गर्ल थी . अब उस तरह की लड़कियों का पता लगाना हमलोगों के लिए न तो उचित है न ही आसान है . वो जो भी रही हो उसे भूल जाओ . “
“ भले ही वह कॉल गर्ल रही हो पर वह एक नेक इंसान थी .आम लोगों ने मुझे पियक्क्ड़ समझ कर मुझ पर तंज कसा और मेरी हाल पर छोड़ दिया . मेरी मदद करने वाली वह एकमात्र लड़की थी जो मेरे लिए किसी फरिश्ता से कम नहीं थी . वो कौन थी मैं नहीं जान सका . वह जहाँ भी हो भगवान उसे खुश और स्वस्थ रखे .
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नोट - कहानी पूर्णतः काल्पनिक है .