Adhura Pyar - 3 in Hindi Horror Stories by Pooja Singh books and stories PDF | अधूरा प्यार - 3

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अधूरा प्यार - 3

मल्होत्रा हाउस में आज अजीब सी खामोशी थी।
बाहर सब सामान्य दिख रहा था —
सिक्योरिटी दोगुनी कर दी गई थी…
सीसीटीवी हर कोने पर लगे थे…
गार्ड्स चौबीस घंटे तैनात थे…
लेकिन मीरा मल्होत्रा का दिल कह रहा था —
खतरा दीवारों के बाहर नहीं… अंदर है।
सुबह के पाँच बजे थे।
मीरा मंदिर में बैठी थीं।
घंटी की हल्की आवाज़ पूरे घर में गूँज रही थी।
उनके हाथ काँप रहे थे।
“भगवान… मेरी बेटी को बचा लेना,” उनकी आँखों से आँसू गिर पड़े।
उन्होंने पिछले दो साल में नव्या को धीरे-धीरे पत्थर बनते देखा था।
पहले वो हँसती थी…
जिद करती थी…
माँ की गोद में सिर रखकर सपने सुनाती थी।
अब…
उसकी आँखों में सिर्फ थकान थी।
और कुछ छुपा हुआ डर।
मीरा को वो रात याद थी…
दो साल पहले।
जब नव्या घंटों रोती रही थी।
“माँ… वो मुझे छोड़कर चला गया… उसने एक बार भी नहीं सोचा…”
मीरा ने उसे सीने से लगाया था।
लेकिन उस दिन के बाद नव्या ने रोना छोड़ दिया।
उसने प्यार छोड़ दिया।
उसने विश्वास छोड़ दिया।
और उसी दिन मीरा ने अपनी बेटी को खो दिया।
“माँ…”
मीरा ने पीछे मुड़कर देखा।
नव्या दरवाज़े पर खड़ी थी।
चेहरा सख्त… लेकिन आँखों के नीचे काले घेरे।
“आप फिर सुबह-सुबह पूजा में बैठी हैं?”
मीरा ने मुस्कुराने की कोशिश की।
“माँ हूँ… चिंता तो होगी ना।”
नव्या पास आकर बैठ गई।
“मैं ठीक हूँ माँ। आप इतना मत सोचिए।”
मीरा ने उसके चेहरे को हाथों में लिया।
“तू ठीक नहीं है, नव्या।
तू मजबूत जरूर बन गई है…
लेकिन खुश नहीं है।”
नव्या ने नजरें हटा लीं।
“खुशी ज़रूरी नहीं होती। सुरक्षित रहना ज़रूरी होता है।”
मीरा ने गहरी सांस ली।
“कल रात जो हुआ… वो सामान्य नहीं था। दरवाज़े खुद बंद हो गए… लोग खुद गिर गए… ये सब क्या है?”
नव्या चुप रही।
वो खुद भी जवाब ढूंढ रही थी।
उसी शाम…
मीरा नव्या के कमरे में आईं।
कमरे में हल्की सी ठंडक थी।
“तू कुछ छुपा रही है मुझसे?” मीरा ने पूछा।
नव्या ने लैपटॉप बंद किया।
“नहीं।”
“क्या तू… उसे महसूस करती है?”
नव्या का दिल एक पल को रुक गया।
“किसे?”
मीरा की आवाज़ धीमी हो गई।
“जिसका नाम हम दो साल से नहीं लेते…”
कमरे की हवा भारी हो गई।
परदे अपने आप हल्के से हिले।
नव्या खड़ी हो गई।
“माँ, प्लीज। वो मेरे लिए खत्म हो चुका है।”
“लेकिन क्या सच में?” मीरा ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा।
अचानक…
ड्रेसिंग टेबल पर रखा फोटो फ्रेम गिर गया।
दोनों चौंक गईं।
तस्वीर वही थी —
नव्या और ऋषभ।
फ्रेम के काँच में दरार पड़ गई।
मीरा ने कांपते हाथों से तस्वीर उठाई।
“ये तीसरी बार है, नव्या,” उन्होंने फुसफुसाया।
“क्या?”
“ये तस्वीर अपने आप गिर रही है…”
नव्या का चेहरा सख्त हो गया।
“कोई साइकोलॉजिकल ट्रिक है। कोई हमें डराने की कोशिश कर रहा है।”
“या फिर…” मीरा की आवाज़ काँपी,
“कोई हमें बचाने की कोशिश कर रहा है।”
कमरे में अचानक हल्की सी खुशबू फैल गई।
वही…
जिसे नव्या पहचानती थी।
उसका दिल तेज़ धड़कने लगा।
“ये सब दिमाग का खेल है,” उसने खुद से कहा।
लेकिन अंदर कहीं…
उसे यकीन नहीं था।
रात।
मीरा अपने कमरे में थीं।
नींद उनकी आँखों से कोसों दूर थी।
उन्होंने बिस्तर के पास रखा पानी उठाया।
तभी उन्हें लगा —
कोई खिड़की के पास खड़ा है।
उन्होंने डरते हुए कहा,
“कौन है?”
परदे हल्के से हिले।
चाँदनी अंदर आई।
और उस रोशनी में एक धुंधली सी परछाईं बनी।
मीरा का दिल धड़कने लगा।
लेकिन इस बार उन्हें डर नहीं लगा।
कुछ सेकंड सन्नाटा रहा।
फिर हवा का झोंका आया…
जैसे किसी ने सिर झुकाकर वादा किया हो।
मीरा की आँखों में आँसू आ गए।
“तुम उसे अभी भी…?” उन्होंने अधूरा सवाल हवा में छोड़ दिया।
कमरे की लाइट एक पल को टिमटिमाई।
फिर शांत।
मीरा समझ गईं —
कोई है।
कोई जो उनकी बेटी से जुड़ा है।
कोई जो उसे नुकसान नहीं पहुँचाना चाहता।
लेकिन वो कौन है?
और क्यों छुपा हुआ है?
उधर…
नव्या बालकनी में खड़ी थी।
नीचे शहर की रोशनी थी।
उसने धीरे से कहा —
“अगर तुम सच में हो… तो सामने आओ।”
कुछ पल सन्नाटा रहा।
फिर अचानक…
पीछे से एक बहुत हल्की आवाज आई —
“अभी नहीं…”
नव्या पलटी।
कोई नहीं।
लेकिन उसकी आँखों में इस बार गुस्सा नहीं था।
डर भी नहीं।
सिर्फ एक सवाल —
क्या वो पागल हो रही है?
या सच में…
कोई उसके आसपास है?
नीचे हॉल में लगी घड़ी ने बारह बजाए।
मीरा ने दूर से अपनी बेटी को देखा।
उनका दिल कह रहा था —
आने वाला वक्त और खतरनाक है।
विक्रम चुप नहीं बैठेगा।
और जो अदृश्य ताकत नव्या की रक्षा कर रही है…
वो कब तक छुपी रहेगी?
माँ होने के नाते उन्हें सबसे ज्यादा डर इस बात का था —
अगर सच सामने आया…
तो क्या उनकी बेटी उस सच को सह पाएगी?