The Mafia Weakness - 2 in Hindi Adventure Stories by Goyal Khushi books and stories PDF | The Mafia Weakness - 2

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The Mafia Weakness - 2

सुबह की पहली किरण ने अभी आसमान को छुआ भी नहीं था, लेकिन ऐशा की आँखों में नींद का एक कतरा भी नहीं था। वह कमरे के सबसे ठंडे और अंधेरे कोने में फर्श पर बैठी थी, अपने घुटनों को सीने से चिपकाए हुए। कल रात की बारिश की गूँज और अर्मान खान की वह बर्फीली आवाज़ उसके कानों में अभी भी हथौड़े की तरह बज रही थी।
उसने अपने कांपते हाथों को देखा। वह अब उस दुनिया का हिस्सा थी जहाँ कानून अर्मान की उंगलियों के इशारों पर नाचता था।
वह धीरे से उठी और कमरे के बीचो-बीच बिछे आलीशान ईरानी कालीन पर नंगे पैर चलते हुए विशाल खिड़की के पास पहुँची। बाहर का नज़ारा लुभावना था, लेकिन ऐशा को वह सब खून से सना हुआ महसूस हो रहा था। बारिश थम चुकी थी, मगर दरख्तों से टपकती बूंदें और धुंध भरी हवा एक उदासी ओढ़े हुए थी। यह 'महल' जिसे दुनिया ईर्ष्या से देखती होगी, ऐशा के लिए एक दमघोंटू जेल से कम नहीं था।
कमरे की हर चीज़—वे रेशमी पर्दे, वह नक्काशीदार फर्नीचर, और दीवारों पर लगे सुरक्षा कैमरे—उसे चीख-चीख कर बता रहे थे कि वह निगरानी में है। वह एक 'ट्रॉफी' की तरह यहाँ सजा दी गई थी।
तभी, भारी सागुन के दरवाज़े के खुलने की आवाज़ आई। ऐशा का दिल जैसे गले को चीरकर बाहर आने लगा। उसने पलटकर देखा।
वही साया। वही दहशत। अर्मान खान।
वह बिना किसी आहट के अंदर आया। उसके काले कपड़े उसके सख्त और ताकतवर जिस्म पर फिट थे। उसकी आँखें, जो रात के अँधेरे में काली लग रही थीं, अब सुबह की हल्की रोशनी में गहरी भूरी और उतनी ही बेजान लग रही थीं।
“नाश्ता तैयार है,” उसने संक्षिप्त में कहा। आवाज़ में कोई भावना नहीं थी, सिर्फ एक पत्थर जैसा भारीपन था।
ऐशा ने खुद को समेटा और दीवार से सट गई। “मुझे भूख नहीं है। मुझे यहाँ से जाने दो, अर्मान! तुम ऐसा नहीं कर सकते। पुलिस मुझे ढूँढ रही होगी!”
अर्मान के चेहरे पर एक डरावनी मुस्कान उभरी—एक ऐसी मुस्कान जिसमें कोई खुशी नहीं थी। उसने एक सधा हुआ कदम ऐशा की तरफ बढ़ाया। ऐशा को लगा जैसे कमरा छोटा होता जा रहा है और हवा कम पड़ रही है।
“पुलिस?” वह उसके इतना करीब आ गया कि ऐशा उसकी गरम सांसें अपने चेहरे पर महसूस कर सकती थी। “इस शहर की पुलिस मेरे पैरोल पर है, ऐशा। और तुम्हारा घर? वह अब एक धुंधली याद है। तुम अब मेरी दुनिया की सरहद के अंदर हो। और यहाँ से बाहर सिर्फ मेरी इजाज़त से निकला जा सकता है।”
“लेकिन क्यों? मैंने क्या किया है?” ऐशा की आवाज़ रोनी हो गई।
अर्मान ने झुककर उसकी आँखों में झाँका। उसके हाथों में एक ट्रे थी, जिसे उसने पास की मेज पर बड़े सलीके से रखा। “तुमने कुछ नहीं किया। लेकिन तुम्हारे वजूद ने मेरी दुश्मनी की आग में घी डाल दिया है। बाहर तुम्हारी जान की कीमत सिर्फ एक गोली है, लेकिन यहाँ... यहाँ तुम मेरी हिफाज़त में हो। चाहे तुम्हें यह कैद लगे या सुरक्षा, तुम्हें यहीं रहना होगा।”
उसने एक प्लेट में टोस्ट और फल रखे और ऐशा की ओर इशारा किया। “खाना लो। मुझे कमज़ोर लोग पसंद नहीं हैं।”
“और अगर मैं न खाऊं तो?” ऐशा ने हिम्मत जुटाकर उसकी आँखों में आँखें डालकर पूछा।
अर्मान का चेहरा अचानक कठोर हो गया। उसने ऐशा की ठुड्डी को अपनी उंगलियों से कसकर पकड़ा और उसका चेहरा ऊपर उठाया। उसकी पकड़ में दर्द था, लेकिन एक अजीब सी तड़प भी।
“अगर तुम सहयोग करोगी, तो यह महल तुम्हारे लिए जन्नत होगा। लेकिन अगर तुमने जिद की... तो मैं वही करूँगा जो मैंने कल किया था। मैं जबरदस्ती करना भी जानता हूँ और सजा देना भी। चुनाव तुम्हारा है, ऐशा। या तो मेरी बात मानो, या मेरी नफरत का सामना करो।”
उसकी आँखों में नरमी की एक बहुत पतली सी लकीर थी, जो पलक झपकते ही गायब हो गई। ऐशा ने महसूस किया कि अर्मान जितना खतरनाक बाहर से था, उसके अंदर उतना ही गहरा सन्नाटा था। क्या वह अकेला था? क्या इस आलीशान महल की दीवारों के पीछे कोई ज़ख्म छुपा था?
अर्मान मुड़ा और बिना पीछे देखे कमरे से बाहर निकल गया, लेकिन जाते-जाते उसके शब्द हवा में तैर रहे थे: “सब कुछ खा लेना। मैं नज़र रख रहा हूँ।”
ऐशा ने कांपते हाथों से सेब का एक टुकड़ा उठाया, लेकिन उसका ध्यान कमरे के कोने में लगे उस छोटे से कैमरे पर गया। उसे अहसास हुआ कि अर्मान अकेला नहीं था जो उसे देख रहा था। इस महल की परछाइयों में कोई और भी था—कोई ऐसा जो ऐशा की मौजूदगी से खुश नहीं था।
अगली सुबह होने तक, ऐशा को यह समझ आ गया था कि उसकी एक छोटी सी गलती, उसकी जान ले सकती थी। वह एक ऐसे खेल का हिस्सा बन चुकी थी जहाँ प्यार और मौत के बीच का फासला बहुत कम था।