ये सफर तब शुरू होता है जब आप हर रिश्ते से मजबूर हो जाते हैं। आप अपनी भावनाएँ, दुःख, दर्द, तकलीफ़े या रोज़मरा की बात चाह कर भी किसी से नहीं बता सकते...
हंसता, खेलता, मुस्कुराता, गाता, नाचता, शोर मचाता, सबको हंसाता चेहरा जब एक दम से शांत हो जाता है.... क्योंकि उसके अंदर बहुत कुछ टूट जाता है....
पहले तो ऐसा कुछ नहीं था....कहने वाले लोग....बोलकर चले जाते हैं, पर ऐसा क्यों हुआ ये कोई नहीं जानना चाहता।
ये सफर हर किसी की जिंदगी में आता है.... किसी को संघर्ष करने के बाद खुशियों की मंजिल मिल जाती है तो कोई हार जाता है और खामोशी के गहरे समुद्र में कहीं खो जाता है।
ये खामोशी भरा सफर इस कदर जान लेवा हो जाता है कि आप मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर हो जाते हैं। समाज तो क्या घर के लोगो से भी आपका कोई मतलब नहीं रहता। आप बस चुप हो, टूट रहे हो, खुद को खो रहे हो....और धीरे-धीरे सब ख़त्म हो जाता है।
आपका लोगो से मिलना, हंसना बोलना, संवारना, घूमना फिरना, खाना पीना या खुश मिजाजी के साथ जीना...सब खत्म हो जाता है।
खुशियों की रोशनी दूर-दूर तक कहीं दिखाई नहीं देती, आप अंदर ही अंदर खुद की एक नई दुनिया बसाते हो... जहां सिर्फ अंधेरा है... गहरा अंधेरा....
काश की कोई समझ पाता हमारे अंदर का तूफ़ान
तो इस कदर हमारी खुशियों की झोपड़ी ना उजड़ जाती...
आपकी जिंदगी में ये सफर तब शुरू होता है जब आप दूसरी बार मां बनती हो। क्योंकि पहला बच्चा तो पहले की खुशी में पल जाता है। दिक्कत तो दूसरे बच्चे के जन्म पर शुरू होती है।
ये वो समय होता है जब आप रिश्तों को बदलते देखते हो, लोगो को बदलते देखते हो, अपनी हर उम्मीद को टूटा हुआ पाते हो, मदद की आस में हर बार निराशा दिखते हो। खुद की किस्मत को पता है. अपने कर्मों को दोष देते हो।
पर गलती आपकी नहीं है....गलत तो वो लोग हैं जो इस नाज़ुक समय में आपकी जरूरत नहीं समझ पाए, जो आपको प्यार से गले नहीं लगा पाए, जो आपके साथ थोड़े से लोग बोल ना पाए..
इसी वजह से आपकी जिंदादिली से भरपूर जिंदगी एक जिंदा लाश में तबदील हो जाती है। सबको दिखता है कि आप खामोश हो गए पर क्यों...इससे किसी को कोई मतलब नहीं।
आप बहुत बहादुर हो, बहुत मजबूत हो, आप जानते हो कि आपको कैसे खुद को संभालना है...
इसलिए अगर आप मां बनें तो बच्चे की जिम्मेदारी या घर के काम के साथ-साथ खुद का भी ख्याल रखें। किसी से उम्मीद ना करे खुद को मजबूत बनाएं, खुद को ऐसे कमो में लगाएं जिससे आपको खुशी मिलती है, अपनी जिंदगी अपने बच्चों के साथ जिएं....और सबको भाड़ में जाओ दे....
जब आप सब कुछ छोर कर सिर्फ अपने और अपने बच्चों पर ध्यान दोगे तो आपको कुछ और सोचने या किसी चीज से परेशान होने की जरूरत नहीं पड़ेगी l
खुद को सम्भालने के बाद ही तो आप अपने बच्चों का जीवन सम्भाल पाएँगी l
उम्मीद करती हूं कि इसे पढ़कर आपको थोड़ा सकारात्मक अनुभव हुआ होगा l
मजबूत बनो, खुश रहो, प्यारे रहो
Shalini gautam