Sadiyo se Tum Meri - 5 in Hindi Love Stories by Pooja Singh books and stories PDF | सदियों से तुम मेरी - 5

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सदियों से तुम मेरी - 5

अगले कुछ हफ़्तों में दिव्या की जिंदगी में अजीब सा संतुलन आने लगा। कॉलेज के दिन सामान्य रूप से गुजरने लगे और अर्जुन हमेशा उसके आसपास रहते हुए उसे उस अंधकार से बचा रहे थे, जो अब तक उसके सपनों और नींद में परेशानियाँ पैदा कर रहा था।
पहली बार उसे महसूस हुआ कि वह रातों को बिना डर के सो सकती है। वह जागते ही अपने कमरे की खिड़की से बाहर देखती और सुबह की रोशनी में ही एक नई ताजगी महसूस करती। उन सपनों की बार-बार आने वाली झलकियाँ धीरे-धीरे कम होने लगी थीं—घना जंगल, चमकती झील, वह छाया—अब वे बस हल्की यादों में बदल चुकी थीं, जैसे हवा में उड़ते धूल के कण।
दिव्या की मुस्कान अब पहले से अलग थी। हर सुबह जब वह उठती, उसे खुद पर भरोसा था कि वह सुरक्षित है। उसे अब यह डर नहीं था कि अचानक कुछ खतरनाक होगा। उसकी खुशी में अब स्थायित्व था।
कभी-कभी कॉलेज में अर्जुन के साथ चलते हुए, दिव्या अचानक ठहर जाती और उसकी ओर देखती। उसकी आँखों में एक हल्की चमक और आस्था थी। अर्जुन उसे देखकर मुस्कुरा देता। वह मुस्कान ऐसी थी, जिसमें सारी बातें बिना शब्दों के कह दी जाती थीं।
एक दिन कॉलेज की गार्डन में दोनों अकेले थे। हल्की हवा चल रही थी और पेड़ों की पत्तियाँ धीरे-धीरे सरसराती थीं। दिव्या ने धीरे से कहा, “तुम्हें पता है… मुझे अब अपने सपनों से डर नहीं लगता। और मुझे समझ में आया कि यह सब… तुम्हारे वजह से है।”
अर्जुन ने उसका हाथ हल्के से पकड़ा। उसकी आँखों में वही गंभीरता थी, लेकिन साथ में एक गर्माहट भी। “मैं सिर्फ इतना चाहता हूँ कि तुम खुश रहो,” उसने कहा।
“और मैं हूँ,” दिव्या ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब मुझे लगता है कि मैं सच में खुश हूँ। मेरे अंदर वह डर नहीं रहा। मुझे नींद आती है, मुझे चैन है… और मुझे लगता है कि मैं खुद पर भरोसा कर सकती हूँ।”
अर्जुन ने उसकी आँखों में देखा। उसे महसूस हुआ कि दिव्या अब पहले जैसी नहीं रही—वह मजबूत थी, लेकिन फिर भी कोमल थी। उसका प्यार अब केवल उसके वादे तक नहीं, बल्कि उसके अस्तित्व तक फैल चुका था।
“तुम जानती हो,” अर्जुन ने धीरे से कहा, “सच्ची खुशी सिर्फ बाहरी चीजों से नहीं आती। जब तुम्हें अपने भीतर का भरोसा और सुरक्षा मिलती है, तभी तुम्हें असली खुशी महसूस होती है। और अब तुमने वह पा लिया है।”
दिव्या ने उसकी ओर देखा और हल्की मुस्कान दी। “हां, और तुम्हारे बिना यह संभव नहीं होता। तुम हमेशा मेरे साथ रहे… हर कदम पर।”
अर्जुन ने उसके हाथ को हल्का सा दबाया। “और मैं हमेशा रहूँगा,” उसने कहा। “तुम्हारे सपनों से मुक्ति दिलाने के बाद भी, मैं तुम्हें हर खतरे से बचाने के लिए तैयार रहूँगा। यही मेरा प्यार है।”
दिव्या ने अपनी आँखें बंद कीं और पहली बार पूरी तरह चैन महसूस किया। उसका मन शांत था, उसका दिल हल्का था। उसे अब डर नहीं था। उसे यह भी महसूस हुआ कि अर्जुन सिर्फ उसका सहारा नहीं, बल्कि उसका अटूट विश्वास भी था।
लेकिन, बाहर की दुनिया अभी भी शांत नहीं थी। दूर कहीं, अंधकार की गहरी शक्ति फिर से उभर रही थी। वह जान चुकी थी कि अर्जुन की मौजूदगी उसके लिए सबसे बड़ी सुरक्षा है, लेकिन आने वाले दिनों में उनका प्यार और उनकी शक्ति—दोनों—कठिन परीक्षाओं से गुजरने वाले थे।
दिव्या ने धीरे से कहा, “अब मैं अपने सपनों से डरती नहीं। और शायद मैं अब अपनी असली खुशी पा रही हूँ।”
अर्जुन ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया। “तुम्हारी यह खुशी… मेरे लिए सबसे बड़ी जीत है। अब चाहे जो भी आए, हम साथ हैं।”
उस बगीचे में खड़े दोनों, शाम की हल्की रोशनी में, पहली बार सच में चैन महसूस कर रहे थे। दिव्या के चेहरे पर वह मुस्कान थी, जो सालों बाद लौट आई थी—एक अधूरी मोहब्बत की पूरी होने वाली पहली झलक।
और आकाश के कोने में, दूर कहीं, वह काली छाया अभी भी गहरी थी, तैयार थी। लेकिन अब अर्जुन और दिव्या के बीच का यह प्यार, उनकी नई शक्ति, उनके विश्वास ने उसे चुनौती देने की हिम्मत कम कर दी थी।
कॉलेज की सुबह हमेशा हल्की हलचल और हँसी-ठिठोली से भरी रहती थी। लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में, सभी छात्रों की नजरें अक्सर दिव्या और अर्जुन की तरफ खिंचती थीं। उनका रिश्ता धीरे-धीरे सबके सामने आने लगा था, और दोनों इसे खुलकर नहीं छिपाते थे।
कॉलेज में सभी जानते थे कि अर्जुन केवल दिव्या का दोस्त नहीं—वह उसके लिए कुछ और था। दोनों अक्सर लंच ब्रेक में साथ दिखाई देते, बगीचे में चलते, या कभी-कभी छोटी-छोटी बातें करते। कभी अर्जुन दिव्या की किताब ठीक करता, कभी वह उसे हँसाने की कोशिश करता।
क्लास में भी उनकी नज़रों का आदान-प्रदान अक्सर छात्रों की नजरों में आता। लोग कहते, “वाह, यह तो एकदम स्वीट कपल लगते हैं।”
कुछ स्टूडेंट्स मुस्कुराते हुए उनकी तारीफ करते, कुछ अपने आप में सोचते कि कितना प्यारा रिश्ता है। लेकिन कुछ को यह सब सहन नहीं हो रहा था।
विशेषकर वह स्टूडेंट्स, जिन्हें खुद भी अर्जुन या दिव्या की तरफ रुचि थी, धीरे-धीरे जलन महसूस करने लगे। उनकी निगाहें अक्सर उन दोनों पर टिकतीं, और कुछ छोटे-छोटे टिप्पणियाँ भी सामने आतीं—“देखो न, कितने अच्छे लग रहे हैं।” या फिर, “हमेशा साथ, कभी अकेले नहीं।”
लेकिन अर्जुन और दिव्या को यह सब परवाह नहीं थी। उनका ध्यान केवल एक-दूसरे पर था। कॉलेज की लाइब्रेरी में किताबें पढ़ते समय भी अर्जुन हमेशा उसकी मदद करता—कभी नोट्स समझाता, कभी उसका बैग उठाता। दिव्या अक्सर उसकी मदद लेने के बजाय खुद मुस्कुराकर कह देती, “तुम हमेशा मेरे लिए यहाँ हो, है ना?”
अर्जुन हल्के से मुस्कुराता। उसकी आँखों में वही गंभीरता और प्यार झलकती थी। “हमेशा।”
दिव्या को धीरे-धीरे यह एहसास होने लगा कि उसके दिल में अर्जुन की मौजूदगी सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, बल्कि एक गहरा अपनापन भी ला रही थी। जब वह उसके पास होती, उसे डर नहीं लगता था, उसे खालीपन महसूस नहीं होता था। उसके लिए अर्जुन सिर्फ प्रेम नहीं—उसकी दुनिया का हिस्सा बन गया था।
कॉलेज के हॉल में एक दिन ऐसा हुआ कि कुछ स्टूडेंट्स अर्जुन और दिव्या को पास-पास खड़े देखकर हँसने लगे। किसी ने मजाक में कहा, “लगता है, आज फिर स्वीट कपल मोड में हैं।”
दिव्या ने लाल होते हुए हँसी रोकते हुए कहा, “हम सिर्फ साथ हैं। बस।”
अर्जुन ने उसका हाथ हल्के से पकड़ते हुए कहा, “और यही मुझे खुशी देता है। दुनिया की नजरें चाहे जैसी भी हों, यह हमारा रिश्ता है।”
कुछ स्टूडेंट्स चुप रह गए, लेकिन कई की आँखों में हल्की जलन साफ दिख रही थी। किसी को गुस्सा आया, किसी को हैरानी, किसी को बस ईर्ष्या। लेकिन अर्जुन और दिव्या को इसका कोई फर्क नहीं पड़ता था। उनका प्यार सिर्फ उनके बीच था।
वहीं बगीचे में, शाम के समय, जब दोनों अकेले थे, दिव्या ने कहा, “अर्जुन, मुझे अब यह सब देखकर अजीब लगता है। लोग हमें देखकर क्या सोचते हैं, यह कभी-कभी परेशान करता है।”
अर्जुन ने उसकी आँखों में देखा और मुस्कुराया। “दिव्या, हमें किसी की नजरों की चिंता नहीं करनी चाहिए। प्यार और विश्वास वही मजबूत होता है, जो केवल हमें पता हो। बाकी सब कुछ… सिर्फ आवाज़ें हैं।”
दिव्या ने हल्का सा सिर हिलाया। उसका दिल हल्का हो गया। उसे यह एहसास हुआ कि अर्जुन के प्यार में सिर्फ अपनापन ही नहीं, समझदारी और सुरक्षा भी है।
और जैसे-जैसे दिन बीतते गए, दोनों का प्यार और गहरा होता गया। कॉलेज में लोग उनकी मुस्कान और उनके हाव-भाव देखकर समझने लगे कि यह रिश्ता सिर्फ दिखावा नहीं, बल्कि सच्चाई में मजबूत है। कुछ को खुशी हुई, कुछ को जलन हुई, लेकिन दोनों ने अब अपने प्यार को और खुलकर जीना शुरू कर दिया।
शाम के समय, बगीचे की नदी किनारे, अर्जुन ने दिव्या का हाथ पकड़कर कहा, “देखो, आज भी हम साथ हैं। और मुझे यकीन है, चाहे जो भी मुश्किल आए, हम इसे एक साथ सामना करेंगे।”
दिव्या ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया और पहली बार बिना डर के महसूस किया कि अब उसका प्यार सुरक्षित है, स्थिर है, और दुनिया की किसी भी नजर से मजबूत है।
लेकिन कहीं दूर, छाया अभी भी जाग रही थी। उसे समझ में आ गया था कि अर्जुन और दिव्या का यह प्यार अब उसकी चुनौती बनने वाला था।