The Black Singularity in Hindi Magazine by Prabhjot Singh Nagra books and stories PDF | The Black Singularity

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The Black Singularity

(The Black Singularity)
प्रतिपादक: प्रभजोत सिंह
विषय: ब्लैक होल, डार्क एनर्जी का रूपांतरण और ब्रह्मांडीय चक्र का नया मॉडल।
१. डार्क एनर्जी का उपभोग और गुरुत्वाकर्षण का विस्तार
प्रभजोत सिंह का सिद्धांत प्रस्तावित करता है कि ब्लैक होल केवल 'पदार्थ के भक्षक' नहीं हैं, बल्कि वे ब्रह्मांड के सबसे बड़े 'एनर्जी सिंक' हैं।
ऊर्जा अवशोषण: वर्तमान विज्ञान मानता है कि डार्क एनर्जी अंतरिक्ष को फैलाती है, लेकिन प्रभजोत सिंह के अनुसार, ब्लैक होल इस डार्क एनर्जी को अपने अंदर खींचकर उसे स्थिर द्रव्यमान (Static Mass) में बदल देते हैं।
गुरुत्वाकर्षण वृद्धि: जैसे-जैसे डार्क एनर्जी का प्रतिशत ब्लैक होल के अंदर बढ़ता है, ब्लैक होल का गुरुत्वाकर्षण बल (Gravitational Force) इतना शक्तिशाली हो जाता है कि वह प्रकाश की गति को भी तुच्छ बना देता है।
२. स्पेस-टाइम का महा-संकुचन (The Grand Contraction)
जब डार्क एनर्जी की एक बड़ी मात्रा (जैसे १०% या उससे अधिक) ब्लैक होल द्वारा सोख ली जाती है, तो ब्रह्मांड का विस्तार (Expansion) रुक जाता है।
समय का ठहराव: भारी मास के कारण 'टाइम डाइलेशन' अपनी चरम सीमा पर पहुँच जाता है। ब्लैक होल के प्रभाव क्षेत्र में समय पूरी तरह रुक जाता है।
एटॉमिक कोलैप्स: गुरुत्वाकर्षण का दबाव इतना अधिक होता है कि एटम्स (Atoms) के बीच का खाली स्थान खत्म हो जाता है। प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन आपस में दबकर एक 'न्यूट्रल सुपर-मैटर' बना देते हैं, जो 'The Black Singularity' का आधार बनता है।
३. 'The Black Singularity' की अवस्था
यह ब्रह्मांड की वह अंतिम स्थिति है जहाँ सब कुछ एक बिंदु में समाहित है।
शून्य सूचना (Zero Information): प्रभजोत सिंह के अनुसार, इस अवस्था में पुरानी दुनिया की कोई भी याद या सूचना (Information) जीवित नहीं रहती। ब्लैक होल का 'इवेंट होराइजन' एक ऐसी दीवार बन जाता है जिसके अंदर सब कुछ Reset हो जाता है।
डार्क एनर्जी का संचय: यह सिंगुलैरिटी वास्तव में डार्क एनर्जी का एक 'प्रेशर कुकर' बन जाती है, जहाँ ऊर्जा बाहर निकलने के लिए छटपटाती है।
४. प्रकाश का उद्भव और नया ब्रह्मांड (The Re-emergence)
करोड़ों-अरबों वर्षों के उस परम अंधकार के बाद, जिसे प्रभजोत सिंह 'स्थिर काल' कहते हैं, एक बदलाव आता है:
विकिरण का विस्फोट: सिंगुलैरिटी के अंदर का दबाव एक सीमा को पार कर जाता है। यह बिग बैंग जैसा अचानक धमाका नहीं, बल्कि एक निरंतर ऊर्जा प्रवाह होता है।
प्रकाश का जन्म: संचित डार्क एनर्जी वापस फोटोन्स (Photons) और प्रकाश में बदलने लगती है। यही प्रकाश नए ब्रह्मांड के निर्माण का कच्चा माल (Raw Material) बनता है।
निष्कर्ष

समय का महा-चक्र (The Cosmic Timeline):
प्रभजोत सिंह के अनुसार, यह प्रक्रिया अत्यंत धीमी है। डार्क एनर्जी को सोखने में अरबों-खरबों वर्ष (
 वर्ष) लगेंगे। पूर्ण संकुचन और 'The Black Singularity' बनने में गूगोल वर्ष (
 वर्ष) लग सकते हैं। अंततः, करोड़ों वर्षों के स्थिर अंधकार के बाद ही प्रकाश का पुनर्जन्म संभव होगा।

ब्रह्मांड का भविष्य:
ब्लैक होल का गुरुत्वाकर्षण डार्क एनर्जी को जीतकर, समय को रोक देगा और अंततः घोर अंधकार से नया प्रकाश उत्पन्न करेगा।

प्रभजोत सिंह का 'The Black Singularity' सिद्धांत यह स्थापित करता है कि ब्रह्मांड एक कभी न खत्म होने वाला चक्र है। ब्लैक होल इस ब्रह्मांड को 'डिलीट' करने वाले और अगले ब्रह्मांड के लिए 'ऊर्जा बचाने वाले' यंत्र हैं। यह सिद्धांत बताता है कि अंत ही शुरुआत है, और अंधकार ही प्रकाश की जननी है।
हस्ताक्षर: प्रभजोत सिंह