What was said happened - 1 in Hindi Astrology by Brijmohan sharma books and stories PDF | जो कहा वही हुआ - 1

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जो कहा वही हुआ - 1

भूमिका

मित्रों अनेकों लोग शेयरबाजार मे ट्रेडिंग करते हैं कितु वे यह जानने का कष्टं नहीं करते कि उनकी जन्मपंत्रिका मे शेयरमार्कैट से कमाने के योग है भी या नहीं ।

वे लगातार घाटा उठाने पर भी यह जानने का पृयास नहीं करते कि जन्मपंत्रिका मे शेयरमार्कैट से कमाने या गंवाने के क्या योग है। अनेक लोग कोई प्रोफेशन या व्यवसाय दूसरों को कमाते देख चुन लेते हैं और फिर बुरी तरह से असफल होते हैं। यदि किसी अच्छे ज्योतिषी से पूर्व मे ही बतलाकर सही परामर्श ले लिया जाऐ तो संभव है कि  भारी नुकसान से बचा जा सकता है व सफलता पाई जा सकती है।

मेरी उम्र ८५ साल की होकर अधिक है | मैंने लोगों द्वारा दिखाई गई पत्रिकाओं का रिकॉर्ड नहीं रखा | मेरी स्मरंणशक्ति कमजोर है अतः मै वास्तविक पत्रिकाए कोट करने में असमर्थ हूँ | किन्तु इस अंक में  वास्तविक घटनाएँ दी हुई है | उनके योग मुझे याद है किन्तु वास्तविक पत्रिकाए याद नहीं है | 

शेयर बाज़ार के योग तभी काम करते है  जब तेजी में तेजी व मंदी में मंदी खेली जाए , ऐसा मै समझता हूँ | मै 

कोई शातिर खिलाडी नहीं हूँ इससे उलट भी संभव है | किन्तु शेयर मार्किट से थोडा बहुत मैंने कमाया है |

मै कोई भगवान नहीं जो सौ प्रतिशत सही हो, मै इन्सान हूँ , मै गलतियाँ कर सकता हूँ , मै अधुरा हूँ |

अनेक बार मेरे द्वारा बताई भविष्यवाणी सही नहीं हुई किन्तु उसी जातक ने समय बीत जाने के बाद बताया कि आपने जो कहा वह ,समय लगा; किन्तु सही हुआ | अनेक बार बात सही न होकर गलत होती दिखाई देती है किन्तु समय बीत जाने पर वही बात सही साबित होती है, नहीं भी हो सकती है | ज्योतिष १०० प्रतिशत सही न होकर काफी हद तक सही साबित होते हुए मैंने देखा है | | अनेक बार मुझे खुद अपनी बताई भविष्यवाणी याद नहीं रहती किन्तु कोई व्यक्ति बतलाता है कि आपके द्वारा कही बात सही सिद्ध हुई |

मुझे आशा ही नहीं विश्वास है कि पाठकों के लिए मेरी यह रचना आनंदप्रद व लाभप्रद सिद्ध होगी |

 

 

● शेयरमार्कैट से कमाने के योग

शेयरमार्कैट पत्रिका के पंचम भाव से देखा जाता है।

इसका स्वामी केन्द्र या त्रिकोण मे होना शुभ होता है।

पंचमेश का स्वग्रही ,मित्र,उच्च राशि मे होना शुभ होता है।

पंचमेश पर शुभ गृहों की दृष्टि ऐवं साथ होना चाहिए।

पंचमेश पर साधारणतया शनि ,राहू ,केतु, मंगल आदि का साथ या दृष्टि नहीं होना चाहिए किंतु अपवाद है कि ये गृह शुभ भावों के स्वामी हो, शुभ हो तो इनका साथ व दृष्टि शुभ हो जाती है।

 

कारक गृह

अलग अलग गृह अलग वस्तुओं के कारक होते हैं जैसे

रवि - सोने ,राज्य ,पिता, शासन, आत्मा आदि का कारक है ।

चंद्रमा -  चांदी ,पानी ,जलीय वस्तुओं, माता आदि का कारक है ।

बुध- साधारण व्यापार , कम्पुटर ,वणिक वर्ग  

गुरु , - साधारण व्यापार ,पूजा पाठ ,गुरु 

शुक्र -  फेन्सी वस्तुएं ,हीरे ,ज्वेलरी आदि

मंगल - अश्त्र शस्त्र ,युद्ध, सीमेंट, इंजीनियरिंग आदि

शनि -  धातुएं, लोहा , पृथ्वी के गर्भ से निकलने वाली धातुएं ध अन्य

राहू  शनि वत

केतु  मंगल वत

 

शार्ट टर्म, लांग टर्म

शेयरमार्कैट मे लांग टर्म या शार्ट टर्म कौन सी ट्रेडिंग अपनाई जाऐ ? 

इस पृश्न के लिए शार्ट टर्म के लिए चंद्रमा का केन्द्र त्रिकोण मे स्थिति ,स्वगृही ,शुभ गृहों से युक्त होना चाहिए।

लांग टर्म के लिए शनि,गुरु का शुभ स्थानों मे स्थित ,शुभ गृहों से युक्त होना शुभ रहता है।

पंचम पंचमेश पर चंद्रमा या बुध की दृष्टि शार्ट टर्म मे सफलता वहीं शुभ शनि व गुरु की युति ,दृष्टि लांग टर्म मे सफलता दिलाता है ।

 चंद्रमा शुभ.होगा शार्ट टर्म मे सफलता मिलती है ।

 नीचभंग राजयोग

पत्रिका मे पंचमेश के नीच होकंर उसका नीचभंग हो जाना नीचभंग राजयोग बनाता है।

इस योग के होने से जातक पहले काफी घाटा उठाता है किन्तु अंत मै उसे काफी प्रॉफिट होता है |

जैसे पंचमेश रवि यदि तुला राशि का हो तो वह नीच कहलाता है । किंतु यदि उसका उच्चनाथ मंगल उससे या लग्नेश अथवा चंद्रमा से केन्द्र मे  हो तो उसका नीचभंग राजयोग हो जाऐगा । और भी अन्य पृकार से नीचभंग हो सकता है।

ऐसे मे व्यक्ति भारी हानि घाटा उठाने के बाद अच्छा लाभ कमाता है।

 

विपरीत राजयोग,हर्ष योग

कभी कभी पत्रिका मे भारी निर्धनता के योग के बावजूद व्यक्ति संघर्ष उठाने के बाद अच्छा धनवान बन जाता है।

इसका कारण विपरीत राजयोग होता है।

जब छटे भाव का स्वामी आठवें भाव अथवा अष्टम का स्वामी छटे हो तो यह विपरीत राजयोग होता है ।

इन्हें हर्ष योग , सरल योग आदि कहा जाता है 

इसी पृकार 12 वे भाव के स्वामी का 6,8,12 स्थिति में विपरीत राजयोग बनाती है।

इन गृहों की परस्पर युति भी विपरीत योग बनाती है ।

ऐसे योग का जातक पहले काफी नुकसान उठाता है किन्तु धैर्य से ट्रेडिंग करने पर अच्छा फायदा उठाता है |

 

ऐक सच्चा उदाहरण :

मकर लग्न कि ऐक पत्रिका में लाभ का स्वामी मंगल नीच का था किन्तु उसका नीचभंग उसके उच्च्नाथ शनि के मंगल पर राशी द्रष्टि होने से हो रहा है | इस जातक ने शेयर बाज़ार में ३० वर्षों तक लोस किया किन्तु उसकी लत नहीं छूटी | यहाँ मंगल व शनि दोनों पाप गृह है | इसने एसा घाटा उठाया कि इसकी साडी पूंजी समाप्त हो गई इसका माकन बिकते हुए बाल बाल बचा | ऐक बार शेयर बाज़ार में भारी गिरावट हुई तब यह व्यक्ति भारी घाटा उठाकर बचा हुआ नाम मात्र का पैसा लेकर हमेशा के लिए बाज़ार से बाहर निकलने के लिए सौदा करने को ही था तभी इसके जीवन में मार्किट  भारी  तेजी से दौड़ने लगा और इसके वारे न्यारे हो गए | 

शेष ज्योतिष कि सच्ची घटनाए अगले अंक में प्रकाशित करूँगा | 

 

लेखक बृजमोहन शर्मा ७९१ सुदामानगर , इन्दौर (म.प्र.) पिन ४५२००९ व्हाटएप ९४२४०५१९२३