Me and My Feelings - 144 in Hindi Poems by Dr Darshita Babubhai Shah books and stories PDF | में और मेरे अहसास - 144

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में और मेरे अहसास - 144

ख़ासकोई मेरा पूछे तो कहना ख़ास नहीं हूँ l
किसी भी जवान दिल की आश नहीं हूँ ll


लोगों को दिखाने को नज़दीक आया था l
जितना दिखता हूँ उतना भी पास नहीं हूँ ll


जरा सी बात रूठ के जाने की बातों से l
गभरा के रुकने जाने वाली साँस नहीं हूँ ll


बुलाने से आ जाऊँगा गलतफ़हमी में हो l
चाहने वाला हूं महफिलों का दास नहीं हूँ ll


एक बार साथ चलने का वादा किया है तो l
यूँ हाथ छुड़ाकर चल दोगे तो रास नहीं हूँ ll
१-२-२०२६ 
सुहाना मौसम 
सुहाने मौसम की रवानी चित को बहका गई l
पहचानी सी आहट धड़कनों को धड़का गई ll


दिखने में तो बड़ा दिवाना लगता है नखराला l
जब चाहे बदल जाने की अदाएं भड़का गई ll


इश्क़ की फितरत तो देखो भरी महफिल में l
हुस्न मालिका के रूख से नकाब सरका गई ll


लम्हा भर खिली खिली धूप कभी बारिस भी l
फिझाओ की रमत तेज बिजली गरजा गई ll


उम्मीद की किरन जिगर में दीपक जलाकर l
होठों पर मुस्कान देकर जी को मलका गई ll
२-२-२०२६ 
अपनी सुनाई दिवानगी
जब अपनी सुनाई दिवानगी तो जान से भी गया l
आगे बढ़ने की ख्वाइशों में उड़ान से भी 
गया ll


बोझ समझकर एक के बाद एक छोड़ता ही 
गया l
कारवाँ के साथ साथ चलते सामान से भी 
गया ll


ज़मी पर पाँव टिकने का नाम नहीं लेते हैं 
तो l
आज उड़ने की तमन्ना में आसमान से भी 
गया ll


सालों की मोहब्बत पल में भुलाकर चल 
दिये l
जी न सकेगे यहीं वहम ओ गुमान से भी 
गया ll


महफ़िल में दोस्तों ने शर्त लगाई होश में 
रहने की l
एक अजूबा हुआ पीने के कमान से भी 
गया ll
३-२-२०२६ 
हाल दिल का
तुम बिन हाल दिल का जो है जानाँ तुम्हें बताएं क्या?
रेज़ा रेज़ा समेटकर जोड़ रखा है कहो दिखाएं क्या?


तुम्हारे बाद जिन्दगी जीने का कोई मकसद 
न रहेगा l
दिल से निकाल रहे हो तो दुनिया से चले जाएं 
क्या?


ये जो बिना बात के ही रूठने का क्या मतलब 
है कि l
जुदाई के वक्त में दिल हमारा बहलाएंगी हवाएं 
क्या?


दूरियाँ जो दिलों के दरमियाँ आई है वजह तो 
कहो l
तुम्हें बहलाने जिगर जलाकर दिये जगमगाएं 
क्या?


वैसे भी तुम्हारा उखड़ा हुआ वर्तन न सह 
सकेंगे l
तुम्हारें बुलाने पर आएं थे चाहते हो लौट जाएं 
क्या?
४-२-२०२६ 
इश्क़ भी पाक बंदगी 
इश्क़ भी पाक बंदगी हैं l
सच्चा इश्क़ दिवानगी हैं ll


गर इश्क़ रुह से है तो l
मोहब्बत में सादगी हैं ll


इन्द्रधनुष के जैसा ही l
दिल ए हुस्न बरगी हैं ll


एक पल नजर प्यार से l
देखने की तिश्नगी हैं ll


इश्क़ में जीना मरना ll
इश्क़ से ही जिंदगी हैं ll
५-२-२०२६ 
क्यूँ चली आई याद 
क्यूँ चली आई याद जब के चैन से जी रहे हैं l
जूठी मोहब्बत में मिले ज़ख्मों को सी रहे हैं ll


लाख भुलाने की कोशिशों को करने के बाद l
अब तक ख्वाबों और ख्यालों में भी रहे हैं ll


इस तरह होशों हवास से लिपटी हुई है कि l
मुस्कान होठों की छीन न जाए बी रहे हैं ll


लगता है वहीं मंजर फिर से ज़ी रहै क्योंकी l
हसीन मुलाक़ातों के लम्हें याद कर पी रहे हैं l  


बिछड़ते वक्त क़सम दिलाई थी न मिलने की l
घर नहीं जा सकते तो गली से लोट ही रहे हैं ll
६-२-२०२६ 
क्षितिज 
भीतर के क्षितिज के दायरे में रहना पड़ता हैं l
कभी कभी हाल ए दिल भी कहना पड़ता हैं ll


जब हमारी करनी का फल भुगतना पड़े तब l
कुदरत की मार को चुपचाप सहना पड़ता हैं ll


ग़र परिस्थिति का कोई निवारण न हो तो l
जिस दिशा सभी जाते वहां बहना पड़ता हैं ll


वक़्त से पहले किसीको कुछ मिलता हैं कि l
सुकून के लिए धीरज को पहना पड़ता हैं ll


कभी खुशियों की झड़ी, कभी ग़म आ खड़ा l
किस्मत में जो बोझ लिखा वो ढहना पड़ता हैं ll
७-२-२०२६ 


मयख़ाने में जाने वाला हर शख़्स शराबी नहीं होता हैं l
मस्जिद में जाने वाला हर शख़्स नमाज़ी नहीं होता हैं ll


दो चार लम्हें यार दोस्तों के साथ दिल को 
बहला ने l
महफिल मे जाने वाला हर शख़्स अय्याशी नहीं होता हैं ll


जिंदगी में कई तरह के इम्तिहान आते जाते 
रहते हैं l
परीक्षा मे जाने वाला हर शख़्स जबाबी नहीं होता हैं ll


इधर उधर की कहीं सुनी बातें बढ़ाकर बोलने 
के लिए l
मजलिस मे जाने वाला हर शख़्स कलामी नहीं 
होता हैं ll


एक शहर से दूसरे शहर में रुपये के वास्ते 
भटकते l
कारवाँ मे जाने वाला हर शख़्स पनाही नहीं 
होता हैं ll
८-२-२०२६ 
खुद से मुलाकात 
भीतर में झाक कर खुद से मुलाकात कर लो l
अपने अंदर खूब आत्मविश्वास को भर लो ll


जिंदगी में सब कुछ नहीं मिलता है यहां तो l
पाक मोहब्बत कर के ऊँचाइयाँ को सर लो ll


आसान होता है किसीकी ख़ुशी में खुश होना l
गर छीन सको तो किसीका दुःख ही हर लो ll


जिंदगी एक बार ही मिलती है इन्सान को l सखी मुकम्मल पूरी कायनात ही तर लो ll


दुनिया को कोई फर्क़ नहीं पड़ता है किसीका l
खुद को चाहते हो तो सजधज के सँवर लो ll
९-२-२०२६ 
तेरा दीदार हुआ
तेरा दीदार हुआ तो रातों की नींद हराम हो गई l
ख्वाबों और ख्यालों में दिल की आँख खो गई ll


एक दीदार की ख़्वाहिश सालों से तड़पाती थी l
बर्षों की जागी हुई तमन्नाएं शांति से सो गई ll


जज्बातों को हवा देकर आग और भड़का दी कि l
जल्द मुलाकात की चाहत को दिल में बो गई ll


एक झलक देखने को बेकरार था कब से सखी l
एक लम्हे में लाइलाज वो बेक़रारी को धों गई ll


मन में एक ही धुन सवार थी वो पूरी हुई है तो l
मुस्कान की एक दवा दिलों दिमाग़ में समो गई ll
१०-२-२०२६ 
अधूरी तलाश 
ताउम्र जिन्दगी की अधूरी तलाश ही रही l
सुख दुःख की आनीजानी में जिंदगी बही ll


अपनों और गैरों के लिए सब कुछ किया है l
किसीने भी लगाई नहीं यहां क़ीमत सही ll


बड़े किस्मत होते है जिसे प्यार मिलता है l
पूरी दुनिया घुम लो प्रीत न मिलेगी कही ll


रफाकत को बहुत कम लम्हें मिलते है तो l
वस्ल के लिए कभी भी ना कहना नही ll


ख्वाबों खयालों में ख़ालिक से राब्ता हुआ l 
तब से तपस्वियों ने मुस्कराहट है पही ll 
रफाकत- मेल मिलाप 
११-२-२०२६ 
ऐतबार ज़ुर्म है 
ऐतबार ज़ुर्म है के ईश को अपना समझा l
उसने जो दिया उसकी मर्जी को माना ll


देने वाले ने तो कोई कमी ही नहीं रखी l
मन की सीमा में उसकी कृपा को जाना ll


कर्म पे नजर रखा करो हमेंशा ही वर्ना तो l
बारहा दुनिया में लगा रहेगा आना जाना ll


जो करेगा वहीं भरेगा यहीं नियति सब की l
अच्छे कर्मो कर गर सदगति को है पाना ll


क़ायनात में आये है मेल मिलाप से जियो l
सब के लिए विचारो में सुद्धता को लाना ll
१२-२-२०२६ 
खेल में हार से जीत तक का सफ़र होता हैं l
कोई सब जीतकर भी सब कुछ खोता हैं ll


कुछ नया नहीं मिलता है लौटकर वो आता l
जीवन भर जो जैसा बीज बोता हैं ll


जिसकी की रखवाली रब करता हो उस l
ख़ुदा का बन्दा आराम की नींद सोता हैं ll

 


हार से जीत तक
हार से जीत तक का सफ़र तय करने में वक्त तो लगता हैं ll
बारहा जानों जिगर में हौसलों को भरने में वक्त 
तो लगता हैं ll


कोशिस करने वाले कोई भी कमी नहीं छोड़ते 
जीतने की l
रुठी हुईं तक़दीर का दरवाज़ा खुलने में वक्त 
तो लगता हैं ll


एक दिन या एक साल की बात तो नहीं है ये 
मुकम्मल l
जीतने को मुसलसल आगे की और सरने में वक्त तो लगता हैं ll


भाग्य में लिखने वाला कभी कभी गलती कर 
देता है कि l
किस्मत से ख़ुद की तकदीर को हरने में वक्त 
तो लगता हैं ll


रुकना नहीं कभी भी जिंदगी तो आगे बढ़ने 
का नाम है l
एक ही मौत को रोज ही रोज मरने में वक्त 
तो लगता हैं ll


जीत की मुकम्मल तैयारियों के बाद भी 
हमेशा से l
गहरे से संसार समन्दर को तरने में वक्त 
तो लगता हैं ll
१३-२-२०२६ 
इश्क़ की आग में जले हुए
इश्क़ की आग में जले हुए को फ़िर से जलाया नहीं करते l
मोहब्बत में चोट खाए हुए का सरे आम तमाशा 
नहीं करते ll


दिल की क़ायनात में बसाया और रग रग में 
बसाया ओ l
प्यार में ख़ुद को मिटाया दिया हो उसे भुलाया नहीं करते ll


ज़ख्म हरे हो तब दिल बहलाने की मजलिस 
में जले को l
यार दोस्तों की महफिलों में फ़िर उसे बुलाया 
नहीं करते ll


सुनहरे लब्जों में लिखे हुई बहकते और 
नशीले से l
हुस्न के सजदे में प्यार भरे नगमें सुनाया 
नहीं करते ll


चाँदनी रात में आसमाँ में सितारे चमकते 
हो तब l
बज़्म में क़ातिल अदाओं को अब देखा नहीं 
करते ll
१४-२-२०२६ 
समझाना
ना-समझ होते है उसे समझाना ज़रूरी है l
समझाने को हाल ए दिल बतलाना ज़रूरी है ll


लाख छुपाना चाहता हो कहने की बात वो l
दिल की बात होठों से कहलाना ज़रूरी है ll


ताउम्र मोहब्बत को खेल समझते रहे कि l
निगाहों से निगाहों को टकराना ज़रूरी है ll


दीदार की प्यास के साथ जीते रहे है कि l
मुकम्मल चैन ओ सुकून पाना ज़रूरी है ll


बेबाक आँखों में तअ'ल्लुक़ रखने के लिए l
थोड़ा सा मुस्कराते हुए शर्माना ज़रूरी है ll
१५-२-२०२६