Deewane Ki Diwaniyat - Episode in Hindi Love Stories by kajal jha books and stories PDF | दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 23

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दीवाने की दिवानियत - एपिसोड 23

छिपा दुश्मन

सुबह का स्टेशन हलचल से भरा था। लोग आते-जाते, बच्चे खेलते, और टीम अपने-अपने काम में लगी थी। तभी पृथ्वी को एक रहस्यमयी चिट्ठी मिली—  

"माफिया का आखिरी कार्ड—तुम्हारा अपना।"  


पृथ्वी का चेहरा सख्त हो गया। सनाया ने चिंतित स्वर में पूछा, “कौन हो सकता है?”  

आरव मासूमियत से बोला, “रमेश अंकल?”  


रुद्र ने तुरंत मीटिंग बुलाई। “सभी की जाँच करो। किसी पर भरोसा मत करो।”  

नीरा ने कहा, “रमेश संदिग्ध है। उसके घाव झूठे लगते हैं।”  

तारा ने दृढ़ता से कहा, “ट्रस्ट नो वन।”  


इसी बीच रमेश आया और बोला, “बॉस, सब तैयार है।” लेकिन जब उसका फोन चेक किया गया, तो उसमें माफिया से बातचीत के सबूत मिले। पृथ्वी स्तब्ध रह गया।  


---


रमेश का राज

दोपहर में स्टेशन पर पृथ्वी ने रमेश को घेर लिया।  

“तू गद्दार है?”  


रमेश हँस पड़ा। “हाँ। माया ने मुझे पाला। विक्रम मेरा भाई था। स्टेशन मेरा हक है।”  

उसने अचानक गोली चलाई, लेकिन रुद्र ने पृथ्वी को बचा लिया। रमेश भाग निकला और टीम उसके पीछे दौड़ी।  


पुराने शेड में रमेश ने सब कुछ उगल दिया। “माफिया ने मुझे पैसे दिए। स्टेशन पर बम प्लांट किया है।”  

फाइट शुरू हुई। नीरा ने वायरस से उसके सिस्टम को हैक किया। रमेश घायल हुआ और चिल्लाया, “20 साल का विश्वासघात…।”  


---


परिवार का दुख

शाम को घर में सन्नाटा था। सनाया रोते हुए बोली, “रमेश? वो तो भरोसेमंद था।”  

पृथ्वी ने गंभीरता से कहा, “गद्दार हर जगह होते हैं।”  


आर्या डर गई। पृथ्वी ने उसे गले लगाकर आश्वस्त किया, “तुम सुरक्षित हो।”  

रात को बालकनी में सनाया और पृथ्वी ने एक-दूसरे को थामा। गहरा चुंबन, पैशन और वादा—  

“20 साल का साथ है, ये तूफान भी पार कर लेंगे।”  


लेकिन तभी रुद्र का कॉल आया—  

“रमेश भाग गया है। माफिया हेडक्वार्टर—पटना आउटस्कर्ट।”  


---


विश्वास की परीक्षा

भोर में टीम तैयार हुई। नीरा बोली, “मैं साथ हूँ। ये मेरा रिडेम्पशन है।”  

तारा ने हामी भरी।  


पटना के वेयरहाउस में सब छिपकर पहुँचे। वहाँ रमेश माफिया बॉस से मिल रहा था—एक चीनी-भारतीय मिश्रित चेहरा।  

“स्टेशन कल ब्लास्ट होगा।”  


रुद्र ने रेडियो से सूचना दी। हमला शुरू हुआ। गुंडों से भिड़ंत हुई। रमेश ने बम का स्विच दबाया।  

“अब सब खत्म!”  


लेकिन नीरा ने हैक कर दिया। तारा ने रमेश को पकड़ लिया।  

“क्यों भाई?”  

रमेश बोला, “गरीबी ने मजबूर किया। माया का सपना पूरा करना था।”  


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इमोशनल टकराव

वेयरहाउस में झगड़ा बढ़ गया। पृथ्वी ने कहा, “तू परिवार था।”  

रमेश रो पड़ा, “पैसे ने मुझे अंधा कर दिया।”  


तभी माफिया बॉस ने गोली चलाई। रमेश ने खुद को ढाल बना लिया।  

“सॉरी बॉस…” कहते हुए वह मर गया।  


टीम ने बॉस को पकड़ लिया, लेकिन बम एक्टिवेट हो चुका था। सब भागे और स्टेशन को अलर्ट किया गया।  


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स्टेशन पर खतरा

दोपहर में स्टेशन पर अफरा-तफरी थी। बम ट्रैक पर लगा था और ट्रेन आ रही थी।  

पृथ्वी दौड़ पड़ा। उसने सिग्नल रोका। नीरा ने कोड डिफ्यूज किया।  

सफलता मिली। यात्री ताली बजाने लगे।  


सनाया बच्चों को लेकर आई और बोली, “हीरो!”  

पृथ्वी ने उसे रोमांटिक हग दिया।  


लेकिन तारा ने चेतावनी दी, “रमेश ने कुछ छिपाया था। माफिया का आखिरी प्लान अंदर से है।”  


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आखिरी विश्वासघात

शाम की मीटिंग में रुद्र ने पूछा, “क्लर्क रिया वापस आई?”  

सबने ‘नहीं’ कहा।  


तभी सनाया का फोन चेक किया गया। पुराने मैसेज सामने आए।  

फ्लैशबैक में दिखा कि सनाया एक सोशल वर्कर थी और माया से मिली थी।  

पृथ्वी गुस्से में बोला, “तू भी?”  

सनाया रोते हुए बोली, “नहीं! मुझे ब्लैकमेल किया गया था।”  


सच्चाई साफ हुई। असली गद्दार रुद्र था।  

वह बोला, “मैं मास्टरमाइंड हूँ। सिक्योरिटी से सब कंट्रोल किया।”  


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रुद्र का क्लाइमेक्स

रुद्र ने बंदूक तानी। “स्टेशन मेरा है। भानु से शुरू हुआ खेल अब खत्म होगा।”  


फाइट शुरू हुई। पृथ्वी और रुद्र आमने-सामने।  

नीरा ने सिस्टम हैक किया। तारा ने गोली चलाई।  

रुद्र गिर पड़ा। “गेम ओवर।”  


पुलिस ने उसे पकड़ लिया। सच्चाई सामने आई—रुद्र माया का बेटा था। वह बदला लेने आया था।  


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जीत की शाम

रात को परिवार ने डिनर किया। सनाया और पृथ्वी ने कहा, “अब शांति है।”  

बच्चे हँस रहे थे। रोमांटिक डांस हुआ। “नई शुरुआत।”  


लेकिन तभी ट्रेन से एक बच्चा उतरा। उसके हाथ में चिट्ठी थी—  

"बगावत की अगली पीढ़ी।"  


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निष्कर्ष

एपिसोड 23 ने दिखाया कि विश्वासघात सबसे गहरे रिश्तों में भी छिपा हो सकता है। रमेश का 20 साल का धोखा, रुद्र का मास्टरमाइंड बनना और अंत में परिवार का बचना—सब मिलकर कहानी को भावनात्मक और रोमांचक मोड़ पर ले जाते हैं। लेकिन आखिरी चिट्ठी ने संकेत दिया कि बगावत की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई।