Silent Love in Hindi Love Stories by krishna mohan patel books and stories PDF | खामोश मोहब्बत

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खामोश मोहब्बत

शहर की भागदौड़ से दूर, मसूरी की वादियों में एक पुराना पुस्तकालय (Library) था। वहाँ की खुशबू में पुरानी किताबों के पन्ने और देवदार के पेड़ों की ताज़गी घुली रहती थी। आर्यन उसी पुस्तकालय का केयरटेकर था। वह कम बोलता था, शायद इसलिए क्योंकि उसकी आँखों में बातों का एक समंदर था, जिसे समझने वाला कोई नहीं मिला।
​उसी शहर में मीरा रहती थी—एक चित्रकार (Painter), जिसकी दुनिया रंगों से भरी थी, लेकिन उसके जीवन में एक गहरा सन्नाटा था। मीरा सुन और बोल नहीं सकती थी, पर उसके पास एक ऐसी दृष्टि थी जो इंसानी चेहरों के पीछे छिपे दर्द को पढ़ लेती थी।
​पहली मुलाकात
​एक बारिश वाली दोपहर, मीरा भीगती हुई पुस्तकालय के बरामदे में रुकी। आर्यन ने उसे देखा और चुपचाप अपनी मेज़ से उठकर उसे एक तौलिया और गर्म चाय का प्याला थमा दिया। मीरा ने हैरानी से उसे देखा। न उसने नाम पूछा, न हाल। बस एक निस्वार्थ मदद।
​मीरा ने अपनी डायरी निकाली और स्केच पेन से एक छोटा सा 'थैंक यू' का नोट लिखकर उसे दिया। आर्यन मुस्कुराया—एक ऐसी मुस्कान जिसमें दुनिया भर का ठहराव था। उस दिन के बाद से, मीरा हर रोज़ पुस्तकालय आने लगी।
​मौन संवाद
​वे घंटों एक-दूसरे के करीब बैठते, लेकिन उनके बीच कभी कोई शब्द नहीं गूंजा। आर्यन किताबें व्यवस्थित करता और मीरा अपनी कैनवास पर रंग बिखेरती।
​उनकी मोहब्बत का इज़हार किसी 'आई लव यू' से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे कामों से होता था:
​आयन का मीरा के आने से पहले उसकी पसंदीदा खिड़की वाली कुर्सी साफ़ रखना।
​मीरा का आर्यन के लिए शहर की मशहूर बेकरी से बिस्कुट लाना।
​बिना कहे एक-दूसरे की चाय में चीनी का सही अंदाज़ा होना।
​एक दिन, मीरा एक तस्वीर बना रही थी। उसने आर्यन का पोर्ट्रेट बनाया था। उसमें आर्यन की आँखें बिल्कुल वैसी ही थीं—गहरी और कुछ तलाशती हुई। जब उसने वह तस्वीर आर्यन को दिखाई, तो आर्यन की आँखों में नमी आ गई। उसने महसूस किया कि कोई तो है जो उसे वैसा ही देख रहा है जैसा वह असल में है।
​परीक्षा की घड़ी
​सर्दियों की एक रात, मसूरी में भारी बर्फबारी हुई। मीरा की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसे तेज़ बुखार था और वह अपने घर में अकेली थी। आर्यन को जब यह महसूस हुआ कि मीरा आज पुस्तकालय नहीं आई, तो उसका मन बेचैन हो गया। वह बर्फ के रास्तों पर चलता हुआ उसके घर पहुँचा।
​उसने देखा कि मीरा बेहोश पड़ी थी। आर्यन ने रात भर जागकर उसकी सेवा की, ठंडी पट्टियाँ रखीं और उसके लिए सूप बनाया। जब मीरा की आँखें खुलीं, तो उसने आर्यन को अपने पास बैठे पाया। उस पल में जो सुकून था, वह किसी भी प्रेम कहानी के संवाद से कहीं बढ़कर था।
​मीरा ने आर्यन का हाथ थाम लिया। उस स्पर्श में एक वादा था—कि हम एक-दूसरे की आवाज़ बनेंगे, भले ही ज़ुबान खामोश रहे।
​अधूरे पन्ने और पूरी दास्तान
​वक्त गुज़रता गया। लोग अक्सर उन्हें देखते और सोचते कि यह कैसा रिश्ता है जहाँ बातें ही नहीं होतीं। लेकिन उन्हें नहीं पता था कि:
​"सबसे खूबसूरत बातें अक्सर वो होती हैं, जिन्हें कहने के लिए शब्दों की ज़रूरत नहीं पड़ती।"
​आर्यन ने मीरा को इशारों की भाषा (Sign Language) सीखना शुरू किया, ताकि वह उसकी दुनिया में और गहराई से उतर सके। वहीं मीरा ने आर्यन को रंगों के ज़रिए अपनी भावनाओं को उकेरना सिखाया। उनकी मोहब्बत किसी महाकाव्य की तरह लंबी और पेचीदा नहीं थी, बल्कि एक कविता की तरह सरल और गहरी थी।
​उपसंहार
​सालों बाद, वह पुस्तकालय आज भी वहीं है। अब वहां एक छोटा सा आर्ट गैलरी भी है, जिसका नाम है—"खामोश गुफ्तगू"। वहां आर्यन की देखरेख में मीरा की वो पेंटिंग्स लगी हैं जो खामोशी की खूबसूरती बयां करती हैं।
​उनकी कहानी हमें सिखाती है कि प्यार ज़ुबान से नहीं, दिल से किया जाता है। जब दो रूहें एक-दूसरे को समझ लेती हैं, तो कायनात खुद-ब-खुद चुप हो जाती है ताकि उनकी धड़कनें सुनाई दे सकें।