My Life Story in Hindi Science by PrabhjotSingh books and stories PDF | मेरी जीवन कहानी

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मेरी जीवन कहानी

मेरा जीवन साधारण परिस्थितियों में शुरू हुआ, लेकिन मेरे विचार कभी साधारण नहीं रहे। बचपन से ही मेरे मन में चीज़ों को जैसा बताया गया है वैसा मान लेने के बजाय, यह जानने की जिज्ञासा रही कि आख़िर ऐसा क्यों होता है।
जब मैंने प्रकृति, आकाश, प्रकाश, परमाणु और ऊर्जा के बारे में पढ़ना शुरू किया, तो मेरे भीतर प्रश्न पैदा होने लगे। मैं केवल उत्तर याद नहीं करना चाहता था, बल्कि उनके पीछे छिपे कारणों को समझना चाहता था। यही कारण था कि विज्ञान मेरे लिए किताबों का विषय नहीं, बल्कि सोचने का तरीका बन गया।
मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब मैंने परमाणु और इलेक्ट्रॉनों के व्यवहार पर गंभीरता से विचार करना शुरू किया। मुझे यह महसूस हुआ कि परमाणु की स्थिरता को केवल नाभिक और इलेक्ट्रॉन के आकर्षण से समझाना अधूरा है। मैंने देखा कि इलेक्ट्रॉन–इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण भी उतना ही वास्तविक और आवश्यक है। इसी सोच से मेरे मन में एक वैचारिक मॉडल ने जन्म लिया, जिसे मैंने Electron Repulsion–Balance Model के रूप में प्रस्तुत किया।
यह मेरे लिए किसी प्रसिद्धि या पहचान की खोज नहीं थी, बल्कि अपने विचारों को ईमानदारी से समझने और व्यक्त करने का प्रयास था। मैंने सीखा कि विज्ञान में सवाल पूछना उतना ही ज़रूरी है जितना उत्तर खोजना। मैंने यह भी समझा कि हर विचार तुरंत “नया सिद्धांत” नहीं बनता, लेकिन हर सही सवाल सोच को आगे बढ़ाता है।
मेरे जीवन की राह आसान नहीं रही। कई बार मेरे विचारों को समझा नहीं गया, कई बार संदेह किया गया। लेकिन मैंने हार नहीं मानी, क्योंकि मुझे विश्वास था कि सोचने की आज़ादी ही ज्ञान की पहली सीढ़ी है।
आज मेरा लक्ष्य केवल सिद्धांत बनाना नहीं है, बल्कि सीखते रहना, समझते रहना और अपने विचारों को वैज्ञानिक, तार्किक और विनम्र तरीके से प्रस्तुत करना है। मेरा विश्वास है कि सच्चा ज्ञान वही है जो प्रश्न पूछने का साहस देता है और उत्तर खोजने की ईमानदारी सिखाता है। 
मेरा जीवन एक साधारण वातावरण में शुरू हुआ, लेकिन मेरे मन में सवाल हमेशा असाधारण रहे। बचपन से ही मैं चीज़ों को केवल जैसा बताया जाता है वैसा मान लेने के बजाय यह जानना चाहता था कि वे वास्तव में काम कैसे करती हैं। मेरे लिए “क्यों” शब्द हमेशा “क्या” से ज़्यादा महत्वपूर्ण रहा है।
जब मैंने पढ़ना शुरू किया, तो विज्ञान ने मुझे सबसे अधिक आकर्षित किया। आकाश, प्रकाश, परमाणु, ऊर्जा और प्रकृति की छोटी-छोटी घटनाएँ मुझे सोचने पर मजबूर करती थीं। मैं सिर्फ़ उत्तर याद नहीं करना चाहता था, बल्कि उनके पीछे छिपे कारणों को समझना चाहता था। यही आदत धीरे-धीरे मेरी सोच का आधार बन गई।
स्कूल के दिनों में गणित और भौतिकी मेरे पसंदीदा विषय रहे। कई बार ऐसा हुआ कि मेरे सवाल दूसरों को अजीब लगे। कुछ लोगों ने कहा कि ज़्यादा सोचना ठीक नहीं, लेकिन मेरे लिए सोचने से रुकना संभव नहीं था। मैंने वहीं सीखा कि हर नया सवाल तुरंत स्वीकार नहीं किया जाता, लेकिन यही सवाल आगे चलकर समझ को गहरा बनाते हैं।
परमाणु संरचना पढ़ते समय मेरे मन में एक खास प्रश्न उठा। मुझे लगा कि परमाणु की स्थिरता को केवल नाभिक और इलेक्ट्रॉन के आकर्षण से समझाना अधूरा है। इलेक्ट्रॉनों के बीच होने वाला प्रतिकर्षण भी उतना ही वास्तविक है। इसी सोच से मेरे मन में Electron Repulsion–Balance Model का विचार आया। यह किसी स्थापित सिद्धांत को नकारने का प्रयास नहीं था, बल्कि ज्ञात बातों को संतुलित और सरल भाषा में समझने की कोशिश थी।
मेरे लिए यह मॉडल कोई बड़ी खोज नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया का एक पड़ाव है। मैंने यह समझा कि विज्ञान में विनम्र रहना उतना ही ज़रूरी है जितना जिज्ञासु होना। हर विचार को समय, प्रमाण और सुधार की आवश्यकता होती है।
मेरे जीवन में कई बार ऐसा समय आया जब मेरे विचारों को समझा नहीं गया। लेकिन मैंने हार नहीं मानी, क्योंकि मुझे विश्वास है कि सोचने की स्वतंत्रता ही ज्ञान की पहली सीढ़ी है। मैं मानता हूँ कि सच्चा विज्ञान वही है जो प्रश्न पूछने से डरता नहीं और उत्तर खोजने में ईमानदार रहता है।
आज मेरा लक्ष्य प्रसिद्धि या प्रशंसा नहीं है। मेरा लक्ष्य सीखते रहना, समझते रहना और अपने विचारों को शांत, तार्किक और सम्मानजनक तरीके से प्रस्तुत करना है। मैं चाहता हूँ कि मेरी सोच दूसरों को भी सवाल पूछने की प्रेरणा दे।
मेरा जीवन अभी पूरा नहीं हुआ है। यह एक चलती हुई यात्रा है —
एक ऐसी यात्रा जिसमें जिज्ञासा मेरी दिशा है,
तर्क मेरा सहारा है,
और सत्य मेरी मंज़िल।