'जैकब्स हॉस्टल' के बाहर सन्नाटे को चीरती हुई बर्फीली हवाएं चल रही थीं। छुट्टियों का सीजन था, इसलिए जो हॉस्टल कभी 500 लड़कों के शोर से गूँजता था, आज वहाँ मुर्दा शांति पसरी थी। करीब 95% स्टूडेंट्स घर जा चुके थे। पूरे हॉस्टल में गिने-चुने 20-30 लड़के ही बचे थे।
थर्ड फ्लोर के कमरा नंबर 304 में बैठा 18 साल का वंश अपनी बेबसी पर झुंझला रहा था। उसका रूममेट भी घर जा चुका था। रात का 1 बज रहा था और नींद आँखों से कोसों दूर थी। वंश फ्रेश होने के लिए वॉशरूम गया ही था कि तभी कमरे के अंदर से किसी चीज के गिरने की भारी आवाज आई। वह झटके से दौड़कर कमरे में आया, पर वहाँ कोई नहीं था। सब कुछ वैसा ही था जैसा वह छोड़कर गया था।
तभी मेज पर रखे उसके फोन की स्क्रीन चमक उठी। एक नोटिफिकेशन पॉप-अप हुआ:
"भाई, मेरे रूम पर आ जा। हम सब यहीं हैं।"
मैसेज 6th फ्लोर पर रहने वाले अयान का था। वंश ने तुरंत अयान को कॉल लगाया, पर जवाब मिला— "The number you are calling is out of network coverage area."
वंश ने कंधे उचकाए और सोचा— 'छोड़ो यार, नींद नहीं आ रही तो वहम हो रहा होगा।' वह जैसे ही दराज से कंबल निकालने के लिए झुका, अचानक कमरे की लाइट्स पागलों की तरह झपकने (blink) लगीं और अगले ही पल पूरा हॉस्टल घने अंधेरे में डूब गया।
सन्नाटा इतना गहरा था कि वंश को अपनी खुद की धड़कनें सुनाई दे रही थीं। उसने कांपते हाथों से फोन की फ्लैश ऑन की। खिड़की के बाहर से कबूतरों के फड़फड़ाने की अजीब आवाजें आ रही थीं। तभी फोन फिर से वाइब्रेट हुआ। अयान का एक और मैसेज:
"भाई, सब वेट कर रहे हैं तेरा। जल्दी आ।"
वंश ने फोन की बैटरी देखी—सिर्फ 17%! अंधेरे कमरे में अकेले रहने के डर ने उसे मजबूर कर दिया। उसने जैकेट पहनी, चार्जर पॉकेट में डाला और स्लीपर्स पहनकर कॉरिडोर में निकल आया।
थर्ड फ्लोर का गलियारा किसी डरावनी सुरंग जैसा लग रहा था। उसकी अपनी चप्पलों की 'चट-चट' की आवाज सन्नाटे को और डरावना बना रही थी। जैसे-तैसे वह सीढ़ियों से होता हुआ 6th फ्लोर पर पहुँचा। वह हाफते हुए रूम नंबर 602 के पास पहुँचा और दरवाजा खटखटाने ही वाला था कि अचानक उसके कदम जम गए।
उसके दिमाग में बिजली की तरह एक बात कौंधी— अयान तो तीन दिन पहले ही घर जा चुका है!
वंश के माथे पर पसीना आ गया। अगर अयान हॉस्टल में नहीं है, तो कमरे के अंदर से कौन बुला रहा है? वह पागलों की तरह सीढ़ियों की तरफ भागा। तभी अचानक लाइट् टिम टीमाने लगी और बिजली वापस आ गईं। रोशनी देखकर उसकी जान में जान आई। उसने देखा सामने ही लिफ्ट हैं। उसने सोचा, 'सीढ़ियों से भागने में टाइम लगेगा, लिफ्ट से सीधा नीचे निकल जाता हूँ।'
उसने लिफ्ट में घुसकर '3' नंबर का बटन दबाया। दरवाजा बंद हुआ, लेकिन लिफ्ट नीचे जाने के बजाय झटके से ऊपर की ओर भागने लगी। लाइट्स फिर से टिमटिमाने लगीं। लिफ्ट एक झटके के साथ रुकी। वंश को लगा वह अपने फ्लोर पर आ गया है, लेकिन जैसे ही दरवाजा खुला, उसके होश उड़ गए।
सामने दीवार पर लिखा था— Floor 7.
हॉस्टल का वो हिस्सा जो सालों से बंद था। टॉर्च की रोशनी में उसे दिखीं काली पड़ चुकी दीवारें, जिन पर काई जमी थी। खिड़कियों के कांच टूटे हुए थे और हर तरफ मकड़ी के जालों का जाल बुना था। ऐसा लग रहा था मानो वह किसी पुरानी कब्रगाह में आ गया हो।
डर के मारे वंश का गला सूख चुका था। वह वापस लिफ्ट का बटन दबाने लगा, पर लिफ्ट हिलने को तैयार नहीं थी। उसे सामने की ओर सीढ़ियाँ दिखीं, जो रूम नंबर 710 के ठीक सामने थीं। वह आँखें बंद करके उस तरफ भागा। तभी बर्फीली हवा के एक झोंके के साथ चमगादड़ों का एक झुंड उसके चेहरे को खरोंचता हुआ निकला।
पसीने और खून से लथपथ वंश भागते-भागते उन सीढ़ियों तक पहुँच तो गया, लेकिन वहाँ पहुँचते ही उसकी चीख निकल गई... क्योंकि सामने जो था, उसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी।
To be continued...